भूख हड़ताल का दूसरा दिन है।
5 जुलाई से शुरू हुआ यह संघर्ष और 25 जुलाई से जारी दिवा-रात्रि सत्याग्रह अब एक कठिन पड़ाव पर है। शरीर में कमजोरी है, कदम भारी हैं, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से भी अधिक मजबूत है।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। हर उस छात्र की लड़ाई है जिसने वर्षों की मेहनत, अपने सपनों और अपने परिवार की उम्मीदों को प्रतियोगी परीक्षाओं के भरोसे रखा।
मैं सभी साथियों से अपील करता हूँ कि आंदोलन को शांतिपूर्ण, संवैधानिक और अनुशासित बनाए रखें। आपका विश्वास, आपका साथ और आपकी आवाज़ ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है।
"भूख शरीर को कमजोर कर सकती है, लेकिन न्याय के लिए उठी आवाज़ को नहीं।
#JPSC #JSSC #satyagrah #hungarstrick
Ye GenZ itna abusive language kyu use kr rhe hai Modi ke liye
Bhai sitting PM hai vo uski ijjat na karo uske kusri ki to ijjat karo..
Protest karo lekin galiya kyu deni hai ...
#GenZWithBharat
प्रिय छात्र,
>ये आंदोलन वगैरह से कुछ नहीं होगा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कुछ नहीं होगा, नया बिल आने से भी कुछ नहीं होगा।
>क्योंकि इस देश का सिस्टम सड़ा हुआ है, लोग मुर्दा हैं, नेता भ्रष्ट हैं, अधिकारी सुवर हैं।
>एक छोटी सी बात बताता हूं, अभी कुछ दिन पहले नोएडा में कर्मचारियों, मजदूरों ने कितना बड़ा आंदोलन किया, लाठी खायीं, केस झेले, मुकदमे खाए, कुछ मजदूरों का घर का बजट बिगड़ गया, लेकिन क्या हुआ?
>हरियाणा के बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क में जितनी भी कंपनियां हैं वो दीपावाली आने के 4 महीने पहले से ही मजदूरों को निकालती हैं, ताकि बोनस का पैसा न देना पड़े।
>थोड़ा सा भी काम कम होता है तो तुरंत मजदूरों को निकाल दिया जाता है, काम आने पर नए मज़दूर भरे जाते हैं।
>अनस्किल्ड लेबर बोलकर स्किल्ड लेबर का काम लिया जाता है, जिसकी सैलरी 8 घंटे की 12000 रुपए है, औरते शाम को आते आते बुरी तरह थक जाती हैं, इतना काम लिया जाता है।
>किसको फर्क पड़ता है? कौन सी सरकार को फर्क पड़ता है? किस मंत्री को फर्क पड़ता है? कितनो का इस्तीफा मांगोगे, इस्तीफा मांगते मांगते जीवन समाप्त हो जाएगा, लेकिन भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा।
सब के सब चोर हैं साले।
>जो आंदोलन आज बीजेपी के खिलाफ चल रहा है, अगर यही आंदोलन किसी अन्य विपक्ष शासित राज्य में होता तो बिल्कुल सेम टू सेम रिजल्ट होता, कुछ भी फर्क नहीं होता।
>किसी को भी बच्चों की नहीं पड़ी, किसी को भी गरीबों की नहीं पड़ी, किसी को भी मजदूरों की नहीं पड़ी।
>पड़ी है तो खुद के बच्चों की, जितने भी विधायक हैं या सांसद हैं या मंत्री हैं, 95% के बच्चे विदेशों में या तो पढ़ रहे हैं या फिर सेटल हो चुके हैं।
>मैने जो लिखा ये सच्चाई है इस देश की, राजनीत का चश्मा हटाकर पढ़ना, असलियत सामने आ जाएगी।
>इसलिए जिन बच्चों के कुछ अरमान हो, माँ बाप सक्षम न हों, घर की अकेली जिम्मेदारी हो, वो बच्चे फर्जी आंदोलन से दूर रहें।
जय हिंद
हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो
~ मुनीर नियाज़ी
“I always manage to delay, whatever I must do—
A crucial word I had to say, a pledge I should see through.”
- Munir Niazi
"सीता के पति " और "उमर खालिद" से स्टूडेंट्स की यूनिटी नहीं टूटी तो मालिक ने नया ब्रह्मास्त छोड़ दिया है ।
"जातिवाद" "आरक्षण" अब खेला इसी के आगे पीछे घूमेगा ।
फूट डालने का अनुभव भाई साहब 🙂↔️🙂↔️
#StudentMovement
@news24tvchannel भाई प्रोटेस्ट उनके लिए है जिन्होंने दोबारा पढ़ाई का मौका न चुन कर आत्महत्या को चुना ।
तू दूसरी बार एग्जाम दिलाकर पहले रैंक में आया ये तेरी कैपेबिलिटी को दिखाता है क्योंकि तू उतना तैयार है ।
जिस लेवल का कंपीटिशन है इंडिया में हर कोई नहीं झेल सकता ।
@dpradhanbjp@RahulGandhi@INCIndia Vo isliye nhi aa rha tha samne .... Muddda tum bna doge political way nikal kar ...
Itne din tak sirf birthday wish kr rhe the twitter pe an khud aa gye rajniti khelne