मशहूर व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के अलग-अलग व्यंग्य लेखों से 14 लाइनें आपके समक्ष रखी हैं, मिर्ची से भी तीखी लगेंगी ।।
1- लडक़ों को, ईमानदार बाप निकम्मा लगता है ।
2- दिवस कमजोर का मनाया जाता है, जैसे हिंदी दिवस, महिला दिवस, अध्यापक दिवस, मजदूर दिवस । कभी थानेदार दिवस नहीं मनाया जाता।
3- व्यस्त आदमी को अपना काम करने में जितनी अक्ल की जरूरत पड़ती है, उससे ज्यादा अक्ल बेकार आदमी को समय काटने में लगती है।
4- जिनकी हैसियत है वे एक से भी ज्यादा बाप रखते हैं । एक घर में, एक दफ्तर में, एक-दो बाजार में, एक-एक हर राजनीतिक दल में।
5-आत्मविश्वास कई प्रकार का होता है, धन का, बल का, ज्ञान का । लेकिन मूर्खता का आत्मविश्वास सर्वोपरि होता है
6 –हमारे लोकतंत्र की यह ट्रेजेडी और कॉमेडी है कि कई लोग जिन्हें आजन्म जेलखाने में रहना चाहिए वे जिन्दगी भर संसद या विधानसभा में बैठते हैं ।
7- विचार जब लुप्त हो जाता है, या विचार प्रकट करने में बाधा होती है, या किसी के विरोध से भय लगने लगता है, तब तर्क का स्थान हुल्लड़ या गुंडागर्दी ले लेती है ।
8- बेइज्जती में अगर दूसरे को भी शामिल कर लो तो आधी इज्जत बच जाती है।
9- जब शर्म की बात गर्व की बात बन जाए, तब समझो कि जनतंत्र बढिय़ा चल रहा है।
10- जो पानी छानकर पीते हैं, वो आदमी का खून बिना छाने पी जाते हैं।
11- सोचना एक रोग है, जो इस रोग से मुक्त हैं और स्वस्थ हैं, वे धन्य हैं।
12- हीनता के रोग में किसी के अहित का इंजेक्शन बड़ा कारगर होता है।
13- नारी-मुक्ति के इतिहास में यह वाक्य अमर रहेगा कि ‘एक की कमाई से पूरा नहीं पड़ता।
14- एक बार कचहरी चढ़ जाने के बाद सबसे बड़ा काम है, अपने ही वकील से अपनी रक्षा करना ।
#हरिशंकरपरसाई #harishankarparsai #Satire
दीपके गैंग ने क्लासें बंद करवा दी,छात्रों को बाहर खड़ा कर दिया गया और उनसे CJP का फॉर्म भरवा रहे हैं !
मतलब कहीं भी कोई भी CJP का नेता बनकर किसी भी सरकारी संस्था में घुस सकता है !
यह चल क्या रहा है ?
टैक्स तो सब देते हैं..तो क्या कल कोई भी बिना टिकट किसी ट्रेन या फ्लाइट में घुस कर कहे कि हम तो इंस्पेक्शन करेंगे ..कोई भी /Police ट्रेनिंग सेंटर में घुस जायेगा इंस्पेक्शन करने ?
Not Acceptable
भाजपा की कट्टर दुश्मन मानी जाने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) की नेत्री सुहासिनी अली ने राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बारे में ये क्या कह दिया।
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जो प्रकृति व रोज़मर्रा की चीजों के जरिए दर्शन समझा दे, वो तुलसीदास। जो संस्कृत का प्रकांड विद्वान होने के बावजूद अभिजात्य शैली छोड़कर लोकभाषा में उतर आए, वो तुलसीदास। जिनके साहित्य में यज्ञ, वेद, मंत्र, व्रत और पूजा से ऊपर भक्ति व व्यवहार हो, वो तुलसीदास।
कइयों को लगता है कि उन्होंने राम को भगवान बनाने के लिए रामकथा लिखी। ऐसा नहीं है। उन्होंने छोटी सी हनुमान चालीसा के जरिए हनुमान को लोकमानस में सर्वव्यापक आराध्य बना दिया था। वो 4 पन्नों में रामचरितमानस भी निपटा सकते थे। व्यक्ति, परिवार, मित्रता, सत्ता, युद्ध, धन, समाज, ज्ञान, प्रेम, दुख और मृत्यु... उनका उद्देश्य था कि इन सभी परिस्थितियों में मनुष्य का सहज व्यवहार कैसा हो और कैसा होना चाहिए, इसका सटीक चित्रण किया जाए। वो वास्तविक परिस्थितियों में व्यवहार बुनते हैं। हर पन्ने पर परिस्थितियाँ व सम्बन्ध नए रूप लेते हैं। तुलसी संसार के उन्हीं रूपों के बीच अपनी बात कहने में सफल होते हैं, यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।
गोस्वामी तुलसीदास, भारतीय साहित्य की वो छवि जो अनंतकाल तक जीवंत बनी रहने के लिए जानी जाएगी। चौथी शताब्दी में हुए कालिदास को उनसे हजार साल बाद हुए लेखक के नाम पर 'भारत का शेक्सपियर' कहने वालों ने गोस्वामीजी को कितना सम्मान दिया होगा, इसपर विवेचना की आवश्यकता नहीं है।
गोस्वामी तुलसीदास को भक्त या संत की जगह केवल एक कवि के रूप में देखें तो भी यही निष्कर्ष निकलता है कि कम से कम पिछले हजार वर्षों में धरती पर ऐसा कोई कवि न हुआ।
तुलसीदास कवि हैं। तुलसीदास सामाजिक पर्यवेक्षक हैं। तुलसीदास राजनीतिक विचारक हैं। तुलसीदास नैतिक दार्शनिक हैं। तुलसीदास कथाकार हैं। तुलसीदास सभ्यता के शिक्षक हैं। तुलसीदास को अहंकार छू तक नहीं सका। उन्होंने बार-बार स्वयं को छोटा दिखाया है। वो स्पष्ट कह देते हैं कि वो कवि नहीं हैं, उनकी बुद्धि छोटी है। वो कहते हैं कि उन्हें काव्यशास्त्र का कोई ज्ञान नहीं, इसके बाद वो काव्य के संसार का सर्वोत्तम ढाँचा खड़ा कर देते हैं। यही उनकी महानता है। उनके लिखे का असर किस रूप में होगा, वो अपने काव्य को केवल इसी कसौटी पर कसते हैं।
तुलसीदास ने ये कभी नहीं दावा किया कि वो कुछ नया लिख रहे हैं, उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि वो वही लिखने जा रहे हैं जो अनगिनत बार लिखा जा चुका है।
रावण का अहंकार, भरत की निष्काम सत्ता, हनुमान की सेवा, कैकेयी का मंथरा के साथ कुसंग, भयभीत सुग्रीव, शरणागत विभीषण, भक्तवत्सल राम और भक्त शबरी - तुलसीदास के चित्रण से न केवल पात्र अमर हो जाते हैं बल्कि उन पात्रों के चरित्र भी स्वतः ही परिभाषित होकर स्थापित हो जाते हैं और उनके संग जुड़ जाते हैं। तुलसीदास के राम धैर्य और दंड दोनों में सामर्थ्यवान हैं, समुद्र के प्रसंग में उनका चित्रण किसे न मंत्रमुग्ध कर दे! शिव विवाह और राम विवाह - वो दोनों को उकेरते हैं लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से एकदम अलग-अलग रंग में। राम-राज्य उनके द्वारा ही परिकल्पित व्यवस्था है, जो गाँधी तक को लुभाता रहा।
तुलसीदास के रामचरितमानस में एक तरफ़ शील, सरलता, दया, सत्य, सेवा, संतोष, विनय, कृतज्ञता, परहित, निष्ठा और संयम। दूसरी तरफ़ कपट, दंभ, लोभ, काम, क्रोध, मद, मोह और अहंकार है। तुलसीदास का रावण शक्तिशाली है, लेकिन किसी की सुनता नहीं। अतः, नष्ट हो जाता है। उनके हनुमान चतुर हैं, कार्य के अनुरूप रूप बदलते हैं। असीम शक्ति होने के बावजूद होशियारी से काम चला लेते हैं।
और हाँ, तुलसीदास संप्रदाय-संयोजक हैं। उन्होंने किसी नए संप्रदाय की अवधारणा नहीं गढ़ी, जो विद्यमान था उसे एक किया। उनके राम 'महेस मन मानस हंसा' हैं। मानउँ एक भगति कर नाता... जो लोग तुलसीदास के 'दुबे' सरनेम को हाइलाइट करते हुए उन्हें जातिवादी बताते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि उनकी नज़र में भक्ति से ऊपर कुछ भी नहीं था। स्वयं भगवान जब शबरी से मिलते हैं तो यही कहते हैं कि वो केवल भक्ति के नाते को मानते हैं।
तुलसी आदर्शवादी हैं, लेकिन यथार्थ को नकारने वाले आदर्शवादी नहीं। राजमहलों की साज़िश से निकलकर रामकथा छल और दल-बदल से होते हुए रामराज्य तक पहुँचती है। आदर्शवाद की राह में कई वास्तविक बाधाएँ हैं, तुलसीदास उन सभी को समझते हैं। हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी... रामराज्य की राह में वियोग भी है।
इसके बाद तुलसीदास के रामचरितमानस के नैरेशन को देखिए, कितने स्तर हैं। शिव, पार्वती से कथा कहते हैं। याज्ञवल्क्य, भरद्वाज को सुनाते हैं। काकभुशुण्डि वही कथा गरुड़ को कहते हैं। बीच-बीच में स्वयं तुलसीदास भी हैं ही। वो पाठक को अकेला नहीं छोड़ते, विभिन्न पात्रों के बीच भ्रमण करने की पूरी जगह देते हैं। जब भी कथा सुनने वाला शंकित होता है, उसकी शंका का समाधान किया जाता है। पाठकों को प्रश्नों के उत्तर भी मिलते चले जाते हैं।
जिस कवि ने अपने कवित्व से अहंकार का दमन कर दिया, वही तुलसीदास का अनुयायी है। जिसमें विनम्रता का भाव नहीं रहा, वो तुलसीदास के मार्ग के आसपास भी नहीं है। मेरी छोटी बुद्धि यहीं तक पहुँच पाती है, कवि शिरोमणि को उनकी जयंती पर नमन!
विभाजन केवल भारत के भूगोल का विभाजन नहीं था, यह करोड़ों लोगों के सपनों, परिवारों और जीवन को झकझोर देने वाली एक मानवीय त्रासदी थी।
लाखों निर्दोषों ने अपना घर-बार खोया, अपनों से बिछड़े और असहनीय पीड़ा सहते हुए भी साहस, धैर्य और संघर्ष से अपने जीवन को पुनः खड़ा किया।आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात पीड़ितों और बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन।
आइए, इतिहास की उस पीड़ा को स्मरण करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का संकल्प लें।
#विभाजन_विभीषिका_स्मृति_दिवस #PartitionHorrorsRemembranceDay
कांग्रेस का काला अध्याय
151. 14 अगस्त 1947 आज ही हिंदू और मुसलमान के नाम पर हमारे देश का बँटवारा हुआ, पाकिस्तान अलग देश बना जो समझौते के अनुसार इस्लामिक राष्ट्र बना लेकिन हम सेकुलर देश के नाम पर वोट बैंक के लिए पाकिस्तान से बड़ा मुसलमान राष्ट्र बन गए ।नेहरु जी के प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा ने एडविना माउंटबेटन के साथ मिलकर ज़िंदगी भर के लिए एक ख़तरनाक पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान बनाया ।स्वतंत्रता सेनानी रामकृष्ण डालमिया जी ने नेहरु जी को यह बताया कि जिन्ना की मृत्यु बीमारी के कारण सालभर के अंदर निश्चित है,इस बंटवारे को 1948 तक टाला जाए,नतीजा डालमिया जी जेल गए,उनका अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया पर कांग्रेसी ने क़ब्ज़ा कर लिया ।लाखों लोग विभाजन विभीषिका के कारण मारे गए,बेघर हुए ।1962 में चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर हमारे हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया,हम अमेरिका के नौकर हो गए,अपनी सुरक्षा,अपना फ़ोन,अपनी सुरक्षा से लेकर रेडियो तक हमने अमेरिका को बेच दिया ।मक़सद केवल एक भारत पर क़ब्ज़ा ।आज भी चीन,सोरोस,विदेशी ताक़तों के साथ मिलकर राहुल गांधी यही काम आगे बढ़ा रहे हैं
#CongressDarkHistory
🚩 जागिए जैन समाज! हमारी महान विरासत अंतिम सांसें गिन रही है 🚩
इतिहास का अपमान: श्योपुर के डोब कुंड में कच्छापघात राजाओं द्वारा (संवत 1045) निर्मित ऐतिहासिक जैन तीर्थंकरों की ये खंडित प्रतिमाएं हमारी उपेक्षा का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
केवल पत्थर नहीं, हमारी आस्था: हजारों वर्षों का गौरवशाली इतिहास और भगवान महावीर का पावन संदेश आज झाड़ियों और उपेक्षा के अंधकार में खो रहा है।
हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: जब तक हम अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण नहीं करेंगे, तब तक हमारा इतिहास सुरक्षित नहीं रह सकता।
तत्काल संरक्षण की मांग: डोब कुंड के प्राचीन जैन मंदिरों और तीर्थंकर प्रतिमाओं के जीर्णोद्धार और सुरक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं।
अपनी भावी पीढ़ी का मार्गदर्शक बनें: हमारी आने वाली पीढ़ियाँ हमसे पूछेंगी कि जब हमारी अमूल्य विरासत नष्ट हो रही थी, तब हम क्या कर रहे थे?
परम धर्म निभाएं: आइए, आज ही संकल्प लें—अपनी संस्कृति, धर्म और तीर्थ क्षेत्रों की रक्षा करना हमारा सर्वोपरि कर्तव्य है!
#savejainculture #dobkund #jainheritage #ourduty #savejaintemples #जैन_संस्कृति #channelmahalaxmi #jainism
इस देश में विदुला जैसी एक स्त्री हुई जिसने अपने युद्ध से भागे हुए कायर पुत्र संजय से कहा था --
अलातं तिन्दुकस्येव मुहूर्तमपि विज्वल।
मा तुषाग्निरिवानर्चिधूमायस्व जिजीविषुः॥
मतलब बेटे! अगर तुम जीना चाहते हो तो तिन्दुक (तेन्दू) की लकड़ी के अंगारे की तरह थोड़े समय के लिए ही सही, पूरी तेजस्विता और प्रताप के भूमियों के साथ प्रज्वलित हो उठो; भूसी की आग की तरह बिना ज्वाला के केवल धुआँ देते हुए लंबे समय तक मत सुलगो। अर्थात कायरतापूर्ण लंबा जीवन जीने से अच्छा है तेजस्वी और गौरवशाली छोटा जीवन।
इस देश में मदालसा, विदुला, द्रौपदी आदि माताओं ने सदैव अपने पुत्रों को धर्म और मातृभूमि की रक्षा के प्राण अर्पण करना ही सिखाया। आचार्य चाणक्य के सीरियल में वही मातृधर्म का बौध कराता हुआ छोटा सा दृश्य ---
अजीब संकेत जिनसे पता चलता है कि आप असल में स्वस्थ हैं
1. बार-बार छींक आना → मज़बूत इम्यून सिस्टम
2. आसानी से पसीना आना → शरीर का तापमान सही ढंग से कम होना
3. भूख के साथ जागना → तेज़ मेटाबॉलिज़्म
4. मांसपेशियों में फड़कन → सक्रिय नसें और मिनरल्स
5. खाना खाने के बाद डकार आना → अच्छा पाचन
6. मज़बूत नाखून → संतुलित पोषक तत्व
7. साफ़ और स्पष्ट सपने आना → स्वस्थ दिमाग का काम करना
8. साफ़ पेशाब → शरीर में पानी की सही मात्रा
9. कसरत के बाद दर्द होना → मांसपेशियों का मज़बूत होना
10. रोंगटे खड़े होना → नर्वस सिस्टम का सक्रिय होना
11. रात में नींद आना → शरीर की घड़ी (बॉडी क्लॉक) का सही तालमेल
12. बार-बार हँसना → भावनात्मक संतुलन
13. भावुक होने पर आँसू आना → तनाव का स्वस्थ तरीके से निकलना
14. बिना कैफ़ीन के सुबह ऊर्जा महसूस करना → कोर्टिसोल का स्तर स्थिर होना
15. नियमित रूप से पेट साफ़ होना → स्वस्थ गट माइक्रोबायोम
16. स्ट्रेच मार्क्स या निशान → त्वचा का ठीक होना
17. बिना दिमागी उलझन (ब्रेन फॉग) के जागना → संतुलित हार्मोन....Read News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से देशवासियों से मितव्ययी होने की अपील की है और कहा है कि एक साल सोना मत खरीदिए,डीज़ल-पेट्रोल और खाने के तेल की खपत कम करिए तब से पूरा विपक्ष मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया है।
दिल्ली से लेकर मुंबई तक सारे विपक्षी कभी प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल पर सवाल उठा रहे हैं, कभी अर्थव्यवस्था के आसन्न संकट के लिए सरकार को दोष दे रहे हैं।
क्या पश्चिम एशिया का युद्ध हमने शुरु किया ?
वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस दौर में युद्ध कहीं भी हो, उसका साया क्या हम पर नहीं पड़ेगा ?
विपक्ष मारे कुंठा के, प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल पर सवाल उठाकर उनकी सुरक्षा का महत्व कम कर रहा है।
क्या प्रधानमंत्री भी पैदल चलें ? क्या वे अपनी गाड़ी खुद चलाएँ ? या वे भी WFH करें ?
विपक्षी समझेंगे कब ?
बहरहाल,
फ़िलहाल कोई संकट नहीं है।
डीज़ल-पेट्रोल पर्याप्त है।
विदेशी मुद्रा का भंडार भी ठीक है।
चूँकि विदेशी संस्थाएं मार्केट से हाथ खींच रही है,इसलिए भविष्य में विदेशी मुद्रा का संकट पैदा हो सकता है।इसलिए सोना की ख़रीद टालने का सुझाव है।
यह चिंता सिर्फ़ प्रधानमंत्री की नहीं,देश के हर नागरिक की होनी चाहिए।
लेकिन विपक्ष मानसिक रूप से इतना दिवालिया हो गया है कि संकट की इस घड़ी में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा है।
#PMsApeal
#IranWar