*अर्नेस्ट बैन* ने राजनीति के स्वरूप पर व्यंग्य करते हुए इसे ऐसी कला की संज्ञा दी हैं जिसमें ‘’पहले तो मुसीबत को ढूँढते हैं, फिर वो जहाँ हो ना हो, वहाँ से उसे पकड़ लाते हैं; उसका ग़लत निदान किया जाता हैं और फिर उसका ग़लत उपचार किया जाता हैं’’ !
यही आजकल आरपीएससी कर रही हैं ।।
"ज्योग्राफी वाले पास हो रहे , हिस्ट्री , हिंदी वाले हो रहे है तो फिर राजनीति विज्ञान वालों ने ही पढ़ना छोड़ा है क्या ? राजनीति विज्ञान वाले औरों से दस गुना ज्यादा पढ़ते है। लेकिन जानबूझकर इन्हें फैल करने पर काम हो रहा है।" @RPSC1
आप सभी को नवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं। साहस, संयम और संकल्प के भक्ति-भाव से भरा यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में नई शक्ति और नया विश्वास लेकर आए। जय माता दी!
देवासी समाज सदैव विश्वासपात्र,स्वामीभक्ति, वचनबद्ध कौम रही है, राज्य में कई लोकसभा/विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक मत बल होते हुए भी राजनीति एवं शिक्षा में अभी भी संबल देने की जरूरत है। इस सरकार द्वारा इन क्षेत्र में समाज को अमूल्य योगदान दिया है आगे भी ऐसी ही आशा रखते है।
क्षण भंगुर जिंदगी... पानी के बुलबुले की तरह एक दिन फट ही जाएगी...
दुनियां कहती है पहाड़ों में गांव कितने सुंदर होते है, जन्नत तो यही है लेकिन प्रकृति का प्रकोप देखिए जन्नत को ही उजाड़ दिया 😌#उत्तरकाशीधराली
गिरती दीवारें
गिरती हुई मासूमियत की लाशें
गिरती हुई नैतिकता
गिरती हुई जिम्मेदारी
आखिरकार कौन लेगा मासूमियत बच्चों की जिम्मेदारी।।
#झालावाड़_मासूमों_को_न्याय_दो