Predator Husband Twice Her Age Accused of Killing 17-Year-Old Bride
📍Bhind, Madhya Pradesh
17 y/o Muskan Khan Sharma died under suspicious circumstances just 03 months after marrying 35 y/o Abhishek Sharma... a man more than twice her age.
> Family alleges she endured repeated abuse, forcing her to return home a month ago.
> Abhishek allegedly arrived with country made pistol, strangled her with her dupatta, staged it as a hanging and threatened witnesses before fleeing.
> Police have registered a case; PM findings awaited. ~ [Nai Duniya]
23 साल के इस लड़के का नाम आदित्य शर्मा है। इनके पिता राजेश शर्मा अंधभक्त हैं।
अमेरिका ने जिस भारतीय जहाज पर हमला किया आदित्या उस के नाविक थे। हमले में आदित्य की मौत हो गई।
आदित्य अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और उनके पिता राजेश शर्मा
"ग़ज़ा में नरसंहार का जश्न मनाते हुए इसराइल और अमरीका को सलाह दे रहे थे कि पूरे गाजा को बर्बाद करके गैर मुस्लिम टेरिटरी बना दी जाए"
आज उसी इसराइल और अमरीका ने राजेश शर्मा के लड़के को मार डाला, अब शर्मा जी सरकार से सवाल कर रहे हैं
AYUSH MALIK COOKS GODI MEDIA!
Godi Reporter : "Ayush, aap toh bohot padhe likhe aadmi ho, Media me sab dekhte he honge..."
Aayush : "Bohot Kam dekhta hun Sir Media. Abb toh aur Kam dekhta hun kyunke media me har waqt Hindu-Muslim, Hindu-Muslim karte hai..."
Godi Reporter : "Khair.. Ab jo hai wo toh chalega he na..."
Aayush : "Hai toh aur bhi bohot kuch par wo nahi dikhaya ja raha hai.... 157 rakh pe gaya shayad Indian Media...."
Godi Reporter: "Khari, wo degar baat hai, alag hai..." 🤣
महोदय, @SpChhatarpur@DIGCHHATARPUR घनश्याम कुशवाहा नामक व्यक्ति फेसबुक पर मुस्लिम समुदाय को टारगेट करके फ़र्ज़ी न्यूज़ पोस्ट कर रहा है कृपया संज्ञान लीजिए।
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मोहब्बत में चांदनी ‘ज्योती’ बने तो वाह-वाह! आयुष ‘अली’ बने तो हाय तौबा!
यूपी के शामली में चांदनी कुरैशी जिम ट्रेनर हैं। उनके जिम में आयुष मलिक आते थे। आयुष और चांदनी के बीच नज़दीकियाँ बढ़ीं, और ‘प्यार’ हो गया। लेकिन इस प्यार में दोनों का ‘धर्म’ दीवार बन गया। अब दोनों के सामने शादी की चुनौती थी। अपने-अपने धर्म अनुसार शादी करने के लिए दोनों में से किसी एक को धर्मांतरण करना था। आयुष मलिक ने धर्मांतरण कर लिया, और अपना नाम मोहम्मद अली रख लिया। आयुष के अनुसार उसने इस्लाम का अध्ययन करना शुरू किया, और फिर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। आयुष ने दाढ़ी रख ली, नमाज़ पढ़ना शुरू कर दिया, बताया तो यहां तक जा रहा है कि दोनों ने निकाह भी कर लिया है।
आयुष के धर्मांतरण की जानकारी जैसे ही हिन्दुवादी संगठनों को पहुंची तो उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया। मीडिया ने भी उनका भरपूर साथ दिया, एक कहानी गढ़ी गई कि, आयुष के पास करोड़ों की संपत्ति है, उसे हड़पने के लिए प्यार का ‘प्रपंच’ रचा गया है। पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उनके पिता समेत करीब दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और चांदनी समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
अब यहां से पुलिस की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगता है। इसी प्रदेश में आए दिन ऐसी ख़बरें आती रहती हैं, जिसमें मुस्लिम युवती धर्म बदलकर किसी मंदिर में जाकर ब्याह रचाती है। यूपी पुलिस ने उनमें से आज तक ऐसे कितने मामलों में कार्रवाई की है? कार्रवाई तो छोड़िए यूपी पुलिस ने ऐसे ‘जोड़ों’ को सुरक्षा दी है, और हिंदूवादी संगठनों ने उनको संरक्षण दिया है।
इन दिनों यूपी का बरेली ‘दूसरे’ समुदाय की युवतियों के मतांतरण और उनका ‘प्रेमी’ के साथ विवाह कराने का केंद्र बना हुआ है। लेकिन मजाल भला कि यूपी पुलिस ने उनमें से किसी पर भी कोई कार्रवाई की हो! वो हिन्दुवादी संगठन जो ‘अपने’ समुदाय की युवती द्वारा ‘दूसरे’ समुदाय के युवक से शादी करने पर लव जिहाद का शोर मचाते हैं, वही संगठन ‘दूसरे’ समुदाय की युवती का धर्मांतरण कराकर उसका ‘अपने’ समुदाय के ‘युवक’ से ‘प्रेम विवाह’ कराते हैं, और उसे सेलिब्रेट करते हैं। मीडिया भी इसे सेलिब्रेट करके बताता है कि प्रेम में टूटी धर्म की दीवार, अंजुम ने आकांक्षा बनकर मंदिर में की फलाने से शादी! हिंदूवादी संगठन और ‘हिंदू’ मीडिया इसे प्रेम विवाह बताता है। जबकि यही अगर मामला ‘दूसरा’ तो तब ‘लव जिहाद’ बन जाता है।
अब जिस चांदनी कुरैशी द्वारा आयुष मलिक का धर्मातरण कराए जाने के ख़बरें सामने आ रही हैं, और पुलिस द्वारा जैसी कार्रवाई की जा रही है। क्या यही कार्रावाई तब भी होती जब, चांदनी कुरैशी आयुष की ‘मोहब्बत’ में धर्म बदलकर ज्योति मलिक बन गई होती? क्या तब चांदनी के पिता की शिकायत पर आयुष, उसके परिजनों, और चांदनी का धर्मांतरण कराने वाले मंदिर के पुजारियों को ऐसे ही जेल भेजा जाता, जैसे चांदनी और उसके परिजनों को जेल भेजा गया है। नहीं! तब यह ‘प्रेम विवाह’ कहलाता। वही पुलिस जो आज चांदनी और उसके परिजनों पर कार्रवाई कर रही है, वही पुलिस उन्हें सुरक्षा देती। हिन्दुवादी संगठनों के फ्रिंज एलिमेंट्स इसे सेलिब्रेट कर रहे होते। ये कानून के दोहरे मापदंड नहीं तो क्या हैं? आयुष की मोहब्बत में चांदनी धर्म बदलकर ज्योति बन जाए तो ठीक! चांदनी की मोहब्बत मे आयुष धर्म बदलकर मोहम्मद अली बन जाए तो अपराध, साजिश और जाने क्या क्या फलाना ढिमकाना। यह दोहरे मापदंड नहीं तो क्या हैं? मदर ऑफ डेमोक्रेसी की पुलिस, मदर ऑफ डेमोक्रेसी की बहुसंख्यक आबादी के सामने निष्पक्षता सबसे बड़ी चुनौती है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी की बहुसंख्यक आबादी के पास सत्ता है, सरकार है, पुलिस है, संसाधन हैं, क्या निष्पक्ष न्याय का माद्दा भी है?
दिल्ली के उस्मानपुर इलाके में 17 वर्षीय अभिषेक को 15 से 16 हिन्दू युवकों ने दौड़ा दौड़ा कर चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया!
यहां हिन्दू मुस्लिम एंगल नहीं है इसलिए सारे हिन्दू दल के ठेकेदार गटर में घुस गए।👇
कुरावली, मैनपुरी उत्तर प्रदेश में वारिश अली की हत्या को वक्त बीत रहा है, लेकिन आरोपी अभिषेक भदौरिया और बिल्ला अब भी फरार हैं। न बुल्डोजर चला, न कोई सख्त कार्रवाई दिखी। ऊपर से आरोपी पक्ष का अमन प्रधान खुलेआम धमकियां दे रहा है।
क्या कानून का डर सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है?
मुसलमानों !!
6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करेगी। मुसलमानों से गुजारिश है कि इस प्रोटेस्ट से दूर रहिएगा, बल्कि उस रास्ते से गुजरने की कोशिश भी मत कीजिएगा। अगर आपका घर उसे जगह के आसपास है तो एक दिन के लिए वह जगह ही छोड़ दीजिए।
100% उस दिन बवाल होगा और हमेशा की तरह मुसलमान बली का बकरा बनाया जाएगा। बाकी लोग अपने घर चले जाएंगे लेकिन आप खालिद सैफ़ी, मीरान हैदर और उमर खालिद की तरह जेल जाएंगे। आप पर उन सभी धाराओं में मुकदमे दर्ज होंगे जिसमें आप 10 साल तक जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
आपका घर बुलडोज किया जाएगा, आपकी दुकान छीन ली जाएगी ,आपके घर के बाहर महीनों पुलिस खड़ी रहेगी, आपका मीडिया ट्रायल होगा, आपका पाकिस्तान कनेक्शन बताया जाएगा। आपको आतंकवादी घोषित किया जाएगा।
और याद रखिए इसी पार्टी के लोग आपको पूछेंगे भी नहीं, जैसे दिल्ली दंगों में अरविंद केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन से पल्ला झाड़ लिया था। ताहिर आज तक जेल में बंद है। आम आदमी पार्टी ने पलट कर ना देखा।
इस वक्त हमारी लड़ाई खुद को बचाने की है, सर्वाइवल की है। अपने काम पर ध्यान दीजिए, अपने बच्चों की एजुकेशन पर फोकस कीजिए।
मुसलमान का चाकू और सियासत की चालबाजी!
-गाजियाबाद के सूर्या को असद ने मारा, तो बड़े भाई को तुरंत नगर पालिका ने नौकरी दी
-गाजीपुर के विनीत राय को मुसलमान ने नहीं मारा, इसलिए परिवार को कुछ नहीं मिलेगा?
-सूर्या को असद ने मारा, तो असद के बाप का घर गिराया जाएगा
-मेरठ की अनुष्का को मुसलमान ने नहीं मारा, तो आरोपी का घर नहीं गिरेगा?
-सूर्या को असद ने मारा, तो सूर्या के घर पर लगा संपूर्ण टैक्स नगर पालिका ने माफ कर दिया
-गाजियाबाद के ही चिराग त्यागी को मुसलमान ने नहीं मारा, इसलिए कोई राहत नहीं दी जाएगी?
-सूर्या को असद ने मारा, तो सड़क या चौराहे का नाम सूर्या के नाम पर किया जाएगा
-नोएडा के गौरव शर्मा को मुसलमान ने नहीं मारा, तो कोई उसका नाम भी नहीं लेगा?
-सूर्या को असद ने मारा, तो बीजेपी के बड़े-बड़े नेता उसके घर पर दुख जताने पहुंचेंगे
-लखनऊ के संदीप सिंह को मुसलमान ने नहीं मारा, तो दुख जताने घर पर कोई नहीं जाएगा?
-सूर्या को असद ने मारा, तो परिवार को सरकार 5 लाख रुपये देगी
-जौनपुर के आजाद बिंद को मुसलमान ने नहीं मारा, तो कोई मदद नहीं की जाएगी?
यानि जब मुसलमान के चाकू से किसी की मौत होगी, तभी उसकी मदद की जाएगी?
नाम अभिषेक मिश्रा। IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। एक कंपनी में 20 लाख के पैकेज पर जॉब की। जॉब छोड़कर 3 साल पहले मथुरा आ गया। धार्मिक संस्था से जुड़ा। किराए के घर में रहकर ऑनलाइन प्रवचन शुरू कर दिए।
नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रख लिया। पढ़े–लिखे बाबा से पढ़े–लिखे नौजवान जुड़ने लगे। यह उन्हें मथुरा बुलाने लगा। लड़के–लड़कियों के गंधर्व विवाह करवाने लगा, जिसमें परिवार की सहमति की जरूरत नहीं होती।
ऐसे कपल को कुछ दिन अपने पास कमरे पर रखता। प्रसाद के नाम पर लड़कियों को नशीला दूध पिलाता। बेहोश करके आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लेता। ब्लैकमेल करके उनसे लाखों रुपए वसूलता।
इन्हीं पैसों से अभिषेक मिश्रा ने मथुरा में अपना खुद का घर खरीद लिया। मोबाइल में करीब 12 लड़कियों के साथ आपत्तिजनक फोटो मिले हैं। आज जेल भेज दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का (17 वर्ष) की हत्या कर दी गई। लाश को बोरे में भरकर नाले में फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में फास्ट फूड विक्रेता श्याम धानक (42 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। दावा है कि अनुष्का ने श्याम धानक से 3600 रुपए उधार लिए थे। रुपए मांगने पर दोनों में विवाद हुआ था। आरोपी की पहचान पर करीब 2 हफ्ते बाद लाश बरामद हुई है।
सुनिये महिला अफसर को और समझिये के कितना आसान हो गया है मुस्लिम नौजवानों को फ़साना झूठे आरोपों में।
मेरठ में सनसनीखेज खुलासा!
जिस मामले को “लव जिहाद” और “गैंगरेप” बताकर हिंदूवादी संगठनों ने हंगामा खड़ा किया, अब उसी केस में कथित साजिश की परतें खुल रही हैं।
आरोप है कि नकुल गुर्जर ने युवती को प्लांट कर जीशान और शाहबेज के पास भेजा, फिर रेप और “लव जिहाद” का नैरेटिव बनाकर 10 लाख रुपये की वसूली और समझौते का खेल रचा गया।
युवती के बयान के बाद पुलिस ने नकुल गुर्जर पर केस दर्ज किया है।
सबसे बड़ा सवाल अगर लड़की सच न बताती तो?
क्या भीड़ और तथाकथित हिंदूवादी संगठन पहले ही जीशान और शाहबेज को अपराधी घोषित नहीं कर चुके थे?
हर बार धर्म, गौरक्षा और “हिंदुत्व खतरे में है” का शोर…और बाद में निकलती है साजिश, उगाही और नफरत की राजनीति।
अब देखना ये है कि पुलिस सिर्फ नामजद आरोपियों तक पहुंचेगी या उन हिंदूवादी संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई होगी जो मौके पर माहौल भड़काने और झूठा नैरेटिव फैलाने में शामिल थे।
दो मुस्लिम युवकों को षड्यंत्र के तहत फसाने की साजिश का खुलासा मेरठ पुलिस ने किया ।
एक बड़ा गैंग है जो सामाजिक द्वेष फैलाने का षड्यंत्र लगातार रच रहा है और बहाने तलाशता है किसी भी प्रकार से मुसलमान को टारगेट करके अवैध वसूली या उनको प्रताड़ित करके लोकप्रियता हासिल करने के लिए।
पिछले तीन दिनों में मेरठ पुलिस ने शानदार काम करते हुए ऐसी 2 घटनाओं का खुलासा किया, एक तो पुनीत का जो अपने घर गोश्त डालने की अफवाह फैला रहा था दूसरा यह नकुल जो दो मुस्लिम लोगों को फसाने का षड्यंत्र रच रहा था फ़र्जी किडनैपिंग के नाम पर
दोनों वीडियो ध्यान से सुनिए और देखिए कि रिपोर्टिंग का स्तर किस हद तक गिर चुका है। शर्म को भी शर्म आ जाए, लेकिन शायद इन्हें नहीं आएगी।
@aajtak की एंकर महोदया एक घटना में बोल रही है एक युवक की हत्या हो गई दूसरे में बोल रही है हिन्दू युवक की हत्या हो गई वाह रे डबल स्टैंडर्ड।
बकरीद के दिन दो घटनाएं हुईं एक जहांगीरपुरी में और दूसरी गाज़ियाबाद में। दोनों मामलों में आपसी विवाद के दौरान एक-एक युवक की जान गई। फर्क सिर्फ इतना था कि जहांगीरपुरी में मरने वाला मुस्लिम था और गाज़ियाबाद में हिन्दू।
लेकिन मीडिया की नज़र में दोनों मौतों की कीमत एक जैसी नहीं है।
जहांगीरपुरी की घटना बस एक साधारण हेडलाइन बनकर रह गई, जबकि गाज़ियाबाद की घटना को ऐसे पेश किया जा रहा है मानो पूरे शहर में आग लगा देनी हो। सवाल है कि क्या मुसलमान की हत्या, हत्या नहीं होती? क्या इंसान की जान की अहमियत उसका धर्म तय करेगा?
अगर दोनों घटनाओं की प्रकृति एक जैसी है, तो रिपोर्टिंग का पैमाना अलग क्यों है?
पत्रकारिता का काम सच दिखाना होता है, समाज को बांटना नहीं। लेकिन जब खबरों का वजन मरने वाले के धर्म से तय होने लगे, तब समझ लीजिए कि खबरें नहीं, एजेंडे परोसे जा रहे हैं।
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🔴मुस्लिम समझकर एक Hindu यूवक की बुरी तरह से हत्या!
राजधानी दिल्ली के कंझावला में एक घर में चोरी का इल्ज़ाम लगा कर भीड़ ने 25-वर्षीय एक हिंदू युवक की कथित तौर पर हत्या कर दी। लोगों का आरोप है की उसको मुस्लिम समझकर मारा गया और झूठा चोरी का आरोप लगाया गया है।
मदरसा चलाने वाले रहमान पर आरोप था कि वो स्कूल के जरिए ‘आतंकवाद से जुड़े कामों’ के लिए लोगों की भर्ती करते थे. साथ ही ‘दहशतगर्दी के लिए विदेशी फंडिंग’ भी जुटाते थे.
करीब 14 साल बाद रहमान को ओडिशा की एक अदालत ने बरी किया. कोर्ट ने कहा कि रहमान के किसी आतंकवादी संगठन से संबंध होने का कोई सबूत नहीं है. यह भी साबित नहीं हो पाया कि उन्होंने 'आतंकवाद' फैलाने के लिए कहीं से फंड जुटाया है.
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