सरकारी पैसों की बर्बादी देखिए..
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैतृक घर में पिछले 20 साल से कोई नहीं रहता है लेकिन उस घर की सुरक्षा के लिए पिछले 20 साल से PAC का पूरा कैंप ड्यूटी देता है जिसमें 15 जवान चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं!
टैक्स पेयर के पैसों की ऐसी बर्बादी इतिहास में आपने आज तक नहीं सुनी ���ोगी.!
राजीव रंजन की पत्रकारिता को भी भी सलाम करता हूँ जिन्होंने ये सच दुनियां को दिखाया!
ये हिन्दी वाला सुनते हैं कि अंग्रेज़ी वाला?
भारतीय न्यूज चैनलों के शो में सिर्फ शोर और पागलपन होता है: अमेरिकी राजदूत — The Credible News https://t.co/NvBGWbAsRq
मतलब FIR दर्ज हो सकती थी, लेकिन दर्ज नहीं की जा रही थी.
अगर देश के नेता विपक्ष को देश की राजधानी में FIR लिखवाने के लिए 7.5 घंटे जूझना पड़ा.
देश के आम नागरिक का क्या हाल होता होगा.
इस विद्यार्थी को 10 में से 10 क्यों मिले?
आप भी आनंद लें 😂😂
प्रश्न: हम किस सदी में जी रहे हैं?
उत्तर: हम उस सदी में जी रहे हैं जहाँ
फोन हैं तारहीन,
खाना बनता है धुआँहीन,
कारें हैं चाबीहीन,
खाना हो रहा है वसाहीन,
टायर हैं ट्यूबहीन,
कपड़े हैं वर्जनाहीन,
युवा हैं रोज़गारहीन,
नेता हैं शर्महीन,
रिश्ते हैं अर्थहीन,
रवैये हैं उत्तरदायित्वविहीन,
भावनाएँ हैं संवेदनाहीन,
शिक्षा है मूल्यहीन,
बच्चे हैं शिष्टाचारहीन,
सरकार है दृष्टिकोण विहीन
राजनीति बना दी गयी है मर्यादाहीन
और धीरे-धीरे सब कुछ होता जा रहा है आशाविहीन.
लेकिन फिर भी हमारी उम्मीदें हैं अंतहीन…
और सच कहूँ तो इस सब पर मैं हूँ… शब्दहीन!
थोड़ा बहुत मैंने अपनी मौलिकता भी जोड़ दी है 🙂
रिपब्लिक TV की यह डिबेट देखकर आपको सचमुच मजा आ जाएगा।
भाजपा प्रवक्ता:— आप हमें अंधभक्त कह सकते हैं कोई समस्या नहीं है— कम से कम ह�� आपकी तरह "दिमागी नक्सल" तो नहीं हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता का जवाब:— हां आप दिमागी नक्सल हो भी नहीं सकते क्योंकि— उसके लिए दिमाग का होना जरूरी है।🔥🔥
कल संदीप दीक्षित की टिप्पणी पर हाहाकार मचाने वाले टीवी चैनल क्या आज निशिकांत दूबे की कुत्सित टिप्पणी पर शोर मचायेंगे?
अगर नहीं तो साफ़ ये उनकी चिंता किसी महिला का सम्मान नहीं सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी दलाली की रक्षा है।
सोचिए कोई मनन मिश्रा एक झटके में एक पूरे बैच का कैरियर तबाह कर सकने की हिम्मत रखता है. फैसला वापस हुआ लेकिन ये हौसला आया कहां से?
कैसे-कैसे लोग कहां-कहां बैठाए गए हैं!
ये कितना डरावना है?
🚨 अभिजीत दीपके का बीजेपी नेताओं को खुला सवाल
अगर बीजेपी के नेता मेरी शिक्षा, पोस्टग्रेजुएशन और स्कॉलरशिप को लेकर RTI लगाना चाहते हैं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।
मेरी जानकारी सार्वजनिक कर दूंगा ।
लेकिन क्या वही नेता अपनी डिग्रियां भी सार्वजनिक करेंगे?
क्या वे भी RTI के तहत अपनी डिग्रियों और शैक्षणिक रिकॉर्ड को सामने लाने के लिए तैयार हैं?
"पारदर्शिता की मांग सबके लिए समान होनी चाहिए, सिर्फ़ विपक्ष या आलोचकों के लिए नहीं।"
ये बच्चों का आंदोलन था
इस आंदोलन में इनके भी बच्चे थे
उनको भी डराया धमकाया जा रहा है
उनपर भी वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाया जा रहा है
पुलिस ने चंद दिनों में पता लगा लिया 1873 असामाजिक तत्व थे आंदोलन में
लेकिन 2 महीने हो गए
चढ़ावा चोरों का पता नहीं लगा पाई पुलिस
यह कैसा जादू है 🧐