प्रदेश अध्यक्ष संगठन उत्तिष्ठ भारत।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
"छात्र गेंग बनाकर पेपर लीक करते है "
"पेपर लीक के जिम्मेदार छात्र खुद है "
-- CM अशोक गहलोत 2022 मे
कॉंग्रेस शासन मे पेपर लीक के जिम्मेदार--- छात्र
BJP शासन मे जिम्मेदार --शिक्षा मंत्री
--बेशर्मी की पराकाष्ठा पार कर चुके है
CJP के कथा कथिन नेता बताएं क्या यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल है इसकी भरपाई कौन करेगा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो हो गया अब आ सामाजिक तत्वों के उल्टे दिन चालू कोई नहीं बचेगा पुलिस में सबके निकले रिकॉर्ड छात्रों को नहीं होगी परेशानी लेकिन हिस्ट्री सीटर जो प्रदर्शन में शामिल होकर दंगा फसाद कर रहे थे उन सब पर होगी सख्त कार्रवाई
जिसको मुद्दा बनाना होगा वो कुछ भी मुद्दा बना लेगा। प्रह्लाद जोशी स्नातक हैं, उन्होंने कर्नाटक के हुबली से BA कर रखा है। अब ये सवाल पूछा जाएगा कि किसी उच्च-शिक्षित को शिक्षा मंत्रालय क्यों नहीं दिया!
हालाँकि, 2004 से ही अजेय हैं। हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहरा कर सुर्ख़ियों में आए थे नब्बे के दशक की शुरुआत में। भाजपा के जिलाध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक रहे हैं कर्नाटक में। शुरू से संघ से जुड़े रहे हैं, ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में संघ से जुड़े एजेंडों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
प्रह्लाद जोशी भी विरोध से बचेंगे नहीं, देख लीजिएगा। ऊपर से उनके पास नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय भी है। ये तीसरा मंत्रालय उनके पास आ गया है। तो लोड पूरा रहेगा।
वाह मोदी जी, आंदोलन खत्म करने का क्या ग़ज़ब सटीक दिमाग़ लगाया है
नहीं समझे आप, आइए समझता हूं
UGC आया था तो मोदी सरकार से सबसे ज़्यादा नाराज कौन था?
सवर्ण ना!
धर्मेंद्र प्रधान की साख और ओबीसी और दलित वोटों के लिए सरकार खामोश हो गई, मामला कोर्ट से लटक गया लेकिन फिर भी सवर्ण में नाराजगी थी
अब CJP का चुतियापा खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने एक कदम तो पीछे खींचा लेकिन दो कदम आगे भी चल दिया, वो ऐसे कि CJP की मांग के चलते धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से हटना पड़ा वो बात और है कि उन्हें आगे कोई और पद मिल सकता है लेकिन वो शिक्षा मंत्री पद से हटाए गए और उनकी जगह पर एक सवर्ण ब्राह्मण को बैठा दिया- प्रह्लाद जोशी
विरोधियों को लगता है कि सरकार बैकफुट पर गई है लेकिन देखना ये चाहिए कि एक आंदोलन को निपटाते निपटाते सरकार ने कई निशाने साध लिए गए
छात्र भी ख़ुश
सवर्ण भी ख़ुश
ब्राह्मण बहुत खुश
और तो और विपक्ष भी ख़ुश🤣😀
साभार @arpitalokmishra
@BalramP75819924@Mayawati@BhimArmyChief तुम अपनो के बने ही कब ।किसी दलित पर अत्याचार कोई समान्य वर्ग करे तो तुम्हारे धरना-प्रदर्शन। ओर यहीं माम मीम बाला करे तो तुम्हारी बोलती ब॔द। संदेश खाली पर ओर देश की हजारो घटना पता नही तो Ai से पूछ ले।
राजनीतिक विश्लेषण के दृष्टिकोण से देखें तो वामपंथी (Leftist) विचारक और दल प्रह्लाद जोशी को इस पद से हटवाने के लिए पूरा जोर लगाएंगे। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
संघ (RSS) से गहरा जुड़ाव:- प्रह्लाद जोशी की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रही है। वामपंथी विचारधारा हमेशा से ही शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों में संघ के किसी भी प्रभाव का कड़ा विरोध करती रही है।
वैचारिक टकराव:- शिक्षा मंत्रालय को लेकर वामपंथी खेमा सबसे ज्यादा सतर्क रहता है। उन्हें यह डर रहता है कि इतिहास, पाठ्यक्रम और नीतियों में वामपंथी दृष्टिकोण की जगह भारतीय या संघ से प्रेरित दृष्टिकोण को शामिल किया जाएगा।
हुबली आंदोलन की पृष्ठभूमि:- 90 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने का मुद्दा वामपंथी और सेक्युलर धड़ों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। इस पृष्ठभूमि के कारण वे जोशी को एक सख्त हिंदुत्ववादी नेता के रूप में देखते हैं।
इसी वजह से, Leftist Ecosystem आने वाले समय में उनके बयानों, शैक्षणिक योग्यता और मंत्रालयों की नीतियों पर कड़ी नजर रखेगा और किसी न किसी विवाद के जरिए उनके इस्तीफे या मंत्रालय बदलने का दबाव बनाने की भरपूर कोशिश करेगा।
@JoshiPralhad
@kheria_abhishek स्वागतम जोशी जी हमे भरोसा है की आप देश ओर धर्म के दुश्मनो का मकसद पूरा नही होने देंगे।इतिहास मे सच्चाई पढना जरूरी है
पंजाब पेपर ओर औरतो पर बोलना पाप है। क्योकि बहा पर इनका बाप है