@ranvijaylive मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी क्या इन सब उपद्रवियों के घर पे आपका बुलडोजर चलेगा या फिर हिंदू होने की वजह से इन सब को छोड़ दिया जाएगा?? क्योंकि आपका बुलडोजर तो तभी किसी के सपनों का घर तोड़ता है जब सामने वाला दूसरे धर��म का इंसान होता है?
कल मथुरा में बवाल करने वाले 13 लोग गिरफ्तार हुए हैं. बवालियों के पिछवाड़े पर लात मारकर ले जाती पुलिस.
ऐसे गुंडों के साथ यही होना चाहिए. इनकी हिम्मत कैसे हुई पत्थरबाजी करने की.
स्पष्टीकरण: एआई जेनरेटेड नहीं है।
बाक़ी सरकार स्वयं देख ले उसे कुछ करना है या 14 दिनों में छुट्टा पशुओं की समस्या से मुक्ति दिलवाने का अपना ‘जुमला’, जाले हटाकर, झाड़ पोंछकर फिर से दोहराना ��ै।
इसको गले मिलना नहीं गले पड़ना कहते है और हाथ तो ये जबरदस्ती पकड़कर खींच लेते है!
गले मिलना तब नॉर्मल लगता है जब दूसरा भी लगना चाहता हो..."कोई चाहे न चाहे हम तो गले लगेंगे ही"..🤣🤣
बिहार भारत का ज्ञान-पुंज और हमारा गौरव है - जिसने अपने समृद्ध इतिहास और संस्कृति से हमेशा देश का मार्गदर्शन किया है।
बिहार दिवस की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
आज की टीवी डिबेट ने एक बार फिर उस कड़वे ��च को उजागर कर दिया, जिसे हम लंबे समय से महसूस कर रहे हैं, “जनता की आवाज़” के नाम पर मंच सजाया जाता है, लेकिन असल में वह एक सुनियोजित, प्रायोजित और पक्षपातपूर्ण तमाशा बन चुका है।
जहाँ सत्ता पक्ष के समर्थकों को “आम जनता” बनाकर बैठाया जाता है, और विपक्ष को घेरने के लिए सवालों की एकतरफा बौछार की जाती है। एंकर, जिनका दायित्व निष्पक्षता और सत्य होता है, खुलेआम तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, और जब सच्चाई तस्वीरों में सामने आ जाती है, तब भी उसे नकारने का दुस्साहस किया जाता है।
यह सिर्फ एक डिबेट नहीं थी, यह लोकतंत्र के मूल्यों के साथ किया गया एक सुनियोजित खिलवाड़ था। जिस मीडिया को कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, आज वही स्तंभ सत्ता के संरक्षण में खड़ा होकर एक पार्टी विशेष का प्रचार-प्रसार करने का माध्यम बनता जा रहा है। सवाल सत्ता से होने चाहिए थे, लेकिन कटघरे में विपक्ष को खड़ा ��िया गया, यही आज के मीडिया का दुर्भाग्यपूर्ण सच है।
हमारे प्रवक्ताओं को बार-बार दबाने, रोकने और उनकी आवाज़ को कुचलने का प्रयास किया जाता है, लेकिन यह भूल जाते हैं कि सच को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता। आज अजय उपाध्याय जी ने जिस साहस और आत्मसम्मान के साथ इस प्रायोजित मंच का बहिष्कार किया, वह किसी एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि उस हर आवाज़ का प्रतिनिधित्व है, जो झुकने से इनकार करती है।
यह समय कठिन है, लेकिन इतिहास गवाह है, जब-जब सच को दबाने की कोशिश हुई है, तब-तब वह और अधिक ताकत के साथ उभरा है। हमें कितना भी डराने, दबाने या बदनाम करने का प्रयास किया जाए, हम न डरेंगे, न झुकेंगे।
क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं है, यह लड़ाई सत्य और असत्य के बीच है, लोकतंत्र और प्रोपेगेंडा के बीच है, और हम उस पक्ष में खड़े हैं जहाँ सच अभी भी जिंदा है।
हम सब अजय उपाध्याय जी के साथ हैं, और हर उस ��वाज़ के साथ हैं जो इस अंधेरे में भी सच की मशाल जलाए हुए है।
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर स्वयंभू बाबा और ज्योतिषी अशोक खरात के पैर धो रही हैं!
उसी खरात पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोप थे। पुलिस जाँच में कथित तौर पर कम से कम 58 अश���लील वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद मिली।
इंटरेस्टिंग ये है की महिला आयोग की अध्यक्ष ख़रात की गिरफ़्तारी के बाद भी उससे मिलती रहीं।
अब सोचिए ये महिला आयोग की अध्यक्ष किसी महिला के लिए खड़ी होगी? भाजपाई पुरुष हो या महिला ये टेंडेंसी सब में बराबर है!
आज भी वो 2 हजार का एक नोट बचा के रखा हुआ है क्योंकि ये दलाल गोदी मीडिया द्वारा बताया गया "नैनो-चिप" कहां लगी है इसके लिए ढूंढ़ने पर मजबूर कर देता है!
वहीं सच्चाई तो यह है कि नोट में @aajtak Chip नहीं मिली लेकिन पत्रकारिता में Cheap लोग बहुत मिल रहें है!😭😭