साहब अब क्या बचा है आप देश के चौकीदार है ये हो रहा है आपको दो महीने के बाद बोलने का समय मिला वो भी सिर्फ 36 सेकंड ,बेटी बचाओ अभियान सफल रहा करवाइए प्रचार प्रसार,आप केवल वोट और सत्ता के लिए जी रहे है अब कब विदेश जायेंगे निकल लीजिए बोलने से बच जायेंगे,परिवार वाला ही ये समझ सकता है,
गुजरात को आम लोगो को लूटकर जिसने पार्टी में अपनी जगह बनाई, गुजरातियों को बड़े सपने दिखा कर, उनसे खूब टैक्स लूटा,30 साल सत्ता में रहने वाली मोदी की GUJ दुर्दशा खुद देखिए, यहां तो कुछ मुफ्त नही है, बस हिंदू/मुस्लिम के नाम की रोटियां सेंकी..दल्ले @SushantBSinha फिर गुजरात क्यू डूबा?
2014 से क्या चल रही है भगतों?
एमरजेंसी का बाप नहीं?
घोषित एमरजेंसी में केवल नेताओं पर शिकंजा कसा गया
अघोषित में हर नागरिक पर शिकंजा?
महाराजाधिराज को आईना दिखाते ही जांच एजेंसियां टूट पड़ती है?
लगता ही नही लोकतंत्र बचा है
सरकार और व्यापारी जनता को आखरी बूंद तक निचोड़ने मे लगे है?
@aajtak@smritiirani ये महिला नेत्री जिसे भेड़िया कह रहीं हैं वो सभी देश की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, मतलब यें उन नेताओं को नहीं देश की जनता को भेड़ियों का झुंड कह रहीं हैं जिसने उन सभी नेताओं को चुन कर अपनी आवाज़ संसद या विधानसभा में रखने के लिय भेजा है, आज कल नेताओं का स्तर बहुत गिर चुका है।
इस लिए मोदी के KhiLG ने अपना आदमी बिठाया है DERC में ताकि BSES दिल्ली की जनता को लूट सके और BJP @ArvindKejriwal को बदनाम करे
दिल्ली की जनता के खिलाफ और जनता विरोधी है BJP
Shame on you 👎
भाजपा नेताओं में खलबली है, कहते हैं कि विपक्ष एकजुट होकर मोदी को हटाना चाहती है। अरे भईया हम मोदी को हटाना नहीं... भगाना चाहते हैं।
जिस देश की 80 करोड़ आबादी 5 किलो राशन पर जी रही हो, वहां 8 हजार करोड़ के हवाई जहाज पर घूमने वाला अय्याश राजा देश को नहीं चाहिए.
स्मृति जी, भेड़ियों का नहीं हाथियों का झुंड है ये।
शेर राजा डर के कारण होता है पर सबसे ताकतवर हाथी होता हैं।
अंतर सिर्फ़ ये होता है कि हाथी शेर की तरह अपने साथी जानवरों को मारकर नहीं खाता क्योंकि वो शाकाहारी होता है।
शेर 18 घंटे सोता रहता है और शेरनी ही शिकार करती है ज़्यादातर शेर सिर्फ़ खाता है।
शेर किसी के साथ मिलजुल कर नहीं रहता है।
एक अकेला हाथी कई शेरों पर भारी पड़ता है।
और हाथी की याददाश्त भी तेज होती है और वो अपने किए वादे, रास्ते और दोस्तों को कभी नहीं भूलता है।
हाथी अपने परिवार के साथ अपने समाज के साथ रहना और घूमना पसंद करते है।
भगवान गणेश का आशीर्वाद है हाथियों पर।
जी हां ये लंदन की नहीं दिल्ली की खूबसूरत सड़कें हैं
@ArvindKejriwal जी ने कहा था न कि हम दिल्ली को लंदन की तरह खूबसूरत बनाएंगे।
उसकी शुरुआत हो चुकी है 🥰😍
एक थे साहिर लुधियानवी, भजन लिखा - तोरा मन दर्पण कहलाए... अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम... मन रे तू काहे ना धीर धरे... गंगा तेरा पानी अमृत... ईश्वर अल्लाह तेरो नाम... हे रोम रोम में बसने वाले राम... लिस्ट लंबी है। सबका जिक्र करने पर पोस्ट बड़ी होगी। ये ऐसे नगमे हैं जो हमारे मंदिरों में, घरों में और यहां तक कि महाकुंभ में गूंजते हैं। सुनिए तो मन के आसमान में फूल बरसते हैं। मजे की बात ये कि साहिर एक प्रगतिशील सोच के नास्तिक थे।
एक थे राही मासूम रज़ा, जिनकी भाषा में, अदायगी में, जिनके विचारों में और रगों में जितनी गाजीपुर की मिट्टी की गंध थी, उतनी ही गंगा और जमुना की पवित्रता महसूस की जा सकती है। महाभारत सीरियल लिखकर न सिर्फ अमर हो गए, बल्कि हम कलम के मजदूरों के लिए कीर्तिमान कायम किया।
एक शकील बदायूंनी थे, उन्होंने लिखा- मन तड़पत हरि दर्शन को आज...मधुबन में राधिका नाचे रे.... मोहे पनघट पे नंदलाल... इन्साफ का मंदिर है ये भगवान का घर है.. ये भजन हिंदी फिल्म संगीत के अनमोल रत्न हैं।
इन सब ज्यादातर भजनों के गायक हैं मोहम्मद रफी और संगीतकार नौशाद।
एक हैं जावेद अख्तर, लगान में लिखा था - मधुबन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले, राधा कैसे न जले... ओ पालनहारे निर्गुण औ न्यारे... स्वदेश में लिखा था - राम ही तो करुणा में हैं, शान्ति में राम हैं राम ही हैं एकता में, प्रगती में राम हैं... संगीतकार ए आर रहमान हैं।
थोड़ा भारतीय शास्त्रीय संगीत पर नजर डालें - अमीर खुसरो से शुरू कीजिए और बड़े गुलाम अली खान, अब्दुल वाहिद खान, अमीर खान, इनायत हुसैन खान, अकबर अली खान, फैयाज खान, अब्दुल करीम खान, अल्ला रक्खा, सुलतान खान, रशीद खान और बहुत लंबी लिस्ट है। मुसलमान संगीतज्ञों को हटा दें, तो भारतीय शास्त्रीय संगीत में शायद आधा से ज्यादा इतिहास बचेगा ही नहीं।
ये सब हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। इन सबमें एक बात कॉमन है- ये सब मानवतावादी और प्रगतिशील सोच के लोग हैं जिन्होंने कभी जहरीला भाषण नहीं दिया। इन्होंने मानवता की इज्जत की, शांति और भाईचारे की वकालत की। इन्होंने हिंदुस्तान को हिंदुस्तान बनाया।
एक ठो है मनोज मुंतशिर, कुछ दिन पहले शुक्ला हो गया है, ट्विटर पर जहर उगलता है, उसने रामायण पर आधारित फिल्म आदिपुरुष लिखी है। लिखा क्या है वास्तव में पाखाना किया है और फिल्म रिलीज होने के बाद से उसे लीप रहा है। हनुमान जी और रावण से ऐसे ऐसे डायलॉग बोलवाया है कि सुनकर गदहों को भी बुखार आ जाए।
नफरत की चाशनी में डूबा व्यक्ति कला का सृजन नहीं कर सकता। वह सिर्फ और सिर्फ समाज में जहर फैला सकता है। #रत्नाझा