@Adityaacard How can a guy working 18 hours a day, without any vacation for decades be unfit. The cockroaches are generally unfit so also misguided screen consumed youth, sad.
India set up a fully functional field hospital in earthquake-hit Venezuela, thousands of kilometres away, simply to help those in need.
This won’t dominate timelines or rack up 50 million views. But let there be one racist post targeting Indians, and it spreads like wildfire.
Humanitarian work rarely goes viral. Hate almost always does.
भारत तरक्की कर रहा है..!
आज भुसावल से गोवा ट्रेन से यात्रा करते समय एक अनुभव हुआ..!
अचानक, मेरे दोस्त के 2 साल के बेटे को बुखार आ गया। हमारे पास कोई दवा नहीं थी, और हमारी मंज़िल, मडगांव, पहुँचने में अभी भी 7 घंटे बाकी थे। हमने सोचा कि अगले स्टेशन पर उतरकर डॉक्टर से सलाह लेंगे और फिर सड़क मार्ग से यात्रा जारी रखेंगे..!
मैंने यूँ ही ट्रेन में सामान बेचने वाले एक वेंडर से कहा..!
"हमें कुछ दवा चाहिए। क्या आप अगले स्टेशन पर इसका इंतज़ाम कर सकते हैं ? मैं आपकी मेहनत के लिए ₹500 दूँगा"
वेंडर ने जवाब दिया..!
"इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। TTE (टिकट परीक्षक) से मिलिए; आपकी समस्या हल हो जाएगी"
हम तुरंत TTE से मिले..!
मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में किसी सरकारी कर्मचारी से इतनी तत्परता का अनुभव नहीं किया था..!
उन्होंने अपना काम रोका, तुरंत फ़ोन किया, हमारी सीट नंबर और बीमारी की स्थिति नोट की, और हमें अपनी सीट पर वापस जाने के लिए कहा..!*
सच कहूँ तो, हमें ज़्यादा उम्मीद नहीं थी। हमने पहले ही तय कर लिया था कि अगर ज़रूरत पड़ी तो हम अगले स्टेशन पर उतरकर बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएँगे..!
हमने सोचा था कि शायद कोई कागज़ में लिपटी कुछ गोलियाँ ही लाएगा..!
लेकिन ठीक अगले स्टेशन पर, एक डॉक्टर अपने असिस्टेंट के साथ हमारी सीट पर आए। TTE भी वहाँ मौजूद थे। बच्चे की जाँच करने के बाद, डॉक्टर ने तुरंत अपने असिस्टेंट को हमें सिरप की कुछ बोतलें देने का निर्देश दिया। उन्होंने दवा देने का तरीका समझाया और फिर TTE से पैंट्री से थोड़ा नमक मँगवाने को कहा..!
TTE ने तुरंत एक और फ़ोन कॉल किया। डॉक्टर ने हमें बच्चे के माथे पर नमक के पानी में भीगा हुआ कपड़ा रखने की सलाह दी और चले गए..!
जब हमने आवाज़ देकर पूछा कि हमें कितने पैसे देने हैं, तो हमें बताया गया कि यह सब पूरी तरह से मुफ़्त था..!
हम अभी भी हैरान और चकित थे कि जब तक हम अपनी सीट पर वापस पहुँचे, पैंट्री का एक कर्मचारी नमक लेकर आ गया..!
मेरा देश सचमुच बेहतर के लिए बदल रहा है..!
इतनी सारी आलोचनाओं का हम क्या करें..!
क्या उन्हें पेट्रोल के साथ पी जाएँ..!
मीडिया या अख़बारों में अक्सर ऐसे सकारात्मक बदलावों को उजागर नहीं किया जाता है..!
बदलाव हो रहा है। हमें भी इन अनुभवों को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ साझा करना चाहिए..!
इसमें समय लगेगा, लेकिन हम उस बदलाव को देख और महसूस कर रहे हैं जो हो रहा है..!
राष्ट्रहित सर्वोपरि..
🪷 🇮🇳 🙏 🇮🇳 🪷🇮🇳
@tehseenp The three losses for Pakistan were severe burnol moments for the entire country. Ghus ke bhi mara aur Izzat ko bhi mitti mein milaya. Aur Kya chahiye? Kya chudi pehanana chahiye tha?
@sushantsareen It was our kings’ selfish nature that made foreigners rule us 1000-200 years. Let’s not forget the golden eras of Vijaynagara and Maratha empire when the leaders were selfless. By not playing our subjugation would not have ended.