जयपुर में मध्यप्रदेश जैसा पेशाब कांड
विधायक ने अपने जुत्ते चटवाए व
डिप्टी एसपी ने पेशाब किया
राजस्थान हो मध्यप्रदेश कांग्रेस हो या बीजेपी दोनो एक है
पर इस घटना पर सब खामोश क्यों है
BHU के हॉस्टल आबंटन में OBC के शोधार्थियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? UR, EWS, ST, SC, PH सबको आरक्षण दिया जा रहा है, OBC से क्या दुश्मनी है।
क्या इस देश में बिना लड़े न्यय नहीं मिलेगा? क्या हर छोटे बड़े अधिकार के लिए लड़ना ही विकल्प है?
#We_want_obc_reservation_in_bhu_hostel
धर्म ऐसी अफ़ीम है जो जिसके नशे में आपको लगता है कि दलित का बर्तन आपको अपवित्र करदेगा और ज़मीन से उठा के खाना आपको पवित्र। इस नशे में दिमाग़ काम करना बंद कर देता है।
थी इसीलिए उन्होंने कहा: “मेरे विरोध में और इस सरकार के समर्थन में वह चाहे जितनी तालियां बजाए किन्तु घर जाकर वे कहेंगे कि लोहिया ने खूब भाषण दिया। उसने हमारे दिल की बात कह दी।”
अब लोकसभा में जवाहरलाल नेहरू और राममनोहर लोहिया सरीखे कद्दावर नेता और वक्ता रहे नहीं। अतः (18/19)
#BJP में जितने #SC#ST#OBC और #माइनॉरिटी के #नेता#मंत्री हैं वो कान खोलकर सुन ले अभी भी वक्त हैं सुधर जाओ और चुपचाप इस्तीफा दे दो वरना तुम्हारा समाज ही तुम सबका सामाजिक बहिष्कार करेगा ? 🙏🙏
सरकार अल्पमत में आ जायेगी संविधान और लोकतंत्र बच जाएगा !
@INCIndia@kharge@AHindinews
आज कम से कम एक पोस्ट फूलन देवी के नाम पर लिखें आप लोग...
मज़बूरी, बेबसी से आगे बढ़कर साहस और ताक़त का प्रतीक बनी हमारी फूलन को सलाम पहुँचे।🙏🏻
जब उन पर ज़ुल्म हुए तो उन्होंने हर एक दर पर जाकर न्याय माँगा पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो
उन्हें जो सही लगा उन्होंने किया... अपने तरीके से अपना बदला लिया। फिर शादी की...
आत्मसमर्पण भी किया संविधान को सर्वोपरि मानते हुए सज़ा को पूरा किया। उसके बाद आदरणीय मुलायम सिंह जी ने उन्हें संसद जाने का रास्ता दिखाया तो उन्होंने जीत दर्ज़ करके कुर्सी हासिल की।
उन्होंने एक बिटिया को गोद भी लिया था जो कि मुस्लिम फैमिली की अनाथ बच्ची थी। उन्हें केवल इंसानियत से ही मतलब था।
हमें सलाम करना चाहिए इस साहस की देवी को...
~ अश्विनी यादव
मेरे लिए कोई दो रास्ते या दुविधा नहीं है। धर्म और राष्ट्र के बीच किसी एक को चुनने की नौबत आ गई तो मैं हमेशा राष्ट्र को चुनूँगा। भारतीय होना मेरी पहली और सबसे प्रमुख पहचान है। @DrKumarVishwas@asadowaisi
चाचा ने ज़मीन हड़प ली तो सामने डटकर खड़ी हो गईं फूलन, 10 साल की फूलन का 35 साल के मर्द से विवाह कर दिया तो सामने डटकर खड़ी हो गईं फूलन, बंदी बनाकर उनसे हैवानियत की गई तो सामने डटकर खड़ी हो गईं फूलन। संघर्ष उनके जीवन में रहा और बदले की ज्वाला उनके दिल में धधकती रही। मुलायम सिंह यादव जी ने उनके संघर्ष को एक नया आयाम देते हुए उन्हें संसद तक पहुंचाया।
वीरांगना फूलन देवी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन 🙏
फूलन देवी का शहादत दिवस है आज. फूलन एक साथ जातिवाद, सामंतवाद व पितृसत्ता तीनों से लड़ रही थीं. सामाजिक न्याय की पाठशाला में आज हम बात कर रहे हैं, भारत की सबसे अगुआ विद्रोही नायिका फूलन देवी पर.
#फूलनदेवी#phoolandevi
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फूलन देवी एक ऐसी शख्सियत, जिसके साथ अन्याय उसके अपने लोगों ने ही किया, आज़ाद भारत के सबसे बड़े लोकतांत्रिक संस्थान संसद में चुन के आने के बाद भी इस देश ने उसे न कबूल करके उससे ज्यादा बड़ा अन्याय किया। मगर फूलन न डरी, न झुकी, ललकार कर खड़ी हो गईं। इसलिए हम फूलन को याद करते हैं।
काल्पनिक देवी देवता की तर्कसंगत आलोचना करना कहीं से भी गलत नहीं है। पेरियार ई.वी. रामास्वामी ने 94 साल तक जिंदा रहकर इस बात को साबित किया कि नास्तिकता का धर्म और मृत्यु होने से कोई संबंध नहीं है!
नार्वे, स्वीटजरलैंड, फिनलैंड, नीदरलैंड, जापान जैसे देश जहां व्यक्ति की औसत आयु दुनिया में अधिक है, मानव विकास सूचकांक में भी वे भारत से बहुत आगे हैं, वहां बड़ी संख्या में लोग नास्तिक हैं।
धर्म और ईश्वर के नाम पर गढ़ा गया पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक सब झूठ है। लेकिन कर्म और नैतिक आचरण ही प्रधान हैं। खुश रहना, लोगों की मदद करना जैसे जीवन मूल्य ज्याद जरूरी हैं।
पंडे पुजारी कितना पाखंड फैलाते हैं और जातिगत भेदभाव को सही ठहराते हैं, तब भी सदियों तक वे अधिकतर शासक की तारा बने रहे, ठगते रहे।
आज भी ऊंचे पदों पर वे ही ज्यादा हैं। न्यायपालिका और विभागों के सचिवों की लिस्ट देख लीजिए।
इसलिए इन ब्राह्मणवादी और मनुवादी पाखंडों के षड्यंत्र से बाहर निकलिए और अपनी शिक्षा तथा रोजगार पर ध्यान दीजिए।
कांवर उठाने और घंटा बजाने से आपका कोई हित होने वाला नहीं है। सहमत हैं तो कॉपी/ RT कीजिए। आप सबों को जयभीम!
भारत में कांवड़ ढोने और घंटा बजाने का काम ज्यादातर दलित और पिछड़े लोग करते हैं।
शिक्षा ओर रोजगार में भी वे लोग बहुत पिछड़े हैं।
इसके विपरीत सवर्ण लोगों के यहां शिक्षा और रोजगार पर अधिक ध्यान दिया जाता है। कुछ लोग धर्म में जाते हैं भी हैं तो पुजारी बनकर।
@Ambedkarite @Bhaktiyapa