श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में आयोजित श्री कृष्ण जन्मोत्सव एवं दही हांडी प्रतियोगिता में शामिल हुआ।
भगवान श्री कृष्ण का जीवन हमें सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी का यह पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करे।
दही हांडी प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
भगवान श्री कृष्ण की कृपा से झारखंडवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे तथा हमारा राज्य निरंतर उन्नति के पथ पर आगे बढ़े।
जय श्री राधे-कृष्ण!
जय श्री कृष्ण!
अरे ये क्या घोर अनर्थ है बाबूलाल जी? 😳
ऐसे कैसे?
भाजपा की डबल इंजन, ट्रिपल इंजन वाली सरकार के मुखिया, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी—जो भाजपा के ही मुख्यमंत्री हैं—अब कह रहे हैं कि उन्हें CBI पर भरोसा नहीं?
CBI बिहार में कोई जांच करे, उससे पहले मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी पड़ेगी?
अगर CBI पर भरोसा है तो अनुमति की जरूरत क्यों?
और अगर भरोसा नहीं है तो फिर भाजपा की सरकारें CBI को लेकर इतना ढोल क्यों पीटती हैं?
बाबूलाल जी, ये कैसी विडंबना है? 🤔
छात्रों की पीठ के पीछे छिपकर राजनीति कर रही भाजपा, सीधे मैदान में उतरकर मुकाबला करे :
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं के मुद्दे पर भाजपा के आंदोलन और 48 घंटे का अल्टीमेटम राजनीतिक नौटंकी। भाजपा की मौजूदा और पूर्व की गतिविधियों से यह पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है कि पार्टी छात्रों को भ्रम में डालकर अपना राजनीतिक हित साधती रही है। भाजपा नेताओं को छात्रों के भविष्य की चिंता है तो उन्हें छात्रों की पीठ के पीछे से राजनीति करने के बजाय सीधे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के मैदान में उतरना चाहिए।
भाजपा प्रदेश के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब सीबीआई जांच का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब मुख्य सचिव पर दबाव बनाकर वे आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं। न्यायालय में विचाराधीन मामले में इस तरह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े करती है। भाजपा को केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग में महारत हासिल है, यह कौन नहीं जानता है।
माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्णय लिये हैं। सरकार ने पूरे मामले में जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी लगातार कार्रवाई कर रही है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े लोगों पर शिकंजा कस रहा है। इसी कार्रवाई से भाजपा घबराई हुई है।
भाजपा अब सीबीआई जांच की मांग की आड़ में उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिनके तार कथित परीक्षा धांधली से जुड़े हो सकते हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि उसे राज्य की जांच एजेंसी की कार्रवाई पर भरोसा क्यों नहीं है और आखिर ऐसी कौन-सी जल्दबाजी है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद वह सरकार पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है। भाजपा को डर है कि उसका कनेक्शन जगजाहिर ना हो जाए।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश भी बर्दाश्त नहीं होगी। भाजपा को छात्रों की भावनाओं से खेलना और उनकी पीठ के पीछे से राजनीति करना बंद करना चाहिए।
राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो भाजपा सीधे मैदान में आए, कानूनी लड़ाई लड़नी है तो कानून के रास्ते पर चले। छुप-छुपकर राजनीति करने वालों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। झारखंड की जनता यह समझ चुकी है कि भाजपा को छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता है।
@JmmJharkhand
आज रांची में हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की मजार पर आयोजित 219वें उर्स में शामिल होकर चादरपोशी की एवं राज्यवासियों की सुख-समृद्धि, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ मांगी।
हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की शिक्षाएं हमें प्रेम, भाईचारे, इंसानियत और आपसी सौहार्द का संदेश देती हैं। उर्स के मुबारक मौके पर सभी को दिली मुबारकबाद।
नई दिल्ली में माननीय गृह मंत्री आदरणीय श्री @AmitShah जी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्षों से चले आ रहे विषय के समाधान की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
वर्षों से झारखंड और बिहार के बीच सोन नदी के जल बंटवारे का विषय लंबित था। लंबे समय से चले आ रहे विमर्श, तकनीकी विचार-विमर्श और आपसी प्रयासों के बाद दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी है।
यह समझौता झारखंड के जल हितों की रक्षा के साथ-साथ किसानों, सिंचाई व्यवस्था और राज्य की भविष्य की जल आवश्यकताओं को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
भाजपा को झारखंड के खनिज पर सेस से दर्द क्यों? खनिज हमारा है तो फैसला भी झारखंड का होगा :
खनिज संसाधनों पर राज्य द्वारा सेस लगाए जाने के अधिकार को लेकर भाजपा को अब यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे झारखंड के हित और संवैधानिक अधिकार से परेशानी है या उन पूंजीपतियों से, जिन पर इस व्यवस्था का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 8:1 के ऐतिहासिक फैसले में राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की शक्ति को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा द्वारा इस अधिकार पर सवाल उठाना सीधे तौर पर राज्यों के अधिकार और संघीय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है।
झामुमो का भाजपा नेताओं से तीन सीधे सवाल : —
पहला, जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को संवैधानिक मान्यता दी है, तो भाजपा को झारखंड द्वारा अपने खनिज पर सेस तय करने से आपत्ति क्यों है?
दूसरा, जब खनिज झारखंड की धरती से निकलता है, उसके पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभाव झारखंड के लोग झेलते हैं, तो उसके ऊपर लगने वाले सेस और राजस्व का फैसला झारखंड क्यों नहीं करेगा?
तीसरा, यदि झारखंड का खनिज महंगा लगता है तो कोई उसे खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। यदि भाजपा के पूंजीपति मित्रों को कहीं सस्ता खनिज उपलब्ध होता है तो वे वहां से खरीद सकते हैं। लेकिन झारखंड को अपने प्राकृतिक संसाधन औने-पौने दाम पर देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
वर्षों से झारखंड की धरती से कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज निकाले जाते रहे हैं। संसाधन झारखंड के रहे, लेकिन उसका बड़ा आर्थिक लाभ बाहर जाता रहा, जबकि विस्थापन, प्रदूषण, जंगल और जमीन की कीमत झारखंडी समाज ने चुकाई।
अब वही पुरानी मानसिकता स्वीकार नहीं की जाएगी जिसमें “खनिज झारखंड से निकालेंगे, कीमत अपने हिसाब से तय करेंगे और झारखंड अपने हिस्से का सेस लगाए तो उसका विरोध करेंगे।”
झामुमो यह स्पष्ट कर देना चाहता है कि झारखंड किसी की खनिज संपदा की दुकान नहीं है। राज्य अपने प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का उपयोग अपने लोगों—विशेषकर आदिवासी, मूलवासी, खनन प्रभावित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के हित में करने का अधिकार रखता है। भाजपा चाहे जितना दबाव बनाए, झारखंड अपने संवैधानिक और प्राकृतिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।
खनिज झारखंड का है। उस पर अधिकार झारखंड का है।
उससे होने वाली कमाई में पहला हक झारखंडियों का है।
और अपने संसाधनों पर फैसला भी झारखंड ही करेगा।
@JmmJharkhand
आज प्रोजेक्ट भवन में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अंतर्गत CAMPA की राज्य प्राधिकरण की गवर्निंग बॉडी बैठक में शामिल हुआ और अधिकारियों को कई जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
हर वर्ष की तरह इस बार भी हमारी सखी मंडल की माताओं-बहनों ने अपने स्नेह, हुनर और मेहनत से खूबसूरत राखियाँ तैयार की हैं।
समस्त राज्यवासियों से मेरा आग्रह है कि इस रक्षाबंधन इन राखियों को खरीदकर हमारी बहनों के हुनर और स्वावलंबन को अपना साथ दें।
आपकी खरीदी सिर्फ एक राखी नहीं, किसी बहन की मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का सम्मान है।
छात्रों की आड़ में भाजपा की राजनीति बेनकाब, झारखंड की खनिज संपदा पर नजर नहीं डालने देंगे :
आखिर भाजपा कब तक पर्दे के पीछे रहकर राजनीति करेगी ? अब भाजपा खुलकर छात्रों के आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने लगी है। आंदोलन के पहले दिन से ही यह स्पष्ट था कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हो रही है। घेराव के दिन जिस तरह भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया और बंगाल-बिहार से बसों एवं अन्य वाहनों में लोगों को लाकर आंदोलन में शामिल करने का प्रयास हुआ, उसने भाजपा की मंशा को उजागर कर दिया है। भाजपा संगठन के बड़े पदाधिकारी जिस तरह पल-पल की गतिविधियों की जानकारी दिल्ली तक पहुंचाते रहे, उससे भी तस्वीर साफ हो गई है।
छात्रों का आंदोलन छात्रों का था, लेकिन भाजपा ने उसे राजनीतिक अखाड़ा बना दिया। झारखंड के छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक टकराव पैदा करने की भाजपा की कोशिश अब किसी से छिपी नहीं है। छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय भाजपा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने में जुटी है।
छात्रों की आड़ में घटिया राजनीति बंद कीजिए बाबूलाल जी। अब छात्र भी समझ चुके हैं कि कौन उनके मुद्दों के साथ खड़ा है और कौन उन्हें अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए स्वयं संघर्ष कीजिए, बच्चों को बरगलाकर राजनीतिक मोहरा बनाने का काम क्यों कर रहे हैं?
भाजपा की राजनीति का एकमात्र उद्देश्य झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर कब्जा जमाना है। झारखंडियों, आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों एवं संसाधनों को किसी भी कीमत पर लूटने नहीं दिया जाएगा। अगले पांच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये की खनिज संपदा पर नजर रखने वाली भाजपा को झारखंड का हिसाब देना होगा। पहले से बकाया डेढ़ लाख करोड़ रुपये को जोड़ दें तो सवाल ढाई लाख करोड़ रुपये का बनता है।
झारखंड कोई राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं है। यहां के छात्र, युवा, आदिवासी, मूलवासी और झारखंडी जनता अपने अधिकारों और संसाधनों की रक्षा करना जानती है। भाजपा चाहे जितना पर्दे के पीछे से खेल खेले, अब उसका राजनीतिक चेहरा जनता के सामने आ चुका है। झारखंड की जनता भाजपा की इस साजिश का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
झामुमो छात्रों की जायज मांगों और लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान करता है। लेकिन छात्रों के नाम पर राजनीतिक अशांति पैदा करने और झारखंड की खनिज संपदा पर किसी बाहरी ताकत की नजर को स्वीकार नहीं किया जाएगा। झारखंड की संपदा झारखंडियों की है और इसके अधिकारों की रक्षा के लिए झामुमो पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा।
@JmmJharkhand
रांची में आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की दिशा में राज्य सरकार की ओर से एक और पहल की गई है।
आंदोलनरत छात्रों को दिनांक 17.08.2026 को दोपहर 2:00 बजे बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है। छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ बातचीत में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) एवं एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर द्वारा छात्रों को इस प्रस्ताव की जानकारी दी गई।
@ceojharkhand@ECISVEEP@prdjharkhand
झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा....
खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?
लोकसभा और राज्यसभा - दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है।
यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा।
झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। अगर केंद्र सरकार ने यह काला बिल वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।
हूल जोहार!
जय झारखंड!
आंदोलन होगा - देश का सबसे बड़ा आंदोलन होगा
भाजपा का यह काला कानून सिर्फ झारखंड के खनिज अधिकार पर हमला नहीं है।
इसका असर सीधे मंईयां सम्मान पर पड़ेगा।
खनिज से मिलने वाला ₹14,656 करोड़ का अनुमानित राजस्व झारखंड की महिलाओं, बच्चों और गरीब परिवारों पर खर्च होता है।
भाजपा चाहती है - खनिज कंपनियों को फायदा मिले, लेकिन झारखंड अपनी बहनों का सम्मान न कर सके।
खनिज बचाओ, मंईयां सम्मान बचाओ!