बहुत से लोग भारतीय आरक्षण की व्यवस्था को सही तरह से समझते ही नहीं हैं। भारतीय आरक्षण व्यवस्था में SC उम्मीदवार SC उम्मीदवारों से प्रतिस्पर्धा करते हैं, ST उम्मीदवार ST उम्मीदवारों से, OBC वर्ग OBC वर्ग के उम्मीदवारों से और सामान्य वर्ग (General Category) के उम्मीदवार सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से। कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद भी हर छात्र को परीक्षा पास करनी पड़ती है, सेमेस्टर क्लियर करने पड़ते हैं और न्यूनतम अंक लाने होते हैं। डिग्री किसी को आरक्षण के आधार पर नहीं मिलती, उसे अपनी योग्यता से पूरी करनी पड़ती है।
अब ज़रा उन लोगों से एक सवाल है जो हर समस्या का कारण आरक्षण को मानते हैं।
ILO की 2024 की भारत रोजगार रिपोर्ट के अनुसार:
2023 में भारत की कार्यशील आयु (15–64 वर्ष) की आबादी 97.2 करोड़ थी।
इनमें 58.6 करोड़ लोग रोजगार में थे।
संगठित क्षेत्र (सरकारी + निजी) में केवल 15.2 करोड़ नौकरियाँ हैं, यानी कुल रोजगार का लगभग 26%।
केंद्र और राज्य सरकारों की कुल नौकरियाँ मात्र 1.4 करोड़ हैं।
यानी भारत में हर 100 नौकरियों में केवल लगभग 2 सरकारी नौकरियाँ हैं और कार्यशील आयु के हर 100 भारतीयों में केवल लगभग 1.4 लोगों को ही सरकारी नौकरी मिल सकती है।
जब 98% से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी मिलनी ही नहीं है, तब पूरे देश की बेरोज़गारी और प्रतिस्पर्धा का दोष केवल आरक्षण पर डालना वास्तविक समस्या से ध्यान हटाना है। असली चुनौती पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना है।
मुझे आरक्षण से ज़्यादा चिंता उस जातिवादी मानसिकता की है, जो आज भी 2026 में ज़िंदा है। जब पूरे के पूरे समुदाय को बिना किसी आधार के "आलसी", "अयोग्य" या "कमज़ोर" कह दिया जाता है, तो यह साबित करता है कि जातिवाद आज भी समाज में गहराई से मौजूद है। यही मानसिकता समानता की सबसे बड़ी दुश्मन है।
अगर सामान्य वर्ग में आपका चयन नहीं हुआ, तो उसका कारण यह है कि आपके ही वर्ग के किसी दूसरे उम्मीदवार ने आपसे अधिक अंक प्राप्त किए। अपनी तैयारी बेहतर करने के बजाय हर असफलता का दोष आरक्षण पर डालना समाधान नहीं है।
इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि "आरक्षण क्यों है?" बल्कि सवाल यह होना चाहिए कि "जातीय भेदभाव आज भी क्यों है?"
जिस दिन भारत का समाज वास्तव में जातिवाद, ऊँच-नीच और भेदभाव से मुक्त हो जाएगा, उस दिन आरक्षण पर होने वाली बहस भी स्वाभाविक रूप से बदल जाएगी। लेकिन जब तक समाज में जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक असली लड़ाई जातिवाद के खिलाफ होनी चाहिए न कि आरक्षण को लेकर फैलाई जाने वाली गलतफहमियों और पूरे समुदायों को बदनाम करने वाली सोच के पक्ष में।
बिहार में छात्रों की आवाज़ को गोलियों से दबाने की कोशिश?
सिवान से आई खबरें बेहद चिंताजनक हैं।
लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ दबाना नहीं, सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।
मोदी जी, करोड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के बाद अब आधी रात की Reel से उनका वक़्त बर्बाद मत कीजिए।
प्रधान बर्ख़ास्त। दोषियों पर कार्रवाई। छात्रों से माफ़ी।
इससे कम कुछ भी मंज़ूर नहीं।
It was such a peaceful movement, feel so sad that it had to take a violent turn. My heart goes out to the students and their families who were hurt. Paper leak is a very serious issue, and I am glad to know n see that the kids of our country have come together for a better educational system, and their parents supported them.
I truly appreciate the stand they have taken, showing dedication, sincerity, and keenness to study hard n make their future and a greater, educated India. This andolan, this protest, is the right way to go abt it, n the students have done this peacefully. So courageous and brave. Driven and motivated towards education, this generation will make India proud.
This issue is between the students and the educational system, it should not be hijacked politically, the credit should only go to the students of our country, and I am sure the government will also give them all the support n make it a stronger educational system. It’s a win-win situation. Hoping n praying for a positive decision. God bless all of you who wanna be educated.
Education should be the next trend and fashion, and should get trendier n more fashionable yr by yr, itna k bahar se log come to India to study and India becomes an educational hub.
लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज़ को लाठी के बल पर कभी दबाया नहीं जा सकता।
छात्रों एवं युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आज माननीय कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी, नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी @RahulGandhi जी, संगठन महासचिव श्री के. सी. वेणुगोपाल जी तथा कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी के नेतृत्व में आयोजित लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में टोंक सवाई माधोपुर के सांसद श्री हरीश मीणा @HC_meenaMP जी ने साथी सांसदों के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस दौरान श्री हरीश मीणा ने कहा कि अपने भविष्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवाल उठाना देश के युवाओं का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। इन सवालों का उत्तर संवाद और जवाबदेही से दिया जाना चाहिए, न कि लाठीचार्ज और दमन से। छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विरुद्ध है।
कांग्रेस पार्टी देश के युवाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्षरत है और छात्रों की आवाज़ को संसद से लेकर सड़क तक पूरी मजबूती के साथ उठाती रहेगी।
श्री हरीश मीणा ने इस घटना की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
#RahulGandhi #HarishMeena #TonkSawaiMadhopurMP
छात्रों और युवाओं की आवाज़ को लाठियों और हिरासत के दम पर दबाया नहीं जा सकता।
आज छात्रों एवं युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार ने युवाओं की पीड़ा सुनने के बजाय दमन का रास्ता चुना और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष माननीय श्री राहुल गांधी जी एवं कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी सहित मुझे एवं साथी सांसदों तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया है।
यह लोकतंत्र की भावना और संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
देश का युवा अपने भविष्य, रोजगार और न्याय की बात कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार जवाब देने के बजाय लाठी और पुलिस का सहारा ले रही है। यह लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार का परिचायक है।
हम न डरेंगे,न झुकेंगे।
संसद से सड़क तक युवाओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
@INCIndia@kharge@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp@INCRajasthan
#Students #Youth #Democracy #Congress #ParliamentMarch
लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज़ को लाठी के बल पर दबाया नहीं जा सकता।
छात्रों एवं युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आज माननीय कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी, नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी, संगठन महासचिव श्री के.सी. वेणुगोपाल जी एवं कांग्रेस महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी के नेतृत्व में साथी सांसदों के साथ लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ।
देश के युवाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हम निरंतर संघर्षरत रहेंगे।
इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
@INCIndia@kharge@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp
#Students #Youth #Democracy #Congress #ParliamentMarch
राहुल गांधी @RahulGandhi ने बताया कि जब वे छात्रों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए लोकसभा स्पीकर से मिले, तो उन्हें जवाब मिला कि सरकार से पूछेंगे। यह अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर छात्रों के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दे पर भी संसद सरकार की अनुमति का इंतज़ार करेगी, तो लोकतंत्र में जवाबदेही किसकी होगी?
आज देश का युवा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली, वर्षों की देरी, बेरोज़गारी और विरोध करने पर पुलिस कार्रवाई जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। लाखों परिवारों की उम्मीदें दाँव पर लगी हैं, लेकिन सरकार की ओर से न जवाब है, न जवाबदेही।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह ग़लत है। प्रधानमंत्री को देश के छात्रों से माफ़ी माँगनी चाहिए। लेकिन वे चुप हैं। मैं छात्रों से मिलूँगा।
लोकतंत्र की असली ताकत संसद की इमारत नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ है और जब देश का युवा न्याय माँग रहा हो, तब चुप्पी समाधान नहीं हो सकती। यह सिर्फ़ छात्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य का सवाल है। जिन युवाओं के सपनों पर भारत का कल टिका है, उन्हें लाठी, चुप्पी और टालमटोल नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए।
जब सत्ता छात्रों की आवाज़ नहीं सुनती, तब इतिहास उनकी आवाज़ को और बुलंद कर देता है #RahulGandhi #ForStudents
आखिर नौबत आई ही क्यों?
25 दिनों तक सत्ता के कानों पर जूँ तक क्यों नहीं रेंगी?
आज तक इतनी बर्बरता शायद ही कभी देखने को मिली हो, जितनी आज जंतर-मंतर पर देखने को मिली।
लोग कह रहे हैं कि बैरिकेड्स तक में करंट लगाया गया।
आखिर सत्ता के आदेश किस हद तक पहुँच चुके हैं?
जो भी वीडियो सामने आ रहे है........
उनमें सिर्फ़ एक चीज़ दिखाई दे रही है
क्रूरता… बर्बरता… और संवेदनहीनता।