जब कच्चे तेल की कीमत $115/बैरल से गिरकर $70/बैरल आ चुकी है, तो फिर देश में पेट्रोल के दाम कम क्यों नहीं हुए?
देश में पेट्रोल की कीमत ₹82/लीटर होनी चाहिए।
चांदनी चौक, दिल्ली में यह नटराज भल्ले वाला है। दिन की कम से कम कई लाख की बिक्री है, वह भी सब कैश में। न UPI स्वीकार करता है, न कार्ड।
क्या बीजेपी की @gupta_rekha सरकार, @dir_ed और @IncomeTaxIndia इसकी जांच कराएंगे?
दिल्ली में एलपीजी वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सरकार ने गोदामों से सिलेंडरों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
सभी वितरकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गोदाम से सीधे सिलेंडर बेचना अवैध है और ऐसी किसी भी गतिविधि पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे शहर में 5 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। अब ये छोटे सिलेंडर वैध पहचान पत्र दिखाकर गैस एजेंसियों से आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं, इसके लिए पते के सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रवासी श्रमिकों को विशेष सुविधा देने के उद्देश्य से एचपीसीएल के चयनित आउटलेट्स पर 11 समर्पित हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं, जहां उन्हें नजदीकी एलपीजी वितरकों की जानकारी दी जा रही है।
नागरिकों से अपील है कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें और स्थापित डिलीवरी व्यवस्था पर भरोसा रखते हुए प्रशासन का सहयोग करें।
2014 में कॉल पर बात करने के लिए न्यूनतम रिचार्ज
10 रुपये
2025 में कॉल पर बात करने के लिए न्यूनतम रिचार्ज
199 रुपये
इस खुलेआम लूट के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है।
मैं दूर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी से पूछना चाहता हूँ कि......
सिम मेरा, मोबाइल मेरा, नंबर भी मेरा…!
फिर ये कहां का इंसाफ है कि इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगा दिया जाए?
बैलेंस खत्म हुआ तो आउटगोइंग बंद हो जाए, ये तो समझ में आता है, क्योंकि एक सेवा मैने ले रखी है।
लेकिन इनकमिंग कॉल भी बंद कर देना, क्या ये सही है?
कॉल तो सामने वाला कर रहा है, उसका पैसा कट रहा है…!!
फिर मेरे नंबर पर “ताला” क्यों❓
क्या अब मोबाइल रखना भी “मासिक टैक्स” देने जैसा हो गया है?
रिचार्ज करो तो नंबर जिंदा, नहीं तो पूरी तरह बंद!
गांव के मजदूर, छोटे दुकानदार और छात्र....
जिनके लिए मोबाइल सिर्फ जरूरत है, शौक नहीं, उनके लिए यह नियम किसी सजा से कम नहीं है।
पहले कहा जाता था, “लाइफटाइम इनकमिंग फ्री”
अब हाल ये है कि रिचार्ज नहीं तो पहचान भी खत्म!
सोचिए…
अगर किसी गरीब के पास पैसे नहीं हैं,
तो क्या उसका नंबर बंद कर देना ही समाधान है?
क्या उससे उसका संपर्क छीन लेना सही है?
मोबाइल आज सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी पहचान और जिंदगी की लाइन बन चुका है।
बैंक से लेकर नौकरी तक, सब कुछ इसी नंबर से जुड़ा है।
फिर भी अगर इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगाया जा रहा है,
तो सवाल उठना लाज़मी है…!
क्या यह सिर्फ बिजनेस है…❓
या फिर धीरे-धीरे लोगों को मजबूर करके
हर महीने पैसे निकलवाने का तरीका?
सोचिए… और बताइए!
क्या आप भी इसे सही मानते हैं❓
या यह आम आदमी की मजबूरी का फायदा उठाना है?
अगर आप सहमत हैं तो खुलकर आवाज उठाइए, वरना तो जैसा चल रहा है चल ही रहा है।
@JM_Scindia@DoPTGoI@narendramodi@AmitShah
हॉस्पिटल में अंतिम क्षण में पिता ने कहा मुझे संजय मित्तल से खाटू श्याम जी के भजन सुनना हे
पिता की अंतिम इच्छा के लिए हॉस्पिटल में स्वयं संजय मित्तल को बुलवाकर खाटू श्याम जी के भजन सुनाए
कलयुग के ऐसे सनातनी बेटो को नमन 👏
जय खाटू श्याम 🚩🙏
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा एवं प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हिमानी मोर के विवाह रिसेप्शन में सम्मिलित होकर नवदंपति को शुभाशीर्वाद प्रदान किया।
@narendramodi@Neeraj_chopra1
🚨 सुधा मूर्ति ने वही कहा है जो कड़वी सच्चाई है — और जिसे सुनकर कई पेरेंट-इन्फ्लुएंसर बिदक जाएंगे।
आज माता–पिता अपनी ही औलाद को Online Content Machine बनाकर उनके बचपन का पोस्ट-मॉर्टम कर रहे हैं।
हर रोना , हर हँसी , हर मूड स्विंग सब कैमरे पर।
बच्चा इंसान कम, रील बनाने की प्रॉप ज़्यादा हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि बच्चों को ऑनलाइन शो-पीस की तरह बेचने पर सख्त कानून बने।
और ये असलियत किसी को चुभ सकती है, लेकिन सच यही है >>
• आपके क्यूट वीडियो असल में बच्चे की privacy murder हैं।
• लाइक्स और व्यूज़ के लिए बच्चों को नचा-गाना कराना सीधा mental exploitation है।
• बचपन को कंटेंट बनाकर आप उन्हें Attention Addiction और Identity Crisis की तरफ धकेल रहे हैं।
• हर चीज को कैमरे में ठूंस देना उन्हें सिखाता है कि प्यार भी तभी मिलता है जब वे “perform” करें।
आज कंटेंट है ,
कल वही बच्चा lost innocence , anxiety और validation के भिखारीपन से जूझेगा।
और जिम्मेदार कौन?
माता–पिता खुद।
सुधा मूर्ति की बात सीधी और चुभने वाली है ,
बच्चे आपकी सोशल मीडिया करंसी नहीं —
उनका बचपन बेचने का कोई अधिकार आपको नहीं।
एकदम चुस्त पेंट पहन कर वॉक करते ये साहब लोगो को अगर अभी दौड़ कर किसी को पकड़ना पड़ जाए , तो कितनी दूर दौड़ पाएंगे ।
इसका अलर्ट मोड काम कर पाएगा या नहीं ??
कब तक Telecom कपानियों की जनता से मनमानी लूट जारी रहेगी?
क्यों हर टेलीकॉम कंपनी जबरदस्ती डेटा पैक थोप रही है, जबकि करोड़ों गरीब लोगों को उसकी जरूरत ही नहीं?
👉 सिर्फ कॉल करने वालों के लिए सस्ता वॉयस प्लान क्यों नहीं है?
👉 30 दिन का न्यूनतम रिचार्ज प्लान सभी कंपनियों पर लागू क्यों नहीं किया जाता?
👉 क्या सरकार जानबूझकर चुप है क्योंकि इन कंपनियों से भारी चंदा आता है?
👉 TRAI और दूरसंचार मंत्रालय आखिर कर क्या रहे हैं — क्या उन्हें नहीं दिखता कि ये “मोनोपॉली” बन चुकी है?
👉 जो लोग सिर्फ कॉल करना चाहते हैं, उनसे हर महीने 200–300 रुपए वसूलना क्या लूट नहीं है?
👉 क्या अब मोबाइल रखना भी अमीरों का हक़ बन जाएगा?
जनता पूछ रही है — जब डेटा नहीं चाहिए तो डेटा के नाम पर मजबूरी क्यों?
सरकार जवाब दे, ये कंपनियां नहीं — पब्लिक प्रॉब्लम बन चुकी हैं।