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सरकारी संपति को नुकसान औ�� धरोहर पर चोट?
जालौर | जसवंतपुरा के खोडेश्वर महादेव में इको टूरिज्म के तहत वन विभाग की ओर से 1.5 करोड़ की लागत से लव कुश वाटिका और इस झूले का निर्माण करवाया गया था। हज़ारों की संख्या में देशी पर्यटक रोज घूमने के लिए आ रहे है।
वहां बने झूले को कुछ लोग नुकसान पहुंचा रहे हैं, और कुछ हद तक तोड़ भी दिया है। यह बनाए एक साल के करीब हुआ हैं। और हालात देख लीजिए। इनको बनाने और लगातार मॉनिटरिंग वन विभाग द्वारा की जा रही हैं। इसके लिए बाकायदा शुल्क वसूला जा रहा हैं। फिर भी वीडियो में देख लीजिए। क्या इस टूटे झूले की भरपाई की जाएगी? या फिर वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों की संवेदनहीनता इसी तरह चरम सीमा पर रहेगी?
यह हमारी धरोहर है इनको बचाना चाहिए,
प्रशासन को इन लोगों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। और जिन अधिकारियों द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही हैं उनके खिलाफ़ सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी का���्यवाही होनी ही चाहिए।
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिलड़ (रानीवाड़ा) जालोर...!
शिक्��ा मंत्री @madandilawar जी @rajeduofficial
इस गाव के लोगों ने अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और उचित सुविधाओं के लिए प्रयास किए। पानी के अभाव से भामाशाह ने टंकी का निर्माण करवाया जिससे पानी का संग्रहण हो सके, और व्यवस्था सुचारू रूप से चालू रहें, पर संबधित विभाग के गैरजिम्मेदार अधिकारियों ने पानी सप्लाई ही बंद कर दी। अब दो सालों से मासूम बच्चे घर से पानी लाने की मजबूर हैं। कई बार टैंकर से पानी लाया जाता है। जि�� नर्मदा पाइप लाइन को यहां पानी लाने के लिए बिछाया गया उससे भी पानी की बूंद नसीब नहीं हैं सोचिए यह हैं व्यवस्था। इस स्कुल का एक समय नामांकन बहुत अच्छे स्तर पर था शिक्षा विभाग की मायूसी से आज हर अभिभावक उम्मीद खोता जा रहा है। यह स्कुल भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा हैं। यदि विभाग ने कड़े कदम नहीं उठाए तो इस विधालय को बंद करने जैसी नौबत आ जाएगी। जिससे आसपास के इस 4,5 किलोमीटर के दायरे के बच्चों क��� पढ़ाई व्यवस्था चरमरा जाएगी। देख लीजिए पानी की स्थाई व्यवस्था को हर हाल में करना होगा। और रिक्त पद पर भर्ती सुनिश्चित कीजिए।
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@BhaveshPurohiit तमाम गंभीर आरोपों और शिकायतों को लेकर राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री आदरणीय श्री किरोड़ी लाल मीणा जी से आग्रह है कि रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में संचालित फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सहित अन्य योजनाओं की गहन एवं निष्पक्ष जांच करवाएं।
रानीवाड़ा विधानसभा में किसानों के साथ कुठाराघात? आखिर कब तक पात्र किसान अपने हक के लिए दर-दर भटकते रहेंगे?
फसल बीमा योजना हो, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी हो, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हो या किसानों के हित में संचालित अन्य सरकारी योजनाएं—इन योजनाओं का उद्देश��य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, खेती को आधुनिक बनाना और प्राकृतिक आपदा अथवा फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाना है।
लेकिन रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभ वितरण को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा और शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई वास्तविक एवं पात्र किसान योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर का��ने को मजबूर हैं, जबकि कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के चहेतों को प्राथमिकता मिलने का बोलबाला बना हुआ है।
सबसे गंभीर सवाल फसल बीमा योजना को लेकर उठ रहे हैं।
कथित तौर पर ऐसे लोगों को भी फसल बीमा का लाभ पहुंचाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनकी फसल में वास्तविक नुकसान नहीं हुआ या जिनके नुकसान का उचित एवं निष्पक्ष सत्यापन किए बिना लाभ स्वीकृत किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं��� यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि फसल बीमा योजना का उद्देश्य वास्तविक रूप से नुकसान झेलने वाले किसान को राहत देना है, न कि किसी कथित सिफारिश, पहचान या चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाना।
तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है—
-जिन किसानों को फसल बीमा का लाभ मिला, क्या उनके नुकसान का मौके पर वास्तविक सत्यापन हुआ था?
-नुकसान का आकलन किस अधिकारी या एजेंसी ने किया?
-क्या जिन किसा���ों को बीमा राशि मिली, उनके खेतों का भौतिक निरीक्षण और रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा?
-क्या ऐसे लोगों को भी लाभ मिला है, जिनकी फसल को वास्तविक नुकसान नहीं हुआ था?
-यदि बिना वास्तविक नुकसान के किसी को बीमा राशि का कथित अनुचित लाभ पहुंचाया गया है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
- क्या फसल नुकसान के सर्वे और बीमा दावों की ग्रामवार जांच कराई जाएगी?
- वास्तविक नुकसान झेलने वाले कितने किसान आज भी बीमा ला�� से वंचित हैं?
- क्या पात्र किसानों के दावे लंबित या अस्वीकृत किए गए और कथित तौर पर चहेतों के दावे प्राथमिकता से स्वीकृत हुए?
-क्या फसल बीमा योजना के लाभार्थियों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाएगी?
- क्या प्रत्येक लाभार्थी के नुकसान का विवरण और सत्यापन रिकॉर्ड जांच के लिए उपलब्ध कराया जाएगा?
- क्या कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी?
-क्या कृषि यंत्रों पर मिलने व���ली सब्सिडी का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक समान रूप से पहुंच रहा है?
-क्या कुछ चुनिंदा लोगों को बार-बार विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है?
-क्या ऐसे मामलों की भी गहन जांच की जाएगी?
-क्या ग्रामवार लाभार्थी सूची सार्वजनिक की जाएगी?
-क्या सभी पात्र किसानों को समान अवसर दिया जा रहा है या कथित तौर पर पहचान और सिफारिश का प्रभाव हावी है?
-अगर पूरी व्यवस्था पारदर्शी है तो लाभार्थियों की सूची, चयन प्र���्रिया और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने में आपत्ति क्या है?
-क्या कथित भ्रष्टाचार, पक्षपात और मिलीभगत की शिकायतों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
इन तमाम गंभीर आरोपों और शिकायतों को लेकर राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री आदरणीय श्री किरोड़ी लाल मीणा जी से आग्रह है कि रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में संचालित फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं की गहन एवं निष्पक्ष जांच करवाएं।
जांच के दौरान—
✔️ ग्रामवार लाभार्थी सूची की जांच हो।
✔️ फसल नुकसान के सर्वे और वास्तविक स्थिति का पुनः सत्यापन हो।
✔️ बिना नुकसान अथवा गलत तरीके से कथित लाभ लेने वाले मामलों की पहचान हो।
✔️ कृषि यंत्रों की सब्सिडी के लाभार्थियों और खरीद का भौतिक सत्यापन हो।
✔️ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के चयन और लाभ वितरण की जांच हो।
✔️ वास्तविक पात्र किसानों से वंचित रहने के कारणों की समीक्षा हो।
✔️ दोषी पाए जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी या लाभार्थी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।
किसानों के नाम पर योजनाएं चलें और पात्र किसान दर-दर भटकें, जबकि कथित तौर पर बिना नुकसान वाले लोगों को बीमा लाभ पहुंचाया जाए—तो सवाल व्यवस्था से ही होंगे।
माननीय किरोड़ी लाल मीणा जी, पूरे रानीवाड़ा क्षेत्र के किसानों के हित में इस पूरे मामले की गहन, निष्��क्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है।
@DrKirodilalBJP @AgriGoI
@pmkisanofficial @icarindia
@HANUMANKISAN @centegro
@RajCMO @DmJalore @pmfby
#Jalore रानीवाड़ा के ग्रामीण GSS पर अस्थाई ठेका कर्मियों के साथ आखिर कब तक अन्याय?
रानीवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में स्थित विभिन्न GSS पर कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मी बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बिजली आपूर्ति, फॉल्ट की स्थिति में जिम्मेदारी, GSS की देखरेख और अन्य आवश्यक कार्यों का भार इन्हीं कर्मियों के कंधों पर रहता है। लेकिन इन कर्मियों की कार्य परिस्थिति���ां और वेतन व्यवस्था अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
-कर्मचारियों की कमी, कार्यभार ज्यादा
जिन GSS पर कार्य की आवश्यकता के अनुसार तीन कर्मचारी होने चाहिए, कई जगह पर वहां केवल दो कर्मचारी ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में एक कर्मचारी की कमी का अतिरिक्त कार्यभार भी उन्हीं दो कर्मियों को संभालना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि जब काम और जिम्मेदारियां पूरी हैं, तो पर्याप्त कर्मचारी क्यों नहीं लगाए जा रहे?
कम कर्मचारियों के भरोसे ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था चलाना आखिर कितना उचित और सुरक्षित है?
-सिर्फ ₹5000 से ₹6000 मासिक वेतन—क्या यह न्यायसंगत है?
इतनी जिम्मेदारी और कार्यभार के बदले मात्र ₹5000 से ₹6000 मासिक वेतन दिया जाना भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्तमान समय में इतनी कम राशि में एक कर्मचारी अपने परिवार की मूलभूत जरूरतें कैसे पूरी करे?
और जब वेतन भुगतान में अनियमितता की शिकायत��ं भी सामने आती हैं, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक हो जाती है।
आखिर सवाल यह है—
🔹 जिन GSS पर तीन कर्मचारियों की आवश्यकता है, वहां दो ही कर्मचारी क्यों?
🔹 कर्मचारियों की कमी का अतिरिक्त कार्यभार कौन संभाल रहा है?
🔹 इतने महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरे कार्य के बदले सिर्फ ₹5000 से ₹6000 वेतन क्यों?
🔹 वेतन भुगतान में अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है?
🔹 ठेका कर्मियों के कार्य, सुरक्षा और अधिकारों की निगरा��ी कौन कर रहा है?
🔹 क्या बिजली व्यवस्था सुचारू रखने वाले कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है?
बिजली व्यवस्था में कोई फॉल्ट या बाधा आने पर जवाबदेही इन्हीं कर्मचारियों से मांगी जाती है। ग्रामीण उपभोक्ता भी बिजली समस्या के समाधान के लिए सबसे पहले इन्हीं कर्मियों से संपर्क करते हैं। लेकिन जब बात उनके उचित वेतन, समय पर भुगतान और पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की आती है, तो जिम्��ेदारी तय करने वाला कौन है?
काम की जिम्मेदारी बड़ी, कार्यभार ज्यादा और कर्मचारियों की संख्या कम—फिर वेतन सिर्फ ₹6000?
यह मामला केवल कम वेतन का नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मियों के श्रम, सम्मान और अधिकारों का भी है।
रानीवाड़ा क्षेत्र के ग्रामीण GSS पर कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मियों की स्थिति की निष्पक्ष जांच और समीक्षा होनी चाहिए। जिन स्थानों पर आवश्यकता के अनुसा�� कर्मचारी कम हैं, वहां पर्याप्त कर्मियों की व्यवस्था की जाए। साथ ही वेतन भुगतान में हो रही अनियमितताओं की जांच कर कर्मचारियों को समय पर एवं उचित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जो कर्मचारी हर परिस्थिति में बिजली व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उनके साथ अन्याय आखिर कब तक?
₹5000 से ₹6000 का वेतन, वह भी अनियमित भुगतान और ऊपर से तीन कर्मचारियों का काम दो कर्मियों के भरोसे—क्या यही अस्थाई ��ेका कर्मियों के लिए न्याय है?
जिम्मेदार विभाग और संबंधित ठेकेदारों को इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
@hlnagar @BhajanlalBjp @DmJalore @RajCMO @arvindchotia @RatanDevasiINC @NsDewal @TheNewspinch @Abhinavpinch @RajGovOfficial @GovindDotasra @hanumanbeniwal @Rajsthanikaka @SangitaBishnoi
#Jalore रानीवाड़ा के ग्रामीण GSS पर अस्थाई ठेका कर्मियों के साथ आखिर कब तक अन्याय?
���ानीवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में स्थित विभिन्न GSS पर कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मी बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बिजली आपूर्ति, फॉल्ट की स्थिति में जिम्मेदारी, GSS की देखरेख और अन्य आवश्यक कार्यों का भार इन्हीं कर्मियों के कंधों पर रहता है। लेकिन इन कर्मियों की कार्य परिस्थितियां और वेतन व्यवस्था अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
-कर्मचारियों की कमी, का��्यभार ज्यादा
जिन GSS पर कार्य की आवश्यकता के अनुसार तीन कर्मचारी होने चाहिए, कई जगह पर वहां केवल दो कर्मचारी ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में एक कर्मचारी की कमी का अतिरिक्त कार्यभार भी उन्हीं दो कर्मियों को संभालना पड़ रहा है।
सवाल यह है कि जब काम और जिम्मेदारियां पूरी हैं, तो पर्याप्त कर्मचारी क्यों नहीं लगाए जा रहे?
कम कर्मचारियों के भरोसे ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था चलाना आ��िर कितना उचित और सुरक्षित है?
-सिर्फ ₹5000 से ₹6000 मासिक वेतन—क्या यह न्यायसंगत है?
इतनी जिम्मेदारी और कार्यभार के बदले मात्र ₹5000 से ₹6000 मासिक वेतन दिया जाना भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्तमान समय में इतनी कम राशि में एक कर्मचारी अपने परिवार की मूलभूत जरूरतें कैसे पूरी करे?
और जब वेतन भुगतान में अनियमितता की शिकायतें भी सामने आती हैं, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक हो जाती है।
आखिर सवाल यह है—
🔹 जिन GSS पर तीन कर्मचारियों की आवश्यकता है, वहां दो ही कर्मचारी क्यों?
🔹 कर्मचारियों की कमी का अतिरिक्त कार्यभार कौन संभाल रहा है?
🔹 इतने महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरे कार्य के बदले सिर्फ ₹5000 से ₹6000 वेतन क्यों?
🔹 वेतन भुगतान में अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है?
🔹 ठेका कर्मियों के कार्य, सुरक्षा और अधिकारों की निगरानी कौन कर रहा है?
🔹 क्या बिजली व्यवस्था सुचारू रखने वाले कर्मियों की समस्याओं ��ो गंभीरता से लिया जा रहा है?
बिजली व्यवस्था में कोई फॉल्ट या बाधा आने पर जवाबदेही इन्हीं कर्मचारियों से मांगी जाती है। ग्रामीण उपभोक्ता भी बिजली समस्या के समाधान के लिए सबसे पहले इन्हीं कर्मियों से संपर्क करते हैं। लेकिन जब बात उनके उचित वेतन, समय पर भुगतान और पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की आती है, तो जिम्मेदारी तय करने वाला कौन है?
काम की जिम्मेदारी बड़ी, कार्यभार ज्यादा और कर्मचा��ियों की संख्या कम—फिर वेतन सिर्फ ₹6000?
यह मामला केवल कम वेतन का नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मियों के श्रम, सम्मान और अधिकारों का भी है।
रानीवाड़ा क्षेत्र के ग्रामीण GSS पर कार्यरत अस्थाई ठेका कर्मियों की स्थिति की निष्पक्ष जांच और समीक्षा होनी चाहिए। जिन स्थानों पर आवश्यकता के अनुसार कर्मचारी कम हैं, वहां पर्याप्त कर्मियों की व्यवस्था की जाए। साथ ही वेतन भुगत��न में हो रही अनियमितताओं की जांच कर कर्मचारियों को समय पर एवं उचित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जो कर्मचारी हर परिस्थिति में बिजली व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उनके साथ अन्याय आखिर कब तक?
₹5000 से ₹6000 का वेतन, वह भी अनियमित भुगतान और ऊपर से तीन कर्मचारियों का काम दो कर्मियों के भरोसे—क्या यही अस्थाई ठेका कर्मियों के लिए न्याय है?
जिम्मेदार विभाग और संबंधित ठेकेदारों को इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
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तस्वीर हालात बयां कर रहीं हैं, और चेतावनी भी दे रहीं हैं की जिम्मेदारों जाग��ए, पास ही शिक्षा का मंदिर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
अंदाजा लगाईए यदि कोई इंसान इस करंट का शिकार हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा?
फिर भी व्यवस्था राम भरोसे चल रही हैं कोई जिम्मेदारी नहीं।
जागेंगे तब जब कोई अनहोनी होगी। होगा भी क्या चार दिन जांच का चिलचिला चलेगा, छोटा अधिकारी हत्थे चढ़ेगा। और फिर जिंदगी की बोलियां लगाई जाएगी?
जिम्मेदारों हादसे के पूर्व इसको देख लीजिए, निकलिए AC के कमरों से और जिम्मेदारी तय करवा दीजिए।
@DmJalore @RajCMO @RajGovOfficial @BhajanlalBjp @hlnagar @8PMnoCM @arvindchotia @khurpenchh @JanSamadhaan @ccc_jdvvnl
विकास के नाम पर विनाश कब तक?
रानीवाड़ा उपखंड क्षेत्र के सूरजवाड़ा में विद्युत लाइन निकाली जा रही हैं जिसमें हालिया बनी नवीन सड़क को तोड़ा गया है उतना ही नहीं एक कम्पनी द्वारा कि जा रहीं मनमानी इतनी हावी है कि नियमों के विरुद्ध अनगिनत पेड़ों की बलि दी गई। सड़क के आसपास पानी सप्लाई की पाइप लाइनौ को क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे पानी सप्लाई पूरे इलाके में बाधित कर दी गई है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रही ��नमानी इस कदर हावी है जो बेहद गंभीर सवाल खड़े करता हैं। आखिर इस विकास के नाम पर विनाश को पनाह कौन दे रहा हैं। अनगिनत काटे गए पेड़ों की भरपाई कब होगी? संबधित लापरवाह अधिकारियों के रसूख के चलते आम गरीब इन मनमानी कर रहे कंपनियों से परेशान हैं। पर कोई सुनवाई नहीं।
जिम्मेदारों सवालों के जवाब दीजिए...📍
●अनगिनत काटे गए सेंकड़ों पेड़ों की अनुमति किसने दी? और नियमों के विरुद्ध कैसे दी?
●काटे गए पेड़ों की भरपाई और लापरवाह कम्पनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब?
●राजस्थान सरकार के नुमाइंदे एक पेड़ माँ के नाम पेड़ लगाने की मुहिम चला रहें हैं दूसरी तरफ़ यह तस्वीर का जिम्मेदार कौन?
●हालिया बनी सड़क को कई जगहों पर नुकसान पहुंचाया गया है उस राजस्व के नुकसान की भरपाई कब?
●पानी सप्लाई दो दिन से बाधित हैं जिसकी वज़ह पाइप लाइनौ को क्षतिग्रस्त किया गया है आखिर कब होगी इन पर कार्यवाही?
@8PMnoCM @arvindchotia @artizzzz @BhajanlalBjp @RajCMO @PMOIndia @narendramodi @khurpenchh @madandilawar @RajGovOfficial @JanSamadhaan @DmJalore @Bhajanlalofc
विकास के नाम पर विनाश कब तक?
रानीवाड़ा उपखंड क्षेत्र के सूरजवाड़ा में विद्युत लाइन निकाली जा रही हैं जिसमें हालिया बनी नवीन सड़क को तोड़ा गया है उतना ही नहीं एक कम्पनी द्वारा कि जा रहीं मनमानी इतनी हावी है कि नियमों के विरुद्ध अनगिनत पेड़ों की बलि दी गई। सड़क के आसपास पानी सप्लाई की पाइप लाइनौ को क्षतिग्रस्त कर दिया जिससे पानी सप्लाई पूरे इलाके में बाधित कर दी गई है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रही मनमानी इस कदर हावी है जो बेहद गंभीर सवाल खड़े करता हैं। आखिर इस विकास के नाम पर विनाश को पनाह कौन दे रहा हैं। अनगिनत काटे गए पेड़ों की भरपाई कब होगी? संबधित लापरवाह अधिकारियों के रसूख के चलते आम गरीब इन मनमानी कर रहे कंपनियों से परेशान हैं। पर कोई सुनवाई नहीं।
जिम्मेदारों सवालों के जवाब दीजिए...📍
●अनगिनत काटे गए सेंकड़ों पेड़ों की अनुमति किसने दी? और नियमों के विरुद्ध कैसे दी?
●काटे गए पेड़ों की भरपाई और लापरवाह कम्पनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब?
●राजस्थान सरकार के नुमाइंदे एक पेड़ माँ के नाम पेड़ लगाने की मुह��म चला रहें हैं दूसरी तरफ़ यह तस्वीर का जिम्मेदार कौन?
●हालिया बनी सड़क को कई जगहों पर नुकसान पहुंचाया गया है उस राजस्व के नुकसान की भरपाई कब?
●पानी सप्लाई दो दिन से बाधित हैं जिसकी वज़ह पाइप लाइनौ को क्षतिग्रस्त किया गया है आखिर कब होगी इन पर कार्यवाही?
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@artizzzz जी
जालोर जिले के रानीवाड़ा उपखंड के रोड़ा गाव में सिर्फ एक टूटे खंबे की वज़ह से पिछले 15 घंटों से ज्यादा समय से विद्युत आपूर्ति ठप हैं। संबधित विभाग में संवेदनहीनता इतनी चरम पर नहीं होनी चाहिए कि ग्रामीण इलाके के लोगों को इसका खामिय��जा भुगतना पडे। 15 घंटे से विभाग की नींद नहीं खुली और कोई सुचारू करने के संसाधन नहीं लगा सके। आखिर इतनी कब तक चलती रहेगी। बच्चे, बुढ़े लोग भयंकर गर्मी से परेशान हो चुके हैं। काश अधिकारियों में थोड़ी भी संवेदनशीलता होती तो लोग आज परेशान नहीं होते।
रात होने को है पर किसी भी अधिकारी द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा। सोचिए बीमार अथवा वृद्ध लोग आज रात को किस तरह परेशानियों का सामना करेंगे। मेरा अनुरोध है तत्काल इस गंभीर समस्या का हल करवाएं।
@DmJalore @RajCMO @JanSamadhaan @ccc_jdvvnl @hlnagar @8PMnoCM @DIPRRajasthan @BhajanlalBjp @RajGovOfficial
माननीय @artizzzz जी
जालोर जिले के रानीवाड़ा विद्युत विभाग की FRT टीम की लापरवाही और मनमानी लोगों पर हावी हैं। रानीवाड़ा FRT के ठेकेदार और सुपरवाइज़र बिजली आपूर्ति सुचारू करने की बजाय आम निजी तौर पर अनुभवहीन गरीब व्यक्तियों को लालच और प्रलोभन देकर जान जोखिम में डालने को उतारू है। जिसमें अनगिनत हादसों की भरमार घटना हो चुकी हैं जो सुनियोजित जानलेवा से कम नहीं हैं। FRT व्यवस्था में नियमों अनुरूप निजी तौर पर अनुभवहीन व्यक्तियों को इस संवेदनशील कार्य क्षेत्र में काम लिया जा रहा है।
पिछले काफी समय से रानीवाड़ा क्षेत्र में FRT टीम में संवेदनहीनता चरम पर है जो बेहद भयावह हैं। एक फर्म ( Bhanwariya Infra? द्वारा गत 10 दिनों पहले पहले एक ग्रामीण इलाके में एक फर्म के सुपरवाइज़र ने लालच देकर निजी तौर पर अनुभवहीन व्यक्ति को काम पर लगाया जो करंट लगने से ��ादसे का शिकार हुआ। गनीमत रहीं की जान बच गई। वो व्यक्ति आज भी दर्द झेल रहा हैं। उक्त घटना के सबूत सहित उपलब्ध हैं। जो झकझोर करने वाले हैं। ये उस फर्म और सुपरवाइज़र द्वारा सुनियोजित हत्या के प्रयास से कम नहीं था। पर न तो इस घटनाक्रम में दोषी सुपरवाइज़र और ठेकेदार पर कार्यवाही की गईं न FIR दर्ज हुई।
रानीवाड़ा FRT टीम ने इन सब नियमों को ताक पर रख दिया हैं।
● सेवा में लापरवाही पर कार्रवाई जुर्माना (Penalty): यदि निर्धारित समय-सीमा में समस्या का समाधान नहीं होता है, तो ठेकेदार कंपनी पर प्रति घंटा के हिसाब से या नियमानुसार जुर्माना (Penalty) लगाने का प्रावधान है।
●शिकायत फर्जी तरीके से बंद करना: नियम के विरुद्ध, यदि FRT टीम बिना काम किए शिकायत को बंद कर देती है, तो जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई और ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने के निर्देश होते हैं।
● FRT टीम और विभाग के प्रमुख निय���लक्ष्य समय (TAT): शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायत दर्ज होने के बाद 60 मिनट से 120 मिनट के भीतर खराबी को ठीक करना। आवश्यक है।
●टीम का गठन: प्रत्येक FRT वाहन में एक ड्राइवर, एक कुशल लाइनमैन और दो सहायक (हेल्पर) मौजूद रहने चाहिए।
●अनिवार्य यूनिफॉर्म व आईडी: सभी कर्मचारियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म और विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र पहनना अनिवार्य है।
●सुरक्षा उपकरण: फील्ड में काम करने वाले कर्मचा���ियों के पास सुरक्षा के सभी आवश्यक उपकरण (सेफ्टी गियर्स) होने चाहिए।
रानीवाड़ा FRT के पास इन सब नियमों को ताक पर रख दिया है जिससे आम गरीबों की जिंदगी खतरे में डाल दी हैं। पिछले 5 सालों से अधिक समय की रानीवाड़ा की समस्त FRT फर्मों और संरक्षण दाताओं की जांच की जाए तो बड़े खुलासे होंगे। समय रहते कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हुई तो लापरवाह और संवेदनहीन FRT ठेकेदारों द्वारा किसी आम गरीब की जिंदगी लील ली जाए���ी। इस क्षेत्र के तमाम फर्मों की गहन जांच होनी बहुत जरूरी और कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी के अनहोनी घटना नहीं हो।
@8PMnoCM @arvindchotia @khurpenchh @khurpenchh @RajPoliceHelp @JalorePolice @DmJalore @ccc_jdvvnl @BhajanlalBjp @RajCMO @RajGovOfficial @hlnagar
प्रिय @XCorpIndia
भावेश राजपुरोहित अपने क्षेत्र की समस्याएं प्रमुखता से और निडरता से उठाते हैं। इनका अकाउंट दुर्भावनावश रिपोर्ट किया गया है। कृपया इस अकाउंट पर किसी भी प्रकार का बैन नहीं होना चाहिए
प्रिय
@XCorpIndia
भावेश राजपुरोहित अपने क्षेत्र की समस्याएं प्रमुखता से और निडरता से उठाते हैं। इनका अकाउंट दुर्भावनावश रिपोर्ट किया गया है। कृपया इस अकाउंट पर किसी भी प्रकार का बैन नहीं होना चाहिए।
@BhaveshPurohiit
प्रिय @XCorpIndia
भावेश राजपुरोहित अपने क्षेत्र की समस्याएं प्रमुखता से और निडर���ा से उठाते हैं। इनका अकाउंट दुर्भावनावश रिपोर्ट किया गया है। कृपया इस अकाउंट पर किसी भी प्रकार का बैन नहीं होना चाहिए।
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प्रिय @XCorpIndia
भावेश राजपुरोहित अपने क्षेत्र की समस्याएं प्रमुखता से और निडरता से उठाते हैं। इनका अकाउंट दुर्भावनावश रिपोर्ट किया गया है। कृपया इस अकाउंट पर किसी भी प्रकार का बैन नहीं होना चाहिए।
@BhaveshPurohiit