Journalist, Chief Editor @janmat24
ex reporter in IND 24,Pupils samachar किसान का बेटा,बोल्ड अक्षर में हिन्दुस्तानी लिखते है,MCU Bhopal से पत्रकारिता की है।।
जर्सी गाय
50 करोड़ की गर्लफ्रेंड
कांग्रेस की विधवा
हायब्रिड बछड़ा
ऐसी गालियां बोलने पर जिसके ऊपर कार्रवाई नहीं हुई वह आज़ इसलिए केस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें किसी ने गाली दिया !
20 से ज्यादा बच्चों ने आत्मह*त्या कर ली और यह सोचते हैं कि सब शहद टपकाए।
Ruchika Singh vs Riddhima Sharma..
One abused PM Modi, There is an FIR against her. She is being discussed on Multiple Television Anchors..
Another, Abused Mahatma Gandhi, She was invited to several programs where Modi was giving speeches, has met several Top BJP leaders despite her abuses to Mahatma Gandhi and to Minorities.
सावरकर न ईश्वर को मानते थे और न देवी देवताओं को।
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पड़पोते सात्यकि सावरकर ने कोर्ट माना
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सावरकर ने सनातन धर्म पर भी सवाल उठाए थे।
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'सावरकरांचे विज्ञाननिष्ठ निबंध' किताब अब कोर्ट के रिकॉर्ड में।
विस्तृत वीडियो की लिंक कमेंट बॉक्स में।
@AshokShrivasta6 साधु के भेष में रावण भी आए थे... मैं भी हिंदू हूं। ब्राह्मण हूं लेकिन इसमें मुझे कोई हिन्दू धर्म का अपमान नहीं लगा लेकिन जब बीजेपी चंदा चोरी करवाती है तब बुरा नहीं लगता तब सनातन धर्म का अपमान नहीं है..क्या?? हमारे हनुमान जी को अपनी पार्टी का झंडा लेकर नचवाते है तब अपमान नहीं
वाह! क्या संस्कार हैं!
प्रदर्शनकारियों की भाषा को अभद्र बताने वाला BJP IT सेल नाबालिग लड़कियों की निजी जानकारी लीक करके उन्हें रेप की धमकियां देने से बाज़ नहीं आ रही है।
There can be no filthier type of man than one who defends rapists.
Pralhad Joshi is an insult to our education system and an insult to every student in it. Crores of young women study in the institutions he now oversees.
India’s women will never accept PM Modi’s new Education Minister.
बिहार के बांकीपुर में ₹1.57 करोड़ की लागत से बने एक स्कूल कक्षा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। उद्घाटन मंत्री नितिन नवीन ने किया था। वीडियो में क्लास की हालत देखिए-
कॉंपती हुई आवाज़ में संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए इरफ़ान को सुना जाये, सड़क पर अपने हक़ के लिये उतरे हुए छात्रों में ना जाने कितने एैसे युवा हैं जिनके सपने चकनाचूर हैं।
इनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिये, आपको सैल्यूट इरफ़ान साहब❤️
@RubikaLiyaquat 🤣🤣😅😅😜😜
वो तो तुमको भी पता है कि तुम कैसी पत्रकार हो और कैसे जमीर बेच कर मीडिया हाउस में हो😜
देश का लोग तुमको क्या समझता है ये तुम अच्छे से समझती हो लेकिन थेथरई जरूरी है।
तभी थोड़ी बहुत क्रेडिबिलिटी बचेगी वो भी सिर्फ अंधभक्तों में 😅
पूरी दुनिया का एकलौता आंदोलन जिसमे
लाठीचार्ज को मैडल समझा गया, खुद पुलिस से पूछते रहे की वाटर कैनन और टियर गैस की व्यवस्था नही की क्या ?
बड़ी बड़ी एजेंसियां इस आंदोलन को डिकोड नही कर पाई
यह पहली बार है कि देश में शिक्षा के मुद्दे पर इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है।
इस सरकार की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ थी—डर।
लेकिन इन नए बच्चों ने उसी डर को मीम बना दिया है।
ये जेनरेशन सरकार, सिस्टम और पुलिस को एकदम ही सीरियसली नहीं ले रहे हैं।
पूरे सोशल मीडिया को कॉमेडी शो बना दिया है।
रील्स भरी पड़ी हैं।
सरकार को लगा था कि किसानों, ड्राइवरों या दूसरे आंदोलनों की तरह ये भी एक-दो दिन बाद रोज़ी-रोटी के लिए घर लौट जाएंगे। लेकिन यहाँ तो उल्टा हो गया।
सरकार ने इन्हें रील्स से निकलकर रियल लाइफ़ में डेमोक्रेसी जीने का मौका दे दिया।
सरकार और पूरा सिस्टम इनकी भाषा ही नहीं समझ पा रहा। दोनों के बीच इतना बड़ा जनरेशन गैप है कि लगता है पहले 4–6 महीने की "Gen-Z Language Workshop" करनी पड़ेगी।
मिलेनियल्स धड़ाधड़ डोनेशन कर रहे हैं। बोल रहे हैं। "भाई, हमारे कंधों पर बैठो, खाओ-पीओ और सिस्टम की बैंड बजा दो।
असल में मिलेनियल्स भी इसी शिक्षा व्यवस्था से बुरी तरह परेशान थे, लेकिन वे पुरानी पीढ़ी और उसकी मर्यादाओं के बीच फँसे हुए थे। ये वाली Gen-Z? इन्हें किसी की परवाह ही नहीं।
इन्होंने पूरी पार्टी और सरकार के IT सेल का गेम ही बिगाड़ दिया है। उन्हें कबाड़ा बना दिया है। इनके कंटेंट के सामने किसी का नैरेटिव टिक ही नहीं पा रहा।
मंत्रियों और सांसदों के ऑफिशियल पेज कमेंट सेक्शन में भर-भरकर ट्रोल हो रहे हैं। पूरा नैरेटिव वहीं पलट जा रहा है।
गोदी मीडिया को ये घुसने ही नहीं दे रहे हैं जबकि वे इस फोमो मे रील्स काटने के लिए लालायित बैठे हुए हैं।
इधर सरकार समर्थकों को भी आड़े हाथ ले रहे हैं। ऐसा ही रहा तो ये गोदी मीडिया की तरह समर्थकों का भी जीना मुश्किल कर देंगे। उनके भी अच्छे दिन आने वाले हैं। प्रोटेस्ट में जो भी समर्थक आ रहा है उसको ही पीट दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने भी इस दौर में जितनी ऑनलाइन आलोचना झेली है, शायद पहले कभी नहीं झेली होगी।
इनके लिए यह आंदोलन अब सिर्फ़ प्रोटेस्ट नहीं, बल्कि डेमोक्रेसी फेस्ट और डेमोक्रेसी की लाइव क्लास बन चुका है। और मज़े की बात यह है कि इस क्लास से कोई बंक मारना ही नहीं चाहता।
हर सीरियस बात, हर भाषा और हर एक्शन को इन्होंने मीम कल्चर में बदल दिया है। सामने वाले को समझ ही नहीं आ रहा कि इन्हें डील कैसे किया जाए। डिकोड कैसे करें।
अब यह आंदोलन सोनम, दीपक, दास या किसी एक चेहरे के हाथ में नहीं रह गया। यह पूरी तरह डिसेंट्रलाइज़ हो चुका है।
उधर पुरानी पीढ़ी के बुद्धिजीवी और एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रकाश राज जैसे नाम इनमें से बहुतों के लिए लगभग अप्रासंगिक हैं। वे उन्हें पहचानते तक नहीं।
पुलिस से जाकर पूछते हैं ये लाठी कितने में आती है, कोई पुलिस से पूछता है पुलिस अंकल नास्ते में मैगी मिलेगी क्या !
जब मूड होता है नाचने लगते है, आंदोलन स्थल देखते ही देखते किसी क्लब में बदल जाता है !
ये वो जनरेशन है जिसकी आँखों डर नही है, ये आंदोलन नये नये नारों और नए नए मीम के लिए याद रहेगा !
इस जनरेशन की भाषा समझ पाना भी सरकार के लोगों को मुस्किल है, इन्हें राजनीती से कोई लेना देना नही है इन्हें इनके हक़ से लेना देना है !
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन्होंने अपनी ही भाषा में आंदोलन को FOMO Event बना दिया है। अगर आज प्रोटेस्ट मिस कर दिया, तो लगता है कुछ बड़ा मिस कर दिया।
इनके लिए इस आंदोलन में आने का मतलब है कि गंगा नहा लिया।
और लाठी तो ये मेडल की तरह मान रहे