घर कि ओर जाने वाला रास्ता सुःखद लगता है
जीवन की कुछ यात्राएं
मैंने मन से की है
जैसे तुम तक पहुँचना
शामें तब तक खूबसूरत रहेगी
जब तक शाम होते ही
लौट आने का रिवाज़ ��़िंदा है।
• आर्यन
हम घर लौटते है अपना बचा जीवन जीने के लिए तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
घर का आँगन, आम का पेड़, तालाब, स्कूल जो हमारी यादों में बसे होते है वैसे के वैसे नही रहते
बदलने की प्रक्रिया में सब बदलता है।
ये सच है ये शहर हमे जितना देता है, उससे बदले में कई ज्य��दा ले लेता है।
सारा शहर छान डालने के बाद
मैं इस नतीजे पर पहुँचा कि
इस इतने बड़े शहर में
मेरी सबसे बड़ी पूँजी है
मेरी चलती हुई साँस
मेरी छाती में बंद
मेरी छोटी-सी पूँजी
जिसे रोज़ मैं थोड़ा-थोड़ा खर्च कर देता हूँ।
• केदारनाथ सिंह