हमला नेहरू पर क्यो होता है..
संसद में नेहरू छाए होते हैं। सन 64 में मर चुका एक पोलिटीशयन, मौत के 60 बरस बाद भी जेहन से बाहर क्यो नही जाता..
जवाहरलाल नेहरू, आरएसएस की विचारधारा की छाती के बी��ोबीच गड़ा हुआ कांटा क्यो है??
सोचने की बात है..
और इसके कई पहलू है।
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नेहरू 15 अगस्त, 1947 है..
नेहरू 26 जनवरी 1950 है...
नेहरू 25 अक्टूबर 1951 है..
ये महज तीन तिथियां है। हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास का एक नया सफहा हैं- आजादी, सम्विधान, और चुनाव..
ये पुराना भारत नही, पहले जैसा इसमे कुछ भी नही है - राजा नही है, डिक्टेटर नही। धर्म नही है, ऊंच नीच नही है, विशेष अधिकार प्राप्त समाज नही है।
सत्ता ताकत तमाम संस्था���ो में बंटी हुई है। लोगो मे बंटी है। उसके अधिकार सीमित है, दायरे हैं, समय निर्धारित है। याने गवर्नेस का गुण दोष बताकर हर 5 साल में, पट्टा नवीनीकरण कराना पड़ता है।
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इस 5 साल के दौरान भी ��म्विधान नाम दस्तावेज सरकारों को बांधे रखता है।
जो न्याय की बात करता है। न्याय- सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक। फिर वह आजादी सुनिश्चित करता है- विचार की, अभिव्यक्ति की, धर्म, विश्वास और पूजन पद्धति की।
समानता की बाध्यता देता है - स्थिति और अवसरों की..और फिर अंत मे बंधुत्व का बंधन -जिसमे सबकी गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
इन्हें मूल अधिकार बनाकर ऐसी लक्ष्मण रेखा बना दी गई है- जिसे छूने का सत्ता को अधिकार नही। क्या यह मदांध ताकत के लिए सिंहासन पर आरूढ़ होने वाले के लिए दुःस्वप्न नही??
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सरकार के हाथ मे क्या है- नीति निर्देशक तत्व। जो करना है- सूचिबद्ध कर दिया है। सरकार इसके बाहर मुंडी न हिलाये।
संविधान ऐसी कमजोर सत्ता तजवीज करता जिसके हाथ बंधे हों। जो रियाया पर दादागिरी न कर स��े, जान न ले सके, जेल में न डाल सके।
कभी कोर्ट फैसला पलट दे, कभी चुनाव आयोग धमका दे। नेहरू ने ऐसी सरकार की आदत लगा दी। रियाया का मुंह खोल दिया। जो नेहरू का कॉलर पकड़कर पूछ लेती- बोल, इस आजादी से मुझे क्या मिला।।
और नेहरू हंसकर कहते- मेरा कॉलर पकड़कर यह पूछने की आजादी मिली न..
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नेहरू, कमजोर सत्ता से कम्फर्ट में हैं। दूसरी निजी समस्याएं भी है।
वह उच्च शिक्षित है, नफासत से भरा है। जहान में मकबूल है���
उसके साथ आजादी की लड़ाई की विरासत है,
उस पर गांधी का आशीर्वाद है।
वह उद्योगों की सुध लेता है। वो नए नए सेक्टर खड़े करता है। छोटे छोटे सरकारी स्टार्टप खड़े करता है, गगनचुंबी संस्थानो में बदल देता है।
वो स्कूल बनाता है, जिसमे बच्चे मुफ्त पढ़ें। हस्पताल बनाता है, जिसमे मुफ्त इलाज हो। वो सेना भी खड़े करता है, सड़कें भी..
वो कश्मीर लाता है, गोआ लाता है। लोग उसपर लहालोट है। और हर पीएम नेहरू जैसा चाहते हैं।
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यह चाहत दुःस्वप्न है। एब्सोल्यूट सत्ता चाहिए, पूरा कन्ट्रोल चाहिए, मनमर्जी से हांकने की शक्ति तो नेहरू की स्मृति को उखाड़ना होगा। बताना होगा कि नेहरू ने जो देश बनाया- गलत था।
उसकी सीमाएं गलत थी, उसके कानून गलत थे। उसकी सेना गलत, अफसर गलत, उद्यम गलत थे। नेहरूवियन हर तरीका गलत था, उसकी सोच ही गलत थी।
यहाँ तक कि उसका जन्म गलत था, उसके इश्क गलत थे, उसका जुनून गलत था।
उसका खानदान गलत है।
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उसे जल्द से जल्द, नई मूरत से रिप्लेस करना होगा। और नेहरू को भारत के जनमानस से रिप्लेस करने के लिए, नेहरू से बड़ा होना जरूरी है।
भगवान होना जरूरी है।
राम होना जरूरी है।
राम राज्य, जहां राजा ईश्वर है। सर्वसत्तावान है, एकमुखी है। अयोध्या में संसद नही थी, राम की इच्छा कानून थी। व्यक्ति की गरिमा, उसका जीवन, उसका लालन पालन, उसकी स्वतंत्रता, राम की मर्जी पर हैं���
आशा रखिए, भरोसा रखिए- राम कृपालु होंगे, प्रजावत्सल होंगे।
पर अगर उनकी गद्दी पर बैठा राजा, इसके विपरीत भी हो, तो भी जनता चौराहे पर न्याय का घण्टा बजाने औऱ हाथ जोड़ने तक सीमित रहे।
पान, फूल, चंदन करे। हाथ जोड़ भजन करे, दुखड़ा रोये और आशीर्वाद, प्रसाद का इंतजार करे। रामनामी औजार से नेहरू को हटाकर, राम के उत्तराधिकारी को बिठाया का चुका है।
और आप आजादी गंवाकर, रामधुन में मस्त हैं।
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जो नही है, उन्हें भी इस ��ायरे में लाये जाने की जरूरत है। जो साथ, उन्हें अभय.. जो खिलाफ, वह रामद्रोही, देशद्रोही।
ये नेहरू की कमजोर सरकार नही। ये सर्वशक्तिमान, मजबूत सरकार है। इसे किसी से डर नही। मजबूत, रेशनल, विचारवान जनता से है। ऐसी पीढियां गढ़ने वाले नेहरू से है,
जवाहर की लेगेसी से है।
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तभी तो हमला नेहरू पर होता है..
बिल्कुल साथ देना चाहिए। रिपोर्टिंग के लिए केस करने का क्या तुक है। पुलिस अप���ी बात रख सकती थी। केस और जेल का डर दिखा कर हर पत्रकार के मन में डर भरा जा रहा है। फिर कहते हैं राम राज्य आ गया है।
दोनों सदनों में पीएम के भाषण सुनकर,
दुष्यंत कुमार 💐🙏 की पंक्ति याद आ गई,
हमने सोचा था जवाब आएगा,
एक बेहूदा सवाल आया है ❓🤔
#लोकतंत्र_बचाओ#EVM_हटाओ_लोकतंत्र_बचाओ
@RaniSahni2 यह चीनी माडल है शासन करने का, भविष्य में हमारे यहाँ आरएसएस एक राजनैतिक पार्टी बन जायेगी,इस तरह की समितियां हर स्थर पर होगी, गांव से लेकर केंद्र तक
क्षत्रिय समाज का कभी इस बात पर ध्यान ना चला जाए कि भारत में प्रचलित विभिन्न पंथों के प्रवर्तक क्षत्रिय ही क्यों हुए?, इसलिए उनको फालतू के मामलों में उलझाकर रखा गया है
वैसे उपरोक्त सवाल का जवाब जानने के लिए इतिहास की किताबें खंगालने की ज़रूरत नहीं है, इसका जवाब आपको, आजकल की परिस्थितियों को समझने मात्र से ही मिल जाएगा
वर्तमान में क्षत्रियों का एक छोटा सा वर्ग,
"क्षात्र धर्म" की बात करता है और खुलकर कहता है कि यही हमारा असल धर्म है
सोचकर देखिए कि आज जब देश में सबसे बड़ा मुद्दा हिंदू बनाम मुस्लिम बना दिया गया हो, उस बीच में ये "क्षात्र धर्म" किस प्रकार से फिट होगा?
कंफ्यूज हो गए ना कि आखिर कहना क्या चाहते हो? तो कहना केवल इतना है और वो भी इस पोस्ट को पढ़ने वाले सभी जाति वर्ग म��हब पंथ के लोगों से कि:
"हिंदू अथवा सनातन धर्म का सबसे बड़ा बेनिफिशियरी कौन है?"
अगर ये पता लगाने में दिक्कत आ रही हो तो इसका पता लगाने का एक और तरीका है, आप इस बात पर गौर कीजिए कि:
"जय क्षात्र धर्म बोलने वालों का सबसे बड़ा विरोधी कौन मतलब किस जाति वर्ग पंथ से है?"
उम्मीद है आपको जवाब मिल गया होगा तो एक और सवाल का जवाब खोजिए:
"आख़िर किसी और को क्षात्र धर्म से दिक्कत क्यों हो रही है?"
किसी की बनाई ��नाई व्यवस्था को बिगाड़ने का काम करोगे तो गालियां तो पड़नी ही हैं, विरोध तो होना ही है, खून खराबा तो होना ही है।
लेकिन ये मत भूलिए कि दूसरों की बनाई व्यवस्था में आपका कभी भला नहीं होगा, अपने पुरखों ने हर बार नई व्यवस्था बनाकर अपने लिए नए नए मार्ग खोले। आज की जरूरत भी यही है कि हम एक नई व्यवस्था के बारे में सोचें और खुद को इस एजेंडाबाजी वाली सांप्रदायिक, धूर्त, स्वार्थी व्य��्था से मुक्त करें। क्षत्रियों से किसी को भी दिक्कत नही है, उन्हें दिक्कत तब ही है जब क्षत्रिय, बिना दिमाग लगाए किसी और के सिपाही बनकर सामने खड़े हो जाते हैं, वो भी बिना पगार वाले
नोट: अपने पुरखों के दैनिक क्रियाकलाप, रणनीति, विचारधारा, संस्कृति ही क्षात्र धर्म है
अपने खून पसीने से देश को सींचा, 9 साल जेल में रहे, पूरी संपत्ति देश को दान कर दी, उन नेहरू पर सवाल उठाए जाते हैं।
नेहरू कितने बड़े हिंदू थे, इस वीडियो में देखिए, लेकिन वो दूसरे धर्मों का भी उतना ही सम्मान करते थे, और उनके हिंदू होने से दूसरे धर्म के ल��गों को डर नहीं लगता था।
कुमार विश्वास पहले कवि थे तो साधारण फ्लाइट और AC ट्रेनों में चलना होता था। इन्हें वक्त रहते समझ आ गया था कि अब इससे तो इतना ही हो पाएगा
तो अब कुमार विश्वास श्री राम कथा ���हने लगे हैं और चार्टर प्लेन से उतरने लगे हैं। श्री राम कथा कहना अच्छी बात है मगर
यह चार्टर प्लेन से उतरकर कथा पांडाल में बैठकर भगवान श्री राम के त्याग के बारे में बताएंगे। यह जीवन में हर चीज़ को मोह माया भी बताएंगे।
भगवान श्री राम त्याग और बलिदान का उदाहरण हैं जबकि आजकल इंसान उनके नाम पर चार्टर प्लेन में घूम रहे हैं।
सभी क्षत्रिय बन्धु कृपया ध्यान दें,
भाजपा के कुछ नेता समाज का ध्यान भटकाने के लिये फर्जी खबरे प्रचारित कर रहे हैं,अभी कोई फैसला नही हुआ है, कल पूरे हरियाणा के सभी गांवो में राजपूत समाज इन कृतघ्न धूर्तो का पुतला फूंकने का काम करेगा।
कृपया एकता व जोश बनाए रखें, जीत हमारी होगी 🙏💪
@RubikaLiyaquat देश की बात करी क्या, बेरोजगारी, मंहगाई, चरमराती अर्थव्यवस्था, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक और जातिवाद उन्माद, दुनिया में गिरती साख, नाराज पड़ोसी मित्र देश, चीन की घुसपैठ असल मुद्दे हैं, नेहरू जी ने साठ साल पहले क्या बोला नहीं
Really commendable.... I thought that the Organisation has stopped producing such Commanding Officers any more. But, it appears that I was wrong. There are few COs like Col Mrinal Mehta still in the Organisation who can take a stand for his Jawans. My Salute to Col Mrinal Mehta. Let's see as to how our Organisation now supports the CO as well as the cause....
https://t.co/Y6r72Ec4i4
1- समाज के लिए लड़ो।
2- लड़ नही सकते तो लिखो।
3- लिख नही सकते तो बोलो।
4- बोल नही सकते तो साथ दो।
5- साथ भी नही दे सकते तो जो लिख, बोल और लड़ रहे है, उनका सहयोग करें।
6- ये भी न कर सको तो उनका मनोबल न गिरायें, क्योकि वो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ ��हे हैं।
#जय_क्षात्रधर्म 🙏