पहले लोकसभा चुनाव में बाड़मेर के 'उंडू-काश्मीर' (लोकदेवता बाबा रामदेव जी का जन्मस्थान) को सीधे 'जम्मू-कश्मीर' पहुँचा दिया... और आज पचपदरा में साक्षात 'पीपल' लगाकर उसे 'खेजड़ी' बता दिया।
तस्वीर गवाह है कि महामानव की पीआर टीम को राजस्थान के भूगोल और संस्कृति की कतई समझ नहीं है।
खैर, गलती टीम की भी नहीं है; जैसा झूठ ऊपर परोसा जा रहा है, वैसे ही यहाँ की पर्ची सरकार भी दिल्ली को मिसगाइड कर रही है कि "राजस्थान में बहुत जोरदार काम हो रहा है", जबकि ज़मीनी सच्चाई में खेजड़ी और पीपल जैसा ही अंतर है।
जब अडानी-अंबानी जैसे उद्योगपति मित्रों के लिए इतने खेजड़ी के पेड़ कटा दिए, तो फिर लगाएंगे कहां से?
इसीलिए मोदी जी.. "पीपल को खेजड़ी" बताकर काम चला रहे हैं.. और किरकिरी होने पर पोस्ट डिलीट करा रहे हैं।
मैं प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी से पूछना चाहता हूं कि आज आप राजस्थान के पचपदरा आए,वृक्षारोपण भी किया,क्या आपकी सरकार ने खेजड़ी की नई किस्म का आविष्कार किया है या फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
ने पीपल को खेजड़ी बताकर आपसे पौधारोपण करवा दिया ?
पीपल को खेजड़ी बता दिया, अब समझ आ रहा है कि इतनी बड़ी-बड़ी बातें किस भरोसे की जाती हैं। जो लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं में पूजनीय पीपल और खेजड़ी जैसे वृक्षों की सही पहचान तक नहीं कर पाते, वे संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री जी, क्या आपकी नज़र में यह पौधा वास्तव में खेजड़ी है?
@IYC@INCRajasthan
हमारे गुरु घंटाल अक्सर इतिहास और भूगोल की कॉलर पकड़ लिया करते हैं लेकिन आज इनके हत्थे वनस्पति विज्ञान चढ़ गया। एक खास ‘वनस्पति’ का दिमाग़ पर ऐसा रंग चढ़ा कि गुरु घंटाल ने पीपल का नाम ही खेजड़ी रख दिया है। ख़बरदार अब किसी ने इनको बैल-बुद्धि कहा तो!
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वयं के राज्य की इतनी बड़ी परियोजना पचपदरा रिफाइनरी के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मीडिया के समक्ष उनका यह दावा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत है। पूर्व में रिफाइनरी में केन्द्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर वे गलत बयानी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री श्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है।
इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई।
राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। सामान्यतः रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, परंतु एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% (छब्बीस प्रतिशत) की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है।
मुख्यमंत्री जी को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें।
राहुल गांधी जी द्वारा शुरू की गई #ChhatronKiGoonj अभियान के तहत श्रीगंगानगर जिला कांग्रेस कमेटी ने छात्रों के साथ संवाद एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। कोटा से शुरू हुई यह मुहिम अब पूरे देश में युवाओं की आवाज़ को मजबूती से उठा रही है। छात्रों की समस्याओं, सुझावों और आकांक्षाओं को सुनकर उन्हें उचित मंच तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
📍 श्रीगंगानगर
#ChhatronKiGoonj
मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के नए मॉडल और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का एक और बड़ा उदाहरण देश के सामने आया है जिसमें केन्द्रीय मंत्री और केन्द्र सरकार में पदस्थ IAS अधिकारी पर आरोप लग रहे हैं।
जब देश के कृषि राज्य मंत्री ही अपने मंत्रालय की योजना से अपने खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करवा ले, तो इसे आप क्या कहेंगे? एक तरफ आम किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक जाता है, और दूसरी तरफ भाजपा के मंत्रियों और चहेते अफसरों के परिवारों पर करोड़ों की सरकारी मेहरबानी हो रही है।
चाहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामले हों या केंद्रीय मंत्रियों के ये कारनामे, भ्रष्टाचार के इन नए और संस्थागत तरीकों पर प्रधानमंत्री जी की 'रहस्यमयी चुप्पी' आखिर क्या दर्शाती है?
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" का नारा देने वाले आज अपने ही मंत्रियों के इस खुले 'कदाचार' पर मौन क्यों हैं? देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
मोदी सरकार में लूट मची है...
मंदिरों में चंदे की लूट, जमीनें कौड़ियों में लेने की लूट, किसानों की सरकारी सब्सिडी हथियाने की लूट.. क्या लूट मची है।
किसान दर-दर भटक रहे हैं, और मोदी जी के मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से 1 करोड़ की सब्सिडी हासिल कर रहे हैं।
ये रिपोर्ट बता रही है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी जी ने उनके ही मंत्रालय के तहत संचालित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना में करीब 99.6 लाख रुपए की सब्सिडी स्वीकृत करा ली।
सबसे गंभीर सवाल ये है कि कृषि राज्य मंत्री होने के नाते वे उसी बोर्ड के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष भी हैं, जिसने इस योजना को मंजूरी दी।किसानों का हक़ लूटने के साथ ये हितों के टकराव (Conflict of Interest) का भी गंभीर मामला है। मंत्री जी की जगह इस योजना का लाभ किसी योग्य और ज़रूरतमंद किसान को भी मिल सकता था.. लेकिन उसका हक़ मारा गया। इतना ही नहीं, एक वरिष्ठ IAS अधिकारी भी इस योजना के लाभार्थी हैं।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी, देश जवाब चाहता है। क्या सरकार इस मामले में पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच करवाएगी?
@PMOIndia
जालौर में मीडियाकर्मियों से बातचीत। (22 जून 2026)
सवाल: सर, जोधपुर के पावटा में अभी संक्रमण के कारण प्रसूताओं की मौत की गंभीर घटना हुई है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: क्या आज सुबह आपने मेरा ट्वीट देखा? अगर नहीं, तो ज़रूर देखिए। मैंने ट्वीट किया है कि मैं अभी कोटा का दौरा करके आया हूँ। यह जो घटना आप बता रहे हैं, यह बेहद गंभीर है। पहले यह कोटा में हुई, जहाँ पाँच महिलाओं की मौत हो गई। मैं वहाँ खुद पीड़ित महिलाओं से मिलकर आया हूँ, उन सबकी किडनियाँ फेल हो चुकी हैं। किसी का हफ्ते में तीन बार, तो किसी का दो बार डायलिसिस हो रहा है। ईश्वर करे कि किसी की किडनी ठीक हो जाए, ताकि उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत न आए।
बीकानेर में भी ऐसी घटना हुई, जो एक अलग मामला था। अब आज सुनने में आया है कि जोधपुर में भी आठ महिलाओं को गंभीर रूप से इन्फेक्शन (संक्रमण) हो गया है। इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी सरकार पूरी तरह सोई हुई है!
मैंने कोटा में भी कहा था कि सरकार को एक गारंटी लेनी चाहिए। हमारा सरकारी अस्पताल है, जहाँ हमने दवाइयाँ, जाँचें और सारे ऑपरेशन मुफ़्त कर दिए थे। मैं सिर्फ हिंदुस्तान की बात नहीं कर रहा, दुनिया के किसी भी देश में ₹25 लाख का इलाज इस तरह मुफ़्त नहीं होता, जैसा हमने करके दिखाया। अमेरिका में बराक ओबामा के नाम पर 'ओबामाकेयर' योजना शुरू हुई थी, लेकिन उन्हें भी उसे बंद करना पड़ा। हमारी योजना पूरी तरह कामयाब रही।
लेकिन इसके बाद भी ये घटनाएँ हो रही हैं। सरकार की तरफ से वहाँ सिर्फ औपचारिकता के लिए इलाज चल रहा है, पर इससे क्या होगा? आप गारंटी लीजिए कि जिन महिलाओं की मौत हुई है, उनके परिवारों को क्या मुआवज़ा देंगे? जो महिलाएँ अभी अस्पताल में तड़प रही हैं, उनके पूरे परिवार चिंतित हैं। मैं उन सभी परिवारों से मिला हूँ। उनके पति और भाई कह रहे थे, 'अभी तो सब देख रहे हैं, लेकिन जब हम डिस्चार्ज होकर घर चले जाएँगे, तब इन डॉक्टरों को कहाँ ढूँढ़ते फिरेंगे? तब हमारी सुध कौन लेगा?' मैंने डॉक्टरों की मौजूदगी में उनसे कहा कि चिंता मत कीजिए, ये डॉक्टर आपकी प्राथमिकता पर देखभाल करेंगे।
तीसरी बात मैं यह कहता हूँ: अगर इन पीड़ित महिलाओं की किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आती है, तो सरकार ज़िम्मेदारी ले कि पूरा ट्रांसप्लांट सरकारी देखरेख और खर्च पर होगा। तब मैं मानूँगा कि इस सरकार में शासन करने की ईमानदारी और न्याय देने की नीयत है।
अब आप बताइए, आठ महिलाओं को एक जैसी समस्या हो रही है, जो इतिहास में यहाँ पहले कभी नहीं हुई। इसका सीधा मतलब है कि कहीं न कहीं कोई गंभीर संक्रमण है, जिसे ये लोग पकड़ नहीं पा रहे हैं। अगर एफएसएल (FSL) की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है, तो इन्हें सैंपल तुरंत दिल्ली, बॉम्बे या कोलकाता जैसी जगहों पर भेजने चाहिए, जहाँ इसके एक्सपर्ट्स हों। इस काम को प्राथमिकता पर करना होगा, वरना और भी महिलाएँ इसी तरह पीड़ित होती रहेंगी।
चौथी बात यह है: जो महिलाएँ अस्पतालों में प्रसव (delivery) के लिए जा रही हैं, वे अब इस बात को लेकर बेहद चिंतित और डरी हुई हैं कि कहीं उनकी स्थिति भी ऐसी ही न हो जाए। यह कितनी बड़ी विडंबना है! पूरे राजस्थान में हज़ारों महिलाओं को प्रसव के लिए मजबूरन अस्पतालों में जाना पड़ता है। वे जाएँ भी तो कहाँ? प्राइवेट अस्पतालों में बहुत ज़्यादा खर्च होता है। ये तमाम बातें मैं लगातार उठा रहा हूँ।
सवाल: सर, इस संवेदनशील मुद्दे पर चिकित्सा मंत्री का जो बयान आया है, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: देखिए, चाहे चिकित्सा मंत्री जी हों, शिक्षा मंत्री जी हों, वन मंत्री जी हों या दक साहब हों, स्थिति बड़ी अजीब है। कोई थाने में जाकर गाली-गलौज कर रहा है, कोई कलेक्टर को दुत्कार रहा है, तो कोई रोज़ बेतुकी बयानबाज़ी कर रहा है। सरकार में इस वक्त बेहद अजीब और चिंताजनक स्थिति बनी हुई है।
The hope of a generation,
The voice of the youth,
The fight for a better India. 🇮🇳❤️
Wishing the LoP JanNayak Shri @RahulGandhi Ji a very Happy Birthday. May your commitment to equality, accountability and a stronger democracy continue to inspire millions.
जननेता श्री @RahulGandhi जी के जन्मदिवस के अवसर पर NSUI द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में आइए, सेवा और मानवता के इस अभियान का हिस्सा बनें। आपका एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बचा सकता है।
📍 5, रायसीना रोड, नई दिल्ली
📅 19 जून 2026
🕘 सुबह 9 बजे
“रक्तदान केवल दान नहीं, जीवन देने का संकल्प है।”
Happy Birthday, Boss Rahul Gandhi! 🎉 Your dedication and leadership continue to inspire many. Wishing you a year full of success and happiness💐🎊🎂@RahulGandhi
Not a superhero. Just a leader who never stopped showing up for India’s youth.
Through every challenge, @RahulGandhi ji has stood by students, job seekers, and young dreamers with empathy, courage, and conviction.
Wishing him a very Happy Birthday. May his journey of hope and justice continue to inspire millions. ❤️🇮🇳
#HappyBirthdayRahulGandhi #VoiceOfIndiasYouth
#WATCH | Delhi: Former West Bengal and TMC Chairperson CM Mamata Banerjee leaves from the residence of Congress Parliamentary Party Chairperson Sonia Gandhi.