सुधा और अनिल ने आत्महत्या कर ली है ऐसा पुलिसिया बयान में दर्ज हो चुका होगा।
सुधा और अनिल के पैर जमीन पर छू रहे हैं जाहिर है मारकर टांगे गए होंगे।
दैनिक भास्कर वाले तक छाप चुके हैं कि दोनों के पैर जमीन से छू रहे हैं।
हालांकि पैर जमीन से छू रहे हैं कि नहीं ये सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है, आज नहीं तो कल उनको मरना ही था।
इस समाज में सबसे बड़ा मुद्दा है कि दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं फिर भी एक दूसरे को छू रहे हैं।
हमारी महान बलात्कार संस्कृति, अरेंज मैरिज यानी धंधा विवाह संस्कृति पर चोट कर रहे हैं।
ऐसे ही सारे प्रेमी साथ रहने लगेंगे सही उम्र आने पर विवाह कर लेंगे जीवन में थोड़े संतुष्ट रहेंगे तो फिर रेप कल्चर का क्या होगा! और छिछोर संस्कृति का!
अब यही अनिल सुधा की जुल्फों में खोया रहेगा तो भाभी की नाभि पर पड़ोसी की बीवी पर सड़क चलती लड़की पर बस में यात्रा कर रही महिलाओं पर फब्तियाँ कौन कसेगा।
हमारी पुरातन संस्कृति का प्यारा सा देश कैसे बचेगा!
पाखंड का भयानक रूप तो अभी आना बाकी है जो पिछले कुछ सालों में बीज बोया गया है वो तो अभी पेड़ बना ही नहीं है।
विज्ञान की आवश्यकता है प्रकृति को पूजने वाले लोग पाखंड के छाये में फंस कर हर चीज तबाह कर देगें
यह आतंकी दिल्ली जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान तैनात RAF की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत के साथ संपर्क होने की बात कह रहा है।
क्या RAF आतंकियों के साथ मिलकर काम कर रही है?
Read their ages. They are dead bodies now.
Ansh (6),
Nana (4)
Priyanjali (5),
Praveen Singh (13),
Jahanvi (12),
Aditya (12),
Aditya (8),
Ravi (8),
Anju (32),
Gyan Singh (40),
Vikram Saroj (35)
It won't Trend. It won't matter becoz they weren't children of privileged class India.
Fire cracker industry is a scandal of India and the Indian population is so shameless that they dont even care the unprecedented level of regular deaths of underpaid poor workers while making products of their celebrations and festivals.
Every week one or more accidents take lives of mostly Dalits minor children and women who are the core Labour group in this sector across India.
But there is little or no data on the Labour force involved in this high profit margin industry. As it is informal, moreover many of them are illegal, and so the families of the victim hardly gets any compensation.
Today there is no specific labour reporting section in legacy media houses. Those little papers that report on Labour related issues flagged as Maoist sympathiser or China Agent.
If they protest, high official police babus claim that it is funded by Pakistan.
What kind of joke of a nation is this?
हेलो @bastipolice🖐️🚨
➡महोदय आरोपी डी.जे. चालक अनिल कश्यप
➡जो टीनिच बाजार सांडी कल्प थाना गौर" का निवासी बताया जा रहा है
➡इसके द्वारा DJ कंपटीशन के दौरान "बाबा साहब अंबेडकर जी" पर अभद्र गाना चलाया गया,जिससे लोगों की भावनाओं को गहरी ठेंस पहुंची है,कृपया संज्ञान लें@Uppolice
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
जनपद बलिया के विधानसभा क्षेत्र रसड़ा से विधायक श्री उमाशंकर सिंह जी की आकस्मिक निधन की सूचना अत्यंत दुखद है उत्तर प्रदेश विधानसभा में ब.स.पा के इकलौते विधायक श्री उमाशंकर सिंह अत्यंत विनम्र, मृदुभाषी, क्षेत्र एवं कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पित व सहयोगी प्रवृत्ति के विधायक थे उनके निधन से बलिया जनपद की जनता ने अपना लोकप्रिय विधायक खो दिया है दुख की इस घड़ी पर मैं परिवारजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करता हूं
"पैसा" दलित का।
"घर" दलित का।
"खाट" दलित की.
दर्द;
"द्विवेदी को"
"FIR";
"पुलिस की"
यह अजीब बात है। बन्दा अपने पैसे से बनाये अपने घर के बाहर खाट पर बैठा है। एक फ्रिंज एलिमेंट कमेंद्र द्विवेदी गाड़ी से आता है और गालिया देना शुरू कर देता है यह कहकर की;
"पंडित" को देखकर खाट से उठकर सम्मान क्यों नही किया।
कानपुर देहात के नहोली गाँव की घटना है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब कमेंद्र के लोग फर्जी एससी/एसटी एक्ट का रोना रोएंगे।
विकास कुमार जाटव
Reservation Hatao, really?
The fact is you do not hate the reservation policy. You hate that your monopoly on power, education and resources is being challenged.
Equality always feels like oppression to the privileged caste Hindus. Keep crying.
-देश के छात्रों व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्या में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ख़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
@khurpenchh@DelhiPolice इन्हीं जैसे दलों के दल्ले ही बिना वर्दी के वहां पर अराजकता मुंह बांध कर पुलिस पर पथराव कर रही हैं फिर शादी वर्दी में छात्रों को लाठियों से दिल्ली पुलिस की मिली भगत से फर्जी पुलिस बनकर उन्हें पीट रही है।
पेपर लीक के फायदे सुनो -
“पेपर लीक होने से बच्चों को पढ़ने का और ज़्यादा वक़्त मिल गया”
इस तर्क से तो इनकी कुर्सी भी जानी चाहिए ताकि इनको कुतर्क से मुक्ति के लिए वक्त मिल सके।