के हम खुशियों देने की कोशिश में लगे रहे उन्होंने एक गलती को पकड़ के दुखो का सागर थमा दिया नादान थे हम जो बिना पैसों के रिश्तों को पकड़े बैठे थे
ये भाई दूज और रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है आज समय ने बता दिया ना जाने वो कौन सी गलती थे जो उसने आज भी नज़र अंदाज किया और भाई का सुबह से
और एक बात बताऊं
आज मुझे मेरे जैसा ही एक मिला
और मेरे ही घर मे
मेरी तरह बोलता है
मेरी तरह काम करता है
जैस म हंसता था वैसे वो हंसता है
रुको तो सही यार ...
मुझे तो मरे हुए जमाना बीत गया...
फिर घर मे कौन रहता है...
...😶😶
और में हर रात सब को याद कर लेता हूं रात को ख्यालों मे सब से गिले शिकवे दूर कर लेता हूं
करवट बदलते ही आंख खुल जाती है ये रात आखरी रात हो ये दुवा करके करवट फिर बदल लेता हूं
(मतलबी हूं दुवा अपने लिए ही करता हूं) ....दीप🤞
भरा हुआ हूं म फिर बी डटा हुआ हूं म टूट गया तो कुछ अच्छा नहीं होगा आंखे नम हो जाती है किस के सामने रोऊं कोई है ही नहीं है बी तो कहा है तू है बी या नहीं या बस बातें है अभी तो भ्रम है मुझे और भ्रम टूट जाए तो अच्छा होगा....भगवान..😶
और हां सुबह 8 बजे से श्याम 8 बजे तक क्या करते है क्या नहीं कहा जाते है कहा नहीं लगता है किसी को कुछ पता ही नहीं ना खाना दिया जाए गा ना सोने दिया जाए गा अगर घर जाते समय सात में पैसा नहीं...
........Deep 🤞