अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इससे मंदिर प्रबंधन पर लग रहे आरोपों के साथ-साथ संदेह भी बढ़ता जा रहा है। मंदिर निर्माण के समय दान देने वाले कुछ श्रद्धालु अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और दान में दी गई वस्तुओं का सार्वजनिक हिसाब मांग रहे हैं।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया कि देशभर के सराफा कारोबारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी एकत्र की थी। इस चांदी को गलाकर एक से सवा किलो वजन की ईंटें तैयार की गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र अंकित थे। इसके अलावा ऋषिकेश एसोसिएशन की ओर से एक किलो चांदी का कलश भी भेंट किया गया था।
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#AmarUjala
क्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में FIR दर्ज हुई? क्यों नहीं दर्ज हुई?
किसे बचाया जा रहा है? देशवासियों की आस्था से कौन खिलवाड़ कर रहा है?
जिन लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा वो देश और देशवासियों को कैसे छोड़ देंगे? ये सबको ठगेंगे.
आर्काइव | तमाम उम्र ट्रेड यूनियनों का हिस्सा रहे 64 वर्षीय ललन किशोर सिंह ने जून 2021 से यह जानने की कोशिश शुरू की कि सरकार संघ को सुरक्षा मुहैय्या करने में ��ितना ख़र्च कर रही है. सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24(4) के तहत सिंह को जानकारी देने से इनकार कर दिया गया. सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद, यातायात पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी, उन्हें कार्यालय बुलाया और लंबे समय तक इंतज़ार कराया.
2024 में, सिंह ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में एक रिट याचिका दायर की, जिसमें बताया गया कि कैसे, समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सीआईएसएफ 2015 से भागवत और नागपुर स्थित स���घ मुख्यालय को जेड-प्लस सुरक्षा दे रही है. उन्होंने अदालत को बताया, 'लगभग डेढ़ सौ सुरक्षाकर्मी इसमें लगे हुए हैं,' उन्होंने एक अन्य समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 58 कर्मी एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को 40 लाख रुपए प्रति माह से ज़्या��ा की लागत से जेड-प्लस सुरक्षा दे रहे हैं. इसके आधार पर, सिंह ने गणना की कि सरकार संघ की सुरक्षा में हर महीने लगभग 1.25 करोड़ रुपए ख़र्च कर रही होगी. इसका मतलब पिछले एक दशक में 150 करोड़ रुपए ख़र्च हुए होंगे. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फ़रवरी 2023 के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें अंबानी को ख़ुद ख़र्च वहन करने का निर्देश दिया गया था. उन्होंने तर्क दिया कि क्या इसका मतलब यह नहीं था कि आरएसएस को भी अपनी सुरक्षा का ख़र्च वहन करना होगा? सिंह ने मुझसे कहा, 'यह जनता का पैसा है. इसका इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए.'
जब मैंने कुमार से पूछा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संस्था क्यों बनी हुई है, तो उन्होंने कहा, 'इसके लिए पंजीकृत होना कहां ज़रूरी है? क्या कोई क़ानूनी बाध्यता है? नहीं.' यह संगठन सिर्फ़ वित्तीय जांच से ही नहीं बचता. चूंकि इसका पंजीकरण नहीं है, इसलिए इसे सदस्यता रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत नहीं है. संघ कानूनी तौर प��� अनुबंध नहीं कर सकता, संपत्ति का मालिक नहीं हो सकता या कर-कटौती योग्य दान प्राप्त नहीं कर सकता, लेकिन ये सारे काम वह अपने संबद्ध ट्रस्टों और अग्रणी या फ्रंट संगठनों के ज़रिए करता है इस ख़ामी ने इसे गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की आरएसएस सदस्यता को छिपाने का मौका दिया.
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#RSS100Years #MohanBhagwat
नियम बदले, नियामक दरकिनार- अडानी ग्रुप को ₹13.27 लाख करोड़ के पावर टेंडर!
क्या यह सिर्फ एक संयोग है या फिर Crony Capitalism का नया अध्याय? The Reporter's Collective की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 से जनवरी 2026 के बीच भाजपा शासित राज्यों के सभी बड़े कोल प��वर टेंडर अडानी ग्रुप की झोली में गए हैं। अगले 25 सालों में इससे ₹13.27 लाख करोड़ की कमाई तय है।
सवाल यह है कि इसके लिए नियम कैसे और किसके इशारे पर बदले गए? महाराष्ट्र से लेकर बिहार और मध्य प्रदेश तक की पूरी इनसाइड स्टोरी जानने के लिए स्वाइप करें।
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#adanigroup #reporterscollective #powertender #indianpolitics
आर्काइव | आरएसएस से आने वाले और मीडिया में जबरदस्त पैठ रखने वाले, लंबे और सुंदर ब्राह्मण हरेन पांड्या गुजरात बीजेपी के भीतर मोदी के जबरदस्त राजनीतिक प्रतिद��वंद्वी थे. दोनों सार्वजनिक रूप से 2001 में भिड़े. वह वक्त था जब मुख्यमंत्री नियुक्त हो जाने के बाद मोदी विधानसभा में अपनी जीत के लिए सुरक्षित सीट ढूंढ रहे थे. वह पांड्या के क्षेत्र अहमदाबाद के एलिसब्रिज से उपचुनाव लड़ना चाहते थे. यह बीजेपी के लिए बेहद सुरक्षित सीट थी. लेकिन पांड्या, मोदी के लिए सीट छोड़ने के लिए राजी नहीं हुए.
मार्च 2003 में पांड्या को पार्टी अध्यक्ष का फैक्स मिला कि उन्हें दिल्ली आना है. इसके अगले दिन अहमदाबाद में उनकी हत्या कर दी गई. गुजरात पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दावा किया कि पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई), लश्कर-ए-तैयबा और दुबई स्थित अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम ने मिल कर पांड्या की हत्या कराई है. 12 लोगों को गिरफ्तार करके उन पर पांड्या की हत्या का आरोप लगाया गया. लेकिन आठ साल बाद, 2011 सितंबर ��ें, गुजरात हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करके पूरे मामले को खारिज कर दिया. जज ने कहा, “जांच में पूरी तरह से ढिलाई बरती गई. यह जांच आंखों पर पट्टी बांधकर की गई. संबंधित जांच अधिकारियों को उनके अक्षमता के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. इसकी वजह से अन्याय हुआ. कई लोगों का भारी उत्पीड़न हुआ और सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल के अलावा अदालतों का समय भी बर्बाद हुआ.”
पांड्या मामले की जांच का ह���स्सा वो दोनों भ्रष्ट अधिकारी थे, जो मोदी के उप गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कथित रूप से चलाए जाने वाले उगाही रैकेट का भी हिस्सा थे. पांड्या के पिता विट्ठलभाई ने सरेआम मोदी पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए इससे संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. याचिका में मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच किए जाने की मांग थी. हालांकि अदालत ने साक्ष्यों की कमी का हवाला देकर याचिका को खारिज कर दि��ा था.
आरबी श्रीकुमार जिन्होंने दंगों के ठीक बाद एक साल तक, राज्य के खुफिया तंत्र का प्रतिनिधित्व किया, उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय ने हरेन पांड्या की हरकतों और गतिविधियों की जानकारी लगातार देते रहने के लिए कहा गया था.
झड़ापिया ने , “मैं यह नहीं कह रहा कि मोदी ने पांड्या की हत्या कराई. लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी के भीतर अगर कोई मोदी के ख़िलाफ़ मुंह खोलता है तो वह राजनीतिक या शारीरिक रूप से ख़त्म हो जाता है.”
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#NarendraModi
आर्काइव | सूर्यकांत पर गंभीर अनियमित्ता के आरोप हैं. 2012 में एक रियल एस्टेट एजेंट ने सूर्यकांत पर कम कीमत दिखा कर करोड़ों रुपए की संपत्ति का अवैध कारोबार करने का आरोप लगाया था. 2017 में पंजाब में एक कैदी ने याचिका दायर कर सूर्यकांत पर 8 मामलों में रिश्वत लेकर जमानत देने का आरोप लगाया. इस याचिका पर छह सालों तक कॉलेजियम ने सुनवाई नहीं की और वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने रह��. अक्टूबर 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया और अब उनके खिलाफ शिकायतों का निवारण किए बिना कॉलेजियम ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया. एक पूर्व जज के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सूर्यकांत को पदोन्नत करने के लिए भी कॉलेजियम यही करने वाला है.
पढ़ें अतुल देव का यह लेख: https://t.co/aiHD3uunBT
#CJI #Corruption
यह देश 2002 में गुजरात दंगों में मारे गए बेकसूरों का अभिशाप झेल रहा है। यह सिलसिला आगे भी चलेगा, अभी तो बस इस देश के युवाओं को कॉकरोच घोषित किया गया है। यह देश उन बेकसूरों को न्याय नहीं दिला पाया जिनकी दंगों में अकाल मौत हुई। आइए अपने गुनाहों को फिर से याद करें।
अहमदाबाद के गुलबर्गा सोसायटी में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान कांग्रेस एमपी एहसान जाफरी के साथ साथ 69 लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी ।
गुजरात दंगों में कम से कम दो सौ पचास लड़कियों और महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उन्हें जला दिया गया।
दंगों में बच्चों को जबरदस्ती पेट्रोल पिलाया गया और फिर आग लगा दी गई, गर्भवती महिलाओं को चपेट में लिया गया और फिर उनके अजन्मे बच्चे के शरीर को ��िखाया गया।
एहसान जाफरी की हत्या पर लिखते हुए डायन बन्शा ने कहा है कि जब जाफरी ने भीड़ को महिलाओं को छोड़ने के लिए भीख मांगी, तो उन्हें सड़क पर घसीटा गया और "जय श्री राम" कहने से इनकार करने पर उन्हें परेड करने के लिए मजबूर किया गया। दंगाइयों ने दो छोटे लड़कों सहित जाफरी के परिवार को जलाकर मार डाला।
दंगों की अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार गुजरात हिंसा के दौरान 230 मस्जिदें और 274 दरगाहें नष्ट हो गईं। सांप्रदायिक दंगों के इतिहास में पहली बार हिंदू महिलाओं ने भाग लिया, मुस्लिम दुकानों को लूटा। यह अनुमान लगाया गया है कि हिंसा के दौरान 1.5 लाख लोगों को विस्थापित किया गया था।
मोदी जी आपके घर के दादा जी थोड़े ही हैं जो पानी पीने की सलाह दे रहे हैं
आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं
आपका काम लोगों को पीने का पानी मुहैया कराना है - सस्ती सलाह अपने पास रखिए
गुजरात से लेकर इंदौर, देवप्रयाग और आगरा तक लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं
जान जोखिम में डाल कर किसी तरह से पानी जुटा पा रहे हैं
अरे सब छोड़िये राजधानी दिल्ली में पीने के पानी को जगह सीवर का पानी आ रहा है नलों में
लोग सर���ार से पानी की माँग कर रहे हैं, पानी के लिए गर्मी में प्रदर्शन कर रहे हैं
और नरेंद्र मोदी कैबिनेट मीटिंग में हाइड्रेट रहने की सलाह दे रहे हैं
इनसे बस कोरी बकवास करा लो - सरकार चलाना, लोगों को basic सुविधाएं दिलवाने से इनका ढेले का मतलब नहीं है
2014 के बाद देश में एक नया मंत्रालय पैदा हुआ है — “सिस्टम मंत्रालय”
पेपर लीक हो जाए — सिस्टम जिम्मेदार
प्लेन क्रैश हो जाए — सिस्टम जिम्मेदार
महाकुंभ भगदड़ में लोग मर जाएं — सिस्टम जिम्मेदार
लोग गंदा पानी पिएं — सिस्टम जिम्मेदार
न��ली दूध, पनीर, खोया बिके — सिस्टम जिम्मेदार
परीक्षा कैंसिल हो जाए — सिस्टम जिम्मेदार
किसान आत्महत्या करे — सिस्टम जिम्मेदार
छात्र आत्महत्या करें — सिस्टम जिम्मेदार
मजदूर आत्महत्या करे — सिस्टम जिम्मेदार
पुल गिर जाए — सिस्टम जिम्मेदार
ट्रेन हादसा हो जाए — सिस्टम जिम्मेदार
बस एक चीज़ कभी जिम्मेदार नहीं होती — सरकार!
क्रेडिट चाहिए तो “सरकार”,
लेकिन जवाबदेही आए तो “सिस्टम”
आप ही बताइए ऐसा क्यों ?
#UnemploymentInIndia #PaperLeak #RealityCheck
याद है, मांगने के बावजूद सैनिकों को हवाई जहाज मुहैया नहीं करवा कर पुलवामा में दर्जनों सैनिकों की बलि ले ली गई थी !
कल की खबर है कि शिक्षक पढ़ाई लिखाई का काम छोड़ कर गाय भैंसों के लिए भूसा जुटायेंगे ...
और सेना प्रश्न पत्रों की डिलीवरी की इवेंटबाजी करेगी, ताकि भ्रष्ट और न���ारा शिक्षा मंत्री के कुकर्मों को सेना की आड़ में छुपाया जा सके.
कल को ऐसा आदेश ना आ जाए कि बॉर्डर पर दुश्मनों से लड़ने NTA के अधिकारी जाएंगे.
जब जोकर चुनोगे तो यही सब मज़ाक ही होगा.
सवाल यह नहीं कि बस्तियां किसने जलाई, असली सवाल तो यह है कि पागल के हाथ में माचिस किसने दी ?
ये वोट चोरी का सरगना उस पीएम केयर्स फंड में पैसे डालने की वकालत कर रहा है जिसे प्रधानमंत्री और उनकी मंडली ने निजी फंड बना रखा है और जिसकी कोई जानकारी जनता को देने से इंकार करती है। किसी को ये भी पता नहीं कि मोदी के हटने के बाद ये फंड किसका होगा।
अगर इस देश की अदालतें कंप्रोमाइज्ड न होती तो ये कब का बंद हो चुका होता।
बहरहाल, इसके झांसे में मत आइए क्योंकि ये भी उसी गैंग का सदस्य है।
आर्काइव | मध्य प्रदेश की कमल मौला मस्जिद का हाल बाबरी जैसा करने की कवायद में हिंदू महासभा.
कमल मौला मस्जिद परिसर में मूर्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हिंदू महासभा के सदस्य भार्गव पंडिताई करते हैं. उन्होंने खुलासा किया कि बाबरी मस्जिद की घटना की तरह, कमल मौला मस्जिद में वाग्देवी की मूर्ति का प्रकटीकरण एक तयशुदा कार्रवाई थी. उन्होंने हमें बताया कि उन्होंने भोपाल के एक कारीगर को अठारह महीने पहले ही मूर्ति तैयार करने के लिए कहा था और कारीगर ने यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरती थी कि मूर्ति ऐसी न लगे कि इसे हाल ही में तैयार किया गया है, इसके लिए खास तरह का पत्थर तलाशा गया.
भार्गव ने हमें बताया, “हर कोई जानता था कि यह महासभा द्वारा किया गया था. जो ��ोग भोजशाला आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे वे अप्रभावी थे. मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि घंटियां बजाने और शोर मचाने का मतलब क्या है.” उन्होंने कहा कि उनसे कई बार पूछा गया कि उनके कृत्य का उद्देश्य क्या था, जबकि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पहले ही हो चुका था. “लेकिन इसमें पांच सौ साल लग गए. क्या हम प्रत्येक मंदिर के लिए पांच सौ का इंतजार करेंगे? हमने देश में ऐसी बयालीस हजार संरचनाओं की सूची तैयार की ���ै. अगर हमने प्रत्येक पर पांच सौ साल खर्च किए, तो अपने लक्ष्य हासिल करने से पहले कितनी पीढ़ियां गुजर जाएंगी?”
पढ़ें पूरा लेख: https://t.co/113OU8ezs7
#Bhojshala
आर्काइव | नए यूसीसी कानून के तहत एक पोर्टल बनाया गया है जिस पर जाकर लिव-इन कपल्स अपनी डिटेल देनी होगी. पहले आपको बताना पड़ेगा कि देखिए हम दोनों ने फ़ैसला किया है, हम एक साथ रह रहे हैं, उसके बाद अलग-अलग जगह पर सरकारी अधिकार�� जांच करेंगे. जांच के बाद, आपका बयान पुलिस स्टेशन को भेजा जाएगा. हमें यहां सोचना चाहिए कि हमें बोला जा रहा है की आप साथ रह रहे हैं इसकी हमें इसकी इत्तला कर दीजिए. दो लोग आपस में, एक साथ रह रहे हैं, इसको आप शुरुआत से ही एक शक ��र आपराधिक नज़र से देख रहे हैं. इस तरह अपने जीवन का पूरा हिसाब, शुरू से लेकर अंत तक अपनी जिंदगी के सारे निजी फ़ैसले, निजी रिश्ते, शादी, तलाक, बच्चा, वगैरा-वगैरा आपको सब बताना है. फिर वे जांच कर तय करेंगे कि आपका लिव-इन रजिस्टर होगा कि नहीं होगा. वे रजिस्टर करने से मना भी कर सकते हैं. कानून यह ताकत उन्हें देता है. यह कानून आपके निजी जीवन में पुलिस की घुसपैठ कराता है. क्या ऐसा होना सही है?
पढ़ें उत्तराखं�� के समान नागरिक संहिता पर वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के साथ पारिजात की बातचीत: https://t.co/uAWO0zagc7
ओपन एक्सेस | कुछ ही दिन पहले, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किला से कहा था कि, 'आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ है.' मोदी के बयान ने वही बात साफ़ कर दी जिसे भागवत उलझा कर पेश कर रहे थे. सच यह है कि आरएसएस से जुड़े कई संगठन समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं और यही विस्तृत नेटवर्क संघ की शक्ति का असली आधार है.
अब यह सवाल उठता है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है, कैसा है और कैसे काम करता है? इसकी कोई ठोस जांच आज तक क्यों नहीं हुई? इसकी वजह साफ़ है कि संघ ख़ुद इसे यूं ही धुंधला रखना चाहता है.
संघ आधिकारिक तौर पर किसी भी रूप में दर्ज नहीं है, न ही किसी एनजीओ के रूप में, न किसी धार्मिक ट्रस्ट के तौर पर और न ही किसी अन्य क़ानूनी संस्था के रूप में. कागज़ों पर ‘ग़ायब’ रहने की यह रणनीति उसे सुविधा देत�� है कि वह देश की राजधानी में अपना मुख्यालय बना ले बिना यह बताए कि उसका फंड कहां से आता है और उसके सदस्य कौन हैं. सबसे अहम बात यह है कि संघ अलग-अलग संगठनों और लोगों के ज़रिए काम करता है, लेकिन जब भी उससे ‘माध्यम’ या ‘प्रॉक्सी’ के बारे में पूछा गया कि वह कौन हैं और उनसे उसका संबंध कैसे चलता है, वह इस सवाल को नज़र अंदाज़ कर देता है.
'सीइंग द संघ' राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध उन संगठनों का विश्व का पहला मानचित्र है, जो मिलकर विश्व का सबसे बड़ा धुर दक्षिणपंथी नेटवर्क बनाते हैं।
यह इंटरैक्टिव डेटासेट 'साइंस पो' के अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (सीईआरआई) में स्थित एक भंडार में संग्रहीत है. इसमें वर्तमान में ढाई हज़ार से अधिक संगठनों का व्यापक गुणात्मक और मात्रात्मक डेटा शामिल है और इसकी फैक्ट चेकिंग करके इसे द कारवां द्वारा ��्रकाशित किया गया है।
नेटवर्क मानचित्र यहां देखें: https://t.co/dnRTIFsIMd
इस प्रोजेक्ट पर विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें फेलिक्स पाल का लेख: https://t.co/G3aM1bJjLv
आर्काइव | मेरे गुजरात छोड़ने के थोड़ा पहले एक आरएसएस नेता ने अपनी भावनाओं को कड़वाहट भरी आह में व्यक्त किया, “ मोदी शिवलिंग पर विराजमान बिच्छू है. न उसको हाथ से उतार सकते हैं, न ही उसे जूते से मार सकते हैं.”
झड़ापिया ने मुझसे कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि मोदी ने पांड्या की हत्या कराई. लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी के भीतर अगर कोई मोदी के खिलाफ मुंह खोलता है तो वह राजनीतिक या शारीरिक ��ूप से खत्म हो जाता है.”
पढ़ें विनोद के जोस का पूरा लेख: https://t.co/OZoFQEPPnr
#modi #gujarat #RSS100Years
जिस दिन महिला आरक्षण को एक पैकेज के रूप में संसद में पेश किया गया, ठीक उसी दिन सरकार ने एक अधिसूचना भी जारी की कि महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू कर दिया गया है. राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के ढाई साल बाद इसे अमल में लाया गया. इस पल तक का लंबा इंतज़ार अपने आप में एक कहानी है. सरकार यह स्पष्ट नहीं किया कि कानूनन आरक्षण लागू करने के लिए अगली जनगणना का इंतज़ार करना होगा और वास्तविक क्रियान्वयन कम से कम 2029 तक ��ा शायद 2034 में हो. फिर भी सरकार ने दावा कर दिया कि उसने महिला बिल लागू कर दिया है.
ऐसा दावा करने के पीछे सरकार की मंशा भारत की महिलाओं के सामने यह प्रचारित करना था कि उनके आरक्षण को विपक्ष ने रोक दिया. जो बात अनकही रह गई, वह यह थी कि सरकार ने ख़ुद ही महिला आरक्षण को एक बड़े पैकेज के साथ नत्थी कर इसे रोकने का रास्ता तैयार किया है. उसने इसे परिसीमन, जनगणना का समय और लोकसभा के विस्तार जैसे मुद्दों के साथ ��िला कर ऐसा किया है.
अगर सरकार महिला आरक्षण को सच में पारित करना चाहती थी, तो उसने इस कानून का स्वरूप कुछ और ही रखा होता. इसके बजाए, उसने ऐसा रास्ता चुना जिससे विवाद और हार, दोनों, का होना लगभग तय था. पढ़ें हरतोष सिंह बल का पूरा लेख: https://t.co/ySp9Axsdsu
गल्फूड्स से मिथर की सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उनके स्टॉल पर नितिन गडकरी के आने की ख़ुशी मनाई जा रही है. एक ओर कंपनियों के मालिक बीफ़ निर्यात से करोड़ों का मुनाफ़ा कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी की 'गोरक्षा' की राजनीति ने छोटे मुस्लिम व्या���ारियों और ड्राइवरों को अपराधी बना दिया है. एसीएलईडी और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्टें इस बात की पुष्टि करती हैं कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा में मरने वाले अधिकांश लोग मुस्लिम हैं. एक तरफ़ ड्राइवर गिरफ़्तार हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ नितिन और निखिल गडकरी अंतरराष्ट्रीय फूड इंडस्ट्री के कार्यक्रमों में फ़ोटो खिंचवा रहे हैं, जहां सावधानी बरती जाती है कि पृष्ठभूमि में 'बीफ़' के पोस्टर न द��खें.
पढ़ें नितिन गडकरी से जुड़े बीफ़ के व्यापार पर कौशल ��्रॉफ का यह लेख: https://t.co/p60QAfo5SN