"दो नपने नहीं चलेंगे"
यह हमारे अग्निहोत्री भैया का कहना है, और मेरा भी कहना है, एक लड़की मोदी जी का तेरहवी करवा रहा है, किसी एक लड़का ने कभी दरभंगा में मोदी जी के माँ जी को गाली दे दिया।
मैंने तो आज तक नहीं सुना मोदी जी के मुंह से निकला हो कि उसे माफ कर दीजिए।
या तो हम यह कहेंगे कॉकरोच जनता पार्टी आम आदमी पार्टी या बीजेपी कांग्रेस सब मिली जुली है अगर नहीं रहती तो एक तरफा कार्रवाई क्यों?
SC ST act राहुल गांधी पर भी लगा था स्वतंत्र भारद्वाज पर भी लगा है।
मोदी जी दिन रात सोनिया गांधी राहुल गांधी को जो मन में आता है वह बोलते हैं हिम्मत है तो गिरफ्तार करके बताइए।
@narendramodi@Aamitabh2
'देसी कलाकार' ने एक विशेष विचारधारा पर उठाए सवाल
दिल्ली: स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में प्रदर्शन करने पहुंचे युवक सूरज ने वीडियो में बहुत सारे ऐसे दावे किए जो हम सभी को एक बार अवश्य ही सुनने चाहिए; पुलिस ने उसकी जाति जानने के बाद उसे छोड़ दिया।
हालांकि, पुलिस द्वारा जाति के आधार पर छोड़े जाने संबंधी उसके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट का यह क्लिप धारा 370 पर सुनवाई के दौरान का है
आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इतिहास का वो पन्ना पलट दिया कि सभी जज चुपचाप सुनते रह गए,
उन्होंने नेहरू का नाम तो नहीं लिया लेकिन नेहरू के नीचता और नेहरू की गद्दारी की पूरी कहानी सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ के सामने बयां कर दी वह भी तथ्यों के साथ
फिर भी कांग्रेसी चमचे कहेंगे नेहरू तो आधुनिक भारत के निर्माता थे
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी अपनी दलील में कहते हैं, 'हम सच्चाई के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर कौन था, औचिनलेक। भारत के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। पाकिस्तान के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। यह युद्ध (कश्मीर पर पाकिस्तान की तरफ से हमला) क्या था? चर्चिल ने ही तय किया था कि भारत का विभाजन होगा। यह जियो-पॉलिटिक्स का खेल था सब। यह युद्ध एक ब्रिटिश युद्ध था। उन्होंने दोनों तरफ से इसकी तैयारी की थी। हमलावर कहां से आए थे? उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) से। दो कार्यकालों के बाद मिस्टर कनिंघम, जो उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के गवर्नर रह चुके थे, उन्हें जुलाई में वापस बुलाया गया। चुनाव से ठीक पहले।'
द्विवेदी ने उस वक्त की परिस्थियों को बताते हुए आगे कहा, 'हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया, सेना के हथियारों के साथ ट्रकों पर भेजा गया। पाकिस्तान की सेना भारत से अभी-अभी अलग हुई थी। और सबसे बड़ा, सबसे स्पष्ट उदाहरण है, कौन लड़ रहा था? आज पीओके क्या है? पीओके का दो-तिहाई हिस्सा गिलगित-बााल्टिस्तान है। और वहां किसने युद्ध लड़ा? हमलावरों ने नहीं। यह मेजर ब्राउन था। वहां का एजेंट कौन था? उन्हें कनिंघम ने ठीक उसी जुलाई में दोबारा पोस्ट किया था। उन्होंने महाराजा (हरि सिंह) के सभी फोर्सेज को मार डाला। अंसार अहमद वहां तैनात थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और उन्होंने चार दिनों में पाकिस्तान का झंडा लहराया और उन्होंने इसे कनिंघम को सौंप दिया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना आलम के पास भेजी और उन्होंने गिलगित-बल्तिस्तान पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान के साथ युद्ध कहाँ है? यह ब्रिटिश है। लेकिन अगर हम इन सब से आंखें मूंद लेते हैं।'
वो कहते हैं, 'भला ये हमलावरों का युद्ध है? हमलावर अपने आप श्रीनगर तक नहीं आ सकते थे। युद्ध लगभग कारादु और कारगिल से लेकर लेह के करीब तक पहुंच गया था। तो यह एक अलग तरह का युद्ध था, लेकिन कोई नहीं कह सकता था क्योंकि माउंटबेटन वहां गवर्नर जनरल के रूप में थे। पता नहीं हमारे नेताओं ने ऐसा क्यों किया? जिन्ना ने तो साफ कहा, मैं किसी भी ब्रिटिश गवर्नर-जनरल को स्वीकार नहीं करूंगा। लेकिन हमारे यहां कहा गया, नहीं, हमें गवर्नर जनरल स्वीकार हैं। तो यह युद्ध क्या है? यही नहीं, जब युद्ध शुरू हुआ, तो उन्होंने (नेहरू सरकार ने) एक डिफेंस कमिटी का गठन किया और माउंटबेटन को इसका अध्यक्ष बनाया दिया। तो यह एक गजब की स्थिति है, लेकिन माउंटबेटन डिफेंस कमिटी के अध्यक्ष हैं।'
वरिष्ठ वकील आगे कहते हैं, 'ऑचिनलेक सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। सभी जनरल ब्रिटिश हैं और एक ब्रिटिशर विद्रोह कर रहा है और जब वह इंग्लैंड लौटता है तो उसे ब्रिटिश साम्राज्य का पदक दिया जाता है। तो यह युद्ध की स्थिति नहीं है। इसलिए जब आप संविधान और 370 को पढ़ते हैं, तो कृपया इन बातों को ध्यान में रखें कि हमारे नेता किन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। हमारी हमलावरों को पीछे धकेलने और अपनी जमीन वापस पाने की चाहत ही नहीं थी। उन्होंने एक समय पर जानबूझकर युद्ध को रोक दिया और संयुक्त राष्ट्र चले गए क्योंकि अगर हम मीरपुर तक और पीछे चले गए होते तो वह गिलगित-बल्तिस्तान से कनेक्शन टूट जाता।'
राकेश द्विवेदी ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा, 'ये सभी सच्चे तथ्य हैं। कोई भी इसे नकार नहीं सकता। और संयुक्त राष्ट्र क्या था? वही शक्ति जो जियो पॉलिटिक्स की वजह से भारत का विभाजन करना चाहती थी, अमेरिका और ब्रिटेन, उन्हें मध्यस्थ बनाया गया था। सौभाग्य से, पाकिस्तान ने पीओके खाली करने से इनकार कर दिया। इसलिए वह प्रस्ताव खत्म हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के बारे में बात करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन उस समय 370 के निर्माण में स्थिति की गंभीरता को देखें।'
This is how youtube celebs like Vikas Divyakirti should be roasted when they try to brainwash youth with the fake atrocity literature propagated by the britishers and their inheritors like congress, communist, socialist & secular parties over the decades!
Ajeet Bharti absolutely cooked businessman Vikas Divyakirti, the founder of Drishti IAS, over his support for reservation across different sectors of the country — especially his claim that for 3,000 years, only Brahmins had access to education. 🔥
Every Indian must watch this video! 🇮🇳
It is a truly insightful and beautifully presented video. After watching it, you will understand what changes Dharmendra Pradhan wanted to bring to India's education system and why such a massive controversy was created over his resignation.
Please watch this video till the end, and if you find it meaningful, don't forget to share it with others!
नीले कबूतरों ने कहा 3000 साल तक पानी
नहीं पीने दिया फिर भाई ने पूरा इतिहास खोला
1947 से लेकर पिछले 1000 सालों की टाइम लाइन गिना दी अब कोई दलित ये नहीं कहेगा उन्हें सवर्णो ने पानी नहीं पीने दिया
इस भाई ने नीले कबूतरों की धोती खोल दी 🔥