कोटा राजस्थान से यह विडियो वायरल है, बिहार के बेहद गरीब घर की लड़की जिसके मां बाप नहीं थे। छोटा भाई मेहनत मजदूरी करके अपनी बहन को पढाई करने भेजा था।
जब यह विडियो उसके मोबाइल पर दिखा तो सन्न रह गया। उसने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की मगर गांव वालों की सुझ बुझ से उसकी जान बचाई जा सकी।
ये हिज़ड़े देश का नुकसान करके
देश के जवानों कर. सर फोड़कर बोलते हैं
कि ये देश को बदलना चाहते हैं....
Hello @DelhiPolice प्लीज् देखें
पत्थरबाज़ गुंडे वीडियो में साफ पहचान में आ रहे
"कौम जानते हो कौम....बच्चे नहीं हैं....टाइम बॉम्ब हैं....आतंकवादी के पिल्ले....इनका हिसाब चुकाते चुकाते हम खाक हो जाएंगे...."
“देश को अंदर से खोखला करके मानेंगे शांतिदूत…..ये लोग देश के असली कीड़े है”
🚨 आदलणीय बंधुओ 77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
आपका थाना “प्राथमिक सुरक्षा केंद्र” है या “प्राथमिक भ्रष्टाचार केंद्र”?
क्या आपके सांसद-विधायक ने “भारतीय पुलिस संहिता” और “पुलिस चार्टर” लागू करने के लिए सदन में बिल पेश किया?
@PMOIndia@HMOIndia
एक यात्री ने RailMadad पर गंदे वॉशरूम की शिकायत दर्ज कराई क्योंकि उस समय कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था।
कुछ ही मिनटों में रेलवे के कई कर्मचारी सीधे उसकी सीट पर पहुँच गए, शिकायत के बारे में पूछताछ की और वॉशरूम की सफाई कर दी।
समस्या तो हल हो गई, लेकिन यात्री का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसे ऐसा महसूस हुआ मानो शिकायतकर्ता के रूप में उसकी पहचान सभी के सामने उजागर कर दी गई हो।
इसी अनुभव के कारण बाद की एक यात्रा में, वॉशरूम बेहद गंदे होने के बावजूद उसने RailMadad पर शिकायत दर्ज नहीं की।
उसका कहना है कि अगर शिकायत करने के बाद अपनी पहचान उजागर होने का डर रहे, तो कई यात्री वास्तविक समस्याएँ बताने से भी बचेंगे।
यात्री का सुझाव है कि कर्मचारियों को केवल शिकायत की जगह की जानकारी दी जाए, न कि शिकायतकर्ता की सीट संख्या या पहचान, जब तक उसकी बिल्कुल आवश्यकता न हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है
अगर शिकायत करने वाले की पहचान ही उजागर हो जाए, तो क्या यात्री भविष्य में RailMadad पर शिकायत करने का साहस करेंगे?
क्या रेलवे को शिकायतकर्ता की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रक्रिया में बदलाव करना चाहिए?
अगर आप उस यात्री की जगह होते, तो क्या करते?
गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी के एक होटल के कमरे में सरताज़ खान एक हिंदू युवती के साथ मिला।
आरोप है कि उसने पहले दावा किया कि युवती मुस्लिम है, लेकिन बाद में उसकी पहचान हिंदू के रूप में हुई।
कमरे से कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए कंडोम भी बरामद हुए, यह भी दावा किया गया है कि हिंदू रक्षा दल के पहुंचने पर युवती शौचालय में छिप गई और अपने माता-पिता का नंबर देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद सरताज़ को सड़क पर घुमाया गया।
एक मुस्लिम महिला ने एक हिंदू लड़की का नहाते हुए वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया और कथित तौर पर उसे अनस खान नाम के एक व्यक्ति के साथ शेयर किया। उस व्यक्ति पर आरोप है कि उसने उस वीडियो का इस्तेमाल करके लड़की को ब्लैकमेल किया, ₹35,000 की मांग की, उसे एक होटल ले गया और उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाने की कोशिश की, जिसमें कथित तौर पर उसे बीफ़ (गोमांस) खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश भी शामिल थी।
बाद में लड़की ने मदद के लिए बजरंग दल के सदस्यों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्होंने कथित तौर पर आरोपी का सामना किया और आगे की कार्रवाई से पहले उसे पकड़ लिया।
एक मुस्लिम महिला ने एक हिंदू लड़की का नहाते हुए वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया और कथित तौर पर उसे अनस खान नाम के एक व्यक्ति के साथ शेयर किया। उस व्यक्ति पर आरोप है कि उसने उस वीडियो का इस्तेमाल करके लड़की को ब्लैकमेल किया, ₹35,000 की मांग की, उसे एक होटल ले गया और उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाने की कोशिश की, जिसमें कथित तौर पर उसे बीफ़ (गोमांस) खाने के लिए मजबूर करने की कोशिश भी शामिल थी।
बाद में लड़की ने मदद के लिए बजरंग दल के सदस्यों से संपर्क किया, जिसके बाद उन्होंने कथित तौर पर आरोपी का सामना किया और आगे की कार्रवाई से पहले उसे पकड़ लिया।
🚨77 दिन का मौन चीत्कार और भीड़तंत्र का बहरापन!
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से भेदभावपूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ आमरण अनशन पर हैं।
उनकी हालत दिन प्रतिदिन नाजुक होती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि वह आज भी उतने ही अकेले हैं, जितने पहले दिन थे।
रवींद्र जी, आपको एक बहुत ही कठोर वास्तविकता समझनी होगी।
आप CJP के कोई 'दिपके' नहीं हैं। आपके पीछे कोई विदेशी फंडिंग, पीआर एजेंसी या मोमबत्ती लेकर घूमने वाला इकोसिस्टम नहीं है जो आपके लिए रातों रात नेशनल मीडिया को इकट्ठा कर ले।
और जिन कथित सवर्ण (GC) राजनीतिक संगठनों से आप उम्मीद लगाए बैठे हैं, वह भी कभी आपके समर्थन में नहीं आएंगे।
मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों की तरह ही, इन संगठनों को भी इस मुद्दे से सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधना है।
वह चाहते हैं कि यह मुद्दा सुलगता रहे ताकि उनकी दुकान चलती रहे।
जब कोई व्यक्ति सच में इस लड़ाई के लिए अपने प्राण दांव पर लगाता है, तो ये संगठन सबसे पहले गायब हो जाते हैं।
यह देश केवल भीड़तंत्र और शक्ति प्रदर्शन की भाषा समझता है।
जहां पीछे उग्र भीड़ नहीं होती, वहां सत्ता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि कृपया अपना यह अनशन तुरंत समाप्त करें।
यह संवेदनहीन सिस्टम आपके इस बलिदान के लायक बिल्कुल नहीं है।
कृपया अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके प्राण आपके परिवार के लिए बहुत कीमती हैं। 🙏🚩
#RavindraJatheri #SystemFailure #RealityCheck #ReservationSystem
भगवान का नाम लेना बेकार हैं, कोई भगवान नहीं हैं:- जीतन मांझी (केंद्रीय मंत्री, हिन्दुवादी पार्टी BJP की सरकार में)
कुणाल कामरा का बयान गलत था। सबने विरोध किया। करना भी चाहिए। लेकिन इसका बयान सही है क्या? इस पर सब चुप क्यों हैं? मौन क्यों साधे हैं?
अब हम ईश्वर को लेकर भी सेलेक्टिव हो चुके हैं क्या? अब हम भगवान पर की गई टिप्पणी पर भी पार्टी देखकर विरोध करेंगे क्या?