देश की आजादी को ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य बनाकर अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले मां भारती के वीर सपूत शहीद भगत सिंह जी की जयंती पर शत्-शत् नमन।
उनका साहस, बलिदान और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है।
#BhagatSingh
भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने आज मन की बात कार्यक्रम में माध्यम से श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के प्रति अपनी भावना प्रकट कर 100वी जयंती पर उन्हें नमन किया ।
#100YearsOfAshokJi
The bat raise, the roar, the milestone 👏👏
A Virat Kohli show in Thiruvananthapuram 🍿
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Cometh the hour, cometh the King 👑
A spectacular century from Virat Kohli in absolute style 💯
ODI century no.5⃣5⃣ for the chase master 🫡
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विद्या भारती द्वारा आयोजित नमामि भारतम् कार्यक्रम के तहत सरस्वती शिशु मंदिर सिंगरौली के विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक एक स्वर में संपूर्ण वन्देमातरम गीत का गायन किया गया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित श्री विजयादशमी उत्सव मंगलवार 20 अक्तूबर, 2026 को प्रातः 7.40 बजे रेशिमबाग, नागपुर में संपन्न होगा। इस उत्सव में दैनिक जागरण के मुख्य संपादक श्री संजय गुप्ता जी प्रमुख अतिथि होंगे और परम पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन होगा।
Back-to-back 𝗚𝗢𝗟𝗗 𝗠𝗘𝗗𝗔𝗟𝗟𝗜𝗦𝗧𝗦 🏅
Congratulations to #TeamIndia on clinching a 2️⃣nd consecutive Gold Medal in women's cricket at the #AsianGames 🇮🇳👏
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जाति-आधारित भेदभाव "हिंदू समाज पर एक कलंक" है।
हिंदू संस्कृति में जन्म-आधारित भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है और एक मज़बूत व एकजुट समाज बनाने के लिए जातिगत भेदभाव को खत्म करना ही होगा।
: दत्तात्रेय होसबाले, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
जातिगत भेदभाव हिंदू समाज पर कलंक है। इसे कानून से, भगवान के अवतार से या किसी के उपदेश से ठीक नहीं किया जा सकता। इसे अपने आचरण से ही ठीक करना पड़ेगा।
- दत्तात्रेय होसबाले जी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भोपाल विभाग के स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण आज भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में सम्पन्न हुआ।
एकत्रित स्वयंसेवकों को माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का पाथेय प्राप्त हुआ।
“संघ अनुभूति शाला”
इंदौर में कल पूजनीय सरसंघचालक जी द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर की जिस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया, उसका नाम है “संघ अनुभूति शाला”।
यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि जैसा कि केंद्र की मुख्य क्यूरेटर दृष्टि ने इसे बताया, यह एक “अनुभव केंद्र” है। यहाँ इसकी मूल भावना को स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है।
यहाँ संघ की पिछले सौ वर्षों की यात्रा को वास्तव में अनुभव करने का अवसर निर्मित किया गया है।
यहाँ विभिन्न कलाकृतियों और वस्तुओं के माध्यम से संघ की सौ वर्षों की यात्रा का अनुभव साकार किया गया है। जिस प्रकार वर्षा के बाद मिट्टी की सोंधी सुगंध को महसूस किया जा सकता है, उसी प्रकार यहाँ संघ की गतिविधियों की उस आत्मीय भावना को अनुभव किया जा सकता है, जो इसी मिट्टी में गहराई से जड़ें जमाए हुए है।
यहाँ उन संघर्षों का स्वाद भी महसूस होता है, जो पूर्ण समर्पण और अथाह धैर्य से परिभाषित रहे हैं। संघ जिस निःस्वार्थ प्रेम को हमारे भीतर पोषित करता है, उसका कोमल स्पर्श और स्नेहभरी देखभाल की शीतल छाया भी यहाँ अनुभव की जा सकती है।
यहाँ हम केवल उन लोगों को नहीं देखते, जिन्होंने वर्षों तक अपने जीवन को तपाकर संघ के कार्य को आगे बढ़ाया, बल्कि उन अनगिनत साहसी आत्माओं के जीवन की झलक भी देखते हैं, जिन्होंने क्षणभर के लिए ही सही, लेकिन प्रकाश फैलाने की आकांक्षा के साथ अपना जीवन समर्पित कर दिया।
यहाँ उन गूँजते स्वरों को सुनने का अनुभव भी भरपूर है, जिनके घोष आदिम ध्वनियों से लेकर उन अनंत क्षितिजों तक जाते प्रतीत होते हैं, जो मेघाच्छादित आकाश को भेदकर आगे बढ़ने के लिए आतुर हैं।
इस प्रकार यह केंद्र स्वयं एक गहन अनुभव में परिवर्तित हो जाता है।
संघ के सौ वर्षों के संपूर्ण इतिहास को समेटने के लिए शायद यह स्थान भी पर्याप्त न हो, फिर भी इसके निर्माताओं ने, जैसा कि पूजनीय मोहन जी ने आगंतुक पुस्तिका के पहले पृष्ठ पर लिखा है, अपनी हथेली की अंजलि में पूरा समुद्र समेटने का प्रयास किया है।
इस अद्भुत प्रयास के लिए मेरी हार्दिक बधाई और उन सभी कर्मयोगियों को मेरा गहरा, विनम्र नमन, जिन्होंने अथक परिश्रम करके इस अवर्णनीय सुंदरता को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
- जे नंदकुमार @kumarnandaj