इतनी बड़ी नई बिल्डिंग बनाई राजस्थान हाई कोर्ट जोधपुर की
सब कुछ पूरी प्लानिंग के साथ हुआ होगा
बनाने वाले मजदूर भी अपने कार्य में कुशल होंगे
लेकिन काम है तो सरकारी ही सब कुछ बनने के बाद जब तक सड़क/रास्ता ना खोदो तब तक कलेजे को ठंडक थोड़े ही मिलती है इनको
और भी जगह टूट फूट है यहां
सबसे बड़ा घोटाला तो हाईकोर्ट निर्माण में हुआ
सिर्फ 7 साल पहले बनकर तैयार हुए राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ के भव्य भवन की मरम्मत पर 117.65 करोड रुपए खर्च होने वाले हैं। दिखने में इस बहुत ही शानदार भवन की कुल लागत का भी आपको पता होना चाहिए। हाई कोर्ट बिल्डिंग के निर्माण पर कल 220 करोड रुपए खर्च हुए थे। अब 220 करोड रुपए से बनी एक बिल्डिंग की मरम्मत का खर्च 117.65 करोड़ रुपए है तो आप समझ लीजिए की घोटाला कितना बड़ा हुआ है।
भाई साहब यह तो हाईकोर्ट की बिल्डिंग है और तमाम माननीय जज साहिबान यहां बैठते हैं इसलिए यह मरम्मत हो पा रही है और डरी हुई सरकार ने 117.65 करोड रुपए का बजट मंजूर किया है वरना अगर कोई और सरकारी बिल्डिंग होती तो क्या इतना तेजी से काम हो सकता था? बिल्कुल नहीं। हाईकोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव से लेकर पुलिस महानिदेशक तक, सबको इस मामले में तलब कर लिया। कई अफसरों को जेल की हवा भी खिला दी है। ख़ैर। ब्यूरोक्रेसी बहुत ताकतवर है लेकिन ज्यूडिशियरी से ज्यादा तो नहीं ही है।
संविधान ने सबको अलग-अलग ताकत दी है। लेकिन घोटालेबाजों की ताकत देखिए कि उन्होंने सबसे ताकतवर संस्था के मुख्य भवन के निर्माण में ही खेल कर दिया। हाईकोर्ट से उम्मीद तो यह है की जानी चाहिए कि इसके निर्माण में हुई गड़बड़ी में शामिल प्रत्येक कड़ी की जेब से मरम्मत का पैसा जुटाया जाए। कम से कम घोटालेबाजों के आंख तो हो। सरकारी खजाने से मरम्मत का पैसा जारी हो जाएगा, मरम्मत हो जाएगी और बात खत्म हो जाएगी। लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए।
मीडिया को भी ऐसी खबरों को कोने में छापने की बजाय बड़ा बड़ा करके छापना चाहिए ताकि कम से कम लोगों के तो आंख हो कि उनके टैक्स से जाने वाले पैसे का किस तरह से दुरुपयोग हो रहा है। हमने आज तक एक भी व्यक्ति का घर ऐसा नहीं देखा जिस पर 10 लाख रुपए खर्च हुए हों और 7 साल बाद उसकी मरम्मत के लिए 6 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हों। इस मामले में हर स्तर पर मजाक हुआ है। कम से कम हाईकोर्ट को कोई ऐसी नजीर पेश करनी चाहिए कि किसी मामले को बिल्कुल अलग तरह से डील किया गया था।
जनता सब कुछ चुपचाप देख रही है