इंसान अपनी हरकतों से बाज नही आ रहा है। इस धरती को अपने बाप का घर समझता है। यहां पर सभी जीव जन्तु रहते है। लेकिन इंसान अकेला ही इस धरती को गंदा कर रहा है। ��र जब प्रकृति सफाई करती है तो भगवान से दुआ करता है। और माफी मांगता है। और भूल जाता है। सुधार जाओ। ये धरती खत्म हो रही है।