तुम बसे हो मेरे दिल में
प्रेम के गोदान से
और तुम कि बस मुझे
अख़बार सा बांचा किये।
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उसकी यादों का विसर्जन कर दिया है
हमने अपने हाथों तर्पण कर दिया है
टूटने की जिद लिये बैठा है दिल
हमने अपने दिल को दर्पण कर दिया है
~सुरजीत मान जलईया सिंह✍️
सुपरिचित कवि,शायर,संस्थापक
(साहित्यरत्न)