#शराब_पीना_महापाप
शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं:-
फेफड़े, जिगर(लीवर), गुर्दे (kidney), हृदय। शराब सर्वप्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। सुल्फा (चरस) दिमाग को पूरी तरह नष्ट कर देता है। हेरोईन शराब से भी अधिक शरीर को खोखला करती है।
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#शराब_पीना_महापाप
कबीर, औगुण कहूं शराब का, ज्ञानवंत सुन लेय।
मानुष सौं पशुवा करै, द्रव्य गांठ का देय।।
संत रामपाल जी वेदों, गीता और कबीर सागर जैसे ग्रंथों के आधार पर नशे के दुष्परिणामों को समझाते हैं।
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#शराब_पीना_महापाप
संत रामपाल जी महाराज के शिष्य नशे को हाथ तक नहीं लगाते, जो उनकी शिक्षाओं का प्रभाव है। क्योंकि संत रामपाल जी बताते हैं:
गरीब, भांग तम्बाखू पीव हीं, सुरा पान से हेत।
गोश्त मट्टी खाय कर, जंगली बनें प्रेत।।
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#सत_भक्ति_संदेश
गरीब, मात पिता जाकै नहीं, नहीं जन्म प्रमाण।
योह तो पूरण ब्रह्म है, करता हंस अमाন।।
परमात्माके कोई माता-पिता नहीं हैं। उनके जन्म का कहीं पर प्रमाणनहीं है। कबीर परमात्मापूर्ण ब्रह्म भक्तों को (अमान) शांति प्रदान करता है।
#GodMorningThursday
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भूख का अंत🌄पूज्य संत रामपाल जी महाराज जी की अन्नपूर्णा मुहिम बनी गरीब परिवारों का सहारा। अब कोई भी परिवार भूखा नहीं सोएगा। जहां उम्मीद खत्म होती है वहां पहुंची अन्नपूर्णा मुहिम।
अवश्य देखें Annapurna Muhim YouTube
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सतभक्ति करने से नशा अपने आप छूट
जाता है। शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशे
के प्रति घृणा हो जाती है।
अधिक जानकारी के लिए देखिए,
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#IndiaWillBecomeTheGoldenBird
हरियाणा से लेकर असम के लोग संत रामपाल जी महाराज को क्यों कह रहे भगवान?
देखिए "कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 7" Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
Factful Debates YtChannel
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असम के पहाड़ में बसे जिस गाँव में हाइड्रॉलिक सर्वे द्वारा यह मान लिया गया था कि इस पहाड़ के भूगर्भ में कोई जल का स्रोत नहीं वहाँ कैसे निकला 4 लेयर पानी?
जानने के लिए देखिए "कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 7" Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
#IndiaWillBecomeTheGoldenBird#FactfulDeb
असम के जिस गाँव में सरकार ने 800 फीट बोरिंग कराया लेकिन पानी नहीं निकला और संत रामपाल जी द्वारा कराए गए बोरिंग से पानी कैसे निकला? असम वासियों की जुबानी सच जानने के लिए देखिए "कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 7" Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
#सत_भक्ति_संदेश
बहुत से साधु सिद्धियाँ प्राप्त कर स्वयं
को राम मान लेते हैं, पर उनका जन्म-मरण समाप्त नहीं होता। संत गरीबदास जी कहते हैं कि उस सतगुरु को प्रणाम करो जिसने निजनाम की दीक्षा दी। निजनाम से परम शांति, परमपद तथा अमरलोक की प्राप्ति होती हैं।