@AsfakQu75453341 @pantlp@ashokgehlot51 Sir लगे हाथों Right to justice के लिए भी एक PIL लगा दो । अगर पैसा नहीं हो तब भी कोई वकील केस लेने से मना नहीं कर सकता और सभी को सरकार 135 रुपए प्रति पेशी के हिसाब से पुर्नभरण कर देगी,वकील लोअर कोर्ट का हो या सुप्रीम कोर्ट का ।
लोगों को अच्छा न्याय मिलेगा
यही है राईट टू हेल्थ भी
@pantlp Sir लगे हाथों Right to justice के लिए भी एक PIL लगा दो । अगर पैसा नहीं हो तब भी कोई वकील केस लेने से मना नहीं कर सकता और सभी को सरकार 135 रुपए प्रति पेशी के हिसाब से पुर्नभरण कर देगी,वकील लोअर कोर्ट का हो या सुप्रीम कोर्ट का ।
लोगों को अच्छा न्याय मिलेगा
यही है राईट टू हेल्थ भी
@ashokgehlot51 प्राइवेट डॉक्टर और अस्पताल पूरे देश में NMC के नियमानुसार कार्य करते हैं और अपनी आय के मुताबिक टैक्स देकर राज्य के विकास में भागीदार हैं।इस तरह का बिल प्राइवेट अस्पतालों पर थोपना असंवैधानिक है और न्यायपालिका ऐसा किसी सूरत में नहीं होने देगी।
@ashokgehlot51 फ्री स्वास्थ्य देना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और सरकारी तंत्र की बदहाली को दूर करने में नाकाम ये सरकार अब ये जिम्मेदारी बजाय सरकारी स्वास्थय व्यवस्था को सुधारने के जबरन प्राइवेट अस्पतालों पर लादना चाहती है जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
@plmeenaINC आप क्यों जनता को प्राइवेट में मिल रही अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था को बर्बाद करने पर तुले हैं।किसी को लगे कि उससे प्राईवेट में खर्चा वहन नहीं होता तो वो सरकारी में इलाज करवाए,स्वास्थ्य मंत्री जी को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने पर जोर देना चाहिए,प्राइवेट को ख़त्म करने पर नहीं ।
@plmeenaINC गरीबी और भूख से बड़ी कोई समस्या नहीं है।
हम सभी की हमारे अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत से निवेदन है कि सरकार को राइट टू फूड बिल लाकर जनता को अधिकार देना चाहिए कि वो सभी होटलों में ,जब भूख लगे निशुल्क खाना खा सकते हैं।
@plmeenaINC चाहे उनके पास पैसे हों कि ना हों,उनको इंदिरा रसोई योजना के तहत,चाहे वो ढाबा हो या फाइव स्टार, 8 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से सरकार पुनर्भरण कर देगी और सभी होटल इसे मानने के लिए बाध्य हैं।
इसी प्रकार राइट टू हेल्थ बिल है।
@sheikh_miza@ashokgehlot51@plmeenaINC@RajGovOfficial@dsrajpurohit291 मुख्य्मंत्री ने वोटों के लालच और चाटुकार अफसरों के बहकावे में आकर हठधर्मिता अपनाकर बेचारी जनता को मरने के लिए छोड़ दिया जो प्राईवेट अस्पतालों की हड़ताल के समय परेशान है।
सरकारी अस्पतालों में सुविधा के अभाव में हाहाकार परंतु पूरी सरकार ने चुप्पी साधी
@ajitanjum सरकार वोटों की राजनीति के लिए संविधान के स्वतन्त्रता के अधिकार का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन कर गुणवत्ता पूर्ण इलाज दे रहे प्राइवेट मेडिकल सेक्टर को ध्वस्त करने में लगी है और अंजुम साहब आप जैसे वरिष्ठ पत्रकार मुद्दे को बिना समझे सरकार की पैरवी करके अपनी बची कुची साख भी ख़त्म कर चुके
@ajitanjum यहां लोगों के अच्छे इलाज के हक पर सरकार एक निम्न पैकेज के माध्यम से कुठाराघात कर रही है, अस्पतालों में अच्छे यंत्र कहां से आयेंगे,आखिर भुगतेगी तो जनता ही। अंजुम साहब बिना मुद्दे की गहराई को समझे आग में घी मत डालो, जनहित में सच्चाई का साथ दो और वोटों की सस्ती राजनीती का विरोध करो
@ajitanjum तो फिर Right to food बिल की पैरवी क्यों नहीं करते कि कोई भी भूखा किसी भी होटल में जाता है तो उसे मना नहीं कर सकते, कैसा भी होटल हो उसे इंदिरा रसोई योजना के माध्यम से 8 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से सरकार पुर्नभरण कर देगी,बिना मुद्दा समझे दलाली शुरु कर देते हो।
@ashokgehlot51 बल्कि डॉक्टरों के विरोध को लाठीचार्ज और वाटर केनन की बौछारों से कुचलकर जबरन 21 मार्च को ये बिल पास करवाया गया । माननीय मुख्यमंत्री जी काअब ये कहना कि बिल सर्वसम्मति से पास किया गया है, पूर्णतया गलत और भ्रामक प्रचार है।
@ashokgehlot51 माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
ये कहना कि ये बिल डाक्टरों की पूर्ण सहमति के बाद ही पास हुआ है तो ये बिलकुल झूँठ एवं भ्रामक प्रचार है। सभी को याद है कि राज्य के सभी डॉक्टर्स बिल को पास करने के विरोध में 20 कर 21 मार्च को स्टैच्यू सर्किल पर बैठे थे ।