Working on a prolonged domestic violence case in Delhi Trying to reach out to @DCWDelhi@dswGNCTD no phone calls were picked.
@DCWDelhi doesn’t even have functional contact number, the number is not working says my phone.
Slowly my faith in welfare departments are vanishing!
@RailMinIndia
Booked my ticket in Rnc rajdhani with 1 waiting list on staff quota when there was more than 35 general seat left a month ago.
Now my ticket is not confirmed even after the chart is prepared.
Is this how @RailMinIndia@Central_Railway treat their employees?
@_Shivkivani Other reason is if everyone will be vegitarian , sea will be govern by fishes and land by other animals who can reprocreate fast and easy.
There will be no balance and social system to control that. There is a purpose of everything. You must be vegitarian for greater good 😊
पहली बार जब उसने समंदर देखा।
सबसे पहले उसने, मुझे कॉल करके बताया।
उतना गहरा है, पहली बार महसूस हुआ उसे,
ऐसा कहा मुझसे।
आजकल मुझे समंदर से ज्यादा गहरा किनारा लगता है। खड़े होकर किनारे पर, उस समंदर की गहराई का अंदाजा तोह लगा ही सकते है।
और क्या है न, मुझे डूबने से भी डर लगता है।
काफी दिनों के बाद मैं आज बाहर आई,
ऐसा लगा जैसे मानो दुनिया ही बदल गई हो।
वो लोग जिनको मैं अक्सर अपने मेट्रो के सफर में देखती थीं, वो दिखते नहीं अब।
न दिखते हैं वो रास्ते, जिनको पार करके मैं पुरानी दिल्ली जाया करती थी।
वो पेड़ जो मुझे रास्ते में देखता था,
मानो जैसे इस शहर ने खा लिया हो,
वो बच्चों की हँसी, मेट्रो के नीचे जब वो आपको प्यार की दुआएँ देकर गुलाब का फूल हाथ में थमाते थे, जैसे गायब हो गए हैं।
मेट्रो भी बदला बदला सा लगता है।
खैर छोड़ो मेरी बातें!
दोपहर को उनका कॉल आया,
मैंने बोला रात भर सोई नहीं हूँ, सोने जा रही थी।
उन्होंने कहा मैंने तुम्हारी कविता पढ़ी
कैसा लगा आपको?
सच में तू बड़ी हो गई है आजकल लिख रही है।
वैसे बता, पहले तो तेरी गलतियों पर हाथ नहीं उठाया, अब थप्पड़ लगा सकती हूँ मैं?
मैंने कहा गलतियों की गुंजाइश नहीं है आजकल, बहुत सोच कर कुछ भी करती हूँ।
समय लेती हूँ आजकल अपना।
लेकिन अगर मुझसे कोई गलती हुई तो समझा देना प्यार से समझ जाऊंगी मैं।
बड़ी हो गई हूँ मैं!
माँ ने फिर कहा,
वह तो ठीक है,
अब ये बताओ,
तुम मुझसे बात क्यों नहीं करती?
मैंने हल्की सी सास भरी और जवाब दिया उनको,
जब आप बात करते हो मुझसे,
पता नहीं कैसे आपको पता चल जाता है
कि मैं बीमार हूँ, दुखी हूँ, शायद रो रही हूँ, या पक्का गला खराब हो गया है।
इतना घूमती हो मौसम भाता नहीं,
कमजोर हो!
सब पता चल जाता है आपको।
माँ ने कहा, अच्छा एक काम करते हैं
जब खुश हो तब कॉल करना, जब ठीक रहो तब कॉल करना।
मैंने सोचा अब बोलेगी जल्दी कॉल करना,
उन्होंने बोला - अच्छा तुम सो जाओ अब, जब मन करे तब कॉल करना।
@jenn_baxla
ना जाने क्यों? जल्दी-जल्दी बोलती हूँ मैं!
असल में ना, भूल जाती हूँ चीज़ों को अगर बीच में कोई टोक देता है तो।
उस्ताद, बोलने नहीं देते थे लोग मुझे,
तो बोलना भी नहीं आता।
लेकिन अब तो मैं सीख रही हूँ बोलना।
@jenn_baxla
तब ही जल्दी लगती रहती है बोलने की।
पता नहीं कब दोबारा बोलने को मिलेगा।
Atleast, जब कोई सुन रहा है, तो बोल देती हूँ।
ऐसा ही रहता है मेरा, किसी से बात करते समय।
अच्छा, इस बार मैंने सोचा है सुनूंगी,
कम से कम कोशिश तो जरूर करूंगी
ताकि सुनने में भी कमी ना हो!
@jenn_baxla
नहीं सुनने के नुकसान बहुत होते हैं, आजकल ये पता चला है!
नहीं सुना मैंने और खाना नहीं खाया।
अब लग रहा है, "अरे! मुझे तो कब से भूख लगी थी। मुझे कहा गया था खालो सुनती नहीं हो। कमजोर हो जाओगी।"
ठीक है अब सुनूंगी भी।
कहने की कोशिश करना,
आजकल सुनती भी रहती हूँ मैं!
@jenn_baxla
जबसे बाली उम्र आई, ऐसा लगता था, क्यों सब मुझे ऐसे कह रहे कि अभी बच्ची हो। समझ आने लगेगा तो पता चलेगा।
न जाने क्यों, मुझसे कोई गुस्सा नहीं होता था,
@jenn_baxla
सब कहते थे बच्ची है जाने दो।
पर मुझे बड़ा गुस्सा आता था।
ऐसा लगता था मेरी गलतियों के consequences क्यों नहीं हैं? क्या गलती करना सही है?
सब क्यों ऐसे मेरी गलतियों पर, आसानी से माफी दे देते थे?
क्यों वो मेरे चेहरे को हल्के से सहला कर, हंस कर पगली कह कर चले जाते थे?
@jenn_baxla
क्यों वो बहुत दूर जाने के बाद, जब मुझे लगता था शायद यही गलती की सजा है, वो मुड़ कर भी मुझे प्यार से देख कर कहते थे, बच्ची हो अभी समझ नहीं आएगा।
अब जब बड़ी हो गई हूँ और पिछले हफ्ते ही अकल आई है,
सारी गलतियों को मन में दोहरा रही हूँ,
@jenn_baxla