समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के चाचा सपा के महासचिव प्रो रामगोपाल यादव क्या भारतीय जनता पार्टी से मिले हुए हैं ? लग तो ऐसा ही रहा है क्योंकि रामगोपाल यादव गृहमंत्री अमित शाह की जेब में एक पर्ची डाल रहा हैं।
समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी एक हैं। यह सब अंदर से मिले हुए हैं।
@proframgopalya1@AmitShah
जंतर मंतर पर एकमात्र मुद्दा प्रधान का इस्तीफा व परीक्षाओं में हो रही धांधली थी। बहनजी ने अपने प्रेस नोट में इससे कई गुणा समस्या को सम्मलित करके जांरी किया है जिसमे बहनजी का कहना है कि;
1.देश मे बेरोजगार बढ़ रही है। युवा परेशान है। उनकी समझ मे नही आ रहा कि उनका भविष्य कैसा होगा. इसलिए वो आंदोलन का रास्ता चुन रहे है सरकार को कम से कम बेरोजगारी पर अंकुश लगाना चाहिए।
2.युवा "आउटसोर्सिंग/ठेकेदारी" वाली शोषणकारी नौकरी की जगह स्वाभिमान वाली नौकरी चाहते है। (उत्तर प्रदेश में अखिलेश ने संविदा पर नौकरी शुरू की थी)
3.युवाओ को सरकारी स्कूलों में सरकार अच्छी शिक्षा नही दे रही जिसके कारण एजुकेशन माफिया खड़े हो गए है, जिनकी दुकान लगातार खुल रही है। इतनी महंगाई में भी एक गरीब बच्चा कैसे इन कोचिंग में पढ़ सकता है।
4.इसलिए सरकार अगर प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे देगी तो फिर यह कोकेरोच पार्टी जैसे आंदोलन की युवाओ को जरूरत नही पड़ेगी।।
5.बाबा साहब के सिद्धांतो में एक अच्छी शिक्षा मिलने पर युवा अपना ही नही बल्कि देश का भी विकास करेगा।
6.परीक्षा में गड़बड़ी पर जबतक आप टॉप लेवल के जिम्मेदार अधिकारियो पर कार्यवाही नही करेंगे तब तक समस्या का समाधान नही होगा।।
विकास जाटव द्वारा निष्कर्ष
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बहनजी एकमात्र ऐसा लिख सकती है क्योंकि;
1.संविदा पर नौकरी नही दी। सीधी स्थाई नौकरी दी।
2.कई लाख उच्च शिक्षित प्राइमरी टीचर्स भरे जो बीएड क्वालिफाइड थे।
3.सफाई कर्मचारियों की 1 लाख 9 हजार की सीधी भर्ती करी न कि संविदा पर रखे।
4.कई लाख पुलिस कर्मियों की नियुक्ति करी।
5.कई लाख एससी/एसटी/ओबीसी के बैकलॉग पद भर दिए।
6.कई लाख टीचर्स के विज्ञापन 2012 में या तो जांरी करे या जांरी होने वाले थे, जिनपर आज तक भर्ती न तो अखिलेश और न ही योगी सरकार में पूरी हो सकी।
7.मेडिकल फील्ड में हजारो भर्तियां करी। ।
8.सरकारी ठेकों में आरक्षण लागू करके केवल एक दो ठेकेदार तक सीमित योजनाओं में हजारों को सम्मलित करके रोजगार दिया।
9.हर विभाग में भर्तियां ही भर्तियां हुई।
इसके अलावा;
10.जितने प्रोफेशनल कोर्स करने के संस्थान वर्र्तमान में उत्तर प्रदेश में है उनमे 50% से ऊपर बहनजी के शासन में खुले ।
11.शिक्षा को सर्वोत्तम रूप से महत्व दिया गया। इंहा रक की पहला अरबी फारसी विश्वविद्यालय मुस्लिम शिक्षा के लिए बहनजी ने बनाया। जिसका नाम अखिलेश ने बदल दिया, भाजपा सरकार ने "अरबी-फारसी" शब्द ही गायब कर दिया।
यह इतना ज्यादा की में लिखना शुरू रखूं तो लिस्ट काफी लंबी हो जाएगी।
बहुजन विचारधारा करने में विश्वास करती है। बहनजी के शासन में शिक्षा व रोजगार के लिए धरने प्रदर्शन करना युवा भूल गए क्योंकि उन्हें जरूरत ही नही पड़ी।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp
जहाँ एकतरफ युवाओं पर लाठियां बरस रही थी वही दूसरी तरफ अमित शाह की पुलिस इसको अपने गाड़ी पर चढ़ा कर भड़काऊ भाषण दिलवा रही थी ।
इसीलिए हम कहते है कि इसे भाजपा का संरक्षण प्राप्त है वरना जो पुलिस युवाओ पर लाठियां बरसा रही थी वो इसका भाषण क्यों सुन रही थी ।
अमित शाह की पुलिस ने इसके ऊपर लाठियां क्यों नही बरसाई ??
प्रश्न : सिंपल शब्दो मे बताये की रोजाना लेख लिखने, जनजागरूकता फैलाने, एससी विषयो पर अटैक पर काउंटर अटैक करने व Pay back to Society का अंतिम उद्देश्य क्या है?
उत्तर : यह प्रश्न था। मेरा जवाब था कि;
"में कल वेजिटेबल खरीदने गया। मेने पूछा कि Coriander leaves (धनिया पत्ती) नही डाला। कहने लगा की बाउजी 400 रुपया किलो हो रहा है। मेने कहा कि 5 रुपए की दे दो, जवाब आया कि बाउजी बहुत महंगा है। उसने 10 रुपया इसका एक्स्ट्रा लिया और 5 से 7 coriander leaves की कली दी।
अब कुछ महीने पहले में सब्जी वाले को मना कर करके थक गया कि भाई coriander leaves मत दिया कर, पहले से काफी ज्यादा फ्रिज में है। फेंकना पड़ता है। लेकिन वो देकर जाता था। रोजाना फेंकना पड़ रहा था।
अब इससे समझे कि;
"वर्तमान में अनुसुचित जाति का महत्व व मूल्य फ्री वाले Coriander leaves की तरह है। वो easy रूप में हर जगह Available है, इसलिए जिस प्रकार धनिये का फ्री मिलने पर कोई महत्व नही था, उसी प्रकार एससी समाज का महत्व नही है"
अब आपके प्रश्न का सीधा स्पष्ट जवाब यह है कि;
"जिस प्रकार वर्तमान में धनिए का महत्व उंसके 400 रुपया किलो होने के कारण है, उसी प्रकार एससी समाज का सामाजिक वातावरण में हर मूल्य व महत्व पैदा करना है"
बाबा साहब से लेकर मान्यवर व अन्य सँघर्ष कर रहे हर बुद्धिजीवी यह ही कर रहा है।
आप इसे धर्म मे ही देख लीजिए। आपको "अत्यंज" मनुस्मृति में बताया गया है। आप अवर्ण जातिया रही है। शुद्र अथार्त ओबीसी के दिमाग मे भी घुसा दिया गया कि आप हमसे नीचे चाहे हो लेकिन अवर्ण जातिया अथार्त अछूत व आदिवासी से ऊपर है।।
अब एक एससी के आरक्षण से बना आईएएस पूरा लम्बा टिक्का लगाकर्, हर धार्मिक क्रिया करके भी नजरो में अछूत रहा। फिर रिटायर होने के बाद अम्बेडकर महासभा/सभा खोल लेता है।
कारण?
धर्मिकता उसे "फ्री का धनिया" बनाकर रखी। जबकिं अम्बेडकरवादी विचारधारा में उसे "मूल्यवान" बनना अपने आप को नजर आया।
में अगर कहता हूं कि में उन्ही धार्मिक गतिविधियों को करता रहूँगा जिसमे मुझे अत्यंजय बताया गया है तो में कितना भी बेस्ट हो जाऊं, कितना भी गुणवान, तथ्यो को जानने वाला बुद्धिजीवी बन जाऊं मुझे स्वीकार करना ही पड़ेगा कि ब्राह्मणसर्वोच्च है, उंसके बाद क्षत्रिय, वैश्य और इंहा तक कि शुद्र अथार्त ओबीसी भी मुझसे उच्च है। में इससे भाग नही सकता हूँ। स्वीकार करना ही पड़ेगा। इसमे कोई if and But नही है। इसमे में ब्राह्मण को दोष नही दे सकता क्योंकि वर्तमान में बाबा साहब ने आपको इससे अलग होने की आजादी दे रखी है और वास्तव में हम लाखो, करोड़ो बाबा साहब के साथ अलग हो भी गए है।
लेकिन जो नही हुए?
उसका एक दायरा है। उनकी हैसियत अवर्ण व अत्यंजय के रूप में है। जिसमे वो आगे नही जा सकता। उसका मनोबल हमेशा निम्न रहेगा।
इसलिए "मूल्यवान" बनो। हर जगह easy Available न रहा करे, जिससे आपका महत्व फ्री वाले धनिए जैसा वर्तमान में है।।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp
🚨औरैया में बाबा साहब का घोर अपमान! 🤬
महोदय @auraiyapolice लगभग 1 हफ्ते से @Uppolice दिन से अधिक हो गये लेकिन अभी तक कोई कारवाई नही हुई !
📍 नाम: संतोष (दिबियापुर निवासी)
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पूरी स्क्रीन रिकॉर्डिंग सबूत के साथ संलग्न है!
देखो प्रदर्शन इसे कहते हैं बस झंडा के नीचे हजारों की संख्या में लोग आ जाते हैं उस झंडे का नाम है 👉 हांथी छाप
बहुजन समाज पार्टी का नीला सैलाब देख लो पंजाब की सरकार के खिलाफ
औवेशी के सहरानपुर कार्यक्रम में काफी ज्यादा भीड़ थी। उनका कहना है कि कल को हारने पर मुझे दोष मत देना।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यादव वोटर्स नही है। जिस सहरानपुर में रैली हुई वँहा 99% गांवो में यादव परिवार तक नही है।
इस हिसाब से कितनी शीट औवेशी को सपा-कोंग्रेस गठबन्धन में मिलनी चाहिए।
क्या सपा देगी?
मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड के मामले में जांच कर रहीं CO सौम्या अस्थाना को जांच से हटा दिया गया है।
मैडम जांच के नाम पर आरोपियों के प्रति नरमी बरत रही थीं और उन्हें राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही थीं। वाह!
SSP अविनाश पांडेय पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुस्लिम नौजवानों के नाम एक ज़रूरी पैग़ाम!
साथियों, राजनीति में सच और झूठ का फर्क समझना बहुत ज़रूरी है।
हाल ही में आदरणीय बहनजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बिना किसी डर या झिझक के, पूरी बेबाकी से ‘मुस्लिम’ शब्द का प्रयोग भी करती हैं और इस समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाती भी हैं।
क्या आज देश का कोई और राजनीतिक दल इतनी बेबाकी से मुसलमानों के मसअले उठा सकता है?
हाँ मैं ब्राह्मण हूँ लेकिन अंबेडकरवादी हूँ।
ये बात सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर आयुषी पंडित ने कहा है जिसके इंस्टाग्राम पर नौ लाख से ज़्यादा फ़ॉलोवर्स हैं।
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर आयुषी पंडित के विचारों को लेकर ट्रोलर्स तरह तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे जिसके जबाव में आयुषी पंडित ने उन लोगों को खुलकर कहा कि मैं ब्राह्मण हूँ लेकिन अंबेडकरवादी हूँ क्योंकि शिक्षा, स्वतंत्र आवाज़ बुलंद करने और खुलकर जीने का अधिकार मुझे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी ने दिया है।
कुछ लोग तो इनको इनके विचारों को लेकर अनुसूचित जाति से जोड़कर ट्रोल करते हैं जिस पर भी इन्होंने बुरी तरह उन जातिवादी मानसिकता के लोगों को फटकार लगाई है।
क्या कभी किसी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य पँजाबी व अन्य सामान्य को आर्टिकल 30 के अल्पसंख्यक आरक्षण का विरोध करते देखा?
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आजम खान की यूनिवर्सिटी चर्चा में है। यह प्राइवेट अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी है लेकिन राज्य सरकार का कहना है की इसपर 3 हजार करोड़ रुपया खर्च हुआ।। इस यूनिवर्सिटी में;
"50% शीट अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी। क्योंकि अल्पसंख्यक कोटा में 50% शीट अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित की जा सकती है। इनमे अगर सरकार सहायता भी देगी अथार्त प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि सैलरी सरकार देगी तब भी प्रोफेसर्स से लेकर माली तक कि नियुक्ति का 100% आरक्षण अल्पसंख्यक कमेटी के पास होगा और चाहे सरकार सैलरी दे रही हो, 3 हजार करोड़ इसे बनाने में खर्च किया, तब भी एससी/एसटी/ओबीसी और इंहा तक कि EWS का आरक्षण इंहा लागू नही होगा"
अब यह अनुसुचित जाति के कट्टर हिन्दू धार्मिक से सवाल है कि क्या कभी किसी;
1.ब्राह्मण
2.क्षत्रिय
3.वैश्य
4.पँजाबी से लेकर अन्य द्वारा भारत के इस सब्सि बेहतरीन आरक्षण का विरोध करते देखा है?
मुझे सिर्फ एक आंदोलन बता दीजिए जो इसके खिलाफ कभी इन सभी वर्गों ने किया हो?
मेने लिखा कि ;
"100 साल के क्रिकेट के इतिहास में एक भी अनुसुचित जाति/जनजाति का खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम में नही हुआ। केवल बालू पलवनकर अंग्रेजो के समय हुए (काम्बली भंडारी, रिंकू ओबीसी नाई है)"
अब इसमे मेने क्या विवादित कह दिया। क्या केंद्र सरकार का यह कार्य नही है कि इस पर रिसर्च करे कि क्या कारण हो सकते है कि एक भी खिलाड़ी देश की 27% जनसँख्या वाली एससी/एसटी में से नही हुआ। सरकारों का यह कार्य है।
अब कमेंट बॉक्स में;
"सामान्य वर्ग के मुझे गालिया दे रहे थे। एससी/एसटी को भला बुरा कह रहे थे। जिसमें 90% से ऊपर अकेले ब्राह्मण वर्ग के है"
जबकिं;
"भारतीय क्रिकेट में मुस्लिम के लिए अघोषित आरक्षण है। आप 50 साल की टीम देखिए।।उसमे हर सेलेक्शन में सेलेक्शन करने वालो ने 2 तक मुस्लिम खिलाड़ी रखे है। हर सेलेक्शन में रखे है। अब 6 या ज्यादा क्यो नही, या एक भी क्यो नही, अगर पैमाना योग्यता है? क्योंकि उन्हें एक बैलेंस बनाना है, इसी बैलेन्स को अघोषित आरक्षण कहते है"
क्या कभी;
"सामान्य वर्ग के व्यक्ति ने इस अघोषित आरक्षण का विरोध किया है। सामने है। दिया जा रहा है। लेकिन नही किया"
इन वर्गों के टारगेट में "आर्टिकल 30 का अल्पसंख्यक जिसमे 90% से ऊपर मुस्लिम यूज करता है" नही रहता है। इनके टारगेट पर;
1.अनुसुचित जाति को मिल रहा मामूली सा प्रतिनिधित्व रहता है।
2.अनुसुचित जनजाति का प्रतिनिधित्व रहता है।
जबकिं दिखाने के लिए "मुस्लिम दुश्मन" व एससी/एसटी हिन्दू भाई।
इस स्तर तक एससी/एसटी नही सोचते है। उनके संगठनों में तार्किकता नही है। उन्हें जँहा सरकार से 100 रुपया मिलना चाहिए, उन्हें 20 दिया जाता है, उसी पर सामान्य वर्ग हाय तौबा कर देते है जिससे वो इस 20 रुपया के इर्दगिर्द ही आंदोलन करता है, जबकिं उसे पता भी नही की उसे इस 20 रुपया के इर्दगिर्द इसलिए इसमे उलझाया गया है जिससे वो 100 रुपया की मांग न करे।
जबकिं अल्पसंख्यक को 100 की जगह 200 रुपया दिया गया, उसपर न तो किसी ब्राह्मण को, न क्षत्रिय को, न वैश्य को और न ही पँजाबी से लेकर अन्य सामान्य वर्ग को दिक्कत है।।
बाबा साहब इसे जानते थे। इसलिए वो आरक्षण नही बल्कि साइमन कमीशन को यह समझाने में सफल रहे कि एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से अलग मानकर सिख, मुस्लिम की तरह अलग निर्वाचन मण्डल दो। जो मिल रहा था। लेकिन गाँधी इसके विरोध में पुणे की जेल में मरने की हालत तक धरना दे दिए और जबरदस्ती एससी/एसटी को ब्राह्मण धर्म से जोड़कर चले गए। जिसके कारण आज तक इन वर्गों को भुगतना पड़ रहा है।।
गांधी ऐसा न करते तो आज जिस प्रकार आजम की यूनिवर्सिटी पर 3 हजार करोड़ सरकार ने बहाया, अल्पसंख्यक आरक्षण में 50% एडमिशन व 100% पद भरने का आरक्षण मिल रहा है, वो एससी/एसटी को भी मिलता, जिसके सामने वर्तमान का सरकारी नौकरी का आरक्षण 20% भी महत्व नही रखता है।।
एससी/एसटी जब तक एक अलग पक्ष नही बनेगा तब तक इसी प्रकार घाटे में रहेगा।
विकास कुमार जाटव
असदुद्दीन ओवैसी की इस रैली को देखकर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी में बेचैनी देखी जा रही है।
अब आप देखना। समाजवादी पार्टी के लोग असदुद्दीन ओवैसी को भी भाजपा की B टीम कहेंगे।
विदेशी भी बाबा साहब के योगदान को जानते है, बस हमारे देश के वो लोग जिनके पूर्वज भारतीय समाज मे ऐसी गंदगी फैलाकर गए जिसमे दूसरे के मानव अधिकारों को खत्म कर सके, उनके बच्चे ही फ्रिंज एलिमेंट बनकर बाबा साहब हाय हाय करते है।।
सोनम वांगचुक की पत्नी बोलीं- "मुझे तो नहीं लगता कि सोनम की तबीयत कुछ खराब है... वो (सोमवार की) यात्रा के लिए तैयार होंगे। वो यात्रा में शामिल नहीं भी हुए तो मैं उनको रिप्रजेंट करते हुए उस यात्रा को लीड करूंगी..."
लो भाई लोग देख लो बहुजन समाज पार्टी धन्ना सेठों के पैसे से नहीं चलती है इसीलिए उनकी गुलाम नहीं है,
यह अपने लोगों के चंदा से चलती है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी एक बहुजन मिशन है हमेशा फलता फूलता रहेगा।
जय भीम ✊