ये तस्वीर युवा IPS आशीष पुनिया की है 👏👏
जो तमिलनाडु में सेवारत ह��ं एवं मुल निवासी बाड़मेर से हैं!
पुलिस की नौकरी में सबसे बड़ा सम्मान किसी पदक से नहीं, बल्कि किसी की सच्ची दुआ से मिलता है।
एक बुज़ुर्ग अम्मा का मंगलसूत्र स्नैचिंग की घटना में छिन गया था,IPS पूनिया ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनका मंगलसूत्र वापस दिलाया जाएगा।
24 घण्टे के अंदर पुलिस टीम ने अपराधियों को गिरफ्तार कर मंगलसूत्र बरामद किया और अम्मा को उनकी अमानत लौटा दी।
अपनी वर्षों पुरानी निशानी वापस पाकर अम्मा भावुक हो गईं,उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस स्नेह से IPS पूनिया के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दे दिया।
इस एक स्पर्श में जो अपनापन, विश्वास और संतोष रहा होगा, उसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।
अगर पुलिस ईमानदारी और सेवा भावना से काम करे तो पुलिस की नौकरी में ऐसे आशीर्वाद के अवसर कई बार आते हैं 💕
आशीष पूनिया जैसे संवेदनशील, कर्तव्यनिष्ठ और जनसेवा के प्रति भावना रखने वाले अ��सर को 🫡 !
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती - नियम के अनुसार वंचित अभ्यर्थियों को फॉर्म रीओपन करके अवसर देना चाहिए...एक लाख के करीब बीएड डिग्री धारकों को सरकार से बड़ी उम्मीदें..!!
@HANUMANKISAN@RajCMO
तपती धूप में जहाँ लोग छांव ढूंढ़ते हैं, वहाँ ये बुजुर्ग दंपति राहगीरों के लिए पानी का सहारा बनते हैं। ❤️
न कोई दिखावा, न कोई स्वार्थ,बस इंसानियत की मिसाल बनकर हर प्यासे की प्यास बुझाते हैं। 🙏
मारवाड़ की इस भीषण गर्मी में ये बुजुर्ग दंपति हमें सिखाते हैं कि सेवा के लिए दौलत ���हीं, बड़ा दिल चाहिए। इनके हाथों का एक गिलास पानी किसी प्यासे के लिए अमृत से कम नहीं।
आज भी धरती पर इंसानियत ज़िंदा है, क्योंकि ऐसे लोग बिना किसी पहचान और सम्मान की चाह के मानवता का धर्म निभा रहे हैं। सलाम है इस बुजुर्ग दंपति को, जो खुद तपती धूप सहकर दूसरों को राहत पहुंचा रहे हैं। 🌿💧
#Marwar #Inspiration #Respect ❤️🙏
हर कदम बाड़मेर के भविष्य के लिए!!
तत्काल खानापूर्ति नहीं, दीर्घकालीन हल के लिए!!
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी शर्मा, राजस्थान सरकार के नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री श्री झाबर सिंह जी खर्रा सहित संपूर्ण राज्य सरकार का बहुत-बहुत आभार। @BhajanlalBjp@JhabarKharraBJP
शिक्षकों को वर्क फ्रॉम होम क्यों नहीं?
अभी लगातार बारिश का मौसम चल रहा है और अनेक जिलों में भारी से लेकर बहुत भारी तक बार��श हो रही है। इसके चलते जगह-जगह स्कूली छात्र-छात्राओं की छुट्टी की जा रही है। लेकिन शिक्षकों का स्कूल में हाजिर होना सुनिश्चित किया जा रहा है। अब स्कूल जाकर शिक्षक बच्चों को तो पढ़ाने वाले हैं नहीं। हालांकि कुछ प्रशासनिक कार्य/पेपर वर्क वे जरूर कर सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में जबकि रास्ते तक बंद हों, पानी भरा हो तो क्या शिक्षकों को वर्क फ्रॉम होम नहीं दिया जा सकता?
अनेक कंपनियां ऐसी स्थिति में ही नहीं बल्कि सामान्य स्थिति में भी अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देती हैं। कोविड के दौरान भी अनेक बार वर्क फ्रॉम होम का विकल्प रखा गया है। तो यह तो फिलहाल आपदा जैसी स्थिति है। सरकार को यह सुनिश्चित किया करना चाहिए की ब���वजह है किसी का भी मूवमेंट सड़कों पर नहीं हो। असाधारण स्थिति बनी हुई है। दुर्घटना के खतरे रहते हैं वो अलग और स्कूलों की इमारतें गिरने का खतरा छात्र-छात्राओं और शिक्षक शिक्षकों के लिए समान रूप से रहता है। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। कम का जहां तक काम का मामला है तो शिक्षकों को उनके लक्ष्य दीजिए और काम करवाइए। मीटिंग करनी हो तो ऑनलाइन कीजिए। शिक्षकों का जीवन भी उतना ही महत्वप��र्ण है जितना स्कूली बच्चों क���।
@BhajanlalBjp @madandilawar @ashokgehlot51 @GovindDotasra @TikaRamJullyINC @8PMnoCM
यह बात सरकार तक पहुंचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा रिट्वीट करें और ज्यादा से ज्यादा अपनी ओर से भी ट्वीट करें। आप एक अच्छे उद्देश्य के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे होंगे।
रात जश्न की बीत गई अब
नया सवेरा, नई भोर है ।
नई चुनौती, नए लक्ष्य अब
अगली मंजिल, नई दौड़ है।
पार हो गए हैं जो संकट से
उन्हें मुबारक, नई ज़िंदगी ।
अभी फँसे जो बीच समंदर
मेरी कश्ती उसी ओर है।
(टीम कलाम)