जंतर-मंतर पर सपा का सन्नाटा इस बात का पुख्ता सबूत है कि अंदरखाने कोई बड़ा खेल हो चुका है। कार्यकर्ताओं को सिर्फ रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए रखा गया है
चुनाव के वक्त मुसलमानों और वंचितों के सबसे बड़े रहनुमा बनने वाले आज किस बिल में जाकर छिप गए? जंतर-मंतर का खाली मंच बता रहा है कि सपा की राजनीति सिर्फ अपनी तिजोरी और परिवार को बचाने के इर्द-गिर्द घूमती है
क्या यह हैरान करने वाला नहीं है कि जिस मोर्चे पर पूरे विपक्ष को दिखना था, वहां सपा नदारद रही? यह साफ दिखाता है कि सपा कभी किसी आंदोलन की अगुवाई नहीं कर सकती।
जंतर-मंतर की घटना ने साबित कर दिया कि सपा और सत्ता के बीच पर्दे के पीछे की नूराकुश्ती चल रही है। बाहर मंचों से चाहे जितना भी विरोध का नाटक रच लें, लेकिन जब दबाव की आंच महसूस होती है, तो यह मैदान से भाग खड़े होते हैं।
जंतर-मंतर से सपा का यह किनारा सीधे तौर पर अपने गठबंधन और जनता के साथ किया गया सबसे बड़ा छल है। जब लड़ाई सीधी और आर-पार की थी, तब मैदान छोड़ देना बताता है कि सपा में संघर्ष का कोई नैतिक बल नहीं बचा है।
नाना पाटेकर ने अपनी मेहनत, लगन और अनूठी अभिनय शैली से भारतीय सिनेमा में एक ऐसी पहचान बनाई, जिसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं। उनके किरदारों में कभी संघर्ष दिखा, कभी प्रेम और कभी समाज का दर्द। आज उनके जाने से कला जगत की एक बुलंद आवाज सदा के लिए खामोश हो गई।
एक कलाकार की सबसे बड़ी सफलता यही होती है कि उसके जाने के बाद भी लोग उसके किरदारों को याद रखें। नाना पाटेकर ने अपने जीवन में ऐसे अनगिनत किरदार निभाए, जो सदा अमर रहेंगे। उनकी असाधारण प्रतिभा को नमन और उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं।