@ARanganathan72 It was preventable. Leftist radicals will now see PM @narendramodi Ji as soft and slow to act, but will eventually succumb to pressure if they continue to protest indefinitely and engage in street violence. Now the list of demands will grow.
@ARanganathan72 The RTE Act remains.
The Left's stronghold over universities, the CBSE curriculum, and the UPSC remains.
Reservations have only increased.
The minority control over educational institutions remains.
The play remains the same; only the screens have changed.
बच्चे एक कागज पर |
राम राम लिख कर लाओ और |
गोलगप्पे बिल्कुल मुफ्त में खा कर जाओ |
मतलब हिंदुत्व का प्रचार सोशल मीडिया वाले ही नहीं |
बल्कि रोज कमाने और खाने वाला हिंदू भी खूब कर रहे है |
SHOCKING: Karnataka HC blasts Police Inspector Sadiq Pasha for harassing Indian Army 🇮🇳 drone supplier!
MD grilled 6 hours, no FIR copy given. All because test drone (faulty battery) landed in nearby Muslim area in the outskirts of Bengaluru – registered suo motu FIR!
Justice Nagaprasanna stays probe, calls out inspector’s “more than necessary interest” & asks for affidavit.
Company licensed by DGCA, supplies Armed Forces. Police jurisdiction questioned!
वाह मोदी जी, वाह… 😏🔥
TMC बंगाल में अगर मुस्लिमों को OBC रिज़र्वेशन दे तो वो गद्दार और हिंदू-विरोधी हो जाती है। यही काम कांग्रेस तेलंगाना और कर्नाटक में करे तो उसे भी यही उपाधियाँ दी जाती हैं। लेकिन भाजपा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार में करे तो वो राष्ट्रभक्त बन जाती है।
समाज कल्याण एवं अधिकारिता मंत्रालय आज केवल SC-ST-OBC कल्याण मंत्रालय बनकर रह गया है, जिसके पास जनरल के बच्चों को मुफ्त कोचिंग देने का बजट नहीं है, क्योंकि जनरल के बच्चे इस देश पर बोझ माने जाते हैं। हाँ, यह अलग बात है कि वे केवल टैक्स का ATM बनकर रह गए हैं।
Clearly, no Union Minister wants their name associated with the Indo-US trade deal. Jaishankar and Piyush Goyal are both passing the buck. They know the truth will come out, that Modi has surrendered India’s interests to protect his image from the leaks.
History will hold all of them accountable for this betrayal and treachery, especially Modi and Doval.
बड़ी अपडेट 🚨
UGC बिल पर हिंदू विभाजन के बाद इन दिनों जहां देखो वहीं हिंदू सम्मेलन का आयोजन हो रहा है
खास बात है कि पार्टी भी यह मान रही है कि समान्य वर्ग ने इन सम्मेलनों से दूरी बना ली है.
"InsightOut with Megha Prasad" में केंद्रीय मन्त्री चिराग पासवान को सुनिये:👇
"अब भी अनुसूचित जाति के बच्चो को जाती के कारण प्रमोशन नही मिलता,आपको Higher post में जाने नही दिया जाता, आपके साथ भेदभाव होता है, ये precedents रहे हैं, promotions रोके गए हैं"।
मतलब इनके पिता, चाचा,चेचेरे भाई और बहनोई सब राजनीति में है यहां तक कि इनके पिता(रामविलास पासवान) 6 प्रधानमंत्रियों के साथ कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
तब भी इन्हें पिछड़े-अतिपिछड़े वाला प्रोपगैंडा बनाकर रखना हैं जिससे राजनीति का समीकरण बना रहे।
मतलब हद है, अगर लोकसभा सांसद बनने के बाद भी शोषित-वञ्चित वाली सोच नही निकल पा रही तो इसका अन्त और समाधान होगा कैसे।🤷⬇️
I am a Bihari.
Invested in an ethanol plant on govt advice, created jobs and now facing punishment.
We request the government to not backtrack on its promises.
“ठाकुर हूं मैं” बस इस महिला का इतनी क्लिप काटकर वीडियो वायरल कर इसे निशाना बनाया जा रहा है। जबकि वीडियो में साफ है कि उनके साथ अभद्रता की गई।
सबसे पहले इस महिला के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उसने जवाबी कार्रवाई की और सिर्फ़ खुद को बचाने के लिए कहा, "मैं एक ठाकुर हूं"। इसका साफ मतलब है कि वह अपना बचाव करने में सक्षम थी।
यहाँ जाति के आधार पर कौन सा भेदभाव हो गया? ठाकुर है ठाकुर ही ना बताएँगी ख़ुद को? इस महिला के साथ जो अभद्रता हुई उसके विरोध में नारजगी जाहिर करेगी ही….…
जब इंदिरा गांधी ने अमेरिका के साथ
सबसे टफ डील की
—
1960 का दशक था।
भारत सूखे से जूझ रहा था।
खेत सूने थे।
अनाज के भंडार खाली हो रहे थे।
देश PL-480 के तहत
अमेरिकी गेहूं पर निर्भर था।
—
काग़ज़ों में इसे
“Food for Peace” कहा गया।
हक़ीक़त में
यह भूख पर नियंत्रण था।
—
अमेरिका ने
“शिप टू माउथ” नीति अपनाई।
हर महीने तय होता था
अनाज आएगा या नहीं।
कभी देरी।
कभी खामोशी।
भारत के पास
कई बार
सिर्फ कुछ हफ्तों का खाना बचता था।
भोजन
राजनीति का हथियार बन चुका था।
—
1966 की क्रिसमस की एक घटना
इस दौर की पूरी तस्वीर दिखा देती है।
व्हाइट हाउस में
राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन की बेटी
लूसी जॉनसन ने
अपने पिता से कहा —
भारत गरीब है।
लोग भूखे हैं।
आज क्रिसमस है।
अनाज भेज दीजिए।
सोचिए —
एक देश के लिए
दया की अपील करनी पड़ रही थी।
—
जब इंदिरा गांधी ने
वियतनाम में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की —
तो अनाज की रफ्तार और धीमी हो गई।
दबाव बढ़ा।
शर्तें बढ़ीं।
1966 में
मदद के बदले
रुपये का अवमूल्यन कराया गया।
देश ने इसे
अपमान की तरह लिया।
आत्मसमर्पण की तरह महसूस किया।
—
यहीं से
कहानी बदली।
—
इंदिरा गांधी ने तय किया —
भारत
भीख के कटोरे पर
अपनी अर्थव्यवस्था नहीं चलाएगा।
—
खाद्य आत्मनिर्भरता।
हरित क्रांति।
एम.एस. स्वामीनाथन।
सी. सुब्रमण्यम।
कुछ ही सालों में
भारत PL-480 से बाहर आ गया।
—
इंदिरा ने
डील नहीं बदली।
उन्होंने
ताकत बनाई।
—
इतिहास यही सिखाता है —
समझौते
साइन होने से ऐतिहासिक नहीं होते।
वे ऐतिहासिक तब होते हैं
जब देश
दबाव में नहीं,
मजबूती में खड़ा हो।
—
असल नेतृत्व
वही है
जो भारत को उस मुकाम पर ले जाए
जहाँ
किसी भी कीमत पर
दया की अपील
न करनी पड़े।
#usindiatradedeal
#indiragandhi
गज़ब
"डाउनफाल" नाजी जर्मनी के आखरी लम्हो की स्टोरी है।
औऱ इसका मशहूर सीन है- उस मीटिंग का, जो फ़्यूहरर बंकर में हो रही है। बर्लिन घिरा हुआ है। रशियन तोपे सिटी सेंटर पर गोले दाग रही हैं। आखरी घड़ियां करीब है।
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शीराज़ा बिखर चुका, लेकिन फ़्यूहरर अब भी ख्याली दुनिया मे है। वह आदेश दे रहा है- स्टाइनर से कहो, वह जल्द काउंटर अटैक करे।
बर्लिन का घेरा तोड़े,
और रशियन को भगा दे।
डरा हुआ सेनाध्यक्ष बताता है- माई फ़्यूहरर!! स्टाइनर अटैक नही कर सकता। उसके पास फौज, एम्युनिशन, टैंक नही है। उसने हमले से इनकार कर दिया है।
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अब शुरू होता है, फ़्यूहरर का मोनोलॉग।।
एक लम्बा प्रलाप।
वह स्टाइनर को गद्दार कहता है। जनरलों को कायर कहता है। SS को धोखेबाज कहता है। हिमलर, गोयरिंग, अपने साथियों को गालियां देता है। जर्मन जनता को गालियां देता है। और फिर थककर, कांपते हाथों से कुर्सी पकड़ बैठ जाता है।
किसी सहमे हुए बच्चे की तरह।
शांत!! हताश!! हारा हुआ..
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यह वो वक्त है.. जब उसे रियलाइज होता है, कि सबकुछ खत्म हो चुका। उसके हाथ मे अब कुछ बचा नही है। वह बेबस है। वो सर झुकाकर, बिना नजरें मिलाए, जनरलों को आखरी निर्देश ..फुसफुसाता है।
डायलॉग सुनाई नही देता। मैं नीचे सबटाइटल में लिखा हुआ पढ़ता हूँ..
जो उचित समझो, करो।
अंग्रेजों के चाटुकार और कान्वेंट स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले पैरेंट्स ध्यान दें।
last year का डाटा,
43 लाख लड़कियों में बांझपन और 30 लाख में कैंसर पाया गया।
Valentine के बाद मुश्किल से 10 दिन के अंदर गायनेकोलोजिस्टो के पास लड़कियों की भीड़ लग जाती है। क्यों?
टीवी पे ऐड आता है सिर्फ एक कैप्सूल से 72 घंटो के अंदर अनचाही प्रेगनेंसी से छुटकारा..
बिना दिमाग की लडकिया, ऐसी गोलियां जिसका न कम्पोजीशन पता होता है न कांसेप्ट बस निगल जाती हैं
इन फेक गोलियों में आर्सेनिक भरा होता है यह 72 घंटो के अंदर सिर्फ बनने वाले भ्रूण को खत्म नही करता बल्कि पूरा का पूरा fertility system ही करप्ट कर देता है। शुरू में तो गोलिया खाकर सती सावित्री बन जाती हैं लेकिन शादी के बाद पता चलता है ये अब माँ नही बन सकती, तो सबको पता चल जाता है इनका भूतकाल कैसा रहा है, पर कोई बोलता नही जिन्दगी खुद अभिशाप बन जाती है।
सरकार हर साल मातृत्व सुरक्षा, जननी सुरक्षा, बेटी बचाओ जैसी योजनाओ के नाम पर करोड़ो ₹ फुक देती है।
आज हालत ये हैं 13-14 साल की कुछ बच्चिया बैग में i-pill लेकर घूम रही है ये मरेंगी नही तो क्या होगा। कुछ तो शर्म करो वेलेंटाइन मानने वालों\ वाली।
और ऐसी जहरीली चीजे valentine पर medical mafia भारतीय बाजारों में जानबुझकर उतारता है। क्योंकि सबको पता है, भारत में बुद्धिजीवी वर्ग का कोई मान नही होता पहले ये लड़कियों को जहर खिलाकर बीमारी देते हैं। फिर उसकी दवाई बेचकर अरबो रूपये कमाते हैं। जिसमे चादरमोद नेता भी कमाई करते हैं क्योंकि ऐसे जहर को बेचने का परमिट और उनकी चेकिंग न करवाने का काम नेता ही कर सकते हैं भोचली वाले
बहन या बेटी आपकी, तो उसकी जिम्मेदारी भी आपकी। इस valentine उसके पीछे आप खुद सजग रोहोगे, कहां जाती है क्या करती है इसका ध्यान रखोगे। देखने पर विरोध करोगे।
समय है वेलेंटाइन जैसे कुकर्म को बढ़ावा देने वाले घटिया मानसिकता को कुचल कर देश की युवा पीढी को सुदृढ़ बनाने का....
या फिर अगर चाहते हो आपकी बेटे- बेटी जमके अय्याशी करे, और बाद में कैंसर , बाझपन, STD की वजह से मर जाए और आपका बोझ हल्का हो, तो एक ही बार में सल्फास दे दो😠
#हर_बेटी_मेरी
"संसद में PM केयर फंड, PM राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे"
- ये निर्देश सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने लोकसभा सचिवालय को दिए हैं
PMO ने लोकसभा सचिवालय से कहा है- इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि संसद में कोई भी सदस्य इन फंड्स पर सवाल न उठाए।
सवाल है-
• सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं, उन्हें जनहित के सवाल पूछने से क्यों रोका जा रहा है?
• मोदी सरकार जनता के लाखों-करोड़ रुपये का हिसाब क्यों नहीं देना चाहती?
• आखिर मोदी सरकार देश की जनता से क्या छिपाना चाह रही है?
• क्या अब देश की संसद नरेंद्र मोदी की मनमर्जी से चलेगी?
ये सीधे तौर पर तानाशाही है। संसद का अपमान है और सांसदों के अधिकारों पर हमला है।
The Supreme Court of India may have stayed the implementation of new UGC rules, but the public anger does not appear to have cooled.
For BJP, a new problem seems to be emerging:
The social media fortress it built and refined over more than a decade is now being breached through hidden gates.
Until recently, its online ecosystem could generate storms over everything. From PM Modi’s turban on Republic Day to his decision to skip parliamentary proceedings amid security concerns, these incidents did not generate the kind of online hullabaloo they once would have.
For example, The 'Mother Of All Deals' framing was amplified aggressively. Yet even among core social-media supporters, the enthusiasm did not look intense.
One need not jump to the conclusion that PM Modi’s popularity has declined. But it is hard to miss one visible shift:
Social media, as a machine, no longer appears to be moving in lockstep with the BJP ecosystem the way it used to.
What makes this moment even more unusual is that some prominent right-wing influencers (Who were long seen as part of the broader supportive universe) have started openly challenging the government’s newer policies and positions. The criticism is increasingly coming from within the wider camp that once helped build the party’s digital momentum.