कुछ कलाकार पर्दे पर सिर्फ अभिनय नहीं करते, वे अपने किरदारों में जान डाल देते हैं।
नाना पाटेकर की अदाकारी, उनकी आवाज़ और उनका बेबाक अंदाज़ हमेशा दिलों में जिंदा रहेगा।
भारतीय सिनेमा में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
उनके जाने से कला जगत ने एक बेहद प्रतिभाशाली कलाकार खो दिया।
नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि। 🙏
#NanaPatekar
बिहार हो या पश्चिम बंगाल, SIR के नाम पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है?
ज्ञानेश कुमार कहते हैं कि वे देश की जनता के लिए काम करते हैं। लेकिन सवाल है - अगर जनता का वोट ही छिन जाए, तो जवाबदेही किसकी होगी?
वोट किसी सरकार या चुनाव आयोग की कृपा नहीं, हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर SIR के नाम पर योग्य मतदाता सूची से बाहर हो रहे हैं, तो यह सिर्फ एक नाम हटना नहीं, बल्कि एक नागरिक की आवाज़ को कमजोर करना है।
चुनाव निष्पक्ष तभी माना जाएगा, जब हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और उसे बिना किसी बाधा के अपना वोट डालने का अधिकार मिले। चुनाव आयोग को इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देना होगा।
- डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा
#SIR #CEC #GyaneshKumar #ElectionCommission #Election
सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन आज भी सुशासन और जनसेवा के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सिखाया कि नेतृत्व का सार सत्ता में नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही में है।
2 अक्टूबर 1904 को जन्मे शास्त्री जी की सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, राष्ट्रहित सर्वोपरि, किसान और जवान देश की ताकत। उनकी जयंती पर विनम्र नमन। 🇮🇳
#LalBahadur #जयजवानजयकिसान #सुशासन #जनसेवा
SIR को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं रह गए हैं। दो चुनाव आयुक्तों द्वारा बार-बार दर्ज कराई गई आपत्तियों ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर
गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जब मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो चुप्पी नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए।
CEC ज्ञानेश कुमार को देश के सामने बताना चाहिए - इन आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई और चुनाव आयोग के फैसलों में पारदर्शिता कितनी है?
लोकतंत्र में चुनाव आयोग जनता के विश्वास से चलता है। अगर उस विश्वास पर सवाल उठ रहे हैं, तो जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
— डॉ. मुनीश कुमार रायज़ादा
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#CEC #SIR #IndianPolitics #GyaneshKumar #VoterRights #ElectionCommission #Democracy
2022 में पंजाब के किसानों से बड़े-बड़े वादे किए गए। 22 फसलों पर MSP की बात हुई और यहां तक कहा गया कि सरकार बनते ही 5 मिनट में MSP लागू कर देंगे।
लेकिन अब सरकार के करीब साढ़े चार साल पूरे होने को हैं - तो सवाल है, उस वादे का क्या हुआ?
चुनाव के समय किसानों से किए गए वादे सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित क्यों रह गए? अगर सरकार अपने रिपोर्ट कार्ड में हर वादा पूरा करने का दावा कर रही है, तो किसानों को 22 फसलों पर MSP की गारंटी का स्पष्ट जवाब भी देना चाहिए।
पंजाब का किसान अब सवाल पूछ रहा है - 5 मिनट का वादा साढ़े चार साल में भी पूरा क्यों नहीं हुआ?
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#PunjabGovt #PunjabPolitics #FarmerWelfare
28 सितंबर - शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती।
भगत सिंह सिर्फ़ एक नाम नहीं, एक विचार हैं।
आज जब लोकतंत्र में सवाल पूछना, जवाबदेही और पारदर्शिता पहले से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं, भगत सिंह का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची देशभक्ति अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाने और व्यवस्था से सवाल करने का साहस भी है।
उनकी जयंती पर शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को विनम्र नमन।
#BhagatSingh #ShaheedBhagatSingh #BhagatSinghJayanti
"When voter lists lack transparency, democracy loses its most important foundation: public trust.” - Dr. Munish Kumar Raziada
#VoterList#ElectionCommission#Democracy
चुनाव आयोग के भीतर उठती आपत्तियाँ लोकतंत्र में पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं।
क्या Gyanesh Kumar देश के सामने जवाब देंगे❓
#ECI#Democracy#IndianPolitics
क्या भारत में चुनाव अब निष्पक्ष प्रक्रिया है या किसी के इशारे पर लिखी जा रही पटकथा❓
The Indian Express की रिपोर्ट ने चुनाव आयोग के भीतर के मतभेदों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार SIR, Form-6, वोटर डेटा और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई।
और सबसे गंभीर बात - रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कहा कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए।
क्या चुनाव आयोग तीन सदस्यों की संवैधानिक संस्था है या फिर CEC ही आयोग बन गया है❓
चुनाव किसी सरकार की संपत्ति नहीं, जनता के अधिकार हैं।
क्या Gyanesh Kumar को देश के सामने हर सवाल का जवाब देना चाहिए❓
#ElectionCommission #GyaneshKumar #ECI #SIR #Democracy #IndianPolitics
राष्ट्रकवि दिनकर जी की ओजपूर्ण लेखनी ने राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की चेतना जगाई।
उन्हें शत-शत नमन।
#RamdhariSinghDinkar#DinkarJayanti
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती पर शत-शत नमन।
उनकी कविताओं में छिपी ओजस्विता, राष्ट्रप्रेम और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ आज भी हमें प्रेरित करती है।
दिनकर जी ने अपनी लेखनी से केवल साहित्य को समृद्ध नहीं किया, बल्कि समाज में स्वाभिमान और जागरूकता की भावना भी जगाई।
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#RamdhariSinghDinkar #DinkarJayanti
गुरु नानक देव जी की धरती पर भ्रष्टाचार और नशे के सवाल आज भी कायम हैं।
पंजाब सरकार बताए गुरु की शिक्षाएँ शासन में कहाँ हैं?
#GuruNanakDevJi#PunjabGovernance
गुरु नानक देव जी की ज्योति-जोत दिवस पर पंजाब सरकार से सवाल है - गुरु की धरती पर आज भ्रष्टाचार, नशे और अपराध जैसी समस्याएँ क्यों बनी हुई हैं❓
गुरु नानक देव जी ने सत्य, ईमानदारी, सेवा और सदाचार का रास्ता दिखाया था। फिर पंजाब की राजनीति और शासन में इन मूल्यों की कमी क्यों दिखाई देती है? सरकार सिर्फ दावों से नहीं, जमीन पर बदलाव से जवाब दे।
गुरु की धरती को नशे और भ्रष्टाचार से मुक्त करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
#GuruNanakDevJi #PunjabGovernance
On International Day of Peace, we must ask ourselves: are we doing enough to stop wars, or are we only reacting after conflicts begin?
From the crisis in Yemen to tensions around Venezuela, conflicts and global power struggles continue to affect millions of people.
The world needs more than weapons. We need strong diplomacy, wise leaders and statesmen who choose dialogue over confrontation.
The United Nations was created to promote peace, but it must be given the strength and support it needs to address conflicts more effectively.
Peace cannot come through arms alone. We need peacemakers, dialogue and leaders who put human lives above political and geopolitical interests.
This International Day of Peace, let us invest not only in defence, but also in diplomacy, dialogue and humanity.
#InternationalDayOfPeace #InvestInPeace #Peace #Diplomacy #UnitedNations
19 सितंबर को 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे।
यह संधि दिखाती है कि पानी जैसे जीवन के आधार को लेकर सहयोग, संवाद और स्पष्ट नियम कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
आज जल संधि दिवस पर संदेश साफ है - नदियाँ सीमाएँ नहीं पहचानतीं। पानी सिर्फ संसाधन नहीं, आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। जल का न्यायपूर्ण, टिकाऊ और जिम्मेदार उपयोग ही भविष्य की सुरक्षा का आधार बन सकता है।
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#WaterTreatyDay #WaterSecurity #SustainableWater
पंजाब की AAP सरकार ने 4.5 साल में पंजाब को बर्बादी की राह पर पहुंचा दिया है। निकम्मी सरकार के पास जनता के लिए कोई ठोस काम नहीं।
अब संगरूर के स्कूलों में कथित फर्जी छात्रों और फंड गड़बड़ी के आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यानी अब शिक्षा के नाम पर भी जनता के पैसे में कथित घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं।
#PunjabGovt #Corruption #Education
On World Bamboo Day, let’s celebrate bamboo, a versatile, sustainable resource that supports livelihoods and a greener future.
From traditional crafts to modern innovation, bamboo proves that nature can inspire sustainable solutions.
#WorldBambooDay#Bamboo#Sustainability
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वो आपको लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य दें, ताकि आप ऐसे ही चौकीदार बनकर देश की सेवा करते रहें।
एक आम नागरिक होने के नाते, आज के इस खास दिन पर बधाई देने के साथ-साथ हमारी कुछ उम्मीदें भी हैं, जिसपर आपको ध्यान देना चाहिए।
अब देखिये सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने का दावा तो करती है, लेकिन 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' की करप्शन रिपोर्ट में भारत दुनिया के 182 देशों में 91वें नंबर पर है। हम अपेक्षा करेंगे कि आम जनता को दफ्तरों के चक्करों और रिश्वत से राहत मिले।
वहीं, ADR रिपोर्ट ये कहती है कि चुनावी चंदे में जो बड़ा हिस्सा होता है, उसपर सत्ताधारी पार्टी अकेले अधिकार जमा लेती है। लोकतंत्र है, तो सबको बराबर का मौका मिलना चाहिए। इसलिए चुनावी सुधार पर ध्यान थोड़ा प्रकाश डालिये, जिसमे पारदर्शिता हो और लोकतंत्र मजबूत हो।
हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में आप और आपकी पार्टी सिर्फ बड़े-बड़े वादे नहीं करेगी बल्कि जमीन पर सुधार की कोशिश करेगी। ताकि जनता का विश्वास भारत के लोकतंत्र पर हो।
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#CorruptionFreeIndia #IndianDemocracy
क्या UPI पर नया चार्ज सिर्फ आर्थिक फैसला है, या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है?
15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। ₹2,000 तक के पेमेंट और Person-to-Person ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग $311 अरब थी।
वहीं, 2026 की USTR रिपोर्ट में भारत की UPI और RuPay नीतियों पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दो अमेरिकी स्वामित्व वाली पेमेंट ऐप कंपनियां 31 दिसंबर 2025 तक UPI के 80% से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रही थीं।
तो सवाल है - क्या यह चार्ज UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए है, या अमेरिकी दबाव का भी कोई असर है? सरकार और NPCI को इसकी वजह और टाइमिंग साफ करनी चाहिए।
#UPI #Charges
Today, September 15, on the International Day of Democracy, we must ask the present government: have we become too accepting of corruption, poor public services, pollution, and broken systems?
Democracy is not just about voting or choosing a government.
It is about questioning those in power, demanding answers for failures, and ensuring that citizens’ voices are heard. A democracy is strongest when people refuse to accept poor governance as “normal.”
@NewsGramHQ@NewsGramHindi
#InternationalDemocracyDay #DriveForDemocracy