#दी_ग्रेट_कालवी_साहब
जोगा ने जग पूछे…ना जोगा ने कुण पूछे !
स्व. कल्याण सिंह कालवी
जो अपनी जात का नहीं…वह अपने बाप का नहीं !
जो अपने बाप का नहीं…वह अपने राष्ट्र का नहीं…!
स्व. लोकेंद्रसिंह कालवी
@mahipalsmakrana @rajputkarnisen2
#WATCH | Shimla, Himachal Pradesh: Rashtriya Devbhoomi Party workers and supporters marched to the Himachal Pradesh Secretariat in Shimla after completing a 600-km, 21-day ‘Swarn Samaj Ashwamedh Nyay Yatra’, demanding the rollback of UGC provisions and legislation.
Party president Rumit Singh Thakur said the campaign would continue until their demands are addressed.
राजस्थान : पाली में रविंद्र सिंह भाटी निकालेंगे EWS सरलीकरण की मांग को लेकर रोड शो
◆ तखतगढ़ पहुंचे रविंद्र सिंह भाटी, विभिन्न समाजों ने यात्रा को समर्थन देने का भरोसा दिलाया
#Rajasthan | Rajasthan | #RavindraSinghBhati | Ravindra Singh Bhati
राजस्थान में BJP के गढ़ में निर्दलीयों ने बिगाड़ा खेल? UGC पर राजपूतों की नाराजगी ने बढ़ाई टेंशन
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में स्थानीय मुद्दों के साथ UGC के जाति आधारित नियमों को लेकर राजपूत समाज की नाराजगी ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया.
पूरी खबर : https://t.co/w38jqxvZtw
#Rajasthan #RajasthanPolitics #RajasthanCivicPolls #BJP #BJPPolitics | @sharatjpr
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में राणा सांगा के विषय में जो अभद्र टिप्पणी की है, वो सत्य से परे तो है ही, हर देशभक्त, हर राष्ट्रवादी के लिए बहुत ही कष्टप्रद है।
राणा संग्राम सिंह जिन्हें हम राणा सांगा के नाम से जानते हैं, उन्होंने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अनेक लड़ाइयाँ लड़ीं और जीतीं।
महाराणा होते हुए भी युद्ध में सबसे आगे की पंक्ति में लड़ने वाले राणा सांगा ने शरीर पर 80 से अधिक घाव खाये, उनकी एक आंख और एक हाथ भी जाते रहे, लेकिन उनकी पीठ पर एक भी घाव नहीं था।
तुष्टिकरण के चलते हमारे महानायकों को खलनायक और गद्दार कहा जा रहा है। देश का दुर्भाग्य है कि औरंगज़ेब जैसे आततायी और बर्बर शासक का महिमामंडन करने के लिए कुछ लोग अपने ही महानायकों को छोटा दिखाने की होड़ में लगे हैं।
कुंठित लोग राजनैतिक स्वार्थ वश, तुष्टिकरण के उद्देश्य से चाहे जो भी आरोप लगायें किंतु राणा सांगा देशभक्तों, राष्ट्रवादियों के लिए प्रातःस्मर्णीय रहेंगे, सम्मान और श्रद्धा के पात्र रहेंगे।
कैसी विडंबना है जिसने अपने पिता को क़ैद किया, भाइयों की हत्या करके कुत्तों को खिला दिया ऐसे औरंगज़ेब को चाहने वाले भी इस देश में हैं, जो अपने ही महानायकों के गौरवशाली इतिहास को झुठला रहे हैं।
इतिहास के सत्य पुनर्लेखन का युग आ चुका है।
#राणा_संग्राम_सिंह या राणा सांगा ने बाबर को भारत पर हमले का न्योता भेजा काहे कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए....
ये कहने वाला है सपा का बड़ा नेता रामजी लाल सुमन.... और ये सदन में दिया बयान है इसके साथ ही राजपूतों को गद्दारों का वंशज भी घोषित कर दिया...
कई अन्य लोगों के मुंह भी आप ये सुने होंगे बाबर और सांगा के विषय में.... पर सच क्या था??
राणा सांगा और #इब्राहिम_लोदी की सेना के बीच कई छोटी झड़पो के बाद पहला बड़ा आमना सामना हुआ 1517 की ठण्ड के दौरान... बाप के बाद इब्राहिम गद्दी पर बैठा और सांगा की बढ़ती ताक़त को रोकने का निर्णय ले मेवाड़ पर हमला करने चला...
राजपूतों और अफगानों का सामना हुआ खतौली के युद्ध में....अपने से दोगुनी सेना पर राजपूतों ने सीधे हमला बोलने की रणनीति अपनाई और महज़ 4-5 घंटे की ख़ूनी लड़ाई में अफगानों को तितर बितर कर दिया अपने बेटे को सांगा के हाथों बंदी बनवा और आधी फ़ौज गवा इब्राहिम भाग खड़ा हुआ...
बेटे #गयासुद्दीन_लोदी की जान बचाने को सुल्तान ने कई इलाके और बड़ी रकम राणा को दी...
राणा ने इसी युद्ध में अपना एक हाथ और पैर गवाया...
1519 इब्राहिम ने फिर राणा को काबू करने का प्रयत्न किया... लगभग 30 हज़ार सवार और 20 हज़ार पैदल के साथ मेवाड़ का रूख किया
अबकी बार राणा के पास पहले से भी कम फ़ौज थी काहे कि मालवा की घेराबंदी राजपूतों ने की हुईं थी .. महज़ 10 हज़ार सवार और 5 हज़ार पैदल के साथ राणा ने इब्राहिम का सामना धौलपुर में किया
पुनः सीधे और पहले हमले की रणनीति अपनायी गयी... दोपहर से शाम तक राजपूतों ने 35 हज़ार से ज्यादा अफगान काट डाले...
इब्राहिम घायल हो भाग निकला... और उसकी फ़ौज के आधे से ज्यादा बड़े कमांडर इस युद्ध में राजपूतों के हाथों मारे गए...
राणा के हाथ ग्वालियर सहित बड़ा इलाक़ा लगा
तीसरी बार फिर इब्राहिम लोदी ने राणा को कुचलने को कूच किया.... फ़ौज अबके और बड़ी थी.... साल था 1521...
रणथम्बोर के पास दौनो फ़ौजों का आमना सामना हुआ.... पुनः धौलपुर की कहानी दोहराई गयी...
राणा ने बुरी तरह लोदी को हराया उसने फिर भाग कर दिल्ली कूच किया..
इस युद्ध के बाद... आज का राजस्थान, गुजरात का आधा हिस्सा, मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश का बड़ा भाग हरियाणा का बड़ा भाग.. राणा सांगा के कब्ज़े में था...
मेवाड़ विस्तृत हो चुका था और दिल्ली सल्तनत को कमजोर कर दिया था...
अब सवाल ये है मेरा #रामजी_लाल_सुमन व अन्य सभी से जिस राणा सांगा ने तीन तीन बार इब्राहिम को युद्ध में रगड़ा वो भला बाबर से क्यों मदद लेते...
बाबर को इब्राहिम के लिए नहीं.... राणा के लिए इब्राहिम के ही साथी सिपहसालार न्योता दिए...
उन्हें हिन्दू राजा के विरुद्ध कमजोर इब्राहिम स्वीकार्य न था तो नये लड़ाके बाबर को लाए...
मामला तब भी मुस्लिम ब्रदरहुड का था... आज भी
और दुश्मन तब भी हिन्दू था आज भी..
बाबर खुद बाबरनामा में स्वीकार करता है सांगा उसके सबसे ताक़तवर काफर दुश्मन थे!
(Ajai Singh की फेसबुक पोस्ट)
प्रातः स्मरणीय, वीर शिरोमणि महाराणा सांगा केवल एक महान योद्धा नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान और अदम्य पराक्रम के प्रतीक थे। उनकी वीरता ऐसी थी कि अनेकों घाव सहने के बावजूद उनका हौसला कभी नहीं टूटा। एक भुजा, एक आँख और एक टांग खोने के बाद भी वे युद्धभूमि में पूरी दृढ़ता से डटे रहे। उनके शरीर पर युद्ध के दौरान 80 से अधिक घावों के निशान थे, इसीलिए उन्हें "सैनिकों का भग्नावशेष" कहा जाता था।
महाराणा सांगा का चरित्र केवल वीरता तक सीमित नहीं था वे न्यायप्रिय और उदार शासक भी थे। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब उन्होंने सुल्तान मोहम्मद शाह माण्डु को युद्ध में पराजित कर बंदी बनाया, लेकिन अपनी विशाल हृदयता का परिचय देते हुए उसका राज्य उसे लौटा दिया। यह उनकी नीति, नैतिकता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता था।
उन्होंने बाहरी आक्रांताओं के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया और अपनी सैन्य कुशलता से कई निर्णायक युद्ध लड़े। बाबर जैसे आक्रांता को चुनौती देने का साहस भी केवल महाराणा सांगा में था। बाबर ने अपनी आत्मकथा में भी स्वीकार किया है कि –
"राणा सांगा भारत के सबसे वीर शासक है और उन्होंने अपनी वीरता और तलवार के बल पर ये गौरव प्राप्त किया है।"
महाराणा सांगा की नेतृत्व क्षमता और पराक्रम ने उन्हें एक महान योद्धा के रूप में अमर बना दिया। खानवा के युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपने शौर्य से आक्रांताओं की बढ़ती शक्ति को चुनौती दी। उनका लक्ष्य केवल अपने धरा की रक्षा करना नहीं था, बल्कि बाहरी आक्रमणकारियों को रोककर स्वाभिमान और स्वतंत्रता को बनाए रखना भी था।
महाराणा सांगा जी जैसे महान व्यक्तित्व पर अपमानजनक टिप्पणी करना न केवल एक वीर योद्धा का अपमान है, बल्कि इतिहास में दर्ज उनके बलिदान और साहस का भी अपमान है। ऐसे महापुरुषों की गौरवशाली गाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
मैं सरकार से मांग करता हूं कि राष्ट्र नायकों की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी हमारे महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का दुस्साहस न कर सके।
पवित्र संसद भवन में कुछ ऐसे लोग भी पहुँच जाते हैं, जिन्हें न तो इतिहास का ज्ञान है और न ही राष्ट्र के महापुरुषों का सम्मान करना आता है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल द्वारा भारत की वीरभूमि मेवाड़ के महान योद्धा महाराणा सांगा जी के प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणी उनकी अज्ञानता,-
“अस्सी घाव लगे थे तन पे, फिर भी व्यथा नहीं थी मन में”
मातृभूमि की रक्षा में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पण करने वाले, अदम्य साहस, वीरता,त्याग और स्वाभिमान के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा सांगा जी पर सासंद
राम लाल सुमन द्वारा संसद में अमर्यादित टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है व माफ़ी योग्य नहीं है ।
उन पर सख़्त करवाई होनी चाहिए व मैं भारत सरकार से अपील करूँगा की संसद में ऐसा प्रस्ताव लेकर आए जिससे इतिहास के महापुरुषों पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालो की संसद सदस्यता रद्द की जा सके ।।
वीर शिरोमणि महाराणा सांगा जी, जिनके शौर्य की गाथा राजस्थान की मिट्टी के कण-कण से सुनाई देती है। जिनकी वीरता की कहानी सुनकर यहाँ बच्चे बड़े हुए हैं, 80 घाव खाकर भी देश के लिए लड़ने वाले देशभक्त योद्धा के लिए कहा गया 'गद्दार' शब्द, ना सिर्फ महाराणा सांगा जी और राजस्थान, बल्कि देश के शौर्य और बलिदान का भी अपमान है।
सपा सांसद रामजी लाल सुमन का यह बयान शर्मनाक और निंदनीय है। उन्हें देश की वीरता को कलंकित करने वाले इन कटु शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।