आदिवासियों को धोखा देना और उनके अधिकारों पर कब्जा करना कांग्रेस की राजनीति का पुराना चरित्र है।
रांची की आदिवासी महाजुटान रैली में भी यही देखने को मिला। रैली आदिवासियों की थी, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए पूरे मंच पर कब्जा कर लिया।
कांग्रेस ने ये हथकंडे अपनाया...
📍आदिवासी नेताओं को फ्रंटलाइन से हटाया गया
📍आयोजन समिति के प्रमुख आदिवासी सदस्यों को साइडलाइन किया गया
📍आदिवासियों की रैली को कांग्रेस के पोस्टरों और ब्रांडिंग से पाट दिया गया
यह सिर्फ मंच का मामला नहीं, आदिवासी समाज के स्वाभिमान और अधिकारों का सवाल है।
कांग्रेस का यह राजनीतिक खेल अब झारखंड में नहीं चलेगा!
मोदी सरकार में न कोई परेशानी, न भेदभाव की दीवार,
हर व्यक्ति को सम्मान, समानता और गरिमा के साथ मिला जीवन जीने का अधिकार!
सुनिए, सफाई कर्मी की जुबानी…
“मोदी जी ने पैर धोकर जो सम्मान दिया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।”
राहुल गांधी सुन लो... सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, व्यवहार में दिखता है!
मोदी जी का प्रयास, झारखंड का सम्पूर्ण विकास।
आज देश के माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की उपस्थिति में 25 वर्षों से लंबित सोन नदी जल बंटवारे का विवाद अब सुलझा—बिहार और झारखंड के बीच 7.75 मिलियन एकड़-फीट जल बंटवारे पर समझौता हुआ।
झारखंड को भ्रम और आशंकाओं से नहीं, स्पष्ट नीति और बेहतर खनिज प्रबंधन से आगे बढ़ना होगा। MMDR संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता, निवेश और रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करना है।
#JharkhandWithMMDR
2025-26 में राज्यों को ₹1,14,549 करोड़ का खनिज राजस्व मिला। आंकड़े बताते हैं कि राज्यों का खनिज राजस्व खत्म नहीं हो रहा।
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झारखंड के पास खनिज संपदा है, अब उसे विकास की ताकत बनाने का समय है। निवेश आए, खदानें चालू हों, रोजगार बढ़े- यही है MMDR का उद्देश्य…
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खनिजों की लागत कम करने की दिशा में कदम उठेंगे तो इसका फायदा सीधा आम लोगों को होगा, क्योंकि लोहा, टीन, कोयला और बालू के रेट सस्ते होंगे।
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विकसित भारत 2047 की नींव है - खनिज!
ऊर्जा, विनिर्माण, रक्षा, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा... हर क्षेत्र के विकास के लिए खनिज सबसे आवश्यक है।
मोदी सरकार द्वारा लाया गया MMDR संशोधन अधिनियम 2026 इसी दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
"आज लिए गए निर्णय ही कल के भारत की नींव तैयार करते हैं।"
खनिज क्षेत्र में सुधार, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को मजबूती दे रहा है।
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ओडिशा में 74 नीलाम ब्लॉकों में से 35 परिचालित हो चुके हैं, वहीं झारखंड में नीलाम किए गए किसी भी खदान को अब तक परिचालित नहीं किया जाना यह प्रश्न उठाती है कि उपलब्ध संसाधनों का आर्थिक उपयोग कितनी तेजी से हो रहा है।
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ओडिशा ने 2020-21 से 2025-26 तक माइंस ऑक्शन से करीब ₹87,000 करोड़ का नीलामी प्रीमियम हासिल किया। झारखंड को भी अपनी खनिज संपदा का बेहतर उपयोग करना चाहिए।
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खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड को अब आर्थिक शक्ति में बदलने की आवश्यकता है, जिसका माध्यम है- अधिक निवेश, अधिक उत्पादन, अधिक रोजगार और अधिक राजस्व…
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रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF, NMET और GST में राज्यों की हिस्सेदारी जारी रहेगी। इसलिए MMDR पर चर्चा आशंकाओं के बजाय प्रावधानों और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
#JharkhandWithMMDR
झारखंड की खनिज संपदा का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह निवेश, रोजगार, राजस्व और आधारभूत विकास में परिवर्तित हो। MMDR संशोधन इसी दिशा में अधिक स्थिर और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है।
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