आजतक शिव पर ऐसा सरल एवं गूढ़ लेख कहीं नहीं पढ़ा। 👏🏻👏🏻👏🏻
महादेव आप पर कृपा बनाए रखें 🔱 @RebornManish
पोलिटिकल रिफरेन्स के माने भी शिव का नाम आते ही और भी गहरे हो गये।
शिव देवाधिदेव हैं..
वे देवो के देवता है। मनुष्यों के देव हैं, महादेव हैं।
लेकिन वे दैत्यों के भी देवता हैं।
हर असुर ने उनका पूजन किया, वरदान पाए। शिव ने भक्त भक्त में भेद नही किया। उसकी जाति नही देखी, रंग और पूजन पद्धति का भेद नही देखा।
वे तो मानव और पशु का भी भेद नही देखते। तो पशुओं के भी देवता वही है, पशुपति हैं।
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शिव चतुर और कुटिल चाणक्य नही हैं, वे तो भोलेनाथ हैं, औघड़ दानी है।
शिव की महानता उनकी इसी साधारणता में है।
हीरे- मोती- सिक्के और नोट नही जनाब, वे बेल के पत्तो में खुश है।
कतरा भर भांग की बूटी में खुश हैं, धतूरे के एक फूल, बेल के तीन पत्तो से खुश हैं। श्मशान की राख से खुश हैं।
क्या कीर्तन, भजन, संगीतय आराधना- शिव तो अनगढ़ डमरू की आवाज में खुश हैं।
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कोई विधि नही, नियम नही, शिव की आराधना कीजिए, तो बस, उनका नाम लीजिए।
या न भी लीजिए।
क्योकि शिव ही सत्य हैं, सुंदर हैं। तो जिसमे सत्य है, सुंदरता है, वह शिव ही है। लेकिन यहां तो सुंदरता भी बाधा नही। उनके गण, उनके भक्त, असुंदर भी है..
चलेगा।
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गंजेड़ी, भंगेड़ी, शराबी भी बिना अपराध बोध के, भरपूर नशे में प्रभु को याद करता है, तो जै भोलेनाथ ही कहता है।
तो क्या आश्चर्य की शिव सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देव हैं। विश्वास नही??? तो जरा आंख बंद कीजिए, अपने घर से पांच किलोमीटर के दायरे में सारे छोटे देवस्थलों को याद कीजिए।
मेरा दावा है आपको, सत्तर प्रतिशत सिर्फ शिव के स्थान मिलेंगे। 20 प्रतिशत हनुमान हैं, और बाकी तमाम देवता मिलकर शायद 10% भी आराध्य नहीं।
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कारण उनकी सरलता है। शिव को मंदिर नही चाहिए। तालाब के किनारे, वृक्ष के नीचे, घने वन में, सड़क के किनारे, खुले में शिव बैठे हैं, और मस्त हैं।
उसी लोटे से तालाब में खुद नहाइये, और फिर उसी तालाब का पानी, उसी लोटे में भरकर, तालाब के किनारे शिवलिंग पर चढ़ा आइये।
शिवा इज मोर देन हैप्पी!!!
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तो ईश्वर अगर सर्वव्यापी है, तो शिव को इस कसौटी में 100 में से 100 नम्बर हैं।
वे कण कण में हैं, गण गण में, घट घट में हैं। स्फटिक नही, सोना नही, हीरा नही, संगमरमर नही,। हर मामूली पत्थर, बर्फ का टुकड़ा, मिट्टी की लोई, शिव बन सकती है,
महादेव हो सकती है।
मगर जब भाजपा जब शिव को खोजती है, राम को खोजती है- तो जाने क्यूँ, मस्जिदों में, फवारो ही खोजती है।
पुलिस और न्यायालय से सर्वे करवाती है।
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शिव बेशक उस फवारे में भी है। वे किसी मस्जिद में भी धूनी रमाये हुए हैं। यह मानने के लिए कोर्ट से सर्वे करवाने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिन्होंने शिव को लिंग में, शिवालयों में, महालयों में कैद करने का षड्यंत्र किया है।
वही लोग,जिन्होंने हर-हर और घर-घर के नारे से महादेव को हटाकर, किसी मलिन को स्थापित कर दिया है।
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आज शिव संसद में दिखे। उनकी निडरता, उनकी सरलता, उनकी अभय मुद्रा पर बात हुई, तो सबने देखा, सत्ता पक्ष कैसा भयभीत हो गया..
राम के नाम पर राजनीति करने वालो को, सदन में शिव की तस्वीर असंसदीय लगी।
वे जानते हैं, कि शिव तो सत्ता नही देखते, पक्ष और विपक्ष नही देखते। उन्हें अपने गण प्रिय है। अपने जन प्रिय है।
जन गण मन की वे जाति नही देखते, धर्म नही देखते। बस पीड़ा देखते हैं। और उनकी आर्तनाद पर त्रिशूल उठाये दौड़े चले आते है।
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और जिस सदन की दरो दीवार पर जन गण मन पर अत्याचार के जोशीले नारे गूंज चुके हैं, वहां शिव के पदार्पण से मैं भी डरता हूँ।
जाने किसकी अनकही आर्तनाद शिव सुन लें।
दौड़े आयें।
त्रिशूल से वज्रपात हो, मृत्यु का तांडव हो, और तीसरा नेत्र, तिनकों से बने साम्राज्य को भस्म कर दे।
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डरता हूँ मैं..
तुम भी डरो।
हम सब डरें। क्योकि तिनकों से बने अत्याचार के साम्राज्य के बीच ही कहीं तुम्हारा और मेरा घरौंदा भी है।
और शिव का ज्वाल रोकना कठिन है। शिव का क्रोध असीमित है। शिव से बड़ा काल अभी तक कल्पित नही हुआ।
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दौर पलट रहा है। शिव करीब हैं।
तो अपने कर्म से डरो, उसके फल से डरो।
काल के क्रम से डरो।
महाकाल के न्याय से डरो।
ये तो बड़ी सुंदर बात है!
जो भक्तिन टसुवे बहाते हुए कह रहीं थीं कि मोदी जी तो मेरा भगवान है, मेरा सपना था कि एक बार मोदी जी को छू सकूं, उनका सपना पूरा होने जा रहा है!
Welcome back to India, the heaven on the Earth!
अब आप रोज मोदी जी के दर्शन कर सकती हो!
😂👍🥰😍
मार्च में राहुल गांधी जी और विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा मांगी तो स्पीकर ने कहा, कांग्रेस ₹9 करोड़ बर्बाद कर रही है।
तब मोदी सरकार कह रही थी, “सब ठीक है।”
अब मई में अचानक मोदी जी को संकट दिखने लगा।
तो राहुल गांधी सही थे, या देश को गुमराह किया गया?
hey @claudeai
not asking you for any favour, this just a feedback, you can acknowledge at least.
you are the most ethical AI as of now, show some respct to this.
@claudeai
Pro variant is not for chitchat, but for something serious
Free user have only 5 hour reset; Pro has another illogical weekly limit on his head.
But why to paralyse him till weekend? at least downgrade to free type, out of sight-out of focus, don’t kill the momentum.
दिन-रात सोते-जागते उठते-बैठते आपको विकसित भारत का सपना दिखाया जाता है
उस विकसित भारत के लिए सबसे ज़रूरी है अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था
लेकिन फेक डिग्री वालों की सरकार में शिक्षा बदहाल है
आज देश में 👇
▪️1.19 लाख स्कूलों में बिजली नहीं है
▪️98,592 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं है
▪️61,540 स्कूलों में एक भी शौचालय नहीं है
▪️14,505 स्कूलों में पानी की व्यवस्था नहीं है
▪️1.04 लाख स्कूलों में सिर्फ एक टीचर है
▪️2015-2025: 94,000 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं
▪️2005 में सरकारी स्कूल में एनरोलमेंट 71% था, 2025 में घटकर 49.24% हो गया है
सरकारी स्कूल की खस्ताहाल हालत की वजह से ही लोग प्राइवेट में बच्चों का नाम लिखाने को मजबूर हैं - जहां मनमानी फीस वसूली जाती है, और फीस ना देने पर बेइज़्ज़त किया जाता है
खैर, शिक्षा पर चर्चा करके मोदी जी अपना वक़्त थोड़े ही बर्बाद करेंगे. चुनाव आयोग ज़ेब में है, उन्हें कौन सा आपके बच्चे का भविष्य संवार करके चुनाव जीतना है
और BJP मंत्रियों के बच्चे तो विदेश की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं - तो आपके बच्चों के सरकारी स्कूल बदहाल हों इससे उन्हें क्या?
लेकिन अपने बच्चों के बारे में आप नहीं सोचेंगे तो कौन सोचेगा - यह बात भी आपको सोचनी है
❗वाशिंग मशीन का कमाल
१) शुभेंदु अधिकारी जब TMC में थे तब कैमरे सामने कैश लेते पकड़े गए।
Narda स्टिंग ऑपरेशन के इस वीडियो को बीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर जारी किया।
शुभेंदु का नाम सारदा चिट फंड में भी शामिल रहा था।
२) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आमसभा में इस मुद्दे पर टीएमसी और शुभेंदु अधिकारी की जमकर खिल्ली उड़ाई।
मंच पर घूस लेने की मिमिक्री भी करके दिखाई।
३) बाद में शुभेंदु अधिकारी बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी ने अपने सारे सोशल मीडिया प्रोफाइल से शुभेंदु का वीडियो डिलीट कर दिया।
४) शुभेंदु अब बंगाल के मुख्यमंत्री बन रहे हैं। अमित शाह ने उन्हें माला पहना कर विधायक दल का नेता बनने पर माला पहनाई।
उनके शपथ समारोह में खुद प्रधानमंत्री शामिल होंगे।
शेष शुभ है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि मैं नरेंद्र मोदी का करियर तबाह कर सकता हूं
इसके दो कारण हैं 👇
⦿ Epstein फाइल
⦿ अडानी पर केस
@RahulGandhi
📍 गुरुग्राम, हरियाणा
वाय ही इज माई फेवरिट!!
तमाम चुनावी हार और सांगठनिक समस्याओं के बावजूद यह शख्स मेरा फेवरिट पोलटिशियन है।
लोग कहते है कि तुम्हे इसमे दिखता क्या है??
ओके, तो आज बताता हूँ, कि मुझे राहुल में क्या नजर आता है।
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गिनीज बुक वाले अगर चेक करें, तो पाएंगे, कि मानव इतिहास के 5000 साल मे, किसी का सबसे ज्यादा अपमान, लानत- मलामत की गई, तो वह शख्स राहुल है।
जबकि वे कोई हिटलर, चंगेज या ईदी अमीन नही। उसने कोई अमानवीय, अकरणीय काम नही किया।
कमी यही कि एक खास खानदान में जन्मे है। उन्हें हटाने, हिलाने, गिराने के लिए, एक वेल फंडेड, वेल कोर्डिंनेटेड, ऑर्गनाइज्ड कैम्पेन- बरसों बरस से जारी है। और भीतर की मजबूती देखिए..
बंदा हिलता नही।
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दुनिया मे कौन है जिसके पिता, माता, बहन, के साथ दादा, दादी, परनाना और लकड़नाना तक जाकर गालियां दी गयी।
पुरखो की गंदी कहानियां बनाई। और जवाब छठी पीढ़ी के बालक से मांगा???
अनप्रिसिडेंट इन ह्यूमन हिस्ट्री!!!
लेकिन यह शख्स हंसता रहता है। पलटकर जवाब नही दिया, तल्खी नही दिखाई। किसी के लिए मुंह से एब्यूज न निकाला, बदला नही चुकाया।
मोहब्बत की दुकान की बात करता है। गाली देने वालो को गले लगाता है। धोखा देने वालो को भी शुभकामनाएं देता है। ऐसे व्यक्ति से कोई नफरत कैसे कर सकता है?
मैं तो नही।
लेकिन कारण और भी है।
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आप इमरजेंसी को क्यो याद करते हैं, क्यो??
इसलिए कि राहुल डेमोक्रेटिक है।
अपनी मर्जी पर भी दूसरों की इच्छा चलने देते हैं। मित्रों की सुनते मानते हैं। सामने वाले की तानाशाही को जस्टिफाई करने के लिए यह कहना सम्भव नही कि- अरे, तुम खुद भी तो तानाशाह हो।
क्या करें? तो याद दिलाओ, इमरजेंसी..
"कि अरे, तुम नही तो क्या, तुम्हारी दादी तानाशाह थी"
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नेहरू की औरतों के साथ तस्वीरे लगाते हैं, क्यो?
क्योकि स्नूपिंग करने वाले, अपनी बीवी को छोड़, दूजी महिलाओं को गंदी निगाह से ताड़ने वाले नेता के बचाव में, आप ये नही कह सकते- कि राहुल, तुम भी तो चरित्रहीन हो!!
उसके दो दशक के राजनीतिक कॅरियर में चरित्रहीनता का लेशमात्र भी आरोप नही। अब अगर तुम चरित्रहीन नही- तो तुम्हारा परनाना तो था।
ये देख फेक फ़ोटो।
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1947 से लेकर बोफोर्स तक घोटालों की लम्बी सूची दिखाते है। क्यो??
इसलिए कि 2004 से लेकर केंद्र और राज्यो की तमाम सरकारों को एक फोन लगाकर, बड़े से बड़ा काम करवाने की हैसियत राहुल की थी-
एंड डोंट माइंड- 2014 के बाद भी है।
लेकिन ठेका, रुपया, कमीशन, आय से अधिक सम्पत्ति भ्रष्टाचार का चिन्दी भर भी आरोप राहुल पर नही। तब आप 1957 और 1987 के आरोप दोहराते हो- तू नही..
तेरा बाप तो करप्ट था।
अब अलग बात की वे केस भी हवाई निकले थे।
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आप 84 के दंगे याद करते हो-क्यो?
क्योकि UPA से लेकर अब तक MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल जैसी सरकारे दंगामुक्त रही। झारखंड महाराष्ट्र में उसकी समर्थंक सरकारों पर भी दाग नही।
याने दंगाई संस्कृति के लोग, राहुल की सरकारों पर दंगापरस्त होने का आरोप नही लगा सकते।
तो जा- तेरा बाप तो दंगापरस्त था।
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जो अवगुण राहुल में नही, वो पुरखो में खोजे जाते हैं। और पुरखो पर इतने सारे अवगुण थोपे गए है, शायद कोई अपकर्म शायद बचा न होगा।
रिट्रोस्पेक्ट मे आप मान लें, की हर वो मानवीय, या राजनीतिक अवगुण, जिस जिसकी कोई कल्पना कर सकता है- एक भी राहुल में नही मिला।।
इनफैक्ट, बार बार नेहरू, इंदिरा, राजीव, औरंगजेब, गजनवी, गौरी, पृथ्वीराज चौहान के गीत गाने का मतलब ही यही है..
कि सामने खड़े राहुल में कोई कमी, तो उनके चैलेंजर्स भी नही खोज पा रहे।
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वो भी तब, जबकि ये लोग 12 साल से दिन रात राहुल के इर्द गिर्द आईबी, रॉ और फूल छाप कांग्रेसी घुसाकर निगरानी रखते है। पेगागस लगाकर उसके फोन तक में घुसे रहते है-
उन्हें अगर 12 साल के बाद भी कोई चारित्रिक, भ्रष्टाचार, पैसे के लेनदेन या और कोई भी लूज पॉइंट नही मिल सका। तो मान लीजिये कि ऐसे शख्स के जोड़ का मनुष्य ..
इस धरती पर तो मौजूद नही।
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ऐसे में भारतीय राजनीति के राक्षसी जंगल मे..
गन्दे दांतो, लम्बी दाढ़ी, और टकले सर वाले तमाम रक्तपिपासु दैत्यों के बीच, यदि कोई एक श्वेतवर्णी मुनि दिखाई देता है-
तो वह राहुल है। एंड दैट इज वाय
ही इज माई फेवरिट!!
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एक सेमिनार में पत्रकार ने जापान के एक मंत्री से पूछा आप सत्ता में आने के बाद क्या महसूस करते हैं
जापानी मंत्री- हमारे पास 2 विकल्प होते हैं पहला ईमानदारी से देश की सेवा करें और देश को आगे ले जाएं भले ही पैसा न जोड़ पाएं.
दूसरा चोरी चकारी करें .
भ्रष्टाचार करें और अरबपति बन जाएं.
हम पहला विकल्प चुनते हैं.
वही सवाल वकांडा के मंत्री से पूछा गया
वकांडा के मंत्री का जवाब हमारे सामने भी वो ही 2 विकल्प होते हैं पर पहला वाला हमेशा जापानी ले लेते हैं तो मजबूरन हमे दूसरा वाला लेना पड़ता है.
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@budhwardee@SitaRam62548073 कांग्रेस है ?
सिर्फ़ राहुल गांधी जी के भाषण तक
या सुप्रिया श्रीनेत के ट्वीट्स में
उसके आगे पीछे कहीं नहीं?
पोलिटिकल एक्टिविज्म और पॉलिटिक्स में बहुत अंतर है।
समझते तो वो सब हैं लेकिन करते कुछ नहीं।
ग्राउंड लेवल कार्यकर्ताओं की धौंस और कार्यशैली, ऊपरी नेतृत्व से मेल नहीं खाती