@RajGovOfficial शर्म आनी चाहिए आपको यह पोस्ट करते हुए भी बच्चों के भविष्य के साथ कुठाराघात करते हो सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग इस तरह के पेपर बना कर क्या साबित करना चाहते हो
@RajGovOfficial Ek hi vacancy ki post ko 3 bar count Krna y Acha h sir...24 me post khali rhi to vo 25 vali m add ho gyi ki dekho 645 post aayi h or ab 2025 vali ki 578 post khali h inko add krke next me bol dena ki 1000+ post h...
Km se km paper to asa bnao ki 40% marks 1000 logo ke to aaye.
@RajGovOfficial शर्म आनी चाहिए सरकार को।
ये कोई पहले बार नही बल्कि 4th बार ऐसा हुआ ह ।
हर बार सैकड़ों पदों पर भर्ती आ रही ह पर बच्चे तो कभी 7 इस बार 645 मे से 67 पास हुए।
बच्चे डिप्रेसन मे जा रहे ह। जब पद भरने की मंशा ही नही ह तो फिर बार बार बच्चो को ये jhunjhuna क्यो दिखा रहे हो। 🤬🤬😡😡🤬
@RajGovOfficial क्या करे इस सूची का, नौकरी तो तुम लोग,देना नहीं चाहते 😭इस सूची को तोड़ मरोड़ #Rpsc के मुंह में रख दे, बेशर्मो...... डूब मरो कही कुएं भेरे में, किसी ओर को बैठने दो, जो नौकरी दे सके
@Sunil_Merta2311@Omrlp07 लाखों युवाओं के संघर्ष के बाद भी अगर सीटें खाली जा रही हैं, तो नियम और पेपर बनाने के पैटर्न में गंभीर खामी है। योग्य उम्मीदवार न मिलना युवाओं की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था का दोष है। इस 40% नियम में आंशिक छूट या पेपर सुधार बेहद जरूरी है।
645 पद और सिर्फ 67 पास!
भर्ती के नाम पर युवाओं के साथ यह कैसा मज़ाक है?
एक तरफ 'प्रथम प्रश्न पत्र' में अनिवार्य 40% की कठिन शर्त, और दूसरी तरफ पेपर का स्तर आवश्यकता से अधिक और बेहद जटिल (Tough) बनाया जा रहा है।
विषय (Subject) के ज्ञाता अभ्यर्थी भी इस अव्यावहारिक प्रथम पेपर के चक्रव्यूह में फंसकर बाहर हो रहे हैं।
नियम और पेपर का यह कॉम्बिनेशन युवाओं को रोज़गार देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें 'नॉट अवेलेबल' (N.A.) करने के लिए तैयार किया गया लगता है।
इसका सबसे तगड़ा झटका आरक्षित वर्ग को लगा है।
जब सीटें खाली ही छोड़नी हैं, तो अरबों रुपये फूंककर ऐसी परीक्षाएं कराने का क्या औचित्य?
सरकार तुरंत पेपर के स्तर और 40% के इस दमनकारी नियम की समीक्षा करें।
@RajCMO@BhajanlalBjp@ashokshera94@ashokgehlot51@GovindDotasra@VinodJakharIN
#RPSC
#PoliticalScience
"एक और तबाही... सपनों का क़त्ल करती आई💔
कोई नहीं देखता है घर से दूर बिताये गये साल, लाइब्रेरी में बिताये घंटे, Notes और Exam के लिए जगी हुई रातें, आपके अलग-अलग शहरों की परीक्षा के लिए यात्रा, लोग देखते हैं सिर्फ परिणाम, अगर तुम सफल हो तो तुम पढ़े लिखे और असफल रहे तो तुम रद्दी हो, तुम्हारी योग्यता शून्य है, परिणामों से योग्यता नापने वाला ये समाज और लोग हमारी उदासीनता और निराशा का सबसे बड़ा कारण है।
समाज बस यह कभी नहीं देखता है, कितने साल से मेहनत करी होगी, सपने को पूरे करने के लिए दिन रात मेहनत करके कभी भूखा भी सोया होगा 🥹
कभी कभी संघर्ष मेहनत से नहीं, सिस्टम से हार जाता है इस बार कोई हमें मेहनत का ज्ञान मत देना, हमारी मेहनत लाइब्रेरी ne देखा है उस किराया ke मकान ने देखा है,इसी के साथ बस कहानी अब ख़त्म हो गई 💔
पॉलिटिकल साइंस (स्कूल व्याख्याता) 2025 में 645 पदों पर मात्र 67 अभ्यर्थी पास , 578 पद खाली
▪️स्कूल व्याख्याता 2024 - 225 पदों पर 6
▪️सहायक आचार्य 2025 - 83 पदों पर 40
▪️स्कूल व्याख्याता 2025 - 645 पदों पर 67
यह 40% का खेल नहीं है , यह राजस्थान के सैंकड़ों पॉलिटिकल साइंस के अभ्यर्थियों के साथ की जारी सुनियोजित हत्या का स्वरूप है। 😔
यदि आप यह सब देख कर हँस रहे है तो मेरा सलाम आपको, आप आने वाली पीढ़ी के लिए जबाब तैयार रखना, वो पुछेंगे राजनीती विषय का अंत कैसे हुवा??
आप सब पॉलिटी सब्जेक्ट वालो को सांत्वना ना दे, अपने पास रखे, हमें सिस्टम से और संघर्ष से सताये हुऐ है।
राजनीतिक विज्ञान स्कूल व्याख्याता 2025 में 645 पदों पर मात्र 67 अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन हेतु उत्तीर्ण, 578 पद खाली।
▪️स्कूल व्याख्याता 2024 - 225 पदों पर 6 पद भरें।
▪️स्कूल व्याख्याता 2025 - 645 पदों पर 67 पद भरें।
▪️सहायक आचार्य 2025 - 83 पदों पर 40 पद भरें गए।
RPSC केवल भर्ती एजेंसी है इसका काम है विभाग को कार्मिक उपलब्ध करवाना।
इस तरह चलता रहा तो स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती तक नहीं हो पायेगीं।
स्कूल के बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है शिक्षक उपलब्ध नहीं करवा पा रहें भर्ती की एजेंसी के ठेकेदार (RPSC)।
राजस्थान चतुर्थ श्रेणी श्रेणी मे 53750 स्टूडेंट को सलेक्ट किया उनके घर मे खुश खबरी दी अच्छी बात है लेकिन इतनी बड़ी एक 3rd Grade की भर्ती आनी चाहिए।
2018 और 2022 मे बड़ी भर्ती आई थी इसी प्रकार 2027 मे 3rd Grade की 50,000 पदो पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होना चाहिए।
छात्रों के ख़िलाफ़ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है।
खबर आ रही है कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियाँ चलाई गई हैं और सैकड़ों छात्रों को गिरफ़्तार करके उनपर FIR की जा रही है।
मोदी जी, कहाँ गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई FIR नहीं की जाएगी और उन्हें रिहा कर दिया जाएगा? उल्टा उनपर घातक हमले और बर्बरता की जा रही है।
दिल्ली में छात्रों पर पेलेट गन चली और बिहार में AK-47। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार हो या दिल्ली - हर जगह पैटर्न एक ही है।
पहले भी कहा है, ये सरकार झूठी है। सुधार इनके बस का नहीं है। अपनी बातों से मुकर जाएगी और हर तरकीब से छात्रों की आवाज़ दबाएगी।
मोदी जी, देश के छात्रों से माफ़ी मांगिए। और जिन्होंने छात्रों पर हमला किया है, उन्हें कुचला है उनपर कार्रवाई कीजिए, छात्रों पर नहीं।
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
डूंगरपुर शासन प्रशासन से निवेदन है बिछीवाड़ा धामोद के ये लडके एक युवक को बुरी तरह से मारपीट कर रहें है जिस पर संज्ञान लेकर सख्त कार्यवाही करें!
अन्यथा विश्व आदिवासी दिवस मोहल खराब करेंगे!!
@DungarpurP@IgpUdaipur@RajPoliceHelp#Dungarpur