*महंगाई, तेल संकट और मोदी सरकार की विदेश नीति*-
दुनिया आज बड़े भू-राजनीतिक बदलाव के दौर में है। BRICS देश अमरीकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने और वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में भारत के पास अवसर था कि वह #रूस और #ईरान से सस्ता तेल-गैस रुपये या वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था में खरीदकर अपनी जनता को महंगाई से राहत देता।
लेकिन आज पेट्रोल, डीज़ल और गैस की बढ़ती कीमतों का बोझ आम आदमी उठा रहा है। ऊपर से अमरीका–ईरान–इज़राइल तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट ने भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए खतरा और बढ़ा दिया है। यदि हालात बिगड़े, तो महंगाई और तेज़ हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर उतना दृढ़ क्यों नहीं दिखता जितना कभी गुटनिरपेक्ष दौर में दिखता था? क्या हमारी नीतियाँ राष्ट्रीय हितों से अधिक वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया देखकर तय हो रही हैं?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा रूस, ईरान और खाड़ी देशों से मज़बूत हो सकती है। विदेश नीति का उद्देश्य जनता को आर्थिक सुरक्षा देना होना चाहिए, न कि केवल वैश्विक मंचों पर बड़े-बड़े नारे देना।
“विश्वगुरु” की छवि तभी सार्थक होगी जब देश की जनता को महंगाई से राहत मिले, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो और भारत वास्तव में दबावमुक्त, संतुलित और स्वाभिमानी विदेश नीति अपनाए।
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I’ve been fighting Narendra Modi and the RSS for over a decade now. I understand them like you would understand your opponent - inside out, like the back of my hand.
The core characteristic of these people is cowardice.
Narendra Modi, Amit Shah, Mohan Bhagwat, Gyanesh Kumar and Ajit Doval, the villains of this story, are slowly finding the space closing around them. We are closing that space.
Mr. Modi, do whatever you want. Call out all the police: 10,000, 20,000, 50,000, whatever you want.
Arrest all the leaders. Arrest all the young people. Arrest us all.
We are surrounding you, and we are not going to back down. Mark my words: we already have the information we need.
We are going to defend our Constitution. We are going to protect the voice of the Indian people. And we are going to ensure that what was done to India over the last 10-15 years will never, ever be done again.
Youth of India, I am proud of you. Keep protesting. We are standing with you.
We are going to ensure that this regime and the people who have attacked our Constitution are defeated.
मैं नरेंद्र मोदी, RSS और इनसे जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ एक दशक से भी ज़्यादा समय से लड़ रहा हूँ। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूँ, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूँ, इनकी हर चाल से वाक़िफ़ हूँ।
इन लोगों की सबसे बड़ी पहचान है - कायरता।
नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत, ज्ञानेश कुमार, अजीत डोभाल - इस कहानी के खलनायक - अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं। इनके चारों तरफ़ से दायरा सिमट रहा है।
जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए - 10 हज़ार, 20 हज़ार, 50 हज़ार, जितनी चाहें बुला लीजिए।
सारे नेताओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। सारे युवाओं को गिरफ़्तार कर लीजिए। हम सबको गिरफ़्तार कर लीजिए।
घबराइये मत - हम आपको चारों तरफ़ से घेर रहे हैं, और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मेरी बात याद रखिए - हमें जो जानकारी चाहिए, वह हमारे पास पहले से है।
हम अपने संविधान की रक्षा करेंगे। हम हिंदुस्तान की जनता की आवाज़ की हिफ़ाज़त करेंगे। और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पिछले 10-15 सालों में हिंदुस्तान के साथ जो हुआ है, वह दोबारा कभी, किसी भी सूरत में न हो।
हिंदुस्तान के युवाओं, मुझे आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ खड़े हैं।
हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सरकार और हमारे संविधान पर हमला करने वालों को शिकस्त मिले।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक, भारत के पूर्व रक्षामंत्री एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्रद्धेय श्री मुलायम सिंह यादव जी की चौथी पुण्यतिथि पर सादर नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
नेताजी अमर रहें!
किसीके रोके नहीं रुकेगा
अब दिल्ली में देश जुटेगा!
हम देश की युवा ऊर्जा के साथ हैं। भाजपा सरकार अगर समझ रही है कि वो ताक़त के बल पर जनता को रोक लेगी तो ये उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। ‘जंतर-मंतर’ अब एक जगह का नाम नहीं, एक नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार ने आंदोलनकारियों को रोका तो देश में हर जगह जंतर-मंतर बन जाएगा।
माना बादशाहों का बंदोबस्त है बख़्तरबंद
पर उन्होंने देखा न नौजवानों का दमख़म
यहाँ हौसलों की भी तैयारी है चाकचौबंद
हैं साथ सब, मानकर इसको अंतिम जंग
आज अयोध्या की पावन धरती पर कलियुग के ताप को हरकर इहलोक को संवारने वाली और परलोक को सुधारने वाली ‘भागवतकथा’ का अमृतपान करने के सौभाग्यशाली क्षण।
बचपन में किसी ने बताया था कि ‘जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत।’ और ‘जो व्यथा हरे, वही कथा’। आज का समय क्योंकि बंधनों और व्यथाओं से भरा है - अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवतकथा का महत्व और प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है।
कथा सिर्फ कहानी नहीं होती जो मनोरंजन करती है, कथा तो ‘मनोवर्द्धन’ करती है। कहानी मन को बहलाती है, कथा मन और मनोबल को बड़ा बनाती है। कहानी के अंत होने पर आनंद का क्षणिक अनुभव होता है, जबकि कथा खत्म होने पर उत्तरदायित्व की अमिट गहरी अनुभूति होती है। कथा के मूल संदेश को जीवन में उतारने से ही कथा सुनने का पुण्य प्राप्त होता है।
भागवतकथा इसीलिए कथा है, कहानी नहीं। वो सिर्फ कृष्ण जी के बारे में नहीं बताती, वो हमें कृष्ण जी जैसा बनने के लिए हमें प्रेरित करती है।
भागवतकथा वाचन-श्रवण से बढ़कर, व्यक्तिगत प्रेम और सामाजिक समानता का संविधान है।
भागवतकथा सिखाती है - प्रेम ही सबसे बड़ा परमार्थ है।
भागवतकथा दया और करुणा का पाठ पढ़ाती है।
भागवतकथा भेदभाव मिटाकर समानता सिखाती है।
भागवत कथा की अनंत सीखों में से एक विशेष सीख ये भी मिलती है कि ‘प्रेम, दया, अपनापन’ ही सबसे बड़ा मानव-धर्म है।
मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, भागवतकथा का सबसे बड़ा सबक यही है कि ‘भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ’।
कृष्ण जी ने सिखाया कि सत्ता आती-जाती
आज के समय में, प्रेम और समानता के महाकाव्य को हम ‘संविधान’ कहते हैं। इसीलिए हमें संविधान की रक्षा करनी है।
मुझे लगता है भागवतकथा ‘शोषित, पीड़ित, वंचित के उद्धार’ का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें 'राज' का मतलब शासन नहीं, सबको साथ लेकर चलना है।
मेरे लिए भागवतकथा ‘सामाजिक न्याय के राज’ के उदाहरणों का एक संकलन है, जिसमें विदुर जी भी हैं, सुदामा जी भी हैं और कुब्जा भी। इन चरित्रों के माध्यम से मैंने तो यही सीखा कि किसी भी उपेक्षित, विपन्न व उपेक्षित को उसके तिरस्कृत होने या वंचित होने के भाव से मुक्त करना ही सामाजिक न्याय है।
साथ ही जिस ‘बंधु-राष्ट्र’ बनाने का संकल्प हम लेकर चले हैं, भागवतकथा उसका प्रकाश स्तंभ बनकर हमें राह दिखाती है।
भागवत कथा सदियों से चलती चली आ रही है और सदियों तक चलेगी क्योंकि नफ़रत और भेदभाव हर युग में होंगे, तो कृष्ण जी की चेतना भी प्रेम, दया और अपनापन से उनका अंत करने के लिए विविध रूप में सक्रिय होती रहेगी व मानवता को चिरायु होने का वरदान देती रहेगी।
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’प्रेम’ ही है सबसे बड़ा संस्कार
’दया’ से ही पूर्ण होता ये संसार
’अपनापन’ जीवन का आधार
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’सामाजिक-न्याय’ हो आधार!
’मिटें भेद सब, हो सबका उद्धार
निर्मूल हो ‘पीड़ा, दुख, अपमान’
’शोषित-वंचितों’ का हो उत्थान
बनके ‘बंधु-राष्ट्र’ करें कल्याण
‘भागवतकथा’ का यही है सार
अमर नहीं होता किसी का राज
अंत में मारा ही जाता ‘अहंकार’
और होता है पापियों का संहार
‘भागवतकथा’ का यही है सार
काशी बन न पाया क्योटो और न गोरखपुर स्पेन
पर ‘लखनऊ’ वेनिस बना, छिना सब सुख-चैन!
स्मार्ट सिटी के भ्रष्टाचार के पैसे की अनगिनत बोरियों से सारे नाले-सीवर जाम हो गए हैं, क्योंकि भाजपाई सुरंगजीवी वहीं निवास करते हैं।
तैरिए कि आप लखनऊ में हैं!