जब हम शिक्षक की जाति नहीं देखते, डॉक्टर की जाति नहीं पूछते और किसान के उगाए अन्न को जाति से नहीं तौलते, तो नेता चुनते समय जाति ही सबसे बड़ा पैमाना क्यों बन जाता है?
लोकतंत्र की शक्ति जातीय पहचान नहीं, बल्कि नीति, नीयत और नेतृत्व में निहित होती है।
#CastePolitics#VoteForChange
@eknalandite@DrRanjanNishant@jansuraajonline I agree with you,but tell me, why do they announce all these freebies just a month before the elections? What were the remaining five years for? As for the ₹10k the government promised another 2 lakhs which they should also give. Did they only remember all this at election time?
Good morning Ladies & Gentlemen 🧑🌾
जनसुराज एक Political Party है, NGO नहीं। हमारी आलोचना होगी, सवाल पूछे जाएंगे—और होने भी चाहिए। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है।
जो लोग हमारे प्रयासों से इत्तिफाक नहीं रखते, उन्हें हमें criticise और question करने का पूरा अधिकार है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम पूरी ताकत से जवाब दें। जो पार्टियां दशकों से सत्ता में रही हैं, वे हमें Free Walk क्यों देंगी?
हम बिहार में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए निकले हैं। बदलाव ही हमारा रास्ता है।
लेकिन जब सरकार बिहार के लिए कोई अच्छा काम करती है, तो हमें खुशी होनी चाहिए, व्याकुल नहीं होना है 🤭
₹30,000 करोड़ गरीबों तक पहुंचना चुनाव के समय और वोट खरीदना लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है—बिहार के गरीबों को लाभ मिला, लेकिन वोट खरीद लिया गया। जिनको इससे दर्द हुआ, वे सोचें: क्या यह लोकतंत्र का अपमान नहीं था?
सवाल यह भी होना चाहिए कि पूरा लाभ सही लोगों तक पहुंचा या नहीं? भ्रष्टाचार और घोटाले की गुंजाइश रही या नहीं?
पेंशन वर्षों से नहीं बढ़ी, मुद्दा बनने के बाद बढ़ी।
पलायन दशकों से बिहार का कोढ़ है। पहले यह चुनावी मुद्दा नहीं था; आज प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इसकी चर्चा करते हैं।
यानी सवाल उठाइए—मुद्दा बनाइए—तभी व्यवस्था पर दबाव बनेगा।
बिहार की आज की स्थिति के लिए हम बिहारी भी जिम्मेदार हैं। लोकतंत्र में सरकार चुनने की जिम्मेदारी हमारी है। वोट देने बिहार से बाहर से कोई नहीं आता।
अगर मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जोड़ने की शिकायत है, तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोकतंत्र की शुचिता का पहला कदम सही मतदाता सूची है।
बाढ़ भी बिहार का कोढ़ है। सरकार की नियत पांच दशकों से साफ लगती है कि हर साल बाढ़ आए, ताकि गरीबों का पैसा डूब जाए—भ्रष्टाचार के कारण। यहां भी व्याकुल मत होइए 😩
अगर सरकार बाढ़ को स्थायी रूप से रोकने या प्रभाव कम करने को गंभीर मुद्दा नहीं बनाएगी, तो समाधान की उम्मीद कैसे होगी?
बाढ़ पीड़ितों की मदद सरकार की पहली जिम्मेदारी है। NGO और Political Parties की भी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंदों के साथ खड़े हों। हम सिर्फ शोर मचाकर सहायता पहुंचाने वालों में शामिल नहीं हैं—हम चाहते हैं कि बाढ़ का स्थायी समाधान राजनीतिक मुद्दा बने। मछली पकड़ने की बात करें, मछली 🐟 बांटने की जिम्मेदारी हमने सरकार को दी है।
कड़वी सच्चाई और दवाई देनी चाहिए।
प्रशांत किशोर इन मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं और बोलते रहेंगे।
हम रचना के लिए निकले हैं, इसलिए आलोचना होगी।
जमीन पर भी जवाब देंगे, सोशल मीडिया पर भी।
हर इंसान में कहीं न कहीं विरोधाभास होता है। अपने अंदर झांकिए; मेरे अंदर भी दोगलापन दिख सकता है। व्याकुल नहीं होना है, सोशल मीडिया पर तो बिल्कुल नहीं 🤭
अगर किसी के भीतर कमियां हैं और फिर भी वह बिहार के बदलाव के लिए काम कर रहा है, तो सवाल यह होना चाहिए—
क्या वह बिहार के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश कर रहा है?
पिछले पांच दशकों में बिहार को हमने क्या बना दिया है, यह किसी से छिपा नहीं है 🙈 इसे कहते हैं बड़ी-बड़ी बातें और बड़ा पाव खाते 😂
अब जिम्मेदारी भी हमारी है।
सवाल भी हमारे हैं।
बदलाव की कोशिश भी हमारी होनी चाहिए।
सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से हम सबसे ज्यादा पिछड़े हुए हैं। यह प्रॉब्लम है, तो इसे मानने में कोई परेशानी नहीं।
जय बिहार! 🇮🇳
Long Live Bihari Brotherhood! ❤️
बिहार के लिए जीते हैं,
बिहार के लिए काम करते रहेंगे। ✊
@eknalandite@DrRanjanNishant@jansuraajonline Expect results from the one you picked. What good does it do to just keep chanting "PK, PK"? That poor guy ran for office in so many constituencies, got chewed out and chased off by everyone, and now you're looking to him for more.
बिहार में बाढ़ कोइ प्राकृतिक घटना नहीं है। बल्कि मिसमेनेजमेंट का परिणाम है।
सरकार, अधिकारी और प्रशासन सब इसमें मिले हुए है। बाढ़ आती रहेंगी, बाढ़ के नाम पर ये सब मोटा पैसा हर साल कमाते रहेंगे।
बाढ़ जैसी त्रासदी को हेलीकॉप्टर में बैठ के कभी समझा नहीं जा सकता है।
40 सांसद, 243 विधायक और बाकी नेताओं को बिहार के लोगों से कोई मतलब नहीं है। इस बार के चुनाव में इनको भी डूबा देना हैं।
बिहार बाढ़ ने ये दर्शा दिया है कि लोगों को खुद ही अपनी क्षमता विकसित करनी होगी नहीं तो कोई नहीं आयेगा सहायता के लिए।
न पत्रकार, न नेता और न प्रशासन। हम बिहारियों ने खुद से ही खुद को हल्का बना लिया है। बिहार पर कोई नजर नहीं डालता क्योंकि हम खुद लोगों को सब कुछ दे देते हैं। बिना कुछ पाने की चाह किए हुए।
पत्रकारों को व्यूज और सब्सक्राइबर, नेताओं को वोट और प्रशासन को इज्जत।
लोकसभा में कुल सांसद — 543
कुल घोषित संपत्ति — ₹25,160 करोड़
राज्यसभा में कुल सांसद — 226
कुल घोषित संपत्ति — ₹27,600 करोड़
देशभर में कुल विधायक — 4,123
कुल घोषित संपत्ति — ₹73,400 करोड़
📌 प्रति लोकसभा सांसद औसत संपत्ति — ₹46 करोड़
📌 प्रति राज्यसभा सांसद औसत संपत्ति — ₹118 करोड़
📌 प्रति विधायक औसत संपत्ति — ₹16 करोड़
और यह आंकड़ा बिना काले धन को शामिल किए है
यानी सांसदों और विधायकों की कुल घोषित संपत्ति करीब ₹1.30 लाख करोड़ बैठती है
एक सांसद का वेतन लगभग ₹2 लाख प्रति माह और एक विधायक का वेतन लगभग ₹2.5 लाख प्रति माह बताया जाता है
तो सवाल यह है कि इतनी कम सरकारी आय के बावजूद इनकी कुल संपत्ति हजारों करोड़ तक कैसे पहुंच जाती है?
फिर भी यही लोग खुद को “जनसेवक” कहते हैं
Caste politics is nothing more than a tool to manipulate people and collect votes. Once the votes are secured, the same politicians forget the people who supported them. Yet people keep falling for the same caste-based politics again and again.
#PrashantKishor#Bihar
कर्नाटक में जैसे डॉक्टर 'Dr' और प्रोफेसर 'Prof' उपसर्ग का इस्तेमाल करते हैं वैसे ही टीचर्स अब अपने नाम के आगे 'Tr' उपसर्ग लगा सकेंगे। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शिक्षक दिवस पर यह घोषणा की है। उन्होंने कहा, "यह भले दो अक्षर हों लेकिन यह जीवनभर की सेवा को दर्शाते हैं। यह ऐसा सम्मान है जिसे शिक्षकों ने कमाया है।"
पिछले सोमवार को लखीसराय के अशोकधाम की घटना हुई, 7 मौतें हुई थी कई घायल थे...और आज मधेपुरा के सिंहेश्वरनाथ धाम में भगदड़ मची और कई लोग घायल हुए... प्रशासन को भीड़ नियंत्रण और मैनेजमेंट नहीं आता और लोगों को ये नहीं समझ आता कि महादेव दिल में बसते हैं, अच्छे मन से कहीं भी स्मरण कीजिएगा उतना ही मायने रखेगा...जान को जोखिम में क्यों डालना...? खैर श्रद्धा बहुत अलग मसला है,सवाल नहीं कर सकते....पर अपना और अपने अपनों का खयाल रखिए, भीड़ से जितनी दूरी उतनी भलाई....
#Bihar
गर्दनी बाग़ प्रोटेस्ट के समर्थन में नहीं हूं मैं। आप मुझे भाजपा का दलाल कह सकते हैं।
एक फॉर्मेट में तैयारी कर रहे थे तो फॉर्मेट बदल के 2 परीक्षा और नेगेटिव मार्किंग क्यों किया?
अरे बुद्धु केवल तुम्हारे लिए नहीं बदला है सबके लिए बदला है। और नेगेटिव मार्किंग तो एकदम होना चाहिए। नहीं तो तुक्का वाले घुस जाते हैं।
बाकी परिक्षा में पारदर्शिता का मुद्दा और परीक्षा सही समय पर करवाने वाले मुद्दे पर सरकार को घेरना चाहिए।
देखिये कैसे जातिवाद किया जाता है।
डस्टबिन घोटाले पर चरा खाने वाली पार्टी की प्रवक्ता बोल रही।
देखिये कैसे प्रशांत किशोर को इस घोटाले से जोड़ दिया गया है। जिस व्यक्ति ने कभी खुद पांडे नहीं लिखा उसको ये झूठे समाजवादी लोग पांडे लिख रहे।
क्योंकि उनकी राजनीति ही जाति पर आधारित है।
खैर इसलिए ही राजद की स्थिति आज ये है।
As a voter from Bankipur, I genuinely feel that Prashant Kishore is doing a great job in Bihar. The way he has been actively working in Bankipur and across Bihar, it feels like he simply does not stop. Whether it is meeting the DGP, travelling to Lakhisarai, or being among the people he seems to be on the move every moment, working for the public.
Every leader should be this active someone who breathes new life into Bihar and keeps working tirelessly for its people.
Jai Ho Bihar! 🇮🇳
#PrashantKishor #JanSuraaj #Bihar #Bankipur #BiharPolitics #BiharDevelopment #BiharBadlav #ChangeForBihar #JaiBihar #NayaBihar #BiharNeedsChange #BiharFirst
देश भर के सभी राज्यों के शिक्षा विभाग / मंत्रालय में
"शनि-राहु युति" चल रहा है.... इसलिए निकल जाती हैं बातें,हो जाते हैं फैसले, परेशान हो जाते हैं छात्र,शुरू हो जाते हैं धरने और बाकी तो ....rest is history 😐
#Bihar#BiharStudentsProtest#BPSCTRE4
बिहार सरकार एकदम फाडू स्कीम लेकर आई है,
रील बनाओ, सरकार की तारीफ करो,
एक लाख व्यूज के बाद प्रत्येक एक लाख व्यूज पर 10,000 रुपए मिलेंगे, और अधिकतम एक रील पर 1 लाख रुपए मिलेंगे।
और ये सारा पैसा सरकार आदा पादा खेलकर लाएगी।