अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा बयान
"सालों तक, भारत ने अमेरिका का बहुत फ़ायदा उठाया। उन्होंने हमसे बहुत ज़्यादा टैरिफ़ लगाए और हमें कुछ नहीं दिया, हार्ले डेविडसन पर 200% टैरिफ़ लगाया… लेकिन ये मुझसे पहले की बात थी। अब इसका उल्टा होगा। अब हम भारत से बहुत पैसा कमाएँगे”
इतना बोलने के बाद ट्रंप ने फिर प्रधानमंत्री मोदी की तारी��़ कर दी और कहा
"हम एक व्यापार समझौता डील करेंगे क्योंकि मुझे आपके PM बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं, और हमारी अच्छी बनती है। हमारे बीच अच्छे रिश्ते हैं"
चैनलों पर हो सकता है कि सिर्फ़ दोस्ती और तारीफ़ वाली ख़बर दिखे, उसके पीछे की मंशा जानिए
लखनऊ का दिल, डॉक्टर्स की सेवा इंदिरा नगर सी ब्लॉक के प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर फरहान अ��मद खान, खुर्शीद आलम खान और इमाद खान साहब ने आज बड़ा मंगल के पावन अवसर पर सच्ची श्रद्धा और करुणा का भंडारा रखा।
जो लोग बीमारियों से जूझते हुए भी दूसरों के दर्द को समझते हैं, उन्होंने आज न सिर्फ इलाज, बल्कि पेट की भूख भी मिटाई।
पूरी-सब्जी-छोले-चावल, केला और बूंदी के साथ खिलाया वो प्यार, जो दवाइयों से भी ज्यादा असरदार होता है। ये डॉक्टर सिर्फ शरीर नहीं, समाज की आत्मा को भी छू रहे हैं।
सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है।
डरना मत मेरे बच्चे… तुम्हें कुछ नहीं होगा…
माँ ने कांपते हाथों से उसे अपने सीने से लगा लिया। बच्चे की धड़कन तेज़ थ��, आँखों में डर साफ़ दिख रहा था… लेकिन माँ के चेहरे पर अजीब सी शांति थी। लेकिन वो शांति नहीं, टूटने से पहले की आख़िरी मजबूती थी।
वो जानती थी… ये आख़िरी बार है। आख़िरी बार वो अपने बच्चे को ऐसे गले लगा रही है, आख़िरी बार उसके बालों को सहला रही है, आख़िरी बार उसकी सांसों को अपने करीब महसूस कर रही है।
बच्चा मासूम था… उसे क्या पता ज़िंदगी और मौत के बीच की इस खामोश लड़ाई का। वो तो बस अपनी माँ पर भरोसा कर���े आँखें बंद किए था। उसे यकीन था माँ है ना… कुछ नहीं होगा।
लेकिन उस माँ के अंदर एक तूफान चल रहा था। वो चाहकर भी अपने बच्चे से सच नहीं कह सकती थी। वो बस उसे दिलासा दे सकती थी, झूठी उम्मीद दे सकती थी… क्योंकि माँ कभी अपने बच्चे को डरते हुए नहीं देख सकती।
और फिर… कुछ पल बाद सब खत्म हो गया।
पीछे रह गई सिर्फ़ खामोशी…एक ऐसी खामोशी, जिसमें चीखें दब जाती हैं, आँसू सूख जाते हैं और सवाल ज़िंदा रह जाते हैं।
कभी-कभी सच में ईश्वर से लड़ने का मन करता है…
मन पूछता है…कैसा न्याय है ये? किस गलती की सज़ा थी ये?
उस मासूम ने क्या बिगाड़ा था… और उस माँ का कसूर क्या था?
जबलपुर की ये घटना सिर्फ़ एक खबर नहीं है… ये एक जख्म है।
ऐसा जख्म, जो शब्दों से नहीं भरता। जिसे पढ़कर सिर्फ़ आँखें नहीं भीगतीं… बल्कि दिल भी भारी हो जाता है। कुछ कहानियाँ खत्म नहीं होतीं… वो हमारे अंदर हमेशा जिंदा रह जाती हैं, एक सवाल बनकर।
क्या सच में ऊपर कोई न्याय करने वाला है…?