'जहां पैदा हुआ, लोकसभा चुनाव लड़ा, वहीं वोटर लिस्ट से कटा नाम' Actor Prakash Raj का नाम Karnataka की वोटर लिस्ट से SIR के बाद कटा!
क्या बोले? सुनिए पूरी बात -
अहमदाबाद में प्लेग फैला।
मजदूर शहर छोड़कर भागने लगे। फैक्ट्रियां बन्द होने का खतरा था। सेठो ने दांव खेला- मजदूरी दोगुनी कर दी।
जो केवल पेट और तन भर का कमाते थे, उन्हें उम्मीद दिखी। रुक गए, जान पर खेलकर। चिमनियों से धुंआ नही रुका। प्लेग के बावजूद अहमदाबाद की मिलें चलती रही।
और जब प्लेग खत्म हो गया,
मजदूरी वापस घटा दी गई।
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मजदूरों ने विरोध किया। गांधी से सहायता मांगी। गांधी ने मलिकों बात की। वे नही माने, तो मजदूरों के साथ बैठकर उन्होंने हड़ताल का आव्हान किया।
मिलें रुक गयी।
अब सेठों ने फिर दांव खेला।
जो मजदूर, हड़ताल में शामिल थे, उन्हें नौकरी से निकालने लगे। मजदूर डर गए। हड़ताल से खिसक कर वापस काम पर लौटने लगे। अब गांधी ने वो किया..
जो अनोखा था।
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अनशन पर बैठ गए। सेठों के खिलाफ नही, अपने ही उन समर्थकों के खिलाफ, जो मिलो में जाकर वापस काम करने लगे थे। अब मजदूरों को शर्म आयी।
एक एक कर सारे लौट आये।
गांधी ने अनशन तोड़ा।
अहमदाबाद की मिलो की वो हड़ताल, ऐतिहासिक थी। चंपारण में किसानों की लड़ाई लड़ने के बाद, गांधी का यह दूसरा समर था- मजदूरों के लिए।
अपने ही देशवासी सेठों से लड़ गए। धनपतियों को झुकना पड़ा। मजदूरी की नई दरें तय हुई।
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नेहा का यह उदास मुखमण्डल देखकर बुरा लगा।
जिनके संघर्ष के शामिल होने गयी, उन्ही में से किसी ने मुंह पर स्याही फेंक दी। कारण पूछने पर वामपन्थी, देशद्रोही, उमर खालिद समर्थक होने के इल्जाम धर दिये।
लेकिन आंदोलन, एक्टिविज्म, न्याय की लड़ाई में ऐसा अक्सर होता है। कि जिसके लिए आप लड़ते हैं, वही कम्प्रोमाइज्ड हो जाता है।
कारण भय, भ्रम, या लोभ- कुछ भी हो, मगर यह लड़ने वाले के बिलीफ सिस्टम को तोड़ता है।
उदास करता है।
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कभी गांधी ने इसका स्वाद चखा, आज नेहा ने चखा है। लेकिन इस युवा लड़की ने जब संघर्ष, औऱ नेतृत्व की राह, राह चुनी है, तो उसे ऐसे बिट्रियल का से निराश नही होना चाहिए।
कर्मण्येवाधिकारस्ते, मा फलेषु कदाचनम!! 1918 में अहमदाबाद के गांधी की तरह, अपने भीतर की रोशनी पर, अपने उद्देश्य की पवित्रता पर यकीन रखकर वह आगे बढ़ती रहे। यही संदेश है।
और शुभकामनाएं हैं।
BBC की ये रिपोर्ट देखिए 👇
BBC ने एक ऐसे शख्स से बात की, जो कुछ समय पहले तक राम मंदिर में कैश काउंटिंग का काम करते थे।
शख्स ने बताया कि हमारे साथियों ने कई बार चढ़ावा चोरों को पकड़ा था, लेकिन जब इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव से इस बारे में शिकायत की गई तो उन्होंने कहा 👇
'ये प्रभु का धन है, वो देख ही रहे हैं। इसमें हम क्या कर सकते हैं और कौन सा हमारे घर से जा रहा है?'
आगे चलकर जब चढ़ावा चोरी के मामले में जांच हुई तो सुभाष श्रीवास्तव भी पकड़े गए, क्योंकि वे भी इस मिलीभगत में शामिल थे।
साफ है: राम मंदिर में BJP-RSS के संरक्षण में आस्था पर डकैती डाली गई और करोड़ों रामभक्तों के साथ विश्वासघात किया गया।
'चढ़ावा चोरी' के 'महापाप' के लिए 'रामद्रोही' BJP-RSS को देश माफ नहीं करेगा।
ट्रम्प की ग़ुलामी बंद करो,एथनॉल ख़रीदना बंद करो ट्रम्प के ग़ुलाम कहाँ मिलेंगे BJP के दफ़्तर में।
22000 करोड़ का कूड़ा एथनॉल ट्रम्प से क्यों ख़रीद रहे हो मोदी जी?
भारतीयों की करोड़ों गाड़ियाँ क्यों बर्बाद कर रहे हो मोदी जी?
पीडित छात्रा:- एक पुलिस वाले ने मेरे पिछले हिस्से मे लाठी घुसेडी...💔
ठीक ऐसी ही घटना प्रोटेस्टर के दौरान जंतर-मंतर पर और भी छात्राओ के साथ भी हुई
हमें ₹@डी बोला गया है, हमे मारते वक्त ये बोल रहे थे कि और मारो इन बहन की लौ@डी को 💔
एक लडकी को ये तक बोला गया कि घर चली जा वर्ना थाने ले जा कर नं&गा करके मारूंगा
औरतो की छाती पर पैर रखे गए है और ये सब पुरूष पुलिस के द्वारा किया गया था और जो इनमे से तमाम बिना वर्दी के भी थे !!
इस पीडिता की आवाज प्रधानमंत्री के कानो तक जरूर पहुचनी चाहिए, उनको अपने ऊपर पडी गालियां तो सुनाई दे गई...
पर प्रधानमंत्री की पुलिस ने इन छात्राओ के साथ जो सुलूक किया उसके बारे मे प्रधानमंत्री के क्या विचार है ?
विद्यां ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
संस्कृत के इस श्लोक की खासकर दूसरी पंक्ति कलयुग में सटीक नहीं बैठ रही 🙏🙄
Narendra Modi owes the nation an apology
अंधभक्त:
BJP कार्यकर्ता — विपक्षी पार्टियां वंदे मातरम का अपमान कर रही हैं!
पत्रकार — आप राष्ट्रवादी हैं, क्या आप वंदे मातरम गा सकते हैं?
BJP कार्यकर्ता — अब्बा.. डब्बा.. जब्बा..
बहाना बनाकर भाग गया.. 🤣
इसलिए जीवन में शिक्षा बहुत जरूरी है।
"एक पेड़ मां के नाम" लगवाकर सरकार मां का कितना सम्मान करती है, तो क्या यह वृद्ध महिला किसी की मां नहीं है??
यह वीडियो मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र छतरपुर जिले का है। कहां केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों और किसानों द्वारा किए जा रहे जल सत्याग्रह और अनशन, चिता आंदोलन का है।
यह मुद्दा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी आदिवासियों के अधिकारों, ज़मीन, जंगलों और घरों को बचाने तथा उचित मुआवज़े की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
वीडियो में देखा जा सकता है पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा एक वृद्ध मां को घसीटा जा रहा है वहीं प्रदर्शनकारियों तथा सत्याग्रहियों को बलपूर्वक हटाने और हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही है।
निशिकांत दुबे— पाकिस्तान का बंटवारा किस तरह से हुआ और किस तरह से भारत के पहले प्रधानमंत्री अय्याशी कर रहे थे।
प्रियंका गांधी— जितना आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 साल हुए प्रधानमंत्री बने ,
इससे ज़्यादा तो इस देश की आजादी के लिए प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जेल में रहे हैं🔥🔥
आप आलोचना कर रहे हैं अगर नेहरू जी ने इसरो ने बनाया होता तो आज मंगलयान नहीं होता।
20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत होने का दावा करते हुए एक पोस्टर वायरल है. हकीकत में अमित नामक इस पुलिसकर्मी की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई थी. #AltNewsVideoReport#AltNews#FactCheck
4700 करोड़ की लागत से बना कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे उद्घाटन के 17 दिन के अंदर तीन बार धंसा
जिस जगह पर एक्सप्रेसवे धंसा है वहाँ रिपोर्टिंग करने से रोक रहे है
भ्रष्टाचार चरम पर है।
न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकार @ImAvdheshkumar
और द हिंदू की @vijaita की शानदार और असरदार रिपोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कलई खोल दी है .
दोनों को बधाई और शुभकामनाएं