क्या आध्यात्मिकता का प्रभाव है? भगवान को तत्त्व से जानने वाले व्यक्ति कितने गहरे दुख में भी सुखी रह सकते हैं, और जो दुख में सुखी रह सकता है, उसको दुख क्या करेगा? जो अपमान में भी शांत रह सकता है, उसको अपमान क्या करेगा? जो मान में भी अमानी रह सकता है, उसको मान क्या करेगा? जो संसार में भी संसार से ऊपर है, उसको संसार क्या करेगा?
जय राम जी की।
राजा जनक संसार में थे, संसार से ऊपर थे। रामचंद्र जी संसार में थे हम लोगों की नाई। पिता माता की आज्ञा मानकर जीवन जीते थे, लेकिन फिर भी मुक्त थे। अपना स्वतः स्वभाव में थे।
नारायण, नारायण, नारायण नाव पानी में रहे तो हरकत नहीं, लेकिन नाव में पानी न आ जाए। आप संसार में रहे तो हरकत नहीं, लेकिन संसार के दूषण आपके अंदर न आ जाए। संसार की नश्वर आसक्ति आपके अंदर न आ जाए। संसारियों की घृणा, लोभ, चिंता, भय तुम्हारे अंदर न आ जाए।
इसलिए तुम्हारी मन रूपी नाव को सदैव स्वच्छ रखो। नाव वाले देखते हैं, थोड़ा बहुत पानी आया न, डबला रखते और खाली करते रहते हैं, उलेचते रहते हैं। ऐसे ही थोड़ा बहुत इधर-उधर का कचरा पट्टी आ जाए के हरि ओम तत्सत्, और सब गपशप हरि ओम का डबला लेकर उचेलते रहो, उचेलते रहो। नाव बिल्कुल free होनी चाहिए।
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इस मंत्र का जप करने से निद्रा आने लगेगी। जिसको अनिद्रा की तकलीफ है, ठीक से नींद नहीं पाते हैं, तो वह मंत्र है। लिखना चाहो तो लिख लो। शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा। शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।
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न आत्मा में दुःख है, न परमात्मा में दुःख है, न ही प्रकृति में दुःख है । ईश्वर हमारा दुश्मन नही है कि हमको दुःखी करने के लिए ये संसार बनाए।
भूल ये हो गई है कि सांसारिक पदार्थो एवं इंद्रियों से सुख लेने की वासना के कारण मनुष्य जीवन मे दुःख हैं । उस दुःख का मूल तनाव है और उस तनाव का मूल भोग संग्रह है !
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भगवान राम के गुरुदेव वशिष्ठ महाराज कहते हैं कि ये जो केंचुए पेट के बल से रेंग रहे हैं, साँप, केंचुए और दूसरे तुच्छ जीव कभी मनुष्य थे, लेकिन मनमानी करते-करते, करते-करते इस नीच गति को प्राप्त हुए और सहशस्त्र-नेत्रधारी जो इंद्र हैं, वे शास्त्र, सत्संग, सत्कर्म करते-करते, करते-करते देवताओं से सम्मानित हो गए।
इसीलिए हे राम जी! भाग्यवाद को दूर से ही त्याग दो। जो भाग्य में लिखा होगा, वो होगा। इस जीव को जैसे-जैसे कर्म, जैसा-जैसा संग, जैसा-जैसा पुरुष ऐसे-ऐसे फल को प्राप्त होगा।
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स्त्री को कुदरत ने दे रखी है वो शक्ति। पोषक शक्ति, उपार्जन शक्ति स्त्री को दी है। एक विधवा स्त्री, बच्चों को जन्म दिया और पति मर गया और विधवा स्त्री हो गई। जो बच्चों को जैसा पाल सकती है, ऐसा पत्नी मर गई और बच्चों को पालने वाला बाप नहीं पाल सकता। गला घोंट देगा, थप्पड़ मार देगा, पिटाई कर देगा। स्त्री में वो सहनशक्ति होती है, त्याग की वो मूर्ति होती है, श्रद्धा की वो प्रतिमा होती है। उसमें श्रद्धा, त्याग, प्रेम, वात्सल्य कुदरत ने दे रखा है और अनुशासन और विचार पुरुष में कुदरत ने दे रखा है। विचार वाले को विचार के रास्ते बढ़ने दो। पालन-पोषण वाले को पालन-पोषण के रास्ते बढ़ने दो।
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आंवले का रस। आंवले के रस का भी अपना महत्व है। आंवला श्रेष्ठ रसायन, माना tonic है।
132 प्रकार की बीमारी का raw material है। वात, पित्त और कफ। जैसे वायु से 80 प्रकार की बीमारियां, पित्त से 32 प्रकार की और कफ से 20 प्रकार की। 132 प्रकार की बीमारियां इन तीनों से बनती है और इनका तीनों का विमिश्रण, कुमिश्रण से 800 प्रकार की बीमारियां बन जाती है।
लेकिन आंवले में ऐसी योग्यता है कि इन तीनों दोषों को हर लेता है— वात, पित्त, कफ।
दीर्घायुष्य देता है, आरोग्य उत्तम देता है और चेहरे पर चमक भी लाता है, कांति बढ़ाता है।
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ध्यान वो रसायन है कि रस और तृप्ति के साथ यात्रा होती है और सारी सृष्टि का जो पालक, पोषक और आनंद का उदगम स्थान है, उस परमात्मा से एकत्व करा देता है ध्यान!
ध्यान के समान कोई तीर्थ नहीं है, ध्यान के समान कोई यज्ञ नहीं, यज्ञ में वस्तु, स्वधा स्वाहा होती है, ध्यान में अपने ही कुसंस्कार स्वाहा होते हैं, ध्यान से आवश्यक सामर्थ्य की प्राप्ति होती है और अवांछनीय दोषों की निवृत्ति होती है।
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ईश्वरप्राप्ति के रास्ते चलते हैं और सफल होना चाहते हैं लेकिन जैसी तेजी से सफलता चाहते हैं वैसी नहीं होती तो क्या है विघ्न और क्या है उसका निदान जानने के लिए देखें- “सितम्बर 2024 की ऋषि दर्शन” पार्ट -4, जल्दी करें !!
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One of the most powerful symbols of India’s unbroken civilizational continuity!
Discovered at Mohenjo-daro in undivided India this steatite seal, about 4,300-year-old, shows a seated figure in yogic posture (widely seen as Shiva-Pashupati) seated in Mulabandhasana, surrounded by animals.
While ancient sites may lie across modern borders, India remains the living custodian of this heritage. The yogic posture, Shaivite symbolism, and spiritual ethos seen in the Pashupati Seal continue to thrive in India’s temples, daily worship of Shiva, yogic traditions, and cultural life even today.
From the Vedic period to contemporary Bharat, this civilizational thread has remained alive and unbroken — deeply embedded in our philosophy, rituals, and collective consciousness.🇮🇳
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तुलसी का रस और नींबू मिलाकर किसी को भी पिलाओ। रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी और छुपे हुए रोग उखड़कर भागेंगे। ऐसा है तुलसी का रस। 25 तुलसी के पत्तों का रस और एक आध नींबू। हफ्ते में दो-तीन दिन पीया, कैसा भी बीमार व्यक्ति हो, दौड़ने लगेगा।
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असाधन का सुख लेंगे तो क्षणभर तो सुख मिलेगा जैसे दाद खुझलाते हैं, बाद में तपन और पीड़ा...। सारे भोगियों की गहराई में देखो, ईर्ष्या में, तपन में तप रहे हैं। वस्तु की प्राप्ति, व्यक्ति की प्राप्ति, कोई बढ़िया अवस्था की प्राप्ति का जो सुख लेने की आदत है वो ही साधक को असाधन में आबद्ध कर देती है।
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मन ही हमारे दुख सुख का और ऊंचाई-नीचाई का, पतन और उत्थान का कारण है। न ग्रहशास्त्र कारण है, न प्रारब्ध वेग कारण है, न ज्योतिष कारण है। हमारा मन ही हमारे पतन और उत्थान का कारण है। ये श्रीमद्भागवत के ग्यारहवें स्कंध में लिखा है और गीता कहती है, "आत्मैव आत्मनो बंधु।" मनुष्य अपने आप का बंधु है और अपने आप का शत्रु है। तो पुरुषार्थ ये करना है कि मन में जो आए, वो खा लिया, जो आए, वो बोल दिया, जैसा आए, वो कर लिया, तो अपने आप का सत्यानाश करने वाला है। अगर मन के आगे धर्मशास्त्र, ईश्वर आज्ञा, समाज व्यवस्था रखकर नियंत्रित करके मन को चलाया जाए, तो मन आपको ईश्वरमय कर सकता है। यहां है पुरुषार्थ।
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ब्रह्म-विचार प्रधान जो सत्संग है, वो सत्संग जैसे-तैसे मिल नहीं पाता और अनधिकारी आदमी उस सत्संग में बैठ नहीं पाता। जिसका जप, तप, सेवा, पूजा कुछ-न-कुछ उस अंतर्यामी परमात्मा को, ईश्वर को स्वीकार हो गया है, वही आदमी सद्गुरुओं की,सत्संगति की प्राप्ति कर सकता है।
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सुबह समाधि आसन आप 2-3 मिनट ज़रूर करिए। पादपश्चिमोत्तानासन का भाई है समाधि आसन। इससे आपका शरीर तंदुरुस्त रहेगा,मन के संकल्प-विकल्प कम होंगे,प्राणोत्थान में मदद मिलेगी,सुषुम्ना का द्वार खुलेगा और चंद समय में आप चित्त के प्रसाद को पाने के अधिकारी हो जाएँगे।#RishiDarshan#AsharamBapu