कंटीले तार, वॉटर कैनन और सड़कों पर खाकी का पहरा... अपने हक की आवाज उठा रहे छात्रों के खिलाफ झारखंड में यह कैसी क्रूरता की जा रही है?
लेकिन हैरानी की बात यह है कि हर बात पर "लोकतंत्र खतरे में है" का राग अलापने वाले राहुल गांधी आज पूरी तरह मौन हैं! क्या इनकी ‘फ्री स्पीच' और 'संवैधानिक अधिकारों' की दुहाई केवल बीजेपी शासित राज्यों के लिए आरक्षित है?
यह चुप्पी साबित करती है कि इनका ‘लोकतंत्र प्रेम’ सिर्फ राजनीतिक सहूलियत देखकर जागता है!
योगी जी के ऐलान से विपक्ष में खलबली।
योगी सरकार नयी युवा नीति ला रही है, जिसमें प्रत्येक जिले, प्रत्येक महाविद्यालय, विश्वविद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग शुरू होगी।
इसमें UPSC, UPPSC, NEET, JEE समेत सभी परीक्षाओं की तैयारी करायी जाएगी।
PM मोदी ने अपने इंस्टाग्राम पर हैंडलूम को लेकर देश को संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से भारत की हैंडलूम विरासत को बढ़ावा देने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि लोग अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों के साथ वीडियो, जिसमें GRWM वीडियो भी शामिल हों, सोशल मीडिया पर साझा करें और #NationalHandloomDay का इस्तेमाल करें।
"अमित शाह कहाँ हैं?"
"अमित शाह क्यूँ छुपे हुए हैं?"
"अमित शाह संसद क्यूँ नहीं आ रहे?"
"अमित शाह ज़वाब क्यूँ नहीं दे रहे?"
लो जी, आ गए अमित शाह। और साथ मे FCRA नाम का छिला हुआ बांस भी लेकर आए हैं। अब ले लो ज़वाब।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज संसद में अमित शाह FCRA संशोधन बिल लेकर आ रहे हैं। ये बिल पहले ही पास हो चुका है। सिर्फ संशोधन करना है।
जो अगर आज बिल रखा जाएगा, तो आज ही clear भी हो जाएगा। लेकिन, इस संशोधन को पास करना इतना असान भी नहीं था।
● कॉंग्रेस इसके विरोध में।
● अमेरिका इसके विरोध में।
● इंग्लैंड इसके विरोध में।
● पाकिस्तान इसके विरोध में।
● वामपंथी इसके विरोध में।
● मिशनरी इसके विरोध में।
● NGOs इसके विरोध में।
● चर्च इसके विरोध में।
● सारी देश विरोधी ताकतें इसके विरोध में।
आप इसी से अंदाजा लगाया लीजिए कि ये संशोधन देश के लिए कितना जरूरी हैं। और इसे पास करना कितना मुश्किल। मुश्किल संसद में संख्या बल को लेकर नहीं। मुश्किल इतनी बड़ी ताकतों के इसके विरोध में होने से।
पिछले दिनों जंतर-मंतर पर छात्रों के नाम पर जो हंगामा हुआ, वो असल मे इसी बिल के विरोध मे था, जिसे छात्रों का नाम दिया गया था। इस बिल मे संशोधन के बाद,
● विदेशी फंडिंग के एक एक पैसे का हिसाब देना होगा।
● सारी फंडिंग दिल्ली के एक ही SBI ब्रांच मे आ सकेगी।
● NGO इस फंडिंग से अब सिर्फ 20% अपने पर्सनल इस्तेमाल के लिए खर्च कर सकेंगे, जो पहले 50% था।
● जिन NGO का लाइसेंस रद्द होगा, उनकी संपत्ति सरकार द्वारा बनाए ट्रस्ट के पास चली जाएगी।
कहने का मतलब है कि विदेश से पैसा अब नहीं आ पाएगा। और देश मे जो सम्पत्ति बना रखी है, वो भी नहीं बचेगी। तो हंगामा तो होना ही था। हुआ भी।
बवाल करके देख लिया। गाली गलोच करके देख लिया। नंगा नाच करके देख लिया। जमीन पर लोट गए। लेकिन मोदी-शाह पर को असर नहीं हुआ। संशोधन होकर रहेगा।
दिल थाम कर बैठिए। बहुत मजा आने वाला है।
जय श्रीराम। 🙏🚩
अमित शाह..... #Breaking#india
जूते भीगा भीगा कर मारना सिर्फ सुना था
आज देख भी लिया
@AmitShah जी ने समय रैना से भी गंदा रोस्ट कर दिया पप्पू (@RahulGandhi) को
बोल रहा था सदन में आओ – सदन में आओ
जब अमित शाह सदन में आए
तो खुद बीच में ही सदन छोड़कर भागा
@INCIndia@AamAadmiParty
ब्राह्मण सम्मेलन में अखिलेश ने पवन पांडेय, पूजा शुक्ला का अभिवादन तक स्वीकार नहीं किया?
अखिलेश खुद ब्राह्मण नेताओं को इज्जत नहीं देते, इसीलिए कार्यकर्ताओं ने माता प्रसाद का अपमान किया!
🚨 "जिस पर होना चाहिए इल्ज़ाम, वो लेकर वकालत का पैग़ाम!" ⚡
सुधांशु त्रिवेदी ने कपिल सिब्बल पर ऐसा तीखा कटाक्ष किया कि कुछ पल के लिए पूरा माहौल सन्न रह गया। 🎯
राजनीति में शब्दों के वार कभी-कभी सबसे गहरे होते हैं। यह बयान भी उन्हीं में से एक बन गया।
#KapilSibal #SudhanshuTrivedi
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को राजधानी के कमला नेहरू सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय पहुंचे तो उनका सामना एक ऐसी "कैबिनेट" से हुआ, जिसने उन्हें भी प्रभावित कर दिया। यह कैबिनेट स्कूल की छात्राओं की थी, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी जाती है और पूरे वर्ष विद्यालय के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाती है। छात्राओं की कार्यप्रणाली जानकर मुख्यमंत्री इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सभी कैबिनेट सदस्यों को मंच पर अपने साथ बैठाया और उनकी जिम्मेदारियों की विस्तार से जानकारी ली। न्होंने छात्राओं को एआई के उपयोग, करियर विकल्पों और जीवन में निरंतर सीखने के महत्व पर मार्गदर्शन दिया, साथ ही शिक्षकों से भी संवाद किया।
#MadhyaPradesh #CMMohanYadav #SchoolReforms | #ZeeNews
आज संसद में FCRA पर बहस सिर्फ एक कानून की नहीं, बल्कि भारत की नीति और संप्रभुता की भी बहस है।
आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं,
लेकिन सवाल यह है कि क्या विदेशी फंडिंग पर पारदर्शिता और निगरानी किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र का अधिकार नहीं होना चाहिए?
देश का विपक्ष इस मुद्दे पर पूरी ताकत से सरकार का विरोध कर रहा है। अब फैसला जनता को करना है कि वह किस तर्क को अधिक मजबूत मानती है।
इतिहास गवाह है कि विदेशी प्रभाव और राष्ट्रीय हित के बीच संतुलन हमेशा एक बड़ा विषय रहा है। इसलिए हर नागरिक, खासकर युवाओं को, संसद में होने वाली बहस और अपने नेताओं के तर्कों को ध्यान से सुनना चाहिए।
राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
युवाओं! आंखें खुली रखो, तथ्यों को समझो, फिर अपना निर्णय खुद लो।
झुकना मत...
दबना मत...
सोचो, समझो और राष्ट्रहित में निर्णय लो।
इस पर अखिलेश यादव ने क्या कार्यवाही किया?
ब्राह्मण क्षत्रिय चोर होते हैं शाले... हमें इनका वोट नहीं चाहिये?
आज सपा ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है है तो याद आ गया..😂😂