सिद्धशिला- इन बिंदुओं के ऊपर सिद्धशिला, जो लोक के अग्र भाग में है, उसकी आकृति बनी है। और लोक के विस्तारवाली अर्थात 45 लाख योजन विस्तार वाली अर्द्धचंद्राकार है जो मध्य में मोटी और किनारो से पतली है !
#जैनध्वज पाँच रंगो से मिलकर बना एक ध्वज है। इसके पाँच रंग है: लाल, पीला,सफेद, हरा और नीला। जैन ध्वज में स्वस्तिक रत्न त्रय और सिद्धशिला का उपयोग अरिहंत और आचार्य दोनों के प्रतिक रंगो पर किया जाता है !
रत्न- स्वस्तिक के ऊपर बने तीन बिंदु रत्न त्रय के प्रतीक है:-
सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र।
इसका अर्थ है रत्न त्रय धारण कर जीव चार गतियों में जनम मरण से मुक्ति पा सकता है।
विदेश की धरा सिंगापुर, दुबई, बैंकॉक, लंदन के बाद मुनिश्री प्रमाण सागर जी के आशीर्वाद और ब्र विजय भैया (लखनादौन) के परम सानिध्य में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में प्रथम सामाजिक “श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन चैत्यालय” की स्थापना 23 जनवरी को बड़े ही श्रद्धा और भक्ति के साथ हुई।
सभी जैन बंधु अंग्रेज़ी केलेंडर से नववर्ष 2023 की बधाई ना लेंगे ना देंगे क्यूँकि हमारे प्राण से भी प्यारा हमारी आस्था का केंद्र आज ख़तरे में है। प्रण ले सभी की हम जब तक शिखर जी पवित्र तीर्थ घोषित नही हो जाता तब तक 2023 बधाई नहीं देंगे ना ही लेंगे।
Pass it on.
संवैधानिक रूप से किसी भी तीर्थ की पवित्रता को खंडित करना ग़ैर क़ानूनी है । जैनधर्म के सर्वोच्च तीर्थ और हमारी आस्था के हिमालय श्री सम्मेद शिखर जी की शुद्धता को दूषित करके भारत के गौरवशाली अतीत को नष्ट मत करो।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah#DeclareShikharJiPavitraTirth
It is the duty of every person of every Jain society to keep the sanctity of Siddhakshetra Shri Sammed Shikhar ji intact. May its purity remain intact. For this we all have to walk step by step with each other.#DeclareShikharJiPavitraTirth