Call me GOD 😎
एक महीने पहले ही लिख दिया था, ममता बनर्जी अपना संगठन ही बचा ले तो गनीमत है, आज TMC के 50MLA नेता चुनाव आयोग के पास अलग #NEW#TMC बनाने पत्र लेकर गए है, सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी से एक महीने संगठन नहीं थमा,
बहन जी जैसा नेता करोड़ो में एक पैदा होता है, बसपा के संगठन का तिल बराबर नुकसान नहीं कर सकता भले ही हज़ार मोदी बुला लो और दो हज़ार अमित शाह,
ये तो दलितों की बुद्धि खराब है जो कोहिनूर छोड़ के कंकड़ जोड़ते डोले !!
लेख दुबारा पढ़ना और दुबारा समझना !! नमस्ते
पराधीनता पाप है, जान लेहु रे मीत।
रैदास दास पराधीन सौं, कौन करै है प्रीत।
संत शिरोमणि गुरु रविदास कहते हैं कि गुलामी भरा जीवन जीना पाप है। पराधीन व्यक्ति से कोई भी प्रेम नहीं करता।
इसलिए दलितों को गुलामी त्यागकर अपनी मुक्ति के लिए संघर्ष करना है। भेदभाव के हर किले को भेदना है।
वरिष्ठ पत्रकार सरत प्रधान वैसे तो बहन मायावती जी के आलोचक हैं,
लेकिन उन्होंने पत्रकार ज़ीनत के पॉडकास्ट पर बहन मायावती जी बारें में ऐसी बातें कहीं जिसके बारें में कम ही लोगों को पता है.
सरत प्रधान ने कहा आजमगढ़ का एक बाहुबली रमाकांत यादव गरीब आदमी को पीट पीटकर उसकी संपत्ति पर कब्जा कर रहा है,
इसकी खबर न्यूज़ चैनलों पर आ रही थी. बहनजी ने इस खबर को न्यूज़ चैनल पर देख लिया. तब रमाकांत यादव बसपा से सांसद था. बहन मायावती जी ने रमाकांत यादव को अपने दफ्तर में बुलाया.
रमाकांत यादव दफ्तर के बाहर आकर मिलने के लिए रुका था. बहनजी ने डीजीपी विक्रम सिंह को फ़ोन कर रमाकांत यादव को गिरफ्तार करवा दिया. आज कभी किसी सिटिंग CM ने अपने ही पार्टी को सांसद को इस तरह गिरफ्तार नही कराया. बहनजी के शासनकाल में कानून व्यवस्था मजबूत थी.
तिलक, तराजू और तलवार,
इनको मारो जूते चार।
अभी मैंने श्याम मीरा सिंह का एक वीडियो देखा, जिसमें वह दावा कर रहे हैं कि मान्यवर कांशीराम ने 1981 में जो DS4 संगठन बनाया था, यह उसका प्रमुख नारा था।
इंडिपेंडेंट और प्रोग्रेसिव होने का चोला ओढ़े कई सवर्ण बुद्धिजीवियों की यही समस्या है। उन्हें किसी विषय की गहराई से जानकारी भले नहीं होती, लेकिन हर मुद्दे पर एक्सपर्ट बनकर वीडियो बनाने की जल्दबाजी रहती है। इस चक्कर में न तो वे तथ्यों की सही जांच करते हैं और न ही दलित समाज के अनुभवों और संवेदनाओं को समझते हैं। बस सुनी-सुनाई बातें दोहरा देते हैं। यही गलती यहां भी दिखाई देती है।
90 के दशक में एक बार मायावती जी रजत शर्मा के शो
"आप की अदालत" में गई थीं। वहां रजत शर्मा ने उनसे पूछा था कि बसपा नारा है- "तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार", इस पर आपका क्या कहना है?
इस पर बहन जी ने साफ कहा था कि बहुजन समाज पार्टी ने कभी भी यह नारा नहीं दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा था कि क्या कोई उनकी आवाज़ में या मान्यवर कांशीराम जी की आवाज़ में यह नारा दिखा सकता है? बहन जी ने आगे कहा कि यह विरोधियों द्वारा बसपा को बदनाम करने के लिए फैलाया गया प्रचार है। जब रजत शर्मा ने दीवारों पर लिखे नारों का हवाला दिया, तो बहन जी ने जवाब दिया कि ऐसे नारे शायद रात में आपके जैसे लोग ही लिख आते होंगे। बसपा ने कभी यह नारा नहीं लगाया।
बहन जी ने वर्ष 2020 में भी ट्वीट करके स्पष्ट किया था कि बहुजन समाज पार्टी का इस नारे से कोई संबंध नहीं है। वीडियो को ध्यान से देखने पर यह भी साफ लगता है कि श्याम मीरा सिंह स्वयं इस विषय को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते। यहां तक कि उन्होंने नारे की राइमिंग भी गलत बोल दी। इसलिए यह माना जा सकता है कि शायद उनका उद्देश्य जानबूझकर पार्टी की छवि खराब करना न रहा हो।
फिर भी हमारा सुझाव है कि वे जल्द से जल्द वीडियो को डीलिट करके दोबारा अपलोड करें अथवा संबंधित हिस्से को youtube से क्रॉप करके हटा दें। साथ ही उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय में स्पष्टीकरण भी देना चाहिए। दलित समुदाय और बहुजन राजनीति से जुड़े मुद्दों पर वीडियो बनाते समय अत्यंत निष्पक्ष, संवेदनशील और तथ्य-आधारित दृष्टिकोण रखना जरूरी है। मीडिया या अफवाहों में चल रही हर बात को बिना जांचे सच मान लेना समाज के साथ अन्याय है।
चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए बसपा की छवि को नुकसान पहुंचाने के कई प्रयास होंगे। और क्योंकि बसपा की अपनी कोई IT सेल नहीं है, पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं दिखते, इसलिए विरोधियों द्वारा फैलाया गया झूठ धीरे-धीरे जनता को सच लगने लगता है। यही वह जगह है जहां बसपा बार-बार कमजोर पड़ जाती है और विपक्ष अपनी रणनीति में सफल हो जाता है। ऐसे में बहन जी को स्वयं इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।
Correction - All 3 accused are free and living normal life.
Bhakti Mehere Hema Ahuja and Ankita Khandelwal -Name them and shame them. I have wish that Karma will hit them and they are never able to sleep peacefully and one day they will be brought to justice for killing a young tribal doctor Payal Tadvi
नाम- सफलता “पाठक”
काम- पैसे लेकर लोगों को फर्जी पॉस्को और रैप केस में फँसाना।
घृणित से घृणित काम उठा लीजिए। फिर आरोपी की जाति देखिए।
ब्राह्मण न मिले, ऐसा हो ही नहीं सकता।
Listen this carefully, how Arfa convenient doesn’t stress on Mamata’s past association with BJP, let it slide and changes the subject
But she will spend her lifetime to label Mayawati as B team of BJP
BSP can support countless cong govt to keep BJp away (Karnataka, MP, Rajasthan, UK) and ally with bete noir SP in 2019 in an attempt to defeat BJP but some progressive will always see her with suspicion but they won’t apply same stand to other Upper caste leaders
This is called casteism, nothing else
Manyawar Kanshiram called such Progressive folks more dangerous than Conservatives
Behenji has been so terrified of the BJP that
- she clashes with Smriti Irani in Parliament over Rohith Vemula.
She challenges the government and resigns over the Dalits of Saharanpur.
When Yogi stops the Shabbirpur yatra, she walks all the way there.
By supporting the Samajwadi Party, she defeats them in Phulpur, Gorakhpur, and Kairana.
Despite opposition from BJP and Congress, she forms a grand alliance with SP and RLD.
She poses the biggest challenge in the largest state.
Even after investigation agencies are unleashed, she mounts such a massive challenge to the BJP that the party, which lost only 18 seats across North India, ends up losing 15 of those to this very alliance.
That's why if some leader spouts such petty nonsense, it's no big deal—they keep flip-flopping anyway—but professors, journalists, YouTubers, thinkers, and intellectuals should refute these malicious propaganda campaigns for the people.
Remembering a revolutionary & progressive king Rajarshri Chhtrapati #ShahuMaharaj on his death anniversary. He was a social reformer and a visionary who was driven towards the development of his people and the betterment of the socially deprived sectors. He strongly believed in equality amongst all members of the society. In his rule, he initiated many revolutionary schemes in the caste discriminating system to promote equality.
#LokRajaShahu
In 2012, BSP lost power by a margin of 3.5%. Today, TMC has lost power by a margin of 4%.
But there is an outpouring of ‘secular’ sympathy over Mamata Banerjee’s defeat. Meanwhile, BSP’s defeat was celebrated by so called seculars, casteist organizations, media houses, and Manuwadi parties across the country.
TMC losing power is being called a decline of women’s strength, while BSP losing power is seen as a ‘lesson’ for Dalits… what hypocrisy of Manuwad!
This is casteism — sympathy for a Bengali Brahmin leader and hostility toward a Dalit leader. Our fight is not just for gaining power, but also against this narrow, casteist mindset.
By @EngineerSneha
If Brahminist rulers promote anyone from Bahujan Community to the highest position then it is quite understandable that he/she is not a warrior but a stooge.
We must differentiate between Fake-Ambedkarite and Real Ambedkarite. B R Gavai was one of the snakes in the grass !
राज ठाकरे यांच्या सारखा जातिवादी आणि करंटा राजकारणी कुठेच मिळणार नहीं
६ डिसेम्बर ला शिवाजी पार्क मध्ये असून सुद्धा कधीच चैत्यभूमीवर न जाणारा जातिवादी
गणपति ला रस्त्या रस्त्यांवर होणाऱ्या मंडपाबड़ला न बोलणारा
अणि डीजे बद्दल चुप असणारा आंबेडकर द्वेषी
दिवाली दही हांड़ी ला केवल शुभेच्छा देऊन ध्वनि प्रदुषण बद्दल न बोलणारा मनुवादी
भोंगे काढ़ा नाही तर आम्ही हनुमान चालीसा चा आवाज करुन धिंगाना घालु म्हणणारा धर्मांध
१४ अप्रैल ला मात्र केवळ शुभेच्छां न देता डीजे च टुकार विषय काढून सिलेक्टिव टिका करणारा
तर राज राजकारणातून बाहेर फेकला गेला आहे. फ़क्त मिडिया ने वेळोवेळी फुगवलेला फुसका फुगा आहे
Name: Mr. Avtar Singh Karimpuri Ji
Position: Former BSP Rajya Sabha MP
Current Position: Punjab State President
Party: Bahujan Samaj Party
Ideology: Ambedkarite
● Great Deed: Grabbing SP MP Naresh Agarwal by the collar and slapping him on the cheek in the Rajya Sabha.
● Reason for slapping: SP MP Naresh Agarwal had torn copies of the SC/ST Promotion Bill to the Rajya Sabha.
Happy Birthday to Punjab BSP State President Mr. @KarimpuriBsp Sir Ji.
Sir, we are proud of you. You taught a good lesson to a casteist Samajwadi Party MP in Parliament.
"Why is Babasaheb Ambedkar underrated?"
Babasaheb was a great economist whose vision shaped RBI. He influenced key ideas like reduced working hours, equal pay, insurance laws, and MATERNITY RIGHTS.
Indian historians were always biased against Babasaheb because of his caste.
"Cultivation of mind should be the ultimate aim of human existence."
__Babasaheb
Great salute to the emancipator of downtrodden masses of India on his 135th Jayanti 🙏
#AmbedkarJayanti#WeAreBecauseHeWas#JaiBhim
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
"Knowledge without action is useless, and action without knowledge is futile".
- Mahatma Jotiba Phule
Great salute to Mahatma #JotibaPhule on his 199th birth anniversary 🙏
#महात्मा_जोतिबा_फुले