आनंद मठ का पहला हिंदी अनुवाद पूर्णियाँ के श्रीनगर राज के राजा कमलानंद सिंह ने किया था । आज उनके श्रीनगर स्थित आवास पर उनके परपोते चिन्मयानंद सिंह से मुलाकात हुई । चिन्मयानंद सिंह (Chinmaya N Singh)प्रगतिशील विचार वाले हैं। उन्हें आनंद मठ का हिंदी अनुवाद करने की कीमत चुकानी पड़ी।
अभी - अभी खबर मिली है कि पूर्णियाँ साहित्यिक जगत के अविभावक नारायण भक्त का निधन हो गया है।मैं पूर्णियाँ विश्वविद्यालय में योगदान करने के समय से उनके संपर्क में आया था । उनके नहीं रहने से पूर्णियाँ का साहित्यिक वातावरण उदास हो गया । उनकी स्मृति को प्रणाम !
आज से ठीक दो सौ वर्ष पहले महामना ज्योतिबा फुले का जन्म हुआ था। वे सच्चे अर्थों में भारतीय नवजागरण के अग्रदूत थे।भारत में उनसे बड़ा कोई बौद्धिक नहीं हुआ । इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है । राजाराम मोहन राय जैसे समाज सुधारक ने सती प्रथा .... आगे पढ़ें -
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स्वतन्त्रता संग्राम के समय दो विचारधाराएं सक्रिय थीं। एक पहली विचारधारा के अनुसार अँग्रेजों को भारत से भगाना एक मात्र लक्ष्य था । दूसरे किसी भी समस्या को उठाना कतई स्वीकार नहीं था। दूसरी विचारधारा के लोग न सिर्फ अँग्रेजों को भगाने के ..... आगे पढ़े -
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आज जगह - जगह सम्राट अशोक की जयंती मनायी जा रही है। कई जगह से निमंत्रण भी आया था परंतु कही नहीं गया । मैंने सोचा आज सम्राट अशोक पर एक पुस्तक लिखने की शुरुआत करूं ।
आमजन के बीच अशोक के बारे में भ्रांतिपूर्ण धारणा व्याप्त है । .... आगे पढ़ें -
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सिपाही सिंह श्रीमंत भोजपुरी - हिंदी के महत्वपूर्ण लेखक हैं । साहित्य के साथ साथ इन्होंने भाषाविज्ञान, लोक साहित्य , अनुवाद के क्षेत्र में इन्होंने कलम चलायी । इनका जन्म 8 मई 1925 को गोपालगंज जिले के मूंजा में हुआ था । उन्होंने ... आगे पढ़ें -
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आज विश्व मातृभाषा दिवस है। आज ही के दिन पूर्वी पाकिस्तान (आज के बंगलादेश) के मुस्लिम उर्दू के बंगले को राजभाषा बनाने की मांग करते हुए अपनी ही सरकार की खूबसूरती के शिकार हुए थे। उस समय पाकिस्तान नया-नया ही बना था और उसका संविधान बन रहा था।... आगे पढ़ें -
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आज मेरे दादा जी यशकायी रामाशीष प्रसाद वर्मा की पुण्यतिथि है। उन्हें नमन है !
हिंदी - भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक सूर्यदेव पाठक पराग के संपादन में उन पर एक पुस्तक ' एक तीर्थ से गुजरते हुए ' प्रकाशित हुयी थी । उसमें से एक रचना प्रस्तुत है -
अभी - अभी खबर मिली है कि बुद्धशरण हंस का निधन हो गया। वे लगभग 90 वर्ष के थे।वे एक लेखक होने के साथ - साथ एक्टिविस्टभी थे।मेरा उनसेसंपर्कअंबेडकर साहित्य के प्रचार-प्रसार के क्रम मेंहुआ।वे अंबेडकर मिशन पत्रिका के नाम से एक मासिकपत्रिकानिकालतेथे।इस पत्रिका के संपादक मंडलसे मैं भीथा
“बाबू रघुवीर नारायण बिहार में राष्ट्रीयता के आदि चारण जागरण के अग्रदूत थे । पूर्वी भारत के हृदय में राष्ट्रीयता की जो भावना मचल रही थी, वह पहलेपहल उन्हीं के 'बटोहिया' नामक गीत में फूटी और इस तरह फूटी कि एक उसी गीत ने उन्हें अमर कवियों की श्... आगे पढ़ें -
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वैद्यनाथ प्रसाद का जन्म 3 जनवरी 1884 को सीवान में हुआ था । उनके माता का नाम श्रीमती और पिता का नाम श्री जगन्नाथ प्रसाद था ।
वे आर्य समाज के सुधारवादी आंदोलन से प्रभावित थे । उन्होंने आजादी के पहले सीवान जिले में दर्जनों शिक्षण संस्थाएँ ... आगे पढ़ें -
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किसी भी समाज के बौद्धिक स्तर का मूल्यांकन उस समाज में स्त्रियों की स्थिति को देखकर किया जा सकता है। हिन्दू समाज को जब से ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने जकड़ा तब से नारियाँ मात्र भोग विलास की सामग्री बन कर रह गयी। अंग्रेजों के शासनकाल में भारत ... आगे पढ़ें -
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प्रख्यात शायर तंग इनायतपुरी(सुनील कुमार तंग)से स्नेहिल रिश्ता रहा है।वे हिंदी ,भोजपुरी और उर्दू तीनोंभाषाओं में समान रूप से लिखते हैं। देश-दुनिया में उनकी प्रसिद्धिउर्दू शायर के रूप में हुई है। उन्होंने आज मुझे अपने हिंदी गीतोंकासंग्रह'उतरी हुई नदी कापानी ' स्नेहपूर्वक भेंटकिया।
भिखारी ठाकुर का साहित्य उनके के जीवन में ही खूब छपता और बिकता था। कोलकाता (हावड़ा , सकलिया ) में एक प्रेस था - दूधनाथ प्रेस। यहाँ सिर्फ भिखारी ठाकुर का साहित्य ही छापत था । जहाँ पर भिखारी ठाकुर के कार्यक्रम होता वहाँ उनकी पुस्तकें बिकती । वे अपने जीवन में बेस्ट सेलर रहे ।
कल मास्टर जगदीश का आत्म बलिदान दिवस है ।वे चाहते वे बच सकते था।मनुष्यता की मुक्ति में उनका बलिदान हरदम याद किया जाएगा।इनके ऊपर दो उपन्यास और एक महाकाव्य मुझे पढ़ने को मिला ।महाश्वेता देवी (मास्टर साब )
और मधुकर सिंह (अर्जुन अभी जिंदा है बाद में जगदीश कभी नहीं मरते ) का उपन्यास
आज ललई सिंह यादव का जन्मदिन है । वे उत्तर भारत में नवजागरण लानेवालों में प्रमुख थे । उनसे मेरा लंबा संपर्क रहा है । पेरियार ई.वी. रामास्वामी और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की पुस्तकों को घर - घर पहुँचाने के मिशन में उनसे मेरा संपर्क हुआ था ।.....आगे पढ़े - https://t.co/VO0pBB9hB5
आज 92 वर् मेरा जीवन - संघर्षों की कथा 'आयी है । यह व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई का दस्तावेज है।वे वामपंथी विचारधारा से जुड़े हैं और व्यावहारिक रूप से सक्रिय रहें हैं । अभी भाकपा ( माले) में सक्रिय हैं। इस उम्र में वे प्रफुल्लित हैं। व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में सहभागी हैं।