बस हाईवे बनाते जाओ, क्योंकि असली कमाई वहीं है. ‘किकबैक’ का खेल इतना सॉलिड है कि हर किलोमीटर ‘सोना’ उगल रहा है. लोग नितिन गडकरी की तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन सवाल ये है कि इन हाईवे और एक्सप्रेसवे से फायदा आखिर किसका हो रहा है ? जनता का या सत्ता में बैठे लोगों का! क्योंकि जो ��्रोग्रेस दिख रही है, वो आम लोगों की नहीं, बल्कि सिर्फ नितिन गड़करी की अपनी प्रोग्रेस है.
सरकार में बैठे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा आखिर हुआ क्या. उन बड़े-बड़े दावों का क्या हुआ जो मंचों से किए गए थे. आखिर कहां गए वो सारे वादे ?
सबसे नालायक बच्चे को क्लास मॉनिटर बना दो, तो वह क्लास में शांति तो ज़रूर बनाए रखता है. जिसे धौंस जमाना आये वह टीचर का रोल बख़ूबी निभा सकता है.
बस, यहाँ भी यही खेल चल रहा है.
#InternationalYogaDay
सबको योग से शांति मिलती है लेकिन योगी आदित्यनाथ योग करते हुए भी ईर्ष्या, कुंठा, नफ़रत और संशय से भरे हुए व्यक्ति लगते हैं.
चेहरा देखिये, ये भावनाएँ इतनी साफ़ दिख रहीं हैं!
#InternationalYogaDay
कल दीपके ने कहा- जेल भरो आंदोलन करो
देश में एक आदमी नहीं निकला जेल भरने
फिर दीपके ने कहा- सुबह 9 बजे आ जाओ
1 बजने आए और जंतर-मंतर का ये हाल है
आगे कुछ नहीं कहूंगा, लोग बुरा मान जाते ��ैं
Dear CM @myogiadityanath, you might be aware that Lucknow University has hiked fees by up to 110% in one stroke. Making already expensive education even more unaffordable.
And when @nsui students were protesting this harsh and unjust burden on poor and middle-class students, University has responded with expulsion and criminal cases.
@lkouniv, you are a public university. This is not how a public university should treat students fighting for affordable education. They are students fighting for fellow students. Not criminals. Listen to them. Work with them.
▪️ Roll back the fee hike immediately
▪️ Revoke the expulsion of student leaders
▪️ Withdraw all cases filed against protesting students
Stand with the students of Lucknow University in their fight for affordable education and democratic rights.
@lkouniv@CMOfficeUP@lkopolice
राजस्थान के वो ज़िले जिनकी सीमा पड़ोस के देशों से मिलती है (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार के इशारे पर चुन चुन कर मस्जिद मदरसों और दरगाहों को तोड़ने की कार्यवाही पूरी तरह से संविधान विरोधी और अपने ही देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीनने वाली है।
इन इलाक़ों में हिंदू मुसलमान न सिर्फ भाईचारे से रहते हैं बल्कि 1965 हो या 1971 का युद्ध हो, यहां के सभी धर्मों के लोगों ने पाकिस्तान को धूल चटाने में भारतीय सेना का बढ़ चढ़ कर साथ दिया है।
ये वो शांत इलाक़े हैं जहॉं अब सरकार की नफ़रत वाली नज़र पडी है, कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह जी का दौरा और अब उसके बाद सुबह नोटिस और कुछ घंटों में मस्जिदों को ज़मीदोज़ करने की कार्यवाही साफ़ बताती है मुसलमानों के प्रति सरकार की मंशा क्या है ?
आज़ादी के पहले से भी बने कई धर्मस्थलों को तोड़ने का स्थानीय हिन्दू समुदाय भी विरोध कर रहे हैं।
सरकारों को अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीनने का कोई हक़ नहीं है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी और गृह मंत्री @AmitShah जी से अनुरोध है कि राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर जैसे ज़िलों में हो रही इस एकतरफ़ा और मुसलमानों को प्रताड़ित करने वाली कार्यवाही पर रोक लगवायें।
Happy birthday to the goodest guy in Indian politics. The man who stood tall despite more than a decade of trolling, negative publicity & naysaying and kept showing up for India! Happy Birthday to the indomitable @RahulGandhi 💙
Thank you for fighting for India ❤️🇮🇳
Thank you, Thiru Vijay, for your warm wishes.
We remain united in our commitment to the Constitution and to strengthening our democracy - and together, we will keep working for the welfare, dignity, and aspirations of the people of Tamil Nadu.
Dearest Railway Minister @AshwiniVaishnaw ji,
I am asking repeatedly again & again.
This is very very important & needs immediate attention.
Why should a RAC passenger bear full charge for 50% of a side lower seat? Isn't it unfair?
Once the chart is prepared, Railways must refund 50% of the fare with interest for RAC passengers. The same source of payment can be used for the refund.
Pls implement this immediately. I see many ladies and senior citizens who travel by RAC, without sleep and they pay full charge. This is so unfair.
If any of you reading this feel that this should be implemented immediately, comment with your thoughts and share until Railways makes it a fair deal for passengers.
This is long long overdue. @RailwaySeva
On behalf of Indian Passengers,
#FI
THE “SPONTANEOUS” MODI WELCOME HAD AN EMBASSY TWIST 🔥
SUPPORTER: I got invited by the Indian Embassy.
ANOTHER SUPPORTER: We are all winners of the Bharat Ko Jaaniye quiz hosted by the Embassy.
ANOTHER SUPPORTER: The Indian Embassy invited us for the Bonjour Modi programme.
So this was not just NRIs randomly turning up on their own. The embassy invited them to praise Modi 🫢
मैं ऐसी दृश्य देखता हूं तो मैं मुस्कुरा देता हूं। शायद मैं गलत हूं लेकिन मुझे ऐसे नारे चौंकाते हैं। मैं राहुल गांधी को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर रखकर न��ीं सोच पाता हूं, यह पद बहुत छोटा है इस व्यक्ति के लिए। राहुल गांधी का नाम पीएम पद से बड़ा है।आप लिख कर रख लो राहुल पीएम बनना नहीं स्वीकारेंगे। वो आपको चौंका देंगे।
पीएम पद के मान को इस देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रसातल में पहुँचा दिया है। यह पद अब गरिमाहीन हो चुका है। यह नारा गलत है कि "ह��ारा पीएम कैसा हो राहुल गांधी जैसा हो" असल नारा होना था "हर हिन्दुस्तानी कैसा हो राहुल गांधी जैसा हो"।
राहुल गांधी का कद ऐसे पदों से बहुत ऊपर है। बहुत मुमकिन है कि राहुल को यह पद मिले तो राहुल उसे लात मार दें और कहें कि यार इसको बनाओ और किसी अनजाने से युवा चेहरे को जिस पर उन्हें यकीन हो कि वो मेरे सपनों को पूरा करेगा मेरे डिजाइन को इस्तेमाल करेगा, उसको अवसर दे दें।
राहुल पीएम मैटेरियल तैयार करने का कारखाना हैं वो सैकड़ों हजारों ऐसे पीएम तैयार कर सकते हैं जो इस देश को इस देश की जनता की नब्ज को समझता हो। राहुल के पास इस देश के युवाओं, महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, पिछड़ों, मजदूरों के लिए विजन है।
आजाद भारत में पंडित नेहरू के बाद अकेले राहुल गांधी हैं जिनके पास नए भारत का एक डिजाइन है। गुलाम भारत के पास नेहरू,गांधी, भगत सिंह, सुभाष थे। जब काले अंग्रेजों ने देश पर कब्जा किया तब उसके पास एक अकेला राहुल है।
कांग्रेस को अभी राहुल के विजन को समझने की जरूरत है। कांग्रेस अभी राहुल के पीछे पीछे चल रही है उसे राहुल से आगे बढ़ने की जरूरत है जो कि होगा नहीं। बहुत दौड़ना पड़ेगा, सबसे मोहब्बत करनी पड़ेगी, असीम त्याग करना पड़ेगा। आखिरी बात "खुद को सबसे अंत में रखकर सोचना पड़ेगा"
सोशल मीडिया में दो संवाद छाये हुये हैं - एक राहुल गांधी का कोटा में छात्रों के साथ और दूसरा मोदी का पर्ची से पढ़ मोदी का ट्रंप के साथ संवाद.
कल निश्चित तौर राहुल गांधी भारी पड़े, उनकी बातों में भारत के भविष्य के मुद्दे थे, इनर्जी थी और संवाद के मॉडर्न टूल्स थे.
दूसरी तरफ़ पर्ची से पढ़ कर ट्रंप को कई बार 'योर एक्सिलेंसी' कह कर संबोधित करते हुए झुक कर बैठे हुये मोदी.
अब तुरंत रामचंद्र गुहा के आर्टिकल की डिमांड बढ़ गई है - आना चाहिये अगले एक दो दिन में. गुहा को रिपीट करना न चाहे तो और किसी का ही सही - लेकिन आयेगा ज़रूर, नज़र रखिये 😀