लल्लनटॉप के पत्रकार और असम के बड़बोले मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सारमा के बीच तीखी बहस हो गयी.
Lallantop : मुख्यमंत्री जी आपको नही लगता चुनाव प्रचार के आखरी चरण में आप की भाषा थोड़ी असंवैधानिक हो गयी थी.
Hemanta Sarma : लल्लनटॉप की भाषा मुझे पसंद नही है.
Lallantop : हमें आपका सर्टिफिकेट नही चाहिए 🔥
सौरभ द्विवेदी के जाने के बाद लल्लनटॉप की रीढ़ मजबूत हो गयी है. लल्लनटॉप के सरल सवालों से हेमंता को बुखार आ गया है. बीजेपी असम चुनाव साफ हार रही है, हेमंता के चेहरे पर साफ नजर आ रहा है.
उन्नाव
➡बीजेपी MLA अनिल सिंह का सपा पर बयान
➡सपा नेता बेरोजगार हो गए हैं
➡उनकी दलाली और धंधे बंद हो चुके
➡‘गैस, सिलेंडर पर अफवाह फैला रही है सपा’
➡सपा के लोग सिर्फ हवा बना रहे
#Unnao | @anilsinghmla167
#Unnao
उन्नाव में भूमाफिया इसरार पर प्रशासन का एक्शन
सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग
डीएम के निर्देश पर बुलडोजर एक्शन
करीब ढाई करोड़ की जमीन कब्जा मुक्त
#Unnao#LandMafia#BulldozerAction#zeeupuk
लखनऊ : जुमे की नमाज के बाद शिया समुदाय का प्रदर्शन
➡बड़ी संख्या में लोगों ने किया विरोध-प्रदर्शन
➡सऊदी अरब के शासन के खिलाफ की नारेबाजी
➡आतंकवाद विरोधी तख्तियां लेकर जताई नाराजगी
➡अमेरिका,इजरायल और सऊदी के खिलाफ लगे नारे
➡जन्नतुल बकी के पुनर्निर्माण की उठी मांग
➡प्रदर्शन को लेकर इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
➡बड़े इमामबाड़ा के बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात
#Lucknow #ShiaProtest #UPNews
पेशाब का इंफेक्शन यानी UTI. एक बहुत ही आम समस्या. आम है, इसलिए बहुत सारे लोग इसे सीरियसली नहीं लेते. पेशाब में जलन जैसे लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं. डॉक्टर को नहीं दिखाते. कभी शर्म के चलते. कभी ये सोचकर कि अपने आप ठीक हो जाएगा. लेकिन UTI पर ध्यान नहीं देना बहुत ख़तरनाक हो सकता है. इससे पायलोनेफ्राइटिस भी हो सकता है. ये एक सीरियस किडनी इंफेक्शन है.
डॉक्टर से जानिए, पायलोनेफ्राइटिस क्या होता है. इसके क्या लक्षण हैं? कौन लोग इसके ज़्यादा रिस्क पर हैं? साथ ही जानेंगे, इससे बचाव और इलाज?
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अखिलेश यादव बोल रहे थे
*पत्रकार ने उन्हें बीच में ही रोक दिया*
अखिलेश: आपका नाम क्या है?
पत्रकार: ज्ञानेंद्र
अखिलेश: कौन सा चैनल?
पत्रकार: ज़ी न्यूज़
अखिलेश: ज़ी न्यूज़ तो बीजेपी को बिक चुका है 😂
इतनी तगड़ी बेज्जती 😭
सादा जीवन, उच्च विचार.
@bstvlive के एडिटर इन चीफ आदरणीय बृजेश मिश्रा सर का हमारे बीच आना किसी सम्मान से कम नहीं। सादगी ही आपका सबसे बड़ा गहना है। पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मार्गदर्शन के लिए आभार सर.
@brajeshlive#Purwa#Unnao#UttarPradesh#Moments#lucknow
उत्तर प्रदेश विधानसभा में शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राएं माननीय अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी से भेंट कर विधानसभा की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त करते हुए।
@Satishmahanaup
उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार से ‘बाबा’ नाम बदलने को लेकर बजरंग दल ने हंगामा किया, वीडियो वायरल हुआ
◆ वीडियो में खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताने वाले शख्स ने बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में विरोध किया
◆ बहस बढ़ने पर दीपक और उनके साथी बजरंग दल कार्यकर्ताओं को धक्के देकर वहां से हटा देते हैं
#Kotdwar | Hindu Muslim | #Uttarakhand | Kotdwar | MohammadDeepak | #ViralVideo
जी न्यूज़ की रिपोर्टर मजार पर जूते पहन जा रही थी, जिसका विरोध मुस्लिम युवक ने किया.
बावजूद इसके जी न्यूज़ की रिपोर्टर जूते पहन गई. वीडियो लखनऊ का बताया जा रहा है.
यूपी की पत्रकारिता की एक बड़ी बुआ हैं।
झा साहब।
बड़ी बुआ इसलिए क्योंकि इनकी पूरी पत्रकारिता ही-
"उस नेता ने फोन पर किससे क्या कहा।"
"उसने खाना खाने के बाद कितनी बार डकार ली।"
"उसने सोते समय कितने मिनट खर्राटे लिए।"
"उस नेता ने आज फ्रेश होने में कुल कितना वक्त लिया। "
जैसी चंडूखाने की सुपर मार्केट में बिक रही अफवाहों की नई नई सब्जियों पर आधारित रहती हैं।
बुआ बाहुबलियों की सबसे बड़ी सलाहकार हैं और अपनी उलूल-जुलूल सलाहों से उनके भविष्य का पर्चा फाड़ती रहती हैं।
हाल ही में इन्होंने सवालों के घेरे में घिरे एक बाहुबली को इंटरव्यू देने की सलाह दे डाली।
बाहुबली के लिए ये शांत रहने का सबसे मुफीद समय था,
क्योंकि किसी भी एजेंसी, किसी भी सरकार या फिर उनके किसी भी विरोधी ने उनका नाम लेकर कोई आरोप लगाया ही नहीं था।
हकीकत भी यही थी कि उनका नाम परिस्थितजन्य साक्ष्यों में सामने आ रहा था।
कोई डायरेक्ट साक्ष्य अभी तक सामने नहीं आया था।
इसके बावजूद यूपी की पत्रकारिता की बड़ी बुआ ने उन्हें इंटरव्यू देने की सलाह देकर बेवजह ही सारा फोकस उन पर केंद्रित करवा दिया।
बड़ी बुआ इससे पहले भी पारिवारिक मामलों में घिरे एक बाहुबली को पत्रकार पर एफआईआर कराने की सलाह देकर उनकी भारी किरकिरी करा चुकी हैं।
उस केस में भी मामला पारिवारिक था। केस कोर्ट में था।
कोर्ट में गए हर केस की रिपोर्टिंग होती है। इसकी भी होनी ही थी। शुरूआत कोई भी करता।
वही हुआ भी।
आज तक उन बाहुबली का केस चप्पे चप्पे पर छाया हुआ है, क्योंकि इसमें किसी बाहरी का कोई रोल न था और न हो सकता था।
मगर बुआ वहां भी एक्टिव थीं और सब गुड़गोबर करके मानी।
बुआ इन दिनो इसलिए भी बेहद चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने अपनी कलम को ही कोडीन की कफ सिरप पिलाकर सुला दिया है।
हर मामले में तीन-पांच करने वाली बुआ कोडीन कफ सिरप के मामले में रहस्यमय ढंग से खामोश हैं।
वे भगौने से चुपचाप दूध पीकर भागने वाली बिल्ली की तरह इस मामले से नौ-दो-ग्यारह हो चुकी हैं,
क्योंकि बाहुबली उनके अच्छे दोस्त हैं।
बुआ जब से पुराने समूह से 'जबरन' विदा की गई हैं और नए समूह में आई हैं,
उन्होंने अपनी वही पुरानी तीन-पांच वाली तिया-पांचा टाइप पत्रकारिता से अपने नए समूह की 'टॉप' पत्रकारिता को ही 'लल्लन' बना दिया है।
ऐसा होगा नहीं, बावजूद लग तो यही रहा है जैसे बुआ ने पूरे समूह को कोडीन मामले में खामोश रहने की कोई डील करा दी हो।
बुआ कुछ भी कर सकती हैं।
वे अपनी इसी तीन-पांच टाइप पत्रकारिता के चलते आज़म ख़ान की बेगम की बहन जी से मुलाकात भी करा चुकी हैं।
बड़ी बात ये भी रही कि इस मुलाकात की ख़बर सबको लगी, सिवाए बहन जी के।
मुझे लगता है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष और संघ के स्वयंसेवक सौरभ मालवीय को बुआ को ससम्मान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में आमंत्रित करना चाहिए-
और 'पत्रकारिता के बुआकरण' विषय पर उनका एक भाषण आयोजित करना चाहिए।
पत्रकारिता के नए छात्र अगर इस विधा को नहीं समझेंगे,
तो जैसे प्रयोग में न होने के चलते पालि और प्राकृत सरीखी भाषाएं विलुप्त हो गईं, वैसे ही एक रोज़ ये 'बुआ' पत्रकारिता भी विलुप्त हो जाएगी।
और ये तीन-पांच टाइप पत्रकारिता की अपूर्णीय क्षति होगी!!
विशाल_विश्लेषण- यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी और योगी आदित्यनाथ दोनों #गोरखपुर से आते हैं। यानि सरकार और संगठन दोनों का केन्द्र गोरखपुर होगा।
पंकज चौधरी और योगी आदित्यनाथ के रिश्ते बहुत मधुर नहीं हैं। हाल ही में पंकज चौधरी के एक कार्यक्रम में पोस्टर में योगी की तस्वीरें नहीं थीं, जिस पर विवाद हुआ था। हालाँकि वो पोस्टर समर्थकों ने लगवाए थे।
वहीं राजनीति के मिस्टर धैर्य माने जाने वाले राजनाथ सिंह के सबसे ख़ास माने जाते हैं पंकज चौधरी। पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। क्या राजनाथ सिंह यूपी में फुल एक्टिव हो रहे हैं ? यह एक बड़ा सवाल सियासी गलियारों में गूंज रहा है।
राहत रूह से भी पंकज चौधरी का जुड़ाव है। विवादों से बचने की कोशिश करते हैं और लो प्रोफ़ाइल रहते हैं। एक ईमानदार नेता की छवि है।
खूबी यह भी है कि किसी भी ताकतवर व्यक्ति से उलझते नहीं हैं। हमेशा निशाना दूसरे का कंधा इस्तेमाल कर लगाते हैं।
1989 में पहली बार गोरखपुर नगर निगम में पार्षद बने और फिर डिप्टी मेयर. 1991 में बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने। 1991 में पहली बार महाराजगंज लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
2009 में कांग्रेस से महाराजगंज लोकसभा सीट हार गए। इस चुनाव में पंकज चौधरी तीसरे नंबर पर रहे थे। दूसरे नंबर पर बसपा रही थी।
2014 और 2019 में महाराजगंज लोकसभा सीट से लंबे अंतर से चुनाव जीते लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में ओवर कॉन्फ़िडेंस में एक बयान दिया और हांफते हाँफते 35 हज़ार वोटों से चुनाव जीते। उनके अपने बूथ के आँकड़े बहुत बेहतर नहीं रहे।
महाराजगंज ज़िला पंचायत अध्यक्ष पर हमेशा इनके ही आदमी का क़ब्ज़ा रहता है। पक्ष और और विपक्ष दोनों से संबंध ठीक करते चलते हैं पंकज चौधरी।
पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुर्मी वोट बैंक को बीजेपी की तरफ वापसी कराना होगा, जो कि 2022 के विधानसभा चुनाव से सपा की ओर जा चुका है। चुनौती सपा के क्षेत्रीय कुर्मी क्षत्रप जैसे रामप्रसाद चौधरी, लालजी वर्मा से भी होगी।
क्या पंकज चौधरी के माध्यम से एक संदेश बीजेपी के सहयोगी दल अपना दल (एस) को भी दिया गया है ? क्योंकि अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल भी कुर्मी वोट बैंक की राजनीति करती हैं।
पंकज चौधरी के माध्यम से स्वतंत्र देव सिंह के अरमानों पर भी पानी फिरता दिख रहा है। वो भी कुर्मी समाज के नेता के तौर पर खुद को स्थापित देखना चाहते हैं।
पंकज चौधरी से पहले स्वतंत्र देव सिंह, ओम प्रकाश सिंह, विनय कटियार भी कुर्मी समाज से यूपी में बीजेपी के अध्यक्ष चुके हैं।
बीजेपी ने 2027 चुनाव से पहले कुर्मी कार्ड खेला है, यह एक अच्छा राजनीतिक दांव है। लेकिन इस समाज को पूरी तरह से किसी एक पार्टी के पक्ष में ले जाना अब तक असंभव रहा है। वो फिर चाहे बेनी प्रसाद वर्मा हों या फिर विनय कटियार, ये भी ये काम नहीं कर पाए।
#Kanpur में शादी समारोह में कैमरामैन पीटा गया, आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक ने अपने गुर्गे के साथ मिलकर एक कैमरामैन को शादी समारोह के दौरान जमकर पीटा, मारपीट के दौरान युवक के शरीर में आई गंभीर चोटें, बिठूर थाना क्षेत्र का मामला।
@Uppolice@dgpup@kanpurnagarpol
भारतीय निर्वाचन आयोग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करा रहा है
◆ वर्क प्रेशर के कारण कुछ बीएलओ के आत्महत्या की खबरें भी सामने आईं
◆ चुनाव आयोग ने SIR में लगे बीएलओ और सुपरवाइजर की सैलरी दोगुनी करने का बड़ा फैसला लिया
#ElectionCommission | Voter List | #SIR | #BLO | #SalaryHike
SDM का गुस्सा,BLO पर भड़का...
यूपी बस्ती सदर तहसील के डारीडीहा
SIR प्रपत्र कलेक्शन को लेकर बूथों पर पहुंचे एडीएम और एसडीएम ने
बीएलओ को लगाई फटकार।अन्य जिलों में में SIR फार्म भरने का क्या हाल है?